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Chapter 29 of 30
NCERT Solutions

मेघ आए

Jharkhand Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for मेघ आए — Jharkhand Board Class 9 Hindi.

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21 Questions Solved · 4 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है, उन्हें लिखिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

उत्तर:

बादलों के आने पर कवि ने प्रकृति में निम्नलिखित गतिशील क्रियाओं का चित्रण किया है—

1. हवा का चलना: आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली — हवा खुशी से नाचती-गाती आगे-आगे चलने लगी, जैसे मेहमान के आने की खबर फैला रही हो।
2. धूल का उड़ना: धूल भागी घाघरा उठाए — धूल घाघरा उठाकर भागने लगी।
3. पेड़ों का झुकना: पेड़ झुक झाँकने लगे — पेड़ आदर में झुककर मेहमान को देखने लगे।
4. नदी का ठिठकना: नदी ठिठकी, घूँघट सरके — नदी ने तिरछी नजर से बादलों को देखा और उसका घूँघट सरक गया।
5. बिजली का चमकना: दामिनी दमकी — बिजली चमकने लगी।
6. लता का लिपटना: लता ने बाँह खोलकर बादलों का स्वागत किया।
7. ताल का भर जाना: ताल में बाँध टूटा और वह झर-झर बहने लगा।
8. पीपल का प्रणाम करना: पीपल ने बड़े बुजुर्ग की तरह आगे बढ़कर जुहार (नमस्कार) किया।

इस प्रकार कवि ने प्रकृति की प्रत्येक वस्तु को सजीव और गतिशील रूप में चित्रित किया है।
2निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं?
- धूल
- पेड़
- नदी
- लता
- ताल
Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' में प्रकृति के विभिन्न तत्त्वों का मानवीकरण किया गया है।

उत्तर:

| प्रकृति-तत्त्व | प्रतीक |
|---|---|
| धूल | धूल उस चंचल बालिका या लड़की का प्रतीक है जो मेहमान के आने की खबर सुनकर घाघरा उठाए भागती है — अर्थात् गाँव की उत्साहित बच्ची/स्त्री का प्रतीक। |
| पेड़ | पेड़ गाँव के बड़े-बुजुर्ग पुरुषों के प्रतीक हैं जो झुककर मेहमान को देखते हैं। |
| नदी | नदी गाँव की उस युवती (नव-विवाहिता) का प्रतीक है जो लाज से घूँघट में रहती है और तिरछी नजर से मेहमान को देखती है। |
| लता | लता उस प्रेमिका या नव-वधू का प्रतीक है जो अपने प्रियतम (बादल/दामाद) से मिलकर बाँहें फैलाकर लिपट जाती है। |
| ताल | ताल उस भावुक स्त्री का प्रतीक है जिसकी आँखों से मिलन की खुशी में आँसू छलक पड़ते हैं — बाँध टूटकर झर-झर बहने लगता है। |
3लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों?Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — लता और बादल का संबंध।

उत्तर:

लता ने बादल रूपी मेहमान को अत्यंत प्रेम और उत्सुकता के साथ देखा। कविता में लता को एक प्रेमिका या नव-वधू के रूप में चित्रित किया गया है। जब बादल रूपी मेहमान (दामाद/प्रियतम) आए, तो लता ने बाँहें फैलाकर उनका स्वागत किया और उनसे लिपट गई।

लता के इस प्रकार देखने के कारण:
1. लता बहुत दिनों से अपने प्रियतम (बादल) की प्रतीक्षा कर रही थी।
2. लंबे वियोग के बाद प्रियतम के आने पर उसका हृदय प्रेम और उत्साह से भर गया।
3. उसने 'क्षमा करो, गाँठ खुल गई अब भरम की' कहकर अपनी भूल स्वीकार की — अर्थात् उसे भ्रम था कि प्रियतम नहीं आएगा, पर वह आ गया।
4. मिलन की खुशी में उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

इस प्रकार लता ने बादल को एक प्रेमिका की भाँति — प्रेम, उत्सुकता और भावुकता के साथ देखा।
4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की
(ख) बाँकी चितवन उठा, नदी टिटकी, घूँघट सरके।
Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' की पंक्तियाँ।

