कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास) (Part 2) — Important Questions
Manipur Board · Class 12 · Hindi
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Important Questions from कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूरच्छा और राम का विलाप-(तुलसीदास)
तुलसीदास ने किन-किन वर्गों का उल्लेख करके समाज की स्थिति दिखाई है?
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किसबी (वेश्या), किसान, बनिक (व्यापारी), भिखारी, चाकर (नौकर)
तुलसीदास ने समाज के विभिन्न वर्गों का उल्लेख किया है जो आर्थिक संकट से पीड़ित हैं। इनमें किसबी (वेश्या), किसान, बनिक (व्यापारी), भिखारी, भाट, चाकर (नौकर), नट, चोर आदि शामिल हैं। यह दिखाता है कि आर्थिक समस्या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं बल्कि पूरे समाज को प्रभावित कर रही थी। कवि ने समाज के हर तबके की पीड़ा को समझा और व्यक्त किया है।
दूसरे छंद में तुलसीदास ने किन समस्याओं का चित्रण किया है?
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किसानों को खेती नहीं मिल रही, भिखारियों को भीख नहीं मिल रही, व्यापारियों को व्यापार नहीं मिल रहा, नौकरों को नौकरी नहीं मिल रही
दूसरे छंद में तुलसीदास ने बेरोजगारी की समस्या का चित्रण किया है। किसानों को खेती नहीं मिल रही, भिखारियों को भीख नहीं मिल रही, बनिकों को बनिज (व्यापार) नहीं मिल रहा, और चाकरों (नौकरों) को चाकरी (नौकरी) नहीं मिल रही। यह व्यापक बेरोजगारी और आर्थिक मंदी का चित्र है। लोग जीविकाविहीन होकर चिंता में डूबे हुए हैं और एक-दूसरे से पूछ रहे हैं कि 'कहाँ जाएं, क्या करें'।
लक्ष्मण-मूर्छा प्रसंग में राम के विलाप की विशेषताएं कौन सी हैं?
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राम लक्ष्मण के प्रति गहरे भ्रातृ-प्रेम से विह्वल हैं, राम का विलाप धीरे-धीरे प्रलाप में बदल जाता है, विलाप में लक्ष्मण के त्याग और शील की स्मृति बार-बार आती है, राम अपने दुख को ईश्वरीय नहीं, पूरी तरह मानवीय अनुभूति के रूप में व्यक्त करते हैं
इस प्रसंग में राम का शोक केवल औपचारिक नहीं है; वह लक्ष्मण के प्रति उनके गहरे प्रेम को दिखाता है। पाठ में स्पष्ट है कि उनका विलाप धीरे-धीरे प्रलाप बन जाता है और लक्ष्मण के त्याग, शील और मृदुल स्वभाव की यादें उभरती हैं। इसी कारण यह प्रसंग ईश्वरीय राम का मानवीकरण भी कर देता है।
राम कहते हैं 'मिलइ न जगत सहोदर भ्राता'। इसका क्या तात्पर्य है?
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इसका अर्थ है कि संसार में लक्ष्मण जैसा सच्चा सहोदर भाई मिलना दुर्लभ है
राम यहाँ भावावेश में लक्ष्मण को सहोदर भ्राता कह रहे हैं, जबकि तथ्यतः वे सहोदर नहीं थे। इसका तात्पर्य यह है कि भाई-प्रेम और निकटता इतनी गहरी है कि वे दुनिया में ऐसे भाई की दुर्लभता जताते हैं। यह शब्द वास्तविक वंश-सम्बंध नहीं, बल्कि स्नेह और आत्मीयता का संकेत है।
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