मेरे संग की औरतें
Meghalaya Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for मेरे संग की औरतें — Meghalaya Board Class 9 Hindi.
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Get startedप्रश्न-अभ्यास — मेरे संग की औरतें (कृतिका-1, कक्षा 9)
1लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं?Show solution
उत्तर:
लेखिका की नानी एक असाधारण व्यक्तित्व की स्वामिनी थीं। यद्यपि लेखिका ने उन्हें कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा, तथापि उनके बारे में सुनी-सुनाई बातें इतनी प्रेरणादायक थीं कि लेखिका उनसे स्वाभाविक रूप से प्रभावित हो गईं। नानी के प्रभावशाली व्यक्तित्व के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. साहसी निर्णय: नानी ने अपनी बेटी (लेखिका की माँ) की शादी एक ऐसे व्यक्ति से करवाई जो स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय था, जबकि वे स्वयं एक रूढ़िवादी परिवार से थीं।
2. दूरदर्शिता: उन्होंने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाई और उसे स्वतंत्र विचारों वाला बनाया।
3. स्वाभिमान और दृढ़ता: नानी ने अपने जीवन में कभी किसी के दबाव में आकर निर्णय नहीं लिया।
4. प्रगतिशील सोच: उस युग में जब स्त्रियों को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था, नानी ने अपनी बेटी को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाया।
इन्हीं गुणों के कारण लेखिका बिना देखे भी अपनी नानी के व्यक्तित्व से गहरे रूप से प्रभावित थीं।
2लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?Show solution
उत्तर:
लेखिका की नानी की स्वाधीनता आंदोलन में भागीदारी प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण थी। उनकी भागीदारी निम्नलिखित रूपों में रही:
1. परिवार के माध्यम से योगदान: नानी ने अपनी बेटी की शादी एक स्वाधीनता सेनानी से करवाई। इस प्रकार उन्होंने आंदोलन को अपने परिवार से जोड़ा।
2. प्रेरणास्रोत: वे स्वयं एक परंपरागत परिवार से थीं, फिर भी उन्होंने अपनी बेटी को स्वतंत्र विचारों वाला बनाया और देश-सेवा के लिए प्रेरित किया।
3. नैतिक समर्थन: उन्होंने अपने दामाद के स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने का विरोध नहीं किया, बल्कि उसे मौन समर्थन दिया।
इस प्रकार नानी की भागीदारी भले ही सड़कों पर उतरकर नारे लगाने वाली नहीं थी, परंतु उन्होंने अपने परिवार को आंदोलन से जोड़कर एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में—
(क) लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।
(ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।Show solution
दिया गया है: लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह नहीं करती थीं, फिर भी सबके दिलों पर राज करती थीं।
लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. स्वतंत्र विचारों वाली: वे रूढ़िवादी परंपराओं को नहीं मानती थीं। उन्होंने कभी घूँघट नहीं किया, न ही व्रत-उपवास रखे।
2. साहसी एवं निडर: वे अपने विचारों को निर्भीकता से व्यक्त करती थीं और किसी के दबाव में नहीं आती थीं।
3. स्नेहशील: परंपरा न मानने के बावजूद वे सबसे प्रेम और आत्मीयता से मिलती थीं, इसीलिए सब उन्हें पसंद करते थे।
4. सुशिक्षित एवं जागरूक: वे पढ़ी-लिखी थीं और सामाजिक मुद्दों के प्रति सजग थीं।
5. व्यक्तित्व की दृढ़ता: वे अपने आप में पूर्ण थीं — न किसी को खुश करने की चाह, न किसी से डर।
6. सहज आकर्षण: उनके व्यक्तित्व में एक स्वाभाविक आकर्षण था जो लोगों को उनकी ओर खींचता था।
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(ख) लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द-चित्र:
लेखिका की दादी का घर परंपरागत रूढ़िवादी मूल्यों से भरा था। वहाँ का वातावरण निम्नलिखित था:
1. धार्मिक एवं परंपरागत: घर में पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों का बोलबाला था।
