लखनवी अंदाज़
Bihar Board · Class 10 · Hindi
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लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों लिया था?
नवाब साहब की आंखों में क्या भावना दिखाई दी?
नवाब साहब ने खीरे की तैयारी में कौन से कदम उठाए?
नवाब साहब ने खीरे के बारे में क्या कहा था?
Sample Questions
नवाब साहब के पास कौन सी वस्तुएं रखी थीं?
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दो ताजे-चिकने खीरे, सफेद तौलिया, चाकू, नमक-मिर्च की पुड़िया, लोटा
कहानी में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि नवाब साहब के पास दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। बाद में उन्होंने सीट के नीचे से लोटा निकाला, जेब से चाकू निकाला, और लखनऊ के खीरे बेचने वालों की तरह नमक-मिर्च की पुड़िया भी थी। ये सभी वस्तुएं खीरे को खाने की पूरी तैयारी दिखाती हैं।
लेखक ने नवाब साहब की स्थिति के बारे में क्या अनुमान लगाया? (सभी सही विकल्प चुनें)
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उन्होंने किफायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट लिया होगा, वे नहीं चाहते कि कोई उन्हें मंझले दर्जे में सफर करते देखे, वे किसी के सामने खीरा खाने में संकोच कर रहे हैं
लेखक ने बहुत बारीकी से नवाब साहब की मानसिकता को समझा। उन्होंने अनुमान लगाया कि नवाब साहब ने पैसे बचाने के लिए सेकंड क्लास का टिकट लिया, लेकिन अब शर्म कर रहे हैं कि कहीं कोई उन्हें इस दर्जे में न देख ले। खीरे जैसी साधारण चीज खाना भी उनकी शान के खिलाफ लग रहा है।
कहानी में व्यंग्य की निम्नलिखित स्थितियां कहां दिखाई गई हैं? (सभी सही उत्तर चुनें)
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नवाब साहब का खीरा न खाकर केवल सूंघना, बिना खाए पेट भरा डकार लेना, खानदानी तहजीब का दिखावा, लेखक का 'नई कहानी' से तुलना करना
यशपाल ने इस पूरी कहानी में व्यंग्य का सहारा लिया है। नवाब साहब का खीरा तैयार करके न खाना, केवल सूंघना, फिर बिना खाए डकार लेना, और इसे अपनी खानदानी तहजीब बताना - ये सभी बातें व्यंग्यपूर्ण हैं। अंत में लेखक इसकी तुलना बिना कथ्य की 'नई कहानी' से करके साहित्यिक व्यंग्य भी करता है।
इस कहानी में निम्नलिखित में से कौन से सामाजिक संदेश हैं? (सभी सही उत्तर चुनें)
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दिखावे की प्रवृत्ति की आलोचना, पतनशील सामंती वर्ग पर व्यंग्य, बनावटी जीवनशैली का विरोध, सच्ची संस्कृति और नकली तहजीब में अंतर
यशपाल ने इस कहानी के माध्यम से समाज की कई बुराइयों पर प्रहार किया है। मुख्य रूप से उन्होंने दिखावे की प्रवृत्ति, पतनशील नवाबी संस्कृति, बनावटी जीवनशैली, और नकली तहजीब की आलोचना की है। यह कहानी दिखाती है कि कैसे कुछ लोग वास्तविकता से दूर रहकर केवल दिखावे में जीते हैं।
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