(क) क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की

भाव: इस पंक्ति में लता (प्रेमिका/नव-वधू) बादल (प्रियतम/दामाद) से क्षमा माँग रही है। लंबे समय तक बादल के न आने से लता के मन में यह भ्रम (गाँठ) बन गया था कि वह अब नहीं आएगा। परंतु जब बादल आ गया तो उसका वह भ्रम टूट गया। वह कहती है — 'मुझे क्षमा करो, मेरे मन में जो यह गाँठ बंधी थी कि तुम नहीं आओगे, वह अब खुल गई।' यह पंक्ति वियोग के बाद मिलन की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

(ख) बाँकी चितवन उठा, नदी टिटकी, घूँघट सरके।

भाव: इस पंक्ति में नदी को एक लजीली नव-वधू के रूप में चित्रित किया गया है। जब बादल रूपी मेहमान (दामाद) आए, तो नदी ने घूँघट में रहते हुए तिरछी (बाँकी) नजर से उन्हें देखा। देखते-देखते वह एक पल के लिए ठिठक गई (रुक गई) और उसका घूँघट सरक गया। यह दृश्य गाँव की उस शर्मीली स्त्री का है जो लाज के कारण सीधे नहीं देखती, पर उत्सुकतावश तिरछी नजर से मेहमान को देख लेती है।
5मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए?Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — मेघ के आगमन का प्रभाव।

उत्तर:

मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में निम्नलिखित परिवर्तन हुए—

1. हवा का चलना: ठंडी-सुहानी हवा नाचती-गाती आगे-आगे चलने लगी।
2. धूल का उड़ना: धूल घाघरा उठाकर भागने लगी — वातावरण में धूल-भरी आँधी आई।
3. पेड़ों का झुकना: पेड़ झुककर मेहमान को देखने लगे।
4. बिजली का चमकना: दामिनी दमकी — आकाश में बिजली चमकने लगी।
5. नदी का ठिठकना: नदी तिरछी नजर से देखते हुए ठिठक गई।
6. लता का लिपटना: लता ने बाँहें फैलाकर बादल का स्वागत किया।
7. पीपल का झुकना: पीपल ने आगे बढ़कर जुहार (नमस्कार) किया।
8. वर्षा होना: अंत में बादल बरसे और ताल का बाँध टूट गया — झर-झर वर्षा होने लगी।
9. आनंद का वातावरण: समूचे गाँव में उत्साह, प्रसन्नता और उमंग का वातावरण बन गया।

इस प्रकार मेघ के आने से प्रकृति का कण-कण आनंदित हो उठा।
6मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात क्यों कही गई है?Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — 'बन-ठन के, सँवर के' पंक्ति।

उत्तर:

कविता में मेघों की तुलना शहर से आए एक सजे-धजे मेहमान (दामाद) से की गई है। जब कोई दामाद ससुराल जाता है तो वह अच्छे वस्त्र पहनकर, सज-सँवरकर जाता है।

मेघों के लिए 'बन-ठन के, सँवर के' आने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि—

1. काले-घने बादल आकाश में छाए हुए थे — जैसे कोई सुंदर वस्त्र पहने हो।
2. बिजली की चमक उनकी शोभा को और बढ़ा रही थी — जैसे आभूषण हों।
3. बादल क्षितिज-अटारी पर आकर रुके — जैसे कोई मेहमान दरवाजे पर खड़ा हो।
4. मेघों का यह आगमन भव्य और प्रभावशाली था — ठीक उसी तरह जैसे शहर का कोई रईस मेहमान गाँव में आता है।

इस प्रकार 'बन-ठन के, सँवर के' कहकर कवि ने मेघों के भव्य, सुंदर और प्रभावशाली आगमन का चित्रण किया है।
7कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — अलंकार।

उत्तर:

मानवीकरण अलंकार (जहाँ प्रकृति की वस्तुओं को मानवीय क्रियाएँ करते दिखाया गया हो)—

1. 'आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली' — हवा को नाचते-गाते चलते दिखाया गया है।
2. 'धूल भागी घाघरा उठाए' — धूल को घाघरा उठाकर भागती स्त्री के रूप में दिखाया गया है।
3. 'पेड़ झुक झाँकने लगे' — पेड़ों को झुककर झाँकते मनुष्य के रूप में दिखाया गया है।
4. 'पीपल ने जुहार किया' — पीपल को नमस्कार करते बुजुर्ग के रूप में दिखाया गया है।
5. 'नदी टिटकी, घूँघट सरके' — नदी को घूँघट में लजाती स्त्री के रूप में दिखाया गया है।
6. 'लता ने बाँह खोली' — लता को बाँहें फैलाती प्रेमिका के रूप में दिखाया गया है।

