इस जल प्रलय में
Jharkhand Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for इस जल प्रलय में — Jharkhand Board Class 9 Hindi.
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1बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे?Show solution
उत्तर:
बाढ़ की खबर सुनते ही लोग निम्नलिखित तैयारियाँ करने लगे—
1. लोग घरों में खाने-पीने का सामान (आटा, चावल, दाल, तेल, नमक आदि) इकट्ठा करने लगे।
2. मिट्टी का तेल (केरोसिन) और माचिस जमा करने लगे ताकि बाढ़ के दौरान रोशनी और खाना पकाने में दिक्कत न हो।
3. दुकानदारों ने अपना सामान ऊँचे स्थानों पर रखना शुरू कर दिया।
4. लोग अपने जरूरी कागजात और कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने लगे।
5. पान की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई क्योंकि लोग पान और तंबाकू का भी स्टॉक करने लगे।
6. सभी लोग 'पानी कहाँ तक आ गया है' यह जानने के लिए उत्सुक थे और एक-दूसरे से जानकारी लेने लगे।
निष्कर्ष: बाढ़ की खबर सुनकर लोगों में भय और सतर्कता दोनों एक साथ जाग उठे और उन्होंने जीवन-रक्षा के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने की कोशिश की।
2बाढ़ की सही जानकारी लेने और बाढ़ का रूप देखने के लिए लेखक क्यों उत्सुक था?Show solution
उत्तर:
लेखक बाढ़ की सही जानकारी लेने और उसका रूप देखने के लिए निम्नलिखित कारणों से उत्सुक था—
1. साहित्यकार की जिज्ञासा: लेखक एक संवेदनशील रचनाकार था। वह बाढ़ की विभीषिका को अपनी आँखों से देखकर उसे अपनी रचनाओं में यथार्थ रूप से चित्रित करना चाहता था।
2. पत्रकारिता की भावना: लेखक में एक पत्रकार की तरह घटनाओं को प्रत्यक्ष देखने और उन्हें दर्ज करने की इच्छा थी। वह चाहता था कि मूवी कैमरे और टेप रिकॉर्डर से बाढ़ का दृश्य रिकॉर्ड किया जाए।
3. सामाजिक सरोकार: लेखक बाढ़ पीड़ितों की वास्तविक स्थिति जानना चाहता था ताकि उनकी पीड़ा को समाज के सामने रख सके।
4. व्यक्तिगत अनुभव: लेखक स्वयं उस क्षेत्र का निवासी था, इसलिए वह जानना चाहता था कि बाढ़ का पानी उसके इलाके तक कब और कितना पहुँचेगा।
निष्कर्ष: लेखक की उत्सुकता उसकी साहित्यिक संवेदनशीलता, पत्रकारिता-वृत्ति और सामाजिक दायित्व-बोध का परिणाम थी।
3सबकी जबान पर एक ही जिज्ञासा—'पानी कहाँ तक आ गया है?'—इस कथन से जनसमूह की कौन-सी भावनाएँ व्यक्त होती हैं?Show solution
उत्तर:
इस कथन से जनसमूह की निम्नलिखित भावनाएँ व्यक्त होती हैं—
1. भय और आशंका: लोग डरे हुए थे कि बाढ़ का पानी उनके घरों तक न पहुँच जाए। यह प्रश्न उनके मन की घबराहट को दर्शाता है।
2. जिज्ञासा: लोग बाढ़ की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उत्सुक थे। वे जानना चाहते थे कि खतरा कितना बड़ा है।
3. सतर्कता: यह प्रश्न इस बात का भी संकेत है कि लोग सतर्क हो गए थे और समय रहते बचाव के उपाय करना चाहते थे।
4. सामूहिक चिंता: यह प्रश्न केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक चिंता का प्रतीक है। पूरा समाज एक साझी विपदा का सामना कर रहा था।
5. असहायता की भावना: लोग जानते थे कि वे प्रकृति के सामने असहाय हैं, फिर भी जानकारी लेकर मन को थोड़ा आश्वस्त करना चाहते थे।
