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Chapter 11 of 30
NCERT Solutions

तुम कब जाओगे, अतिथि

Meghalaya Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for तुम कब जाओगे, अतिथि — Meghalaya Board Class 9 Hindi.

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26 Questions Solved · 5 Sections

मौखिक प्रश्न

1अतिथि कितने दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है?Show solution
उत्तर: अतिथि लेखक के घर पर चार दिनों से रह रहा है। पाठ में उल्लेख है कि कल जो किरण आएगी वह 'पाँचवें सूर्य की परिचित किरण' होगी, अर्थात् अतिथि के आगमन के बाद चार दिन बीत चुके हैं।
2कैलेंडर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही हैं?Show solution
उत्तर: कैलेंडर की तारीखें पंछी की तरह फड़फड़ा रही हैं — अर्थात् एक के बाद एक दिन बीतते जा रहे हैं, परंतु अतिथि जाने का नाम नहीं ले रहा। समय तेज़ी से गुज़र रहा है और लेखक की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
3पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?Show solution
उत्तर: पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत बड़े उत्साह और आत्मीयता से किया। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट थी, घर में चहल-पहल हो गई और उन्होंने अतिथि के लिए विशेष भोजन-व्यवस्था की। आरंभ में सत्कार की ऊष्मा भरपूर थी।
4दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई?Show solution
उत्तर: दोपहर के भोजन को 'लंच' की गरिमा प्रदान की गई। अर्थात् साधारण दोपहर के खाने को विशेष और औपचारिक रूप देकर अतिथि के सम्मान में परोसा गया।
5तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?Show solution
उत्तर: तीसरे दिन सुबह अतिथि ने कहा कि उसके कपड़े मैले हो गए हैं, उन्हें लॉण्ड्री पर दे देते हैं — जल्दी धुल जाएँगे। इससे स्पष्ट हो गया कि वह और अधिक दिन रुकने का इरादा रखता है।
6सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?Show solution
उत्तर: सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर लेखक और उसकी पत्नी के व्यवहार में शीतलता आ गई। मुस्कुराहट लुप्त हो गई, बातचीत के विषय चुक गए, भावनाएँ गालियों का स्वरूप ग्रहण करने लगीं और घर का वातावरण तनावपूर्ण हो गया।

लिखित — (क) 25-30 शब्दों में उत्तर

1लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?Show solution
उत्तर: लेखक अतिथि को सम्मानपूर्ण और हार्दिक विदाई देना चाहता था। वह चाहता था कि अतिथि स्वयं घर लौटने का निर्णय ले, ताकि दोनों के बीच का संबंध मधुर बना रहे और उसे 'गेट आउट' जैसे कठोर शब्द न कहने पड़ें। वह अतिथि के देवत्व को सुरक्षित रखना चाहता था।
2(क)'अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया' — इस कथन की व्याख्या कीजिए।Show solution
व्याख्या: जब अतिथि के आने की सूचना मिली, तो लेखक ने मन ही मन सोचा कि मेहमान के स्वागत-सत्कार में काफी खर्च होगा। 'बटुए का काँपना' एक व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति है जिसका अर्थ है — लेखक को आर्थिक चिंता सताने लगी। वह जानता था कि अतिथि के आने से घर का बजट प्रभावित होगा।
2(ख)'अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है' — इस कथन की व्याख्या कीजिए।Show solution
व्याख्या: यह कथन 'अतिथि देवो भव' की परंपरागत मान्यता पर व्यंग्य है। लेखक कहना चाहता है कि जो अतिथि बिना बुलाए आए, लंबे समय तक टिका रहे और मेज़बान की परेशानी की परवाह न करे — वह देवता नहीं, बल्कि राक्षस की श्रेणी में आता है। अत्यधिक रुकने वाला अतिथि कष्टदायक हो जाता है।
2(ग)'लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें' — इस कथन की व्याख्या कीजिए।Show solution
व्याख्या: 'होम स्वीट होम' की उक्ति इसलिए प्रचलित हुई ताकि लोग अपने घर को ही सर्वश्रेष्ठ मानें और दूसरों के घर में लंबे समय तक डेरा न जमाएँ। लेखक व्यंग्य करता है कि यदि सभी लोग दूसरों के घर की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने दौड़ें, तो सामाजिक व्यवस्था बिगड़ जाएगी।
2(घ)'मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी' — इस कथन की व्याख्या कीजिए।Show solution
व्याख्या: लेखक कह रहा है कि पाँचवें दिन की सुबह उसकी सहनशक्ति की सीमा होगी। यदि उस दिन भी अतिथि नहीं गया, तो लेखक अपना धैर्य खो देगा और उसे कठोर शब्द कहने पर विवश होना पड़ेगा। यह कथन लेखक की बढ़ती हुई बेचैनी और थकान को व्यक्त करता है।
2(ङ)'एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते' — इस कथन की व्याख्या कीजिए।Show solution
व्याख्या: लेखक व्यंग्यपूर्वक कहता है कि अतिथि को देवता माना जाता है और वह स्वयं एक साधारण मनुष्य है। देवता केवल दर्शन देकर लौट जाते हैं, वे लंबे समय तक नहीं रुकते। इसलिए अतिथि को भी देवता की भाँति शीघ्र लौट जाना चाहिए, अन्यथा उसका देवत्व नष्ट हो जाएगा।