रूपक अलंकार (जहाँ उपमेय पर उपमान का आरोप हो)—

1. 'क्षितिज-अटारी' — क्षितिज को अटारी कहा गया है।
2. 'मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के' — मेघ को सजे-धजे मेहमान (दामाद) के रूप में प्रस्तुत किया गया है — यहाँ मेघ ही मेहमान है।
3. 'बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके' — वर्षा की बूँदों को मिलन के आँसू कहा गया है।
8कविता में जिन रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — ग्रामीण रीति-रिवाज।

उत्तर:

कविता में भारतीय ग्रामीण जीवन के निम्नलिखित रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है—

1. मेहमान के आने की खबर फैलाना: जब कोई मेहमान गाँव में आता है तो उसके आने की खबर पूरे गाँव में तेजी से फैल जाती है — 'आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली।'

2. बड़े-बुजुर्गों का स्वागत करना: गाँव के बड़े-बुजुर्ग (पीपल) आगे बढ़कर मेहमान को जुहार (नमस्कार) करते हैं।

3. स्त्रियों का घूँघट में रहना: गाँव की स्त्रियाँ दामाद के सामने घूँघट करती हैं — 'नदी टिटकी, घूँघट सरके।'

4. प्रतीक्षा और स्वागत: नव-वधू (लता) अपने प्रियतम की प्रतीक्षा करती है और आने पर बाँहें फैलाकर स्वागत करती है।

5. क्षमा-याचना: लंबे समय बाद आए मेहमान से 'क्षमा करो' कहकर अपनी भूल स्वीकार करने की परंपरा — 'क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की।'

6. मिलन पर भावुक होना: प्रियजन के आने पर आँखों में आँसू आ जाना — 'बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके।'

इन रीति-रिवाजों के माध्यम से कवि ने भारतीय ग्रामीण संस्कृति का अत्यंत मार्मिक और जीवंत चित्रण किया है।
9कविता में कवि ने आकाश में बादल और गाँव में मेहमान (दामाद) के आने का जो रोचक वर्णन किया है, उसे लिखिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — बादल और दामाद के आगमन की समानता।

उत्तर:

कवि ने बादल के आगमन और गाँव में दामाद के आगमन की अत्यंत रोचक तुलना की है। दोनों का वर्णन साथ-साथ चलता है—

बादल का आगमन | दामाद का आगमन
---|---
बादल बड़े बन-ठन के, सँवर के आए | दामाद सज-सँवरकर ससुराल आया
हवा आगे-आगे नाचती-गाती चली | गाँव में खबर तेजी से फैल गई
धूल घाघरा उठाकर भागी | गाँव की लड़कियाँ उत्साहित होकर भागीं
पेड़ झुककर झाँकने लगे | गाँव के लोग झाँककर देखने लगे
पीपल ने जुहार किया | बड़े-बुजुर्गों ने नमस्कार किया
नदी ने घूँघट में तिरछी नजर से देखा | गाँव की स्त्रियों ने घूँघट में देखा
लता ने बाँहें फैलाकर स्वागत किया | नव-वधू ने प्रियतम का स्वागत किया
बिजली चमकी | मिलन का आनंद हुआ
बादल बरसे — मिलन के आँसू बहे | प्रिया-प्रियतम के मिलन पर आँसू छलके

इस प्रकार कवि ने प्रकृति और मानव-जीवन को एक-दूसरे में इस तरह गूँथ दिया है कि दोनों का वर्णन एक साथ चलता है और पाठक को अत्यंत रोचक लगता है।
10काव्य-सौंदर्य लिखिए—
पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' की प्रथम पंक्तियाँ।

काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में कवि ने बादलों के आगमन की तुलना शहर से आए एक सजे-धजे मेहमान (दामाद) से की है। बादल काले, घने और भव्य होते हैं — ठीक उसी तरह जैसे शहर का कोई रईस मेहमान गाँव में आता है तो उसका व्यक्तित्व अलग ही दिखता है।

