तुलसीदास (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद) — NCERT Solutions
Jammu & Kashmir Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for तुलसीदास (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद), Jammu & Kashmir Board Class 10 Hindi: 17 textbook questions solved step by step.
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अभ्यास प्रश्न (क्षितिज-2, कक्षा 10)
1परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?Show solution
उत्तर:
परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए—
- पुराना धनुष था: लक्ष्मण ने कहा कि यह धनुष बहुत पुराना था, इसलिए राम के छूते ही टूट गया। इसमें राम का कोई दोष नहीं है।
- बचपन में भी ऐसे धनुष तोड़े हैं: लक्ष्मण ने कहा कि बचपन में भी उन्होंने ऐसे अनेक धनुष तोड़े हैं, तब परशुराम ने क्रोध नहीं किया। इस धनुष पर इतना मोह क्यों?
- साधारण धनुष था: लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह कोई विशेष धनुष नहीं था, बस एक पुरानी कमान थी जो टूट गई। इस पर इतना क्रोध उचित नहीं।
- राम ने जान-बूझकर नहीं तोड़ा: लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि राम ने जानबूझकर धनुष नहीं तोड़ा, वह तो स्वयंवर की शर्त पूरी करने के लिए धनुष उठाने गए थे और धनुष अपने आप टूट गया।
निष्कर्ष: लक्ष्मण ने अपने तर्कों से यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि धनुष टूटना राम की गलती नहीं थी और परशुराम का क्रोध अनुचित है।
2परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
उत्तर:
राम के स्वभाव की विशेषताएँ:
परशुराम के क्रोध करने पर राम ने अत्यंत विनम्रता और शांति से उत्तर दिया। उन्होंने परशुराम को 'गुरु' और 'पिता समान' कहकर संबोधित किया। राम ने स्वयं को परशुराम का दास बताया और कहा कि धनुष तोड़ने में उनका कोई दोष नहीं था। राम के स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- विनम्रता: वे बड़ों के सामने सदा नम्र रहे।
- धैर्य: क्रोध की स्थिति में भी वे शांत रहे।
- मर्यादा का पालन: उन्होंने कभी अपनी मर्यादा नहीं छोड़ी।
- सहनशीलता: परशुराम की कठोर बातें सुनकर भी वे विचलित नहीं हुए।
लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ:
लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध का डटकर सामना किया। उन्होंने व्यंग्यपूर्ण और तीखे वचनों से परशुराम को उत्तर दिया। लक्ष्मण के स्वभाव की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- साहसी और निर्भीक: वे परशुराम जैसे महाक्रोधी ऋषि से भी नहीं डरे।
- वाक्पटु: उन्होंने तर्कपूर्ण और व्यंग्यात्मक वचनों से परशुराम को निरुत्तर किया।
- स्वाभिमानी: उन्होंने अपने और राम के सम्मान की रक्षा की।
- उग्र स्वभाव: वे शीघ्र उत्तेजित हो जाते थे और अन्याय सहन नहीं करते थे।
निष्कर्ष: राम मर्यादा और विनम्रता के प्रतीक हैं जबकि लक्ष्मण साहस और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।
3लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।Show solution
उत्तर:
(यह प्रश्न व्यक्तिपरक है। नीचे एक आदर्श उत्तर दिया जा रहा है।)
मुझे सबसे अच्छा वह अंश लगा जब परशुराम बार-बार अपना फरसा दिखाकर लक्ष्मण को डराने की कोशिश करते हैं और लक्ष्मण निर्भीकता से उत्तर देते हैं। उसे संवाद शैली में इस प्रकार लिखा जा सकता है—
परशुराम: (क्रोध से) देखो इस फरसे को! यही फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काट चुका है। तुम बालक हो, इसलिए छोड़ रहा हूँ, नहीं तो अभी...
लक्ष्मण: (मुस्कुराते हुए) हे महामुनि! आप बार-बार यह फरसा दिखा रहे हैं। क्या आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं? यहाँ कोई कुम्हड़े की बेल का कमजोर फल नहीं है जो तर्जनी उँगली दिखाने से मर जाए।
परशुराम: (और अधिक क्रोधित होकर) तू जानता नहीं मैं कौन हूँ! मैंने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से खाली किया है।
लक्ष्मण: (व्यंग्य से) मुनिवर! वीर पुरुष अपनी वीरता का बखान नहीं करते, वे रणभूमि में अपनी वीरता दिखाते हैं। हम भी क्षत्रिय हैं और युद्ध से नहीं डरते।
परशुराम: (विस्मित होकर) यह बालक तो बड़ा ढीठ है!
