स्मृति
Meghalaya Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for स्मृति — Meghalaya Board Class 9 Hindi.
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Get startedबोध-प्रश्न — पाठ: स्मृति (संचयन, कक्षा 9)
1भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?Show solution
उत्तर: भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में यह डर था कि उसकी जेब में रखी माँ की दो चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गई थीं। यदि वह चिट्ठियाँ लिए बिना घर लौटा तो भाई को पता चल जाएगा कि उसने लापरवाही की है। इसके साथ ही उसे यह भी भय था कि भाई उसे डाँटेंगे और माँ को दुःख होगा। इसीलिए वह चिट्ठियाँ निकाले बिना घर नहीं जाना चाहता था।
2मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?Show solution
उत्तर: मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली उस कुएँ में ढेला इसलिए फेंकती थी क्योंकि कुएँ में एक साँप रहता था। ढेला फेंकने पर साँप फुसकारता था और बच्चों को उसकी फुसकार सुनने में बड़ा मज़ा आता था। यह उनकी एक बाल-सुलभ शरारत और रोमांच का साधन था। साँप की फुसकार सुनकर वे रोमांचित हो जाते थे।
3'साँप ने फुसकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं'—यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?Show solution
उत्तर: यह कथन लेखक की उस समय की अत्यंत घबराई हुई, भयभीत और विचलित मनोदशा को स्पष्ट करता है। जब चिट्ठियाँ कुएँ में गिरीं तो लेखक इतना अधिक भयभीत और चिंतित हो गया कि उसे आसपास की किसी भी बात का होश नहीं रहा। उसका पूरा ध्यान चिट्ठियों पर केंद्रित हो गया था। इस मनोदशा में उसे यह भी याद नहीं रहा कि साँप ने फुसकार मारी या नहीं। यह कथन उसकी तीव्र मानसिक व्याकुलता और बेचैनी का परिचायक है।
4किन कारणों से लेखक ने चिड़ियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया?Show solution
उत्तर: लेखक ने चिड़ियों को कुएँ से निकालने का निर्णय निम्नलिखित कारणों से लिया:
1. चिट्ठियों की सुरक्षा: कुएँ में उतरते समय लेखक ने देखा कि दो चिड़ियाँ भी कुएँ में फँसी हुई थीं। चिट्ठियाँ तो उसे निकालनी ही थीं।
2. दया और करुणा: निर्दोष चिड़ियों को साँप के साथ कुएँ में छोड़ देना उसके मन को स्वीकार नहीं था। उनके प्रति दया का भाव जागा।
3. साहसी स्वभाव: लेखक स्वभाव से साहसी और निडर था, इसलिए उसने जोखिम उठाकर भी चिड़ियों को बचाने का निर्णय लिया।
4. उत्तरदायित्व की भावना: चिड़ियाँ उसी के कारण कुएँ में फँसी थीं (ढेला फेंकने की आदत के कारण), अतः उन्हें बचाना उसका नैतिक दायित्व था।
5साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाईं?Show solution
उत्तर: साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने निम्नलिखित युक्तियाँ अपनाईं:
1. डंडे का उपयोग: लेखक ने अपने डंडे से साँप को बार-बार छेड़ा और उसका ध्यान एक दिशा में लगाए रखा ताकि वह दूसरी दिशा में काम कर सके।
2. साँप को व्यस्त रखना: जब साँप एक ओर फन उठाता, लेखक दूसरी ओर से चिट्ठियाँ उठाने का प्रयास करता। इस प्रकार वह साँप को लगातार व्यस्त रखता रहा।
3. धैर्य और सतर्कता: लेखक ने धैर्य के साथ साँप की हर हरकत पर नज़र रखी और उचित अवसर देखकर ही आगे बढ़ा।
4. डंडे से चिड़ियों को हाँकना: चिड़ियों को साँप से दूर रखने और उन्हें ऊपर भेजने के लिए भी डंडे का उपयोग किया।
इस प्रकार लेखक ने अपनी बुद्धिमानी और साहस से साँप का ध्यान बँटाकर अपना काम पूरा किया।
6कुएँ में उतरकर चिड़ियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