शिल्प-सौंदर्य:
1. उपमा अलंकार: 'पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के' — मेघ की तुलना शहरी मेहमान से की गई है।
2. मानवीकरण: मेघ को मनुष्य की तरह बन-ठनकर आते दिखाया गया है।
3. 'बन-ठन के, सँवर के' — पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार; दोनों शब्द एक ही भाव को और अधिक स्पष्ट करते हैं।
4. भाषा: सरल, सहज खड़ी बोली में ग्रामीण जीवन का चित्रण।
5. लय और संगीतात्मकता: पंक्तियों में स्वाभाविक लय है जो पाठक को बाँध लेती है।
6. बिम्ब: शहरी मेहमान का गाँव में आना — एक जीवंत दृश्य-बिम्ब उपस्थित होता है।

विशेषता: यह पंक्ति कविता का केंद्रीय भाव प्रस्तुत करती है और पूरी कविता की आधारशिला है।

रचना और अभिव्यक्ति

11वर्ष के आने पर अपने आसपास के वातावरण में हुए परिवर्तनों को ध्यान से देखकर एक अनुच्छेद लिखिए।Show solution
वर्षा ऋतु के आगमन पर अनुच्छेद:

जब वर्षा ऋतु आती है तो प्रकृति का रूप ही बदल जाता है। आकाश में काले-घने बादल छा जाते हैं। ठंडी-ठंडी हवाएँ चलने लगती हैं। धरती की मिट्टी की सोंधी खुशबू मन को मोह लेती है। पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं। सूखी नदियाँ और तालाब पानी से भर जाते हैं। मेंढकों की टर्र-टर्र और मोरों की केकारव से वातावरण गूँज उठता है। किसान खुशी से खेतों की ओर निकल पड़ते हैं। बच्चे बारिश में भीगकर खेलते हैं। गलियों में पानी बहने लगता है। आम के पेड़ों पर झूले पड़ जाते हैं। चारों ओर हरियाली और ताजगी का वातावरण बन जाता है। वर्षा ऋतु प्रकृति और मनुष्य दोनों के लिए नई ऊर्जा और उमंग लेकर आती है।
12कवि ने पीपल को ही बड़ा बुजुर्ग क्यों कहा है? पता लगाइए।Show solution
उत्तर:

कवि ने पीपल को बड़ा बुजुर्ग इसलिए कहा है क्योंकि—

1. आयु की दृष्टि से: पीपल का वृक्ष बहुत लंबे समय तक जीवित रहता है। यह सैकड़ों वर्षों तक हरा-भरा रहता है, इसलिए यह गाँव का सबसे पुराना और बुजुर्ग वृक्ष माना जाता है।

2. धार्मिक महत्त्व: पीपल को हिंदू धर्म में पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे देवताओं का वास-स्थान कहा जाता है। इसलिए यह गाँव में सम्मानित बुजुर्ग की तरह है।

3. आकार की दृष्टि से: पीपल का वृक्ष बहुत विशाल और ऊँचा होता है। उसकी शाखाएँ दूर-दूर तक फैली होती हैं — ठीक उसी तरह जैसे बुजुर्ग का अनुभव और प्रभाव दूर-दूर तक होता है।

4. गाँव में स्थान: पीपल का पेड़ प्रायः गाँव के चौपाल या मंदिर के पास होता है, जहाँ बड़े-बुजुर्ग बैठते हैं।

इन सभी कारणों से कवि ने पीपल को गाँव का बड़ा बुजुर्ग कहा है।
13कविता में मेघ को 'पाहुन' के रूप में चित्रित किया गया है। हमारे यहाँ अतिथि (दामाद) को विशेष महत्व प्राप्त है, लेकिन आज इस परंपरा में परिवर्तन आया है। आपको इसके क्या कारण नजर आते हैं, लिखिए।Show solution
उत्तर:

आज अतिथि-सत्कार की परंपरा में परिवर्तन के निम्नलिखित कारण नजर आते हैं—

1. व्यस्त जीवनशैली: आज के युग में लोग इतने व्यस्त हैं कि उनके पास मेहमानों के लिए समय नहीं है। नौकरी और व्यवसाय की व्यस्तता ने पारिवारिक संबंधों को कमजोर किया है।