2. पर्दा-प्रथा: घर की बहुओं से घूँघट और पर्दे की अपेक्षा की जाती थी।
3. पितृसत्तात्मक: घर में पुरुषों की आज्ञा सर्वोपरि थी और स्त्रियों से आज्ञाकारिता की उम्मीद की जाती थी।
4. सामूहिक परिवार: घर में संयुक्त परिवार का माहौल था जहाँ सबकी नज़रें एक-दूसरे पर रहती थीं।
5. अपेक्षाओं का बोझ: नई बहू से यह अपेक्षा थी कि वह घर के नियमों का पालन करे, परंतु लेखिका की माँ ने इन अपेक्षाओं को अपने स्वभाव और स्नेह से जीत लिया।
4आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी?Show solution
कल्पना पर आधारित उत्तर:
परदादी का यह कार्य उस युग के लिए अत्यंत असाधारण और क्रांतिकारी था, जब लड़की के जन्म को अशुभ माना जाता था। मेरी कल्पना के अनुसार परदादी ने यह मन्नत निम्नलिखित कारणों से माँगी होगी:
1. स्त्री-शक्ति में विश्वास: परदादी स्वयं एक सशक्त महिला थीं। उन्होंने अपने जीवन में स्त्री की शक्ति और सहनशीलता को पहचाना था। वे चाहती थीं कि उनके घर में भी एक ऐसी बेटी आए जो घर को संभाले।
2. बेटी के प्रति ममता: शायद उनके अपने जीवन में कोई बेटी नहीं थी और वे एक बेटी की किलकारी सुनना चाहती थीं।
3. समाज को संदेश: वे समाज की उस रूढ़िवादी सोच को चुनौती देना चाहती थीं जो लड़की को बोझ मानती थी।
4. पतोहू के प्रति स्नेह: वे चाहती थीं कि उनकी बहू को पहले बच्चे के रूप में एक बेटी मिले ताकि वह माँ बनने का सुख पूरी तरह महसूस कर सके — बिना किसी दबाव के।
5. वंश से परे सोच: परदादी वंश चलाने की परंपरागत सोच से ऊपर उठकर सोचती थीं। उनके लिए बेटा-बेटी में कोई भेद नहीं था।
इस प्रकार परदादी की यह मन्नत उनकी प्रगतिशील सोच और स्त्री के प्रति सम्मान का प्रतीक थी।
5डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है—पाठ के आधार पर तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
उत्तर:
पाठ में लेखिका की माँ का व्यक्तित्व इस कथन का सबसे सटीक उदाहरण है। लेखिका की माँ ने कभी किसी को डाँटा नहीं, उपदेश नहीं दिया, फिर भी उनके आसपास के लोग स्वयं सही राह पर चलने लगते थे। इसके प्रमाण निम्नलिखित हैं:
1. सहज व्यवहार से प्रभाव: लेखिका की माँ ने दादी के घर में परंपराओं का पालन नहीं किया, फिर भी उन्होंने किसी को नाराज नहीं किया। उनके सहज और स्नेहपूर्ण व्यवहार ने सबका दिल जीत लिया।
2. बच्चों की शिक्षा: लेखिका की माँ ने बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया — न डाँट-फटकार से, बल्कि अपने आचरण और प्रेम से।
3. लेखिका पर प्रभाव: लेखिका स्वयं स्वीकार करती हैं कि उनकी माँ के व्यवहार ने उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाई — बिना किसी दबाव के।
4. परदादी का उदाहरण: परदादी ने भी अपनी पतोहू को कभी दबाव में नहीं रखा, बल्कि अपने स्नेह और विश्वास से उसे सही मार्ग दिखाया।
निष्कर्ष: पाठ यह सिद्ध करता है कि जब हम किसी से प्रेम, सम्मान और सहजता से पेश आते हैं, तो वह व्यक्ति स्वयं प्रेरित होकर सही राह अपनाता है। डर या दबाव से केवल अस्थायी परिवर्तन आता है, जबकि सहजता और स्नेह से स्थायी परिवर्तन होता है।
6'शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है'— इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।Show solution
उत्तर:
लेखिका मृदुला गर्ग ने शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार माना और इस दिशा में निम्नलिखित प्रयास किए:
1. स्वयं शिक्षित होना: लेखिका ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपने जीवन में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
2. बच्चों को स्कूल भेजना: लेखिका ने अपने आसपास के बच्चों को, विशेषकर वंचित वर्ग के बच्चों को, स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया।
3. लेखन के माध्यम से जागरूकता: लेखिका ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई।