जब लेखक की चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गईं तो उसने साहस करके कुएँ में उतरने का निर्णय लिया। उसने अपने धोती की रस्सी बनाई और कुएँ की जगत से बाँधकर धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा।
कुएँ में उतरते ही उसने देखा कि साँप फन फैलाए बैठा है और दो चिड़ियाँ भी वहाँ फँसी हुई हैं। साँप को देखकर उसका कलेजा धक से रह गया, परंतु उसने हिम्मत नहीं हारी। उसके एक हाथ में डंडा था।
लेखक ने डंडे से साँप का ध्यान बँटाना शुरू किया। जब साँप डंडे की ओर फन उठाता, लेखक दूसरी ओर से चिट्ठियाँ उठाने की कोशिश करता। इस क्रम में कई बार साँप ने फन उठाया और लेखक का दिल दहल गया। अंततः उसने चिट्ठियाँ उठा लीं और उन्हें अपनी टोपी में रख लिया।
इसके बाद उसने चिड़ियों को भी डंडे की सहायता से साँप से दूर किया और उन्हें ऊपर की ओर हाँका। चिड़ियाँ उड़कर कुएँ से बाहर निकल गईं। तत्पश्चात लेखक भी सावधानी से ऊपर चढ़ आया। यह पूरा प्रसंग अत्यंत रोमांचक और साहस से भरा हुआ था।
7इस पाठ को पढ़ने के बाद किन-किन बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है?Show solution
1. कुएँ में ढेला फेंकना: मक्खनपुर जाते समय बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला फेंकती थी ताकि उसमें रहने वाला साँप फुसकारे और वे रोमांच का अनुभव करें।
2. साँप को छेड़ना: बच्चे जानते थे कि कुएँ में साँप है, फिर भी वे उसे जानबूझकर छेड़ते थे — यह उनकी निडरता और शरारत का प्रमाण है।
3. बिना सोचे-समझे काम करना: लेखक ने बिना सोचे जेब में हाथ डाला और चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गईं — यह बच्चों की लापरवाही और बेध्यानी की शरारत है।
4. साहसिक कार्य करना: साँप वाले कुएँ में उतरना — यह भी एक प्रकार का बाल-सुलभ दुस्साहस है जो बच्चे बिना परिणाम सोचे कर बैठते हैं।
इन शरारतों से स्पष्ट होता है कि बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु, निडर और रोमांच-प्रिय होते हैं।
8'मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं'—का आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि मनुष्य जो योजना बनाता है या जो अनुमान लगाता है, वह हमेशा सही नहीं होता। परिस्थितियाँ कभी-कभी इतनी बदल जाती हैं कि सारी योजनाएँ धरी की धरी रह जाती हैं।
पाठ के संदर्भ में — लेखक ने सोचा था कि वह कुएँ में उतरेगा, चटपट चिट्ठियाँ उठाएगा और ऊपर आ जाएगा। परंतु जब वह कुएँ में उतरा तो साँप ने उसकी सारी योजना उलट दी। साँप के कारण चिट्ठियाँ उठाना इतना कठिन हो गया जितना उसने कभी सोचा भी नहीं था।
व्यापक अर्थ में यह पंक्ति यह संदेश देती है कि मनुष्य को अपनी योजनाओं पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि ईश्वर की इच्छा और परिस्थितियाँ कभी भी बदल सकती हैं।
9'फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है'—पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
आशय: इस पंक्ति का आशय यह है कि मनुष्य केवल अपना प्रयास कर सकता है, परंतु उस प्रयास का परिणाम (फल) किसी दूसरी शक्ति — अर्थात् ईश्वर या प्रकृति — पर निर्भर करता है। यह भावना गीता के 'कर्म करो, फल की चिंता मत करो' के सिद्धांत से मेल खाती है।
पाठ के संदर्भ में — लेखक ने कुएँ में उतरकर चिट्ठियाँ निकालने का पूरा प्रयास किया। उसने साहस दिखाया, बुद्धि लगाई, डंडे से साँप का ध्यान बँटाया। परंतु यह उसके वश में नहीं था कि साँप उसे डसे या न डसे। उसका जीवित बाहर निकलना किसी दैवीय शक्ति की कृपा पर निर्भर था। इस प्रकार यह पंक्ति मनुष्य की सीमाओं और ईश्वरीय शक्ति की महत्ता को रेखांकित करती है।
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