निष्कर्ष: यह एक छोटा-सा प्रश्न मानव मन की भय, जिज्ञासा, सतर्कता और सामूहिक संकट की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
4'मृत्यु का तरल दूत' किसे कहा गया है और क्यों?Show solution
उत्तर:
'मृत्यु का तरल दूत' बाढ़ के पानी को कहा गया है।
कारण:
1. तरल: पानी तरल (liquid) पदार्थ है, इसलिए उसे 'तरल' कहा गया है।
2. मृत्यु का दूत: बाढ़ का पानी अपने साथ मृत्यु और विनाश का संदेश लेकर आता है। यह पानी—
- घरों को डुबो देता है,
- फसलों को नष्ट कर देता है,
- पशु-पक्षियों और मनुष्यों की जान ले लेता है,
- बीमारियाँ फैलाता है,
- लोगों को बेघर कर देता है।
3. दूत का प्रतीक: जिस प्रकार दूत किसी संदेश को लेकर आता है, उसी प्रकार बाढ़ का पानी मृत्यु और तबाही का संदेश लेकर आता है। यह पानी धीरे-धीरे बढ़ता है और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को नष्ट कर देता है।
निष्कर्ष: 'मृत्यु का तरल दूत' एक अत्यंत सटीक और काव्यात्मक अभिव्यक्ति है जो बाढ़ के पानी की विनाशकारी प्रकृति को बखूबी दर्शाती है।
5आपदाओं से निपटने के लिए अपनी तरफ से कुछ सुझाव दीजिए।Show solution
आपदाओं से निपटने के सुझाव:
पूर्व-तैयारी (Before Disaster):
1. घर में आवश्यक खाद्य सामग्री, पानी, दवाइयाँ और टॉर्च का पर्याप्त भंडार रखें।
2. आपदा-प्रबंधन की जानकारी और प्रशिक्षण लें।
3. अपने क्षेत्र के निकटतम राहत केंद्र और आपातकालीन नंबरों की जानकारी रखें।
4. घर को मजबूत बनाएँ और निचले इलाकों में रहने वाले लोग ऊँचे स्थानों पर जाने की योजना बनाएँ।
आपदा के दौरान (During Disaster):
5. अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करें।
6. बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की विशेष देखभाल करें।
7. एक-दूसरे की मदद करें और सामूहिक रूप से काम करें।
8. बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से न उतरें।
आपदा के बाद (After Disaster):
9. दूषित पानी न पिएँ, उबला हुआ या शुद्ध पानी ही उपयोग करें।
10. सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि महामारी न फैले।
11. राहत सामग्री का उचित वितरण सुनिश्चित करें।
12. मानसिक रूप से टूटे लोगों को सहारा दें।
निष्कर्ष: आपदाओं से पूरी तरह बचा नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी और सामूहिक प्रयास से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
6'ईह! जब दानापुर डूब रहा था तो पटनियाँ बाबू लोग उलटकर देखने भी नहीं गए...अब बूझो!'—इस कथन द्वारा लोगों की किस मानसिकता पर चोट की गई है?Show solution
उत्तर:
इस कथन द्वारा निम्नलिखित मानसिकताओं पर चोट की गई है—
1. स्वार्थी मानसिकता: जब दानापुर में बाढ़ आई थी, तब पटना के लोगों ने उनकी कोई मदद नहीं की, यहाँ तक कि देखने भी नहीं गए। यह उनकी स्वार्थी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
2. उदासीनता और संवेदनहीनता: दूसरों की पीड़ा के प्रति उदासीन रहना और जब तक अपने पर न आए, तब तक परवाह न करना—यह मानसिकता इस कथन में उजागर होती है।
3. 'अपना-पराया' की भावना: पटना और दानापुर दोनों पास-पास हैं, फिर भी पटना के लोगों ने दानापुर को 'अपना' नहीं समझा। यह संकीर्ण मानसिकता है।
