खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास)
Assam Board · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास) — Assam Board Class 11 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास)? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 11 students started this chapter today
प्रश्न-अभ्यास
1'खेलन में को काको गुसैयाँ' पद में कृष्ण और सुदामा के बीच किस बात पर तकरार हुई?Show solution
उत्तर: कृष्ण और सुदामा के बीच खेल में दाँव (पारी) देने को लेकर तकरार हुई। खेल के दौरान सुदामा ने कृष्ण पर आरोप लगाया कि उन्होंने बेईमानी की और नियम के विरुद्ध खेले। कृष्ण ने दाँव देने से मना कर दिया और रूठ गए। सुदामा ने कहा कि खेल में कोई किसी का स्वामी नहीं होता — 'खेलन में को काको गुसैयाँ' — अर्थात् खेल के मैदान में कृष्ण होने से कोई विशेष अधिकार नहीं मिलता। इस प्रकार दाँव देने और न देने की बात पर दोनों में झगड़ा हुआ।
2खेल में रूठनेवाले साथी के साथ सब क्यों नहीं खेलना चाहते?Show solution
1. ऐसा साथी खेल का आनंद नष्ट कर देता है।
2. वह हारने पर या अपनी बारी आने पर बहाने बनाता है और खेल बीच में छोड़ देता है।
3. उसके रूठने से खेल रुक जाता है और सभी साथियों का मन खराब होता है।
4. ऐसे साथी पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह नियमों का पालन नहीं करता।
5. पद में सखा कृष्ण को यही समझाते हैं कि रूठनेवाले के साथ खेलने में मज़ा नहीं आता और आगे कोई उनके साथ नहीं खेलेगा।
3खेल में कृष्ण के रूठने पर उनके साथियों ने उन्हें डाँटते हुए क्या-क्या तर्क दिए?Show solution
1. खेल में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता — 'खेलन में को काको गुसैयाँ' — खेल के मैदान में कृष्ण होने से कोई विशेष अधिकार नहीं मिलता।
2. जाति-पाँति का भेद नहीं — खेल में ऊँच-नीच, जाति-पाँति का कोई स्थान नहीं होता।
3. रूठनेवाले के साथ कोई नहीं खेलता — यदि कृष्ण इसी तरह रूठते रहे तो आगे कोई उनके साथ खेलने नहीं आएगा।
4. नंद बाबा के लाड़ले होने का खेल में कोई महत्त्व नहीं — घर पर चाहे जितने लाड़-प्यार मिले, खेल में सब बराबर होते हैं।
5. बरबस (व्यर्थ) रूठना उचित नहीं — बिना कारण रूठना बचकानापन है।
4कृष्ण ने नंद बाबा की दुहाई देकर दाँव क्यों दिया?Show solution
नंद बाबा की दुहाई देना यह दर्शाता है कि कृष्ण अपने पिता का नाम लेकर अपनी बात को सच्चा और विश्वसनीय सिद्ध करना चाहते थे। बच्चे प्रायः अपनी बात मनवाने के लिए या अपनी सच्चाई प्रमाणित करने के लिए माता-पिता का नाम लेते हैं। इस प्रकार यह बाल-स्वभाव का स्वाभाविक चित्रण है — कृष्ण ने अपने पिता की कसम खाकर दाँव दिया ताकि साथी उन पर विश्वास करें और खेल पुनः आरंभ हो सके।
5इस पद से बाल-मनोविज्ञान पर क्या प्रकाश पड़ता है?Show solution
1. रूठना और मनाना — बच्चे खेल में छोटी-छोटी बातों पर रूठ जाते हैं, जैसे कृष्ण दाँव देने से मना करके रूठ गए।
2. समानता की भावना — बच्चे खेल में किसी भेदभाव को स्वीकार नहीं करते। वे मानते हैं कि खेल में सब बराबर हैं।
3. तर्क-शक्ति — बच्चे अपनी बात मनवाने के लिए तर्क देते हैं, जैसे सुदामा और अन्य सखाओं ने कृष्ण को तर्क दिए।
4. माता-पिता का सहारा — बच्चे अपनी बात सच्ची सिद्ध करने के लिए माता-पिता का नाम लेते हैं, जैसे कृष्ण ने नंद बाबा की दुहाई दी।
5. सामूहिकता की भावना — बच्चे चाहते हैं कि सब मिलकर खेलें और कोई खेल न छोड़े।
6. स्वाभिमान — बच्चे अपने अधिकारों के प्रति सजग होते हैं और अन्याय सहन नहीं करते।
