| 1 | देवसेना का गीत / कार्नेलिया का गीत (जयशंकर प्रसाद) | कवि परिचय और साहित्यिक महत्व · देवसेना का गीत — कथ्य और प्रसंग · देवसेना का गीत — मुख्य पंक्तियाँ और भावार्थ |
| 2 | सूरदास की झोंपड़ी | कथानक का संक्षिप्त क्रम · मुख्य पात्र और उनके कार्य · महत्त्वपूर्ण उद्धरण और भावार्थ |
| 3 | आत्मपरिचय | एक गीत (हरिवंश राय बच्चन) | कवि-परिचय और रचनात्मक विशेषताएँ · ‘आत्मपरिचय’ कविता का केंद्रीय भाव · मुख्य पंक्तियाँ और उनका आशय |
| 4 | सिल्वर वैडिंग | मुख्य पात्र और उनके संबंध · कथानक का संक्षिप्त विकास · प्रमुख विषय और विचार |
| 5 | सरोज स्मृति (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') | कवि-परिचय और काव्य-संदर्भ · कविता का मूल स्वर और विषय · महत्त्वपूर्ण पंक्तियाँ और उनका भाव |
| 6 | बिस्कोहर की माटी | कथ्य का केंद्र और आत्मकथात्मक स्वर · प्रकृति, फूल और ग्रामीण सौंदर्य · माँ, दूध, बाल्य-संबंध और करुणा |
| 7 | पतंग (आलोक धन्वा) | कवि परिचय · कविता का केंद्रीय भाव · ऋतु-चित्र और प्रतीक |
| 8 | जूझ | कथानक का मूल प्रवाह · प्रमुख पात्र और उनके गुण · संघर्ष और शिक्षा का महत्व |
| 9 | यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय') | कवि परिचय और साहित्यिक योगदान · कविता 'यह दीप अकेला' का भावार्थ · कविता 'मैंने देखा, एक बूँद' का भावार्थ |
| 10 | अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में | मालवा का प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप · यात्रा के अनुभव और नदी-संवेदना · नर्मदा, शिप्रा और चंबल का भूगोल और भाव |
| 11 | कविता के बहाने | बात सीधी थी पर -( कुवर नारायण) | कुँवर नारायण: कवि-परिचय और काव्य-विशेषताएँ · ‘कविता के बहाने’ : केंद्रीय भाव और प्रतीक · ‘बात सीधी थी पर’ : केंद्रीय भाव और भाषा-संघर्ष |
| 12 | अतीत में दबे पाँव | मुअनजो-दड़ो: स्थान, आकार और ऐतिहासिक महत्व · नगर नियोजन और सड़क व्यवस्था · जल-प्रबंधन और महाकुंड |
| 13 | बनारस / दिशा (केदारनाथ सिंह) | कवि परिचय · कविता ‘बनारस’ का सार · कविता ‘बनारस’ के प्रमुख बिंब और पंक्तियाँ |
| 14 | कैमरे में बंद अपाहिज-(रघुवीर सहाय) | कवि और रचना-परिचय · कविता का केंद्रीय भाव · कविता की प्रमुख पंक्तियाँ और संकेत |
| 15 | वसंत आया / तोड़ो (रघुवीर सहाय) | कवि-परिचय और काव्य-विशेषताएँ · ‘वसंत आया’ का भावार्थ और केंद्रीय विचार · ‘तोड़ो’ का भावार्थ और केंद्रीय विचार |
| 16 | उषा - (शमशेर बहादुर सिंह) | कवि परिचय और काव्य-दृष्टि · कविता का केंद्रीय भाव · मुख्य बिंब और उपमान |
| 17 | भरत-राम का प्रेम / पद (तुलसीदास) | तुलसीदास का परिचय · पाठ का संदर्भ और केंद्रीय भाव · भरत का चरित्र-चित्रण |
| 18 | बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') | कवि परिचय · कविता का केंद्रीय भाव · प्रथम खंड का भावार्थ |
| 19 | बारहमासा (मलिक मुहम्मद जायसी) | कवि परिचय और काव्य-परंपरा · पद्मावत: रचना, भाषा और शैली · बारहमासा का स्वरूप और विषय |
| 20 | कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) | लेखक परिचय और काव्य-प्रवृत्ति · कवित्त: पेट की आग और दरिद्रता का चित्रण · सवैया: भक्त-स्वाभिमान और सामाजिक अस्वीकार |