4. 'जब अपने पर पड़े तब जानो' की भावना: अब जब पटना खुद डूब रहा है, तब उन्हें दूसरों की पीड़ा का अहसास हो रहा है। यह कथन उनकी इसी मानसिकता पर व्यंग्य है।
5. सामाजिक असमानता: 'पटनियाँ बाबू लोग' शब्द से यह भी ध्वनित होता है कि उच्च वर्ग के लोग निम्न वर्ग या छोटे कस्बों की समस्याओं को महत्त्व नहीं देते।
निष्कर्ष: यह कथन मानवीय स्वार्थ, संवेदनहीनता और 'जब तक अपने पर न आए' वाली मानसिकता पर करारा व्यंग्य है।
7खरीद-बिक्री बंद हो चुकने पर भी पान की बिक्री अचानक क्यों बढ़ गई थी?Show solution
उत्तर:
पान की बिक्री अचानक बढ़ने के निम्नलिखित कारण थे—
1. चिंता और तनाव दूर करने का साधन: बाढ़ की आशंका से लोग मानसिक रूप से तनावग्रस्त थे। पान खाना उनके लिए तनाव कम करने और मन को व्यस्त रखने का एक तरीका था।
2. अड्डेबाजी और गपशप: बाढ़ की खबरें सुनने-सुनाने के लिए लोग पान की दुकानों पर इकट्ठा होते थे। पान की दुकान सूचना-केंद्र बन गई थी। पान खाते हुए लोग बाढ़ की जानकारी का आदान-प्रदान करते थे।
3. भविष्य के लिए स्टॉक: लोग सोचते थे कि बाढ़ आने के बाद पान मिलना बंद हो जाएगा, इसलिए वे पहले से ही अधिक पान खरीद रहे थे।
4. मनोवैज्ञानिक सहारा: संकट के समय लोग अपनी आदतों और छोटी-छोटी खुशियों में सहारा ढूँढते हैं। पान खाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।
निष्कर्ष: पान की बिक्री का बढ़ना यह दर्शाता है कि संकट के समय भी मनुष्य अपनी आदतों और सामाजिकता को नहीं छोड़ता। पान की दुकान उस समय सूचना और सामाजिकता का केंद्र बन गई थी।
8जब लेखक को यह अहसास हुआ कि उसके इलाके में भी पानी घुसने की संभावना है तो उसने क्या-क्या प्रबंध किए?Show solution
उत्तर:
लेखक ने निम्नलिखित प्रबंध किए—
1. खाने-पीने का सामान: लेखक ने घर में पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री जैसे चूड़ा (चिवड़ा), गुड़, सत्तू आदि इकट्ठा किया जो बिना पकाए भी खाए जा सकते थे।
2. मिट्टी का तेल और मोमबत्तियाँ: बिजली जाने की आशंका में रोशनी के लिए मिट्टी का तेल और मोमबत्तियाँ जमा कीं।
3. पानी का प्रबंध: पीने के लिए साफ पानी का इंतजाम किया।
4. जरूरी सामान ऊपर रखना: घर का जरूरी सामान, कागजात और कीमती वस्तुएँ ऊँचे स्थानों पर रख दीं ताकि पानी आने पर वे सुरक्षित रहें।
5. दवाइयाँ: आवश्यक दवाइयाँ भी एकत्र कीं।
6. मानसिक तैयारी: लेखक ने स्वयं को मानसिक रूप से भी तैयार किया और स्थिति का सामना करने का निश्चय किया।
निष्कर्ष: लेखक ने एक सजग और व्यावहारिक व्यक्ति की तरह बाढ़ से निपटने की तैयारी की। उनके ये प्रबंध आपदा-प्रबंधन के सामान्य सिद्धांतों के अनुरूप थे।
9बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कौन-कौन सी बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है?Show solution
उत्तर:
बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में निम्नलिखित बीमारियाँ फैलने की आशंका रहती है—
1. हैजा (Cholera): दूषित पानी पीने से हैजा फैलता है। यह बाढ़ के बाद सबसे आम और खतरनाक बीमारी है।
2. टाइफाइड: गंदे पानी और भोजन के कारण टाइफाइड बुखार फैलता है।
3. मलेरिया: बाढ़ के बाद जगह-जगह पानी जमा हो जाता है जिसमें मच्छर पनपते हैं और मलेरिया फैलाते हैं।
