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Chapter 24 of 39
Practice Quiz

अरे इन दोहुन राह न पाई (कबीर)

Haryana Board · Class 11 · Hindi

Practice quiz for अरे इन दोहुन राह न पाई (कबीर) — Haryana Board Class 11 Hindi. MCQs and questions with answers to test your preparation.

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Quick Quiz: अरे इन दोहुन राह न पाई (कबीर)

0/4

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1

कबीर के जन्म स्थान के बारे में क्या कहा जाता है?

2

कबीर के गुरु कौन थे?

3

कबीर की मुख्य रचना शैलियाँ कौन सी हैं?

4

'गागर छुवन न देई' पंक्ति से क्या आशय है?

45 Questions·
multiple choicemultiple correct

Sample Questions

1multiple correct
1 marks

पहले पद 'अरे इन दोहुन राह न पाई' में कबीर किसकी आलोचना करते हैं?

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हिंदुओं के धार्मिक आडंबर, मुसलमानों के धार्मिक आडंबर, जातिगत भेदभाव, सामाजिक कुरीतियाँ

कबीर इस पद में दोनों धर्मों - हिंदू और मुसलमान - के बाह्य आडंबरों की आलोचना करते हैं। वे हिंदुओं की छुआछूत और मुसलमानों की कुरीतियों दोनों पर प्रहार करते हैं। उनका मकसद जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करना है। वे किसी एक धर्म को लक्षित नहीं करते बल्कि सभी धर्मों के आडंबरों का विरोध करते हैं।

2multiple correct
1 marks

दूसरे पद 'बालम आवो हमारे गेह रे' में कौन से भाव व्यक्त हुए हैं?

Show answer

विरह की पीड़ा, प्रियतम से मिलने की इच्छा, दाम्पत्य प्रेम, घर की महत्ता

इस पद में कबीर ने अपने आप को एक विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया है जो अपने पति की प्रतीक्षा कर रही है। यहाँ विरह की पीड़ा, प्रियतम से मिलने की तीव्र इच्छा, दाम्पत्य प्रेम की गहराई और घर-परिवार की महत्ता के भाव व्यक्त हुए हैं। यह धार्मिक उपदेश नहीं बल्कि प्रेम की अभिव्यक्ति है।

3multiple correct
1 marks

निर्गुण भक्ति परंपरा में कबीर की विशेषताएँ क्या हैं?

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धर्म के बाह्याडंबरों का विरोध, राम-रहीम की एकता, जातिगत भेदभाव का खंडन, मानवीयता पर बल

कबीर निर्गुण भक्ति की ज्ञानमार्गी शाखा के प्रतिनिधि हैं। वे धर्म के बाहरी आडंबरों का विरोध करते हैं, हिंदू-मुस्लिम एकता (राम-रहीम) की स्थापना करते हैं, जातिगत भेदभाव का खंडन करते हैं और मनुष्य की मनुष्यता पर बल देते हैं। वे मूर्ति पूजा के विरोधी थे, समर्थक नहीं।

4multiple correct
1 marks

कबीर की काव्य भाषा की विशेषताएँ कौन सी हैं?

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जनभाषा की सहजता, भावों की गहराई, दार्शनिक चिंतन की सहज अभिव्यक्ति, अनुभव के धरातल पर आधारित

कबीर की भाषा में जनभाषा की सहजता है - यह आम लोगों की भाषा है। उसमें भावों की गहराई है और दार्शनिक विषयों को सहज रूप में व्यक्त करने की शक्ति है। उनकी कविता अनुभव के ठोस धरातल पर टिकी है जो इसे विश्वसनीय बनाती है। वे कठिन संस्कृत शब्दों का प्रयोग नहीं करते बल्कि सरल भाषा में गहरी बात कहते हैं।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in अरे इन दोहुन राह न पाई (कबीर) for Haryana Board Class 11 Hindi?
अरे इन दोहुन राह न पाई (कबीर) covers several key topics that are frequently asked in Haryana Board Class 11 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
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Understand the core concepts first, then work through the 45 practice questions available for this chapter. Revise formulas and definitions regularly, and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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