लक्ष्मण: हम ढीठ नहीं, स्वाभिमानी हैं। अपने बड़े भाई श्रीराम का अपमान हम सहन नहीं कर सकते।
4परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए—
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वविदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।
मातु पितहि जनि सोचबस करसिस महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।Show solution
उत्तर:
परशुराम ने सभा में अपने विषय में निम्नलिखित बातें कहीं—
- बाल ब्रह्मचारी: उन्होंने कहा कि वे जन्म से ब्रह्मचारी हैं अर्थात् उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया है।
- अत्यंत क्रोधी: उन्होंने स्वयं को बहुत क्रोधी स्वभाव का बताया। उनका क्रोध जगत-प्रसिद्ध है।
- क्षत्रिय-कुल के शत्रु: उन्होंने कहा कि वे क्षत्रिय वंश के प्रसिद्ध शत्रु हैं। सारा संसार इस बात को जानता है।
- भुजबल से पृथ्वी को राजाओं से मुक्त किया: उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी भुजाओं के बल से पृथ्वी को राजाओं (क्षत्रियों) से रहित कर दिया और वह भूमि अनेक बार ब्राह्मणों को दान में दे दी।
- सहस्रबाहु की भुजाएँ काटने वाले: उन्होंने कहा कि यह वही फरसा है जिसने सहस्रबाहु की हजार भुजाएँ काट डाली थीं। हे राजकुमार! इस फरसे को देखो।
- माता-पिता को चिंता में मत डालो: उन्होंने राजकुमार (लक्ष्मण) को चेतावनी देते हुए कहा कि अपने माता-पिता को चिंता में मत डालो।
- गर्भ में पल रहे बच्चों का नाश करने वाला फरसा: उन्होंने कहा कि उनका फरसा इतना भयंकर है कि यह गर्भ में पल रहे बच्चों का भी नाश कर सकता है।
निष्कर्ष: परशुराम ने अपनी वीरता, क्रोध और क्षत्रिय-विरोधी स्वभाव का बखान करके सभा को भयभीत करने का प्रयास किया।
5लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?Show solution
उत्तर:
लक्ष्मण ने परशुराम को उत्तर देते हुए वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताईं—
- वीर अपनी वीरता का बखान नहीं करते: लक्ष्मण ने कहा कि सच्चे वीर पुरुष अपनी वीरता का गुणगान स्वयं नहीं करते। जो बार-बार अपनी प्रशंसा करे, वह वास्तव में वीर नहीं होता।
- वीर रणभूमि में अपनी शक्ति दिखाते हैं: सच्चे योद्धा युद्धभूमि में अपनी वीरता प्रदर्शित करते हैं, केवल बातों से नहीं।
- वीर कायरों और निर्बलों पर शस्त्र नहीं उठाते: लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा कि परशुराम बार-बार फरसा दिखाकर उन्हें डराना चाहते हैं, जबकि वीर पुरुष ऐसा नहीं करते।
- वीर निर्भीक होते हैं: सच्चा योद्धा किसी के भी शस्त्र या धमकी से नहीं डरता।
- वीर शत्रु की शक्ति को कम नहीं आँकते: लक्ष्मण ने संकेत दिया कि वे भी क्षत्रिय हैं और युद्ध करना जानते हैं।
निष्कर्ष: लक्ष्मण ने परशुराम पर व्यंग्य करते हुए यह स्पष्ट किया कि वास्तविक वीरता शब्दों में नहीं, कर्म में होती है।
6साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।Show solution
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सत्य और विचारणीय है। साहस और शक्ति मनुष्य को महान बनाते हैं, परंतु जब इनके साथ विनम्रता भी हो तो व्यक्तित्व और भी निखर जाता है।
साहस और शक्ति का महत्त्व:
साहस और शक्ति के बिना मनुष्य अन्याय का सामना नहीं कर सकता। ये गुण व्यक्ति को आत्मनिर्भर और दृढ़ बनाते हैं।
विनम्रता का महत्त्व:
विनम्रता मनुष्य को सबका प्रिय बनाती है। विनम्र व्यक्ति दूसरों का सम्मान पाता है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।
दोनों का संयोग:
इस पाठ में राम इसके सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। वे अत्यंत शक्तिशाली और साहसी हैं — उन्होंने शिव-धनुष तोड़ा — परंतु परशुराम के क्रोध के सामने वे विनम्रता से बोले। इसके विपरीत परशुराम में शक्ति तो थी, परंतु विनम्रता का अभाव था, इसलिए वे सभा में उपहास के पात्र बने।
निष्कर्ष: साहस और शक्ति से व्यक्ति शत्रु को परास्त करता है, परंतु विनम्रता से वह सबका हृदय जीत लेता है। इसलिए साहस, शक्ति और विनम्रता का संयोग ही आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण करता है। जैसा कि कहा गया है — 'विनम्रता वीरों का आभूषण है।'