इस प्रकार सूरदास ने इस पद में बाल-मनोविज्ञान का अत्यंत सजीव और यथार्थ चित्रण किया है।
6'गिरिधर नार नवावति' से सखी का क्या आशय है?Show solution
सखी का आशय यह है कि कृष्ण की मुरली की मधुर तान सुनकर राधा या गोपी अपनी गर्दन एक ओर झुका लेती है — यह प्रेम-विह्वलता और भाव-विभोरता का प्रतीक है। मुरली की धुन इतनी मनमोहक है कि उसे सुनकर गोपी स्वयं को संभाल नहीं पाती और उसकी गर्दन प्रेम के भार से झुक जाती है। यह भाव-भंगिमा कृष्ण के प्रति गोपी के अनुराग और समर्पण को व्यक्त करती है। सखी इस दृश्य का वर्णन करते हुए कृष्ण की मुरली के प्रभाव को रेखांकित करती है।
7कृष्ण के अधरों की तुलना सेज से क्यों की गई है?Show solution
1. मुरली सदा कृष्ण के अधरों पर विराजमान रहती है, जैसे कोई सेज पर विश्राम करता है।
2. जिस प्रकार सेज पर प्रिय का निवास होता है और वह सेज को सुखद बनाता है, उसी प्रकार मुरली कृष्ण के अधरों पर रहकर उन्हें और भी मनोहर बना देती है।
3. गोपियाँ कृष्ण के अधरों को मुरली की 'सेज' कहकर अपनी ईर्ष्या व्यक्त करती हैं — वे चाहती हैं कि कृष्ण के अधरों का स्पर्श उन्हें मिले, परंतु वह सौभाग्य मुरली को प्राप्त है।
4. यह उपमा श्रृंगार रस की दृष्टि से अत्यंत सटीक और भावपूर्ण है।
इस प्रकार यह तुलना गोपियों की कृष्ण-भक्ति, प्रेम और मुरली के प्रति ईर्ष्या को एक साथ व्यक्त करती है।
8पठित पदों के आधार पर सूरदास के काव्य की विशेषताएँ बताइए।Show solution
1. बाल-लीला का सजीव चित्रण:
सूरदास ने कृष्ण की बाल-लीलाओं का अत्यंत स्वाभाविक और मनोवैज्ञानिक चित्रण किया है। 'खेलन में को काको गुसैयाँ' पद में बच्चों का रूठना, मनाना और तर्क देना बिल्कुल यथार्थ लगता है।
2. भक्ति और श्रृंगार का समन्वय:
सूरदास के पदों में भक्ति और श्रृंगार रस का सुंदर समन्वय है। कृष्ण के प्रति गोपियों का प्रेम भक्ति और श्रृंगार दोनों को एक साथ व्यक्त करता है।
3. ब्रजभाषा का प्रयोग:
सूरदास ने ब्रजभाषा का सरल, मधुर और प्रवाहमय प्रयोग किया है। 'गुसैयाँ', 'रिसैयाँ', 'कनौड़े' जैसे शब्द भाषा को जीवंत बनाते हैं।
4. संगीतात्मकता:
सूरदास के पद गेय हैं। उनमें लय, ताल और संगीत का स्वाभाविक प्रवाह है।
5. उपमा और अलंकारों का सुंदर प्रयोग:
कृष्ण के अधरों की सेज से तुलना जैसे अलंकार काव्य को सौंदर्यपूर्ण बनाते हैं।
6. मनोवैज्ञानिक यथार्थता:
सूरदास के पात्र मनोवैज्ञानिक दृष्टि से सजीव हैं। बच्चों और गोपियों के भाव बिल्कुल स्वाभाविक लगते हैं।
7. सखी-भाव:
गोपियों का कृष्ण के प्रति सखी-भाव और ईर्ष्या-भाव सूरदास की काव्य-कला की विशेषता है।
9(क)निम्नलिखित पद्यांश की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए — जाति-पाँति ………………तुम्हारे गैर्यां।Show solution
प्रसंग: कृष्ण खेल में दाँव देने से मना करके रूठ गए हैं। तब उनके साथी उन्हें तर्क देते हुए कहते हैं —
व्याख्या: सखा कृष्ण को समझाते हुए कहते हैं कि खेल के मैदान में जाति और कुल का कोई भेद नहीं होता। यहाँ कोई ऊँचा या नीचा नहीं है। खेल में सब बराबर होते हैं। तुम्हारा बड़े घर का होना, नंद बाबा का पुत्र होना — यह सब घर पर चल सकता है, खेल में नहीं। खेल के नियम सबके लिए समान हैं। यदि तुम इसी प्रकार रूठते रहे और नियमों का पालन नहीं किया, तो यह तुम्हारी ही हार है — यह तुम्हारे लिए लज्जा की बात है ('तुम्हारे गैर्यां' अर्थात् तुम्हारी गर्दन झुकेगी/तुम्हें शर्म आएगी)।
काव्य-सौंदर्य:
- ब्रजभाषा का सहज प्रयोग है।
- बाल-मनोविज्ञान का यथार्थ चित्रण है।
