राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र)
Mizoram Board · Class 11 · Hindi
Flashcards for राजस्थान की रजत बूँदें (अनुपम मिश्र) — Mizoram Board Class 11 Hindi. Quick Q&A cards covering key concepts, definitions, and formulas.
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कुँई क्या है और यह कुएँ से कैसे अलग है?
Answer
कुँई राजस्थान में पाई जाने वाली एक विशेष जल संरक्षण प्रणाली है। यह एक बहुत छोटा कुआँ होता है जो केवल व्यास में छोटा होता है, गहराई में नहीं। मुख्य अंतर: कुआँ भूजल से जुड़ता है जबकि कुँई वर्षा जल को वि…
चेलवांजी या चेज़ारो कौन होते हैं?
Answer
चेलवांजी या चेज़ारो वे दक्ष कारीगर होते हैं जो कुँई की खुदाई और विशेष चिनाई करते हैं। यह काम 'चेज़ा' कहलाता है। ये लोग अत्यंत कुशल होते हैं और कुँई निर्माण की पारंपरिक तकनीक में विशेषज्ञ होते हैं। वे …
पालरपानी, पातालपानी और रेजाणीपानी में क्या अंतर है?
Answer
पालरपानी: सीधे बरसात से मिलने वाला पानी जो धरातल पर बहता है। पातालपानी: भूजल जो कुओं से निकाला जाता है। रेजाणीपानी: धरातल से नीचे उतरा लेकिन पाताल में न मिला पानी जो खड़िया पट्टी के कारण अलग रहता है। …
बसौली क्या है और इसका प्रयोग क्यों किया जाता है?
Answer
बसौली एक छोटी डंडी का छोटे फावड़े जैसा औज़ार है जिसका नुकीला फल लोहे का और हत्था लकड़ी का होता है। कुँई की संकीर्ण जगह में कुल्हाड़ी या फावड़े से खुदाई संभव नहीं होती, इसलिए बसौली का प्रयोग किया जाता …
कुँई में काम करने वाले चेलवांजी अपने सिर पर धातु का बर्तन क्यों पहनते हैं?
Answer
चेलवांजी सिर पर काँसे, पीतल या अन्य धातु का बर्तन टोप की तरह पहनते हैं। यह दो कारणों से आवश्यक है: 1) हवा के लिए ऊपर से फेंकी जाने वाली रेत के कणों से सिर की सुरक्षा 2) मिट्टी निकालते समय गिरने वाले क…
खड़िया पत्थर की पट्टी का क्या महत्व है?
Answer
खड़िया पत्थर की पट्टी रेत के नीचे 10-15 हाथ से 50-60 हाथ की गहराई पर होती है। यह वर्षा जल को गहरे खारे भूजल तक जाने से रोकती है, जिससे मीठा पानी अलग बना रहता है। यह पट्टी रेजाणीपानी की रखवाली करती है …
रेजा का माप कैसे किया जाता है?
Answer
रेजा वर्षा की मात्रा नापने का पारंपरिक तरीका है। यह धरातल पर हुई वर्षा को नहीं बल्कि धरातल में समाई वर्षा को नापता है। उदाहरण: यदि पानी पाँच अंगुल भीतर समा जाए तो उसे 'पाँच अंगुल रेजो' कहते हैं। यह इं…
मरुभूमि में रेत के कणों की विशेषता क्या है?
Answer
मरुभूमि में रेत के कण बहुत बारीक होते हैं और एक-दूसरे से चिपकते नहीं हैं। वे समान रूप से बिखरे रहते हैं। यहाँ परस्पर लगाव नहीं होता इसलिए अलगाव भी नहीं होता। पानी गिरने पर कण अपनी जगह नहीं छोड़ते, इसल…
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