4. डेंगू और चिकनगुनिया: मच्छरों के कारण ये बीमारियाँ भी फैलती हैं।
5. दस्त और पेचिश: दूषित पानी और भोजन से पेट की बीमारियाँ होती हैं।
6. त्वचा रोग: गंदे पानी में रहने से त्वचा संबंधी बीमारियाँ जैसे खुजली, फोड़े-फुंसी आदि होती हैं।
7. आँखों की बीमारियाँ: गंदे पानी के संपर्क से आँखों में संक्रमण हो सकता है।
8. साँप के काटने का खतरा: बाढ़ में साँप पानी में बह आते हैं और काट सकते हैं।
निष्कर्ष: बाढ़ के बाद स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है ताकि इन बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
10नौजवान के पानी में उतरते ही कुत्ता भी पानी में कूद गया। दोनों ने किन भावनाओं के वशीभूत होकर ऐसा किया?Show solution
उत्तर:
नौजवान की भावनाएँ:
1. साहस और निडरता: नौजवान ने बाढ़ के खतरनाक पानी में उतरने का साहस दिखाया। वह डर के बावजूद आगे बढ़ा।
2. जिज्ञासा: वह बाढ़ की स्थिति को करीब से देखना चाहता था।
3. कर्तव्य-भावना: संभवतः वह किसी की मदद करने या किसी काम से पानी में उतरा था।
4. युवा उत्साह: युवावस्था का जोश और रोमांच भी उसे पानी में उतरने के लिए प्रेरित कर सकता था।
कुत्ते की भावनाएँ:
1. स्वामिभक्ति: कुत्ते की सबसे प्रमुख भावना अपने मालिक के प्रति अटूट वफादारी थी। वह अपने मालिक को अकेला नहीं छोड़ना चाहता था।
2. प्रेम और लगाव: कुत्ते का अपने मालिक से गहरा प्रेम था, इसलिए वह उसके पीछे खतरनाक पानी में भी कूद गया।
3. सुरक्षा की भावना: कुत्ता शायद अपने मालिक की रक्षा करना चाहता था।
निष्कर्ष: यह दृश्य मानव-पशु के बीच के गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाता है। नौजवान का साहस और कुत्ते की स्वामिभक्ति दोनों अपने-अपने स्तर पर प्रेरणादायक हैं।
11'अच्छा है, कुछ भी नहीं। कलम थी, वह भी चोरी चली गई। अच्छा है, कुछ भी नहीं—मेरे पास।'—मूवी कैमरा, टेप रिकॉर्डर आदि की तीव्र उत्कंठा होते हुए भी लेखक ने अंत में उपर्युक्त कथन क्यों कहा?Show solution
उत्तर:
लेखक ने यह कथन निम्नलिखित कारणों से कहा—
1. मानवीय संवेदना की जीत: जब लेखक ने बाढ़ पीड़ितों की वास्तविक पीड़ा, उनकी बेबसी और दुर्दशा को अपनी आँखों से देखा, तो उसे लगा कि इस पीड़ा को कैमरे में कैद करना या रिकॉर्ड करना एक तरह की संवेदनहीनता होगी।
2. पत्रकारिता बनाम मानवता: लेखक को लगा कि यदि उसके पास कैमरा होता तो वह पीड़ितों की तस्वीरें खींचता और उनकी पीड़ा को 'सामग्री' की तरह इस्तेमाल करता। यह उचित नहीं होता।
3. निजी अनुभव की गहराई: बिना किसी उपकरण के लेखक ने बाढ़ की पीड़ा को सीधे अपने दिल से महसूस किया। उपकरण होते तो वह एक 'रिपोर्टर' बनकर रह जाता, 'मनुष्य' नहीं।
4. आत्म-संतोष: कलम चोरी हो जाने पर भी लेखक को संतोष है क्योंकि अब वह इस पीड़ा को केवल एक लेखक की दृष्टि से नहीं, बल्कि एक पीड़ित मनुष्य की दृष्टि से देख सकता है।
5. विडंबना का बोध: यह कथन एक गहरी विडंबना को भी व्यक्त करता है—जब सब कुछ नष्ट हो रहा हो, तब कैमरे और रिकॉर्डर की चाहत कितनी बेमानी लगती है।
निष्कर्ष: यह कथन लेखक की मानवीय संवेदनशीलता और आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है। वह समझ गया कि कुछ अनुभव उपकरणों से नहीं, बल्कि हृदय से ही दर्ज होते हैं।