2. एकल परिवार: संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवार बन गए हैं। छोटे घरों में मेहमानों के लिए स्थान और सुविधाएँ कम हो गई हैं।

3. आर्थिक दबाव: महँगाई के कारण मेहमानों का खर्च उठाना कठिन हो गया है।

4. पाश्चात्य प्रभाव: पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से 'अतिथि देवो भव' की भावना कमजोर हुई है।

5. शहरीकरण: गाँवों से शहरों की ओर पलायन के कारण पारंपरिक मूल्य कमजोर हुए हैं।

6. संचार माध्यमों का विकास: फोन और इंटरनेट के कारण लोग बिना मिले ही संपर्क में रहते हैं, इसलिए आना-जाना कम हो गया है।

फिर भी यह परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है — विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अतिथि-सत्कार की भावना जीवित है।

भाषा-अध्ययन

14कविता में आए मुहावरों को छाँटकर अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' में प्रयुक्त मुहावरे।

उत्तर:

कविता में आए मुहावरे और उनका वाक्य-प्रयोग—

1. बन-ठन के आना (सज-सँवरकर आना)
- वाक्य: दामाद जी बन-ठन के ससुराल आए।

2. गाँठ खुलना (भ्रम दूर होना)
- वाक्य: जब सच्चाई सामने आई तो मन की गाँठ खुल गई।

3. बाँध टूटना (रोका हुआ भाव उमड़ पड़ना)
- वाक्य: बेटे को देखते ही माँ के आँसुओं का बाँध टूट गया।

4. घूँघट सरकना (लाज का कम होना)
- वाक्य: बहू का घूँघट सरक गया जब उसने मेहमान को देखा।

5. जुहार करना (आदर से नमस्कार करना)
- वाक्य: गाँव के बुजुर्गों ने आगे बढ़कर मेहमान को जुहार किया।

6. बाँहें खोलना (प्रेम से स्वागत करना)
- वाक्य: माँ ने बाँहें खोलकर अपने बेटे का स्वागत किया।
15कविता में प्रयुक्त आँचलिक शब्दों की सूची बनाइए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' — आँचलिक (क्षेत्रीय) शब्द।

उत्तर:

कविता में प्रयुक्त आँचलिक शब्दों की सूची—

| आँचलिक शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पाहुन | मेहमान, अतिथि (विशेषतः दामाद) |
| बयार | हवा, वायु |
| जुहार | आदर सहित नमस्कार |
| घाघरा | स्त्रियों का पहनावा (लहँगा) |
| टिटकी | ठिठकना, एक पल के लिए रुकना |
| बाँकी चितवन | तिरछी नजर |
| भरम | भ्रम, संदेह |
| ढरकना | बहना, टपकना |
| दामिनी | बिजली |
| क्षितिज-अटारी | क्षितिज रूपी अटारी |
| सँवर के | सज-सँवरकर |

ये शब्द मुख्यतः अवधी, ब्रज और ग्रामीण हिंदी के शब्द हैं जो कविता को लोकगीत जैसा स्वाद देते हैं।
16मेघ आए कविता की भाषा सरल और सहज है—उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मेघ आए' की भाषा-शैली।

उत्तर:

'मेघ आए' कविता की भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोलचाल की भाषा के निकट है। इसे निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट किया जा सकता है—

1. सरल शब्दावली: कविता में कठिन संस्कृत शब्दों के स्थान पर सरल हिंदी और आँचलिक शब्दों का प्रयोग हुआ है—
- 'आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली' — यह वाक्य बिल्कुल बोलचाल की भाषा में है।

2. लोकजीवन के बिम्ब: 'धूल भागी घाघरा उठाए', 'घूँघट सरके' — ये बिम्ब ग्रामीण जीवन से लिए गए हैं और सहज ही समझ में आते हैं।

3. आँचलिक शब्दों का प्रयोग: 'पाहुन', 'जुहार', 'बयार', 'टिटकी' जैसे शब्द भाषा को स्वाभाविक और जीवंत बनाते हैं।

4. मानवीय संबंधों की भाषा: 'क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की' — यह पंक्ति एकदम सहज मानवीय भाव की अभिव्यक्ति है।