4. बेटी की शिक्षा का उदाहरण: पाठ में लेखिका की बहन का उदाहरण है जो बाढ़ के दौरान भी स्कूल जाने के लिए निकल पड़ी — यह शिक्षा के प्रति उस परिवार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो लेखिका की माँ ने बच्चों में डाली।
5. माँ की प्रेरणा को आगे बढ़ाना: लेखिका की माँ ने सभी बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। लेखिका ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।
निष्कर्ष: लेखिका का मानना था कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकता है।
7पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है?Show solution
उत्तर:
पाठ के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि निम्नलिखित गुणों वाले इंसानों को जीवन में अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है:
1. स्वाभिमानी व्यक्तित्व: जो लोग बिना किसी के दबाव में आए अपने सिद्धांतों पर चलते हैं, उन्हें समाज श्रद्धा से देखता है। लेखिका की माँ इसका उदाहरण हैं।
2. निःस्वार्थ सेवा भाव: जो लोग दूसरों की भलाई के लिए काम करते हैं, बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के, वे श्रद्धेय बनते हैं।
3. साहस और दृढ़ता: जो लोग कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोते और साहस से आगे बढ़ते हैं, उन्हें श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है।
4. सहजता और स्नेह: जो लोग बिना दिखावे के सबसे प्रेम और आत्मीयता से मिलते हैं, वे सबके दिलों में जगह बना लेते हैं।
5. प्रगतिशील सोच: जो लोग रूढ़िवादी परंपराओं से ऊपर उठकर समाज के हित में सोचते हैं, उन्हें श्रद्धा से देखा जाता है — जैसे परदादी ने लड़की के जन्म की मन्नत माँगकर समाज को एक नई सोच दी।
6. आत्मनिर्भरता: जो लोग अपने बल पर जीते हैं और दूसरों पर बोझ नहीं बनते, वे समाज में सम्मान पाते हैं।
निष्कर्ष: पाठ की सभी महिलाएँ — परदादी, नानी, माँ और लेखिका की बहन — इन्हीं गुणों के कारण श्रद्धेय हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि श्रद्धा पद या धन से नहीं, बल्कि चरित्र और आचरण से अर्जित होती है।
8'सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है'—इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।Show solution
प्रसंग: लेखिका की बहन बाढ़ के दिनों में, जब पूरा शहर सुनसान था और जगह-जगह पानी भरा हुआ था, अकेले ही स्कूल की ओर चल पड़ी। स्कूल बंद मिला तो वापस आ गई। जब माँ ने पूछा तो उसने बड़े सहज भाव से कहा — 'स्कूल बंद था तो मैं वापस आ गई, इसमें आपका कहना कहाँ से आ गया?'
लेखिका की बहन के व्यक्तित्व के बारे में विचार:
1. साहसी एवं निडर: बाढ़ के भयावह माहौल में अकेले निकल पड़ना उनके असाधारण साहस को दर्शाता है।
2. स्वतंत्र विचारों वाली: उन्होंने किसी की अनुमति की प्रतीक्षा नहीं की — यह उनकी स्वतंत्र सोच का प्रमाण है।
3. लक्ष्य के प्रति समर्पित: स्कूल जाना उनके लिए इतना स्वाभाविक था कि बाढ़ भी उन्हें रोक नहीं सकी।
4. सहज एवं निश्छल: माँ के प्रश्न पर उनका उत्तर बिल्कुल सहज था — न कोई घबराहट, न कोई सफाई।
लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में विचार:
1. संवेदनशील एवं विचारशील: लेखिका अपनी बहन के इस कार्य में रोमांच और अकेलेपन का आनंद देखती हैं — यह उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
2. स्वतंत्रता की प्रशंसक: लेखिका अकेलेपन को नकारात्मक नहीं, बल्कि एक विशेष अनुभव मानती हैं।
3. प्रेरणा ग्रहण करने वाली: वे अपने परिवार की महिलाओं से प्रेरणा लेती हैं और उनके साहस को सराहती हैं।
निष्कर्ष: 'अकेलेपन का मज़ा' वास्तव में आत्मनिर्भरता, साहस और स्वतंत्र सोच का प्रतीक है। लेखिका और उनकी बहन दोनों ही इन गुणों से संपन्न हैं — यही उनके परिवार की विरासत है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।
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