7(क)भाव स्पष्ट कीजिए—
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुटारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।Show solution
उत्तर:
प्रसंग: यह पंक्तियाँ तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' के बालकांड से ली गई हैं। जब परशुराम बार-बार अपना फरसा दिखाकर लक्ष्मण को डराने का प्रयास करते हैं, तब लक्ष्मण मुस्कुराते हुए व्यंग्यपूर्ण उत्तर देते हैं।
भावार्थ:
लक्ष्मण मुस्कुराते हुए कोमल वाणी में बोले — 'अरे! ये तो महामुनि हैं और महान योद्धा भी मानते हैं अपने आप को। ये बार-बार मुझे अपना फरसा दिखा रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे ये फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हों।'
विशेष भाव:
- लक्ष्मण ने 'मृदु बानी' (कोमल वाणी) में व्यंग्य किया, जो उनकी चतुराई दर्शाता है।
- 'फूँकि पहारू उड़ावन' — यह मुहावरा बताता है कि परशुराम की धमकियाँ व्यर्थ हैं। जैसे फूँक से पहाड़ नहीं उड़ता, वैसे ही उनकी धमकियों से लक्ष्मण नहीं डरते।
- इन पंक्तियों में व्यंग्य-सौंदर्य और वीर रस का अद्भुत समन्वय है।
7(ख)भाव स्पष्ट कीजिए—
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।Show solution
उत्तर:
प्रसंग: परशुराम जब बार-बार अपना फरसा दिखाकर और धमकी देकर लक्ष्मण को डराने का प्रयास करते हैं, तब लक्ष्मण निर्भीकता से उत्तर देते हैं।
भावार्थ:
लक्ष्मण कहते हैं — 'यहाँ कोई कुम्हड़े की बेल का कमजोर फल (कुम्हड़बतिया) नहीं है जो तर्जनी उँगली दिखाने मात्र से मर जाए। हम तो आपका फरसा और धनुष-बाण देखकर भी कुछ स्वाभिमान के साथ बोल रहे हैं।'
विशेष भाव:
- 'कुम्हड़बतिया' — यह एक अत्यंत सटीक व्यंग्य है। कुम्हड़े का छोटा फल बहुत कमजोर होता है। लक्ष्मण कह रहे हैं कि वे इतने कमजोर नहीं हैं कि केवल उँगली दिखाने से डर जाएँ।
- 'सहित अभिमाना' — लक्ष्मण स्वाभिमान के साथ बोल रहे हैं। वे डरकर नहीं, बल्कि क्षत्रिय-गर्व के साथ उत्तर दे रहे हैं।
- इन पंक्तियों में वीर रस और व्यंग्य का सुंदर मेल है।
- लक्ष्मण का यह कथन परशुराम की अहंकारपूर्ण धमकियों का करारा जवाब है।
8पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।Show solution
उत्तर:
तुलसीदास हिंदी साहित्य के महाकवि हैं। 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' के आधार पर उनके भाषा सौंदर्य की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं—
- अवधी भाषा का प्रयोग: तुलसीदास ने इस प्रसंग में अवधी भाषा का प्रयोग किया है जो सरल, सहज और मधुर है।
- चौपाई और दोहा छंद: उन्होंने चौपाई और दोहा छंद का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है जिससे भाषा में लय और संगीतात्मकता आती है।
- अनुप्रास अलंकार: 'बाल ब्रह्मचारी', 'भुजबल भूमि भूप' जैसे स्थलों पर अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग है।
- व्यंग्य-सौंदर्य: लक्ष्मण के संवादों में व्यंग्य का अद्भुत सौंदर्य है जो भाषा को जीवंत बनाता है।
- लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग: 'फूँकि पहारू उड़ावन', 'कुम्हड़बतिया' जैसे लोक-प्रचलित प्रयोगों से भाषा में जीवंतता आई है।
- पात्रानुकूल भाषा: राम की भाषा विनम्र और मर्यादित है, लक्ष्मण की भाषा तीखी और व्यंग्यपूर्ण है तथा परशुराम की भाषा क्रोधपूर्ण है — यह पात्रानुकूलता तुलसी की विशेषता है।
- उपमा और रूपक: भाषा में उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग है।
- संवाद-शैली की जीवंतता: संवाद इतने स्वाभाविक हैं कि पाठक उन्हें पढ़कर दृश्य की कल्पना कर सकता है।
- भावानुकूल शब्द-चयन: क्रोध, विनम्रता, व्यंग्य — प्रत्येक भाव के लिए उचित शब्दों का चयन किया गया है।
- संक्षिप्तता और प्रभावशीलता: थोड़े शब्दों में गहरी बात कहने की तुलसी की क्षमता अद्वितीय है।
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बालकु बोलि बथी नहि तोही।
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Frequently Asked Questions
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