पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) (Part 2) — Practice Quiz
Haryana Board · Class 12 · Hindi
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Quick Quiz: पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु)
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लुट्टन सिंह पहलवान का मुख्य गुरु कौन था?
श्यामनगर मेले में लुट्टन ने किसे हराया था?
पहलवान के कितने बेटे थे?
नए राजकुमार के आने के बाद दंगल की जगह किसने ली?
Sample Questions
पहलवान की मृत्यु के समय वह किस स्थिति में पाया गया?
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चित्त पड़ा हुआ
कहानी के अंत में स्पष्ट रूप से लिखा है - 'पहलवान की लाश चित पड़ी है।' यह अत्यंत प्रभावशाली है क्योंकि पहलवान जीवन भर कभी चित नहीं हुआ था। वह हमेशा कहता था कि मरने के बाद उसे चित नहीं, पेट के बल सुलाना क्योंकि वह जिंदगी में कभी हारा नहीं था। लेकिन मृत्यु के समय वह चित पड़ा मिलना जीवन की विडंबना को दर्शाता है।
कहानी में महामारी के दौरान गाँव में कौन सी बीमारियाँ फैली थीं?
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मलेरिया और हैजा
कहानी की शुरुआत में ही स्पष्ट रूप से लिखा है - 'मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव भयार्त शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था।' यह महामारी गाँव के लिए विनाशकारी साबित हुई। पहले अनावृष्टि हुई, फिर अन्न की कमी, और अंत में मलेरिया और हैजा फैला। इन्हीं बीमारियों के कारण पहलवान के दोनों बेटे भी मारे गए।
पहलवान नौ साल की उम्र में क्यों अनाथ हो गया था?
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माता-पिता का देहांत
कहानी में स्पष्ट रूप से लिखा है - 'लुट्टन के माता-पिता उसे नौ वर्ष की उम्र में ही अनाथ बनाकर चल बसे थे।' यह जानकारी पहलवान के पारिवारिक इतिहास को दर्शाती है। सौभाग्य से उसकी शादी हो चुकी थी, वरना वह भी अपने माता-पिता का अनुसरण कर सकता था। विधवा सास ने उसका पालन-पोषण किया था।
ढोलक की आवाज़ का गाँव वालों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
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संजीवनी शक्ति मिलती थी
कहानी में स्पष्ट रूप से लिखा है - 'यही आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी।' और आगे - 'गाँव के अर्धमृत, औषधि-उपचार-पथ-विहीन प्राणियों में वह संजीवनी शक्ति ही भरती थी।' महामारी के दौरान जब लोग मौत से लड़ रहे थे, तब ढोलक की आवाज़ उन्हें जीने की शक्ति देती थी। यह उनके मनोबल को बढ़ाती थी।
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