5. लय और प्रवाह: कविता में स्वाभाविक लय है जो पाठक को बाँधे रखती है।

इस प्रकार कवि ने सरल और सहज भाषा में गहरे भावों को अभिव्यक्त किया है।

पाठेतर सक्रियता — अपठित कविता के प्रश्न

1'हल का है अभिनंदन' में किसके अभिनंदन की बात हो रही है और क्यों?Show solution
उत्तर:

'हल का है अभिनंदन' में किसान के हल का अभिनंदन हो रहा है।

कारण: मेघ (वर्षा) के आने पर खेतों में जुताई का काम शुरू होता है। वर्षा होते ही किसान हल लेकर खेत जोतने निकल पड़ता है। हल कृषि-कार्य का प्रतीक है और वर्षा के आने पर हल का उपयोग शुरू होता है — इसलिए मेघों के आने पर हल का अभिनंदन किया जा रहा है। यह किसान की मेहनत और कृषि-संस्कृति का सम्मान है।
2प्रस्तुत कविता के आधार पर बताइए कि मेघों के आने पर प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन हुए?Show solution
उत्तर:

प्रस्तुत कविता के आधार पर मेघों के आने पर प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन हुए—

1. बिजली चमकी — 'दामिनि यह गई दमक' — आकाश में बिजली चमकने लगी।
2. मेंढकों का स्वर गूँजा — 'दादुर का कंठ खुला' — मेंढक टर्र-टर्र करने लगे।
3. धरती शुद्ध हुई — 'धरती का हृदय धुला' — वर्षा से धरती की धूल-मिट्टी धुल गई।
4. कीचड़ बना — 'पंक बना हरिचंदन' — धरती पर कीचड़ बन गया जो किसान के लिए हरिचंदन (चंदन) के समान पवित्र है।
5. कृषि-कार्य आरंभ हुआ — 'हल का है अभिनंदन' — किसान हल लेकर खेत जोतने निकल पड़े।
6. वातावरण में ध्वनि — 'धिन-धिन-धा धमक-धमक' — मेघों की गड़गड़ाहट से वातावरण गूँज उठा।
3'पंक बना हरिचंदन' से क्या आशय है?Show solution
उत्तर:

'पंक बना हरिचंदन' का आशय है — कीचड़ (पंक) किसान के लिए हरिचंदन (चंदन) के समान पवित्र और मूल्यवान है।

वर्षा होने पर खेतों में कीचड़ बन जाता है। यह कीचड़ किसान के लिए अत्यंत शुभ और आनंददायक होता है क्योंकि इसी कीचड़ में वह बीज बोता है और फसल उगाता है। जिस प्रकार चंदन पवित्र और सुगंधित होता है, उसी प्रकार यह कीचड़ किसान के लिए पवित्र और जीवनदायी है। यह पंक्ति किसान के कृषि-प्रेम और धरती के प्रति उसकी श्रद्धा को व्यक्त करती है।
4पहली पंक्ति में कौन सा अलंकार है?Show solution
उत्तर:

पहली पंक्ति है — 'धिन-धिन-धा धमक-धमक'

इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

कारण: 'ध' वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है — 'धिन-धिन-धा धमक-धमक' — इसमें 'ध' व्यंजन बार-बार आया है जिससे मेघों की गड़गड़ाहट का ध्वनि-चित्र उपस्थित होता है।

इसके साथ ही पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार भी है — 'धिन-धिन' और 'धमक-धमक' में एक ही शब्द की पुनरावृत्ति है।
5'मेघ आए' और 'मेघ बजे' किस इंद्रिय बोध की ओर संकेत हैं?Show solution
उत्तर:

- 'मेघ आए' — यह दृष्टि-इंद्रिय बोध (Visual/Sight) की ओर संकेत करता है। जब मेघ आते हैं तो हम उन्हें आँखों से देखते हैं — आकाश में काले बादल छाते हैं, बिजली चमकती है — यह सब दृश्य-बोध है।

- 'मेघ बजे' — यह श्रवण-इंद्रिय बोध (Auditory/Sound) की ओर संकेत करता है। जब मेघ बजते हैं तो हम उनकी गड़गड़ाहट को कानों से सुनते हैं — 'धिन-धिन-धा धमक-धमक' — यह ध्वनि-बोध है।

इस प्रकार कवि ने दो अलग-अलग इंद्रियों — दृष्टि और श्रवण — के माध्यम से मेघों के आगमन का सजीव चित्रण किया है।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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