- समानता का संदेश देने वाली पंक्तियाँ हैं।
9(ख)निम्नलिखित पद्यांश की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए — सुनि री…………नवावति।Show solution
प्रसंग: एक गोपी/सखी दूसरी सखी को बता रही है कि कृष्ण की मुरली की धुन सुनकर क्या होता है —
व्याख्या: सखी कहती है — 'सुनि री' अर्थात् हे सखी, सुन! कृष्ण की मुरली की मधुर तान सुनकर गोपी अपनी गर्दन एक ओर झुका लेती है। 'गिरिधर नार नवावति' — गिरिधर (कृष्ण) की मुरली की धुन इतनी मनमोहक और प्रेम-विह्वल करने वाली है कि उसे सुनकर गोपी भाव-विभोर हो जाती है और उसकी गर्दन प्रेम के भार से झुक जाती है। यह प्रेम और भक्ति की चरम अवस्था का चित्रण है जहाँ गोपी अपने आप को संभाल नहीं पाती।
काव्य-सौंदर्य:
- श्रृंगार और भक्ति रस का सुंदर समन्वय है।
- 'नार नवावति' में अनुप्रास अलंकार है।
- ब्रजभाषा की मधुरता और संगीतात्मकता स्पष्ट है।
- गोपी की प्रेम-विह्वलता का मनोवैज्ञानिक चित्रण है।
योग्यता-विस्तार
1खेल में हारकर भी हार न माननेवाले साथी के साथ आप क्या करेंगे? अपने अनुभव कक्षा में सुनाइए।Show solution
यदि कोई साथी खेल में हारकर भी हार नहीं मानता, तो मैं निम्नलिखित करूँगा/करूँगी:
1. शांति से समझाना — मैं उसे प्यार से समझाऊँगा/समझाऊँगी कि खेल में जीत-हार दोनों होती हैं और हार को स्वीकार करना खेल-भावना (sportsmanship) का हिस्सा है।
2. तर्क देना — उसे बताऊँगा/बताऊँगी कि यदि वह हार नहीं मानेगा तो आगे कोई उसके साथ नहीं खेलेगा।
3. उदाहरण देना — बड़े खिलाड़ियों के उदाहरण देकर बताऊँगा/बताऊँगी कि वे भी हार को सहर्ष स्वीकार करते हैं।
4. यदि न माने — यदि वह फिर भी न माने तो उस दिन खेल बंद कर देंगे और अगली बार उसे खेल में शामिल करने से पहले वचन लेंगे।
निष्कर्ष: खेल का उद्देश्य आनंद लेना है, न कि केवल जीतना। हार को स्वीकार करना ही सच्चे खिलाड़ी की पहचान है।
2पुस्तक में संकलित 'मुरली तऊ गुपालहिं भावति' पद में गोपियों का मुरली के प्रति ईर्ष्या-भाव व्यक्त हुआ है। गोपियाँ और किस-किस के प्रति ईर्ष्या-भाव रखती थीं, कुछ नाम गिनाइए।Show solution
1. मुरली के प्रति — क्योंकि मुरली सदा कृष्ण के अधरों पर रहती है।
2. यमुना नदी के प्रति — क्योंकि कृष्ण उसमें स्नान करते हैं और उसके तट पर विहार करते हैं।
3. राधा के प्रति — क्योंकि कृष्ण राधा से विशेष प्रेम करते हैं।
4. कृष्ण की पीताम्बरी (वस्त्र) के प्रति — क्योंकि वह कृष्ण के शरीर से लिपटी रहती है।
5. वृंदावन की लताओं और वृक्षों के प्रति — क्योंकि कृष्ण उनकी छाया में विश्राम करते हैं।
6. कृष्ण की गायों के प्रति — क्योंकि कृष्ण उन्हें चराते हैं और उनसे प्रेम करते हैं।
इस प्रकार गोपियों की ईर्ष्या वास्तव में उनके कृष्ण-प्रेम की गहराई को दर्शाती है।
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास) for Assam Board Class 11 Hindi?
How to score full marks in खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास) — Assam Board Class 11 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास) Class 11 Hindi?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास)
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Syllabus
What topics to cover
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Concept Maps
See how topics connect visually
For serious students
Get the full खेलन में को काको गुसैयाँ (सूरदास) chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Assam Board Class 11 Hindi.