| 21 | पद (विद्यापति) | विद्यापति का परिचय · तीनों पदों का सार · महत्त्वपूर्ण भाव और काव्य-विशेषताएँ |
| 22 | रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) | कवि परिचय और काव्य-विशेषताएँ · रुबाई का रूप और तुक-योजना · भाषा, बिंब और शैली |
| 23 | कवित्त (घनानंद) | कवि-परिचय और साहित्यिक स्थान · दोनों कवित्तों का भावार्थ · भाषा, शैली और काव्य-विशेषताएँ |
| 24 | छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) | कवि परिचय और साहित्यिक महत्व · ‘छोटा मेरा खेत’ : मुख्य भाव और रूपक · ‘छोटा मेरा खेत’ : काव्य-भाषा और शैली |
| 25 | प्रेमघन की छाया-स्मृति (रामचंद्र शुक्ल) | निबंध का स्वरूप, लेखक-परिचय और केंद्रीय भाव · बाल्यकाल, साहित्यिक वातावरण और प्रेमघन से पहली भेंट · हिंदी-प्रेमी मंडली, 'निस्संदेह' लोग और सामाजिक वातावरण |
| 26 | भक्तिन-(महादेवी वर्मा) | रचनाकार, विधा और पृष्ठभूमि · भक्तिन का परिचय और नामकरण · बचपन, विवाह और पारिवारिक जीवन |
| 27 | सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) | लेखक परिचय और रचना-परिचय · ‘बालक बच गया’ — मूल भाव और अर्थ · ‘बालक बच गया’ — घटनाक्रम और संदेश |
| 28 | बाज़ार दर्शन-(जैनेन्द्र कुमार) | लेखक-परिचय और निबंध का स्वरूप · बाजार, पैसा और खरीदने की शक्ति · बाजार का जादू और मन की स्थिति |
| 29 | संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु') | लेखक परिचय और आंचलिकता · कहानी का कथानक और प्रमुख घटनाएँ · पात्र-चित्रण |
| 30 | काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) | १. रचनाकार और विधा · २. पाठ का केंद्रीय विचार · ३. पात्र-चित्रण |
| 31 | गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी) | पाठ का स्वरूप और केंद्रीय विचार · भीष्म साहनी का परिचय · सेवाग्राम प्रसंग और गांधी जी का व्यक्तित्व |
| 32 | पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) | लेखक परिचय और रचनात्मक विशेषताएँ · कथानक का सार · मुख्य पात्र और उनका चरित्र-चित्रण |
| 33 | शेर, पहचान, चार हाथ, साझा (असगर वजाहत) | असगर वजाहत और उनकी रचनात्मक विशेषताएँ · शेर — सत्ता और छद्म व्यवस्था का प्रतीक · पहचान — नियंत्रित प्रजा और प्रगति का भ्रम |
| 34 | शिरीष के फूल-(हजारी प्रसाद द्विवेदी) | रचना का स्वरूप और केंद्रीय विचार · शिरीष का प्राकृतिक और सांस्कृतिक चित्र · शिरीष और कोमलता का प्रसंग |
| 35 | जहाँ कोई वापसी नहीं (निर्मल वर्मा) | पाठ का सार और केंद्रीय विचार · सिंगरौली, अमझर और नवागाँव से जुड़े तथ्य · विस्थापन, प्रकृति और औद्योगीकरण |
| 36 | श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) | बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : जीवन, विचार और प्रेरणा · ‘एनीहिलेशन ऑफ कास्ट’ और पाठ का संदर्भ · श्रम विभाजन और जाति-प्रथा : मुख्य तर्क |
| 37 | दूसरा देवदास (ममता कालिया) | कथा का केंद्रीय भाव · लेखिका ममता कालिया का परिचय · हर की पौड़ी का चित्रण |
| 38 | कुटज (हजारी प्रसाद द्विवेदी) | निबंध का केंद्रीय भाव · नाम और रूप का संबंध · कुटज का प्रतीकात्मक सौंदर्य |