12आपने भी देखा होगा कि मीडिया द्वारा प्रस्तुत की गई घटनाएँ कई बार समस्याएँ बन जाती हैं, ऐसी किसी घटना का उल्लेख कीजिए।Show solution
उत्तर:
मीडिया समाज का दर्पण है, लेकिन कई बार उसकी प्रस्तुति समस्याएँ उत्पन्न कर देती है। ऐसी कुछ घटनाएँ—
उदाहरण 1 — सांप्रदायिक तनाव:
कई बार मीडिया किसी सांप्रदायिक घटना को इस तरह प्रस्तुत करता है कि उससे दो समुदायों के बीच तनाव और बढ़ जाता है। एक छोटी-सी घटना को बार-बार दिखाने से लोगों में भय और क्रोध फैल जाता है और दंगे भड़क उठते हैं।
उदाहरण 2 — आत्महत्या की खबरें:
जब मीडिया किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की आत्महत्या को विस्तार से और बार-बार दिखाता है, तो इससे 'कॉपीकैट सुसाइड' (अनुकरण आत्महत्या) की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
उदाहरण 3 — अफवाह फैलाना:
कोरोना महामारी के दौरान कुछ मीडिया चैनलों ने बिना जाँचे-परखे खबरें चलाईं जिससे लोगों में दहशत फैल गई और अनावश्यक भीड़ जमा हो गई।
उदाहरण 4 — बाढ़ या आपदा के समय:
आपदा के समय मीडिया कैमरे लेकर पहुँच जाता है और पीड़ितों की दुर्दशा को इस तरह दिखाता है जो उनकी गरिमा के विरुद्ध होता है। कभी-कभी राहत कार्य में भी बाधा पड़ती है।
निष्कर्ष: मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। खबरें देते समय संवेदनशीलता, तथ्यात्मकता और सामाजिक दायित्व का ध्यान रखना आवश्यक है।
13अपनी देखी-सुनी किसी आपदा का वर्णन कीजिए।Show solution
उत्तर (नमूना उत्तर):
बाढ़ का दृश्य — एक आँखों देखा वर्णन
कुछ वर्ष पहले हमारे क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण बाढ़ आ गई थी। मैंने उस आपदा को अपनी आँखों से देखा था।
पहले तो लगातार तीन-चार दिनों तक मूसलाधार बारिश होती रही। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। धीरे-धीरे पानी खेतों में घुसने लगा और फिर गाँव की गलियों में। लोग अपना सामान लेकर ऊँचे स्थानों की ओर भागने लगे। बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ सिर पर सामान उठाए जा रहे थे। पशुओं को भी ऊँचे स्थानों पर ले जाया जा रहा था।
कुछ ही घंटों में पूरा गाँव पानी में डूब गया। घरों की दीवारें गिरने लगीं। फसलें बर्बाद हो गईं। लोग स्कूल और मंदिर जैसी ऊँची इमारतों में शरण लेने लगे।
सरकारी राहत दल नावें लेकर आए और फँसे हुए लोगों को निकाला। राहत शिविरों में खाना और दवाइयाँ बाँटी गईं। लेकिन कई दिनों तक लोगों को बहुत कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं।
बाढ़ उतरने के बाद का दृश्य और भी दर्दनाक था। चारों ओर कीचड़, टूटे घर, बर्बाद फसलें और बीमारियाँ। लोगों को अपना जीवन फिर से शुरू करने में महीनों लग गए।
निष्कर्ष: इस आपदा ने मुझे सिखाया कि प्रकृति के सामने मनुष्य कितना असहाय है, लेकिन साथ ही यह भी देखा कि मुसीबत में लोग एक-दूसरे की मदद के लिए कैसे आगे आते हैं। आपदा-प्रबंधन की पूर्व तैयारी और सामूहिक सहयोग से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।
*(नोट: छात्र अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर भूकंप, सूखा, चक्रवात या किसी अन्य आपदा का वर्णन भी कर सकते हैं।)*
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