आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल)
Bihar Board · Class 11 · Hindi
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Quick Quiz: आओ, मिलकर बचाएँ (निर्मला पुतुल)
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कविता 'आओ, मिलकर बचाएँ' की कवयित्री कौन हैं?
कविता में 'संथाल परगना की माटी का रंग' से क्या अभिप्राय है?
कविता में 'हड़िया' क्या है?
'भाषा में झारखंडीपन' का क्या अर्थ है?
Sample Questions
कविता का मुख्य संदेश क्या है?
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आदिवासी संस्कृति और प्रकृति का संरक्षण
कविता का मुख्य संदेश आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण है। कवयित्री चाहती है कि आदिवासी समुदाय अपनी मौलिक पहचान, भाषा, प्रकृति से जुड़ाव, सहजता और सकारात्मक गुणों को बचाए रखे। वह शहरीकरण के नकारात्मक प्रभावों से बचने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की बात करती है। यह एक व्यापक संरक्षण का आह्वान है।
कविता में 'नगाड़े की तरह बजते शब्द' का क्या महत्व है?
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यह कवयित्री के काव्य संग्रह का नाम है
'नगाड़े की तरह बजते शब्द' निर्मला पुतुल के प्रसिद्ध काव्य संग्रह का नाम है। यह उनकी पहली प्रमुख रचना है जिसमें आदिवासी जीवन की विविध समस्याओं और संघर्षों को उकेरा गया है। नगाड़ा एक पारंपरिक ढोल है जो आदिवासी समुदाय में महत्वपूर्ण है। इस शीर्षक से पता चलता है कि कवयित्री के शब्द नगाड़े की तरह गूंजते हैं और लोगों को जगाने का काम करते हैं।
कविता में 'अक्खड़पन और जुझारूपन' को बचाने की बात क्यों कही गई है?
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ये आदिवासी समुदाय के संघर्षशील गुण हैं
'अक्खड़पन' का अर्थ है निडरता और स्वाभिमान, जबकि 'जुझारूपन' का मतलब है संघर्ष करने की क्षमता। ये दोनों गुण आदिवासी समुदाय की मूल प्रकृति का हिस्सा हैं। कवयित्री चाहती है कि भोलेपन के साथ-साथ ये गुण भी बने रहें क्योंकि ये समुदाय को शोषण से बचाने में मदद करते हैं। आधुनिकीकरण में ये गुण खो रहे हैं, इसलिए इन्हें बचाना जरूरी है।
कविता की मूल भाषा क्या थी?
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संथाली
यह कविता मूल रूप से संथाली भाषा में लिखी गई थी और बाद में अशोक सिंह द्वारा हिंदी में अनुवादित की गई है। संथाली निर्मला पुतुल की मातृभाषा है और वे संथाली समुदाय से आती हैं। संथाली एक आदिवासी भाषा है जो मुख्यतः झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। कवयित्री ने अपनी अनुभूतियों को पहले अपनी मातृभाषा में व्यक्त किया।
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