लिखित — (ख) 50-60 शब्दों में उत्तर

1कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?Show solution
उत्तर: तीसरे दिन सुबह अतिथि का यह कहना कि उसके कपड़े लॉण्ड्री पर दे दिए जाएँ — यह लेखक के लिए अप्रत्याशित आघात था। इससे स्पष्ट हो गया कि अतिथि और अधिक दिन रुकने का इरादा रखता है। इस आघात का लेखक पर गहरा प्रभाव पड़ा — उसकी सहनशीलता टूटने लगी, मन में क्षोभ उत्पन्न हुआ और वह अतिथि को विदा करने के उपाय सोचने लगा। उसकी आत्मीयता धीरे-धीरे समाप्त होने लगी और संबंधों में तनाव आ गया।
2'संबंधों का संक्रमण के दौर से गुजरना' — इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।Show solution
उत्तर: 'संक्रमण का दौर' का अर्थ है — परिवर्तन या बदलाव की अवस्था। लेखक कहना चाहता है कि अतिथि के अत्यधिक रुकने के कारण उनके आपसी संबंध अब उस नाज़ुक मोड़ पर आ गए हैं जहाँ मधुरता समाप्त होकर कटुता आने वाली है। आरंभ में जो प्रेम, आदर और उत्साह था, वह अब धीरे-धीरे खीझ, उदासीनता और तनाव में बदल रहा है। यदि अतिथि अभी भी नहीं गया, तो संबंध पूरी तरह बिगड़ जाएँगे। इसलिए यही उचित समय है कि अतिथि विदा हो जाए और संबंधों की मधुरता बनी रहे।
3जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन आए?Show solution
उत्तर: जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया, तो लेखक के व्यवहार में निम्नलिखित परिवर्तन आए —

1. मुस्कुराहट का लुप्त होना — आरंभ की खुशी और मुस्कुराहट धीरे-धीरे फीकी पड़कर समाप्त हो गई।
2. बातचीत का बंद होना — शब्दों का लेन-देन मिट गया, चर्चा के विषय चुक गए।
3. उदासीनता — लेखक उपन्यास पढ़ने लगा और अतिथि की ओर ध्यान देना बंद कर दिया।
4. आर्थिक चिंता — घर का बजट बिगड़ने की चिंता सताने लगी।
5. मन में क्रोध — भावनाएँ गालियों का स्वरूप ग्रहण करने लगीं।
6. सत्कार में कमी — विशेष भोजन और आवभगत बंद हो गई।

भाषा-अध्ययन

1निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्याय लिखिए — चाँद, जिक्र, आघात, ऊष्मा, अंतरंगShow solution
उत्तर:

| शब्द | पर्याय |
|------|--------|
| चाँद | चंद्रमा, शशि |
| जिक्र | उल्लेख, चर्चा |
| आघात | चोट, प्रहार |
| ऊष्मा | गर्मी, ताप |
| अंतरंग | घनिष्ठ, आत्मीय |
2(क)हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाएँगे। (नकारात्मक वाक्य)Show solution
उत्तर: हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने नहीं जाएँगे।
2(ख)किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे। (प्रश्नवाचक वाक्य)Show solution
उत्तर: क्या किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे?
2(ग)सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो रही थी। (भविष्यत् काल)Show solution
उत्तर: सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो जाएगी।
2(घ)इनके कपड़े देने हैं। (स्थानसूचक प्रश्नवाची)Show solution
उत्तर: इनके कपड़े कहाँ देने हैं?
2(ङ)कब तक टिकेंगे ये? (नकारात्मक)Show solution
उत्तर: ये अधिक देर तक नहीं टिकेंगे।
3पाठ में आए 'चुकना' क्रिया के विभिन्न प्रयोगों को ध्यान से देखिए और वाक्य संरचना को समझिए।Show solution
उत्तर: 'चुकना' क्रिया का प्रयोग 'किसी कार्य का पूर्ण हो जाना' अथवा 'समाप्त हो जाना' के अर्थ में हुआ है। इसके विभिन्न प्रयोग इस प्रकार हैं —

(क) 'कर चुके' — पूर्ण क्रिया (Past Perfect): तुम अपने भारी चरण-कमलों की छाप मेरी जमीन पर अंकित कर चुके। (कार्य पूरी तरह संपन्न हो गया।)

(ख) 'खोद चुके' — पूर्ण क्रिया: तुम मेरी काफ़ी मिट्टी खोद चुके। (कार्य समाप्त हो चुका है।)

(ग) 'ले जा चुके थे' — पूर्णकालिक भूतकाल: जिस उच्च बिंदु पर हम तुम्हें ले जा चुके थे। (भूतकाल में पूर्ण हुई क्रिया।)

(घ) 'चुक गए' — स्वतः समाप्त होना: चर्चा के विषय चुक गए। (विषय समाप्त हो गए।)

(ङ) 'बदली जा चुकी' — कर्मवाच्य पूर्ण क्रिया: चादर बदली जा चुकी। (कार्य किसी के द्वारा पूर्ण कर दिया गया।)

निष्कर्ष: 'चुकना' क्रिया मुख्य क्रिया के साथ जुड़कर कार्य की पूर्णता या समाप्ति का बोध कराती है।
4निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं में 'तुम' के प्रयोग पर ध्यान दीजिए।Show solution
उत्तर: इन वाक्यों में 'तुम' का प्रयोग अतिथि को संबोधित करने के लिए हुआ है। इसके विभिन्न रूप इस प्रकार हैं —

(क) 'तुम यहीं हो' — कर्ता के रूप में: अतिथि की उपस्थिति पर व्यंग्य। लॉण्ड्री के कपड़े आ गए, फिर भी तुम यहीं हो।

(ख) 'तुम्हें देखकर' — कर्म के रूप में (तुम्हें): अतिथि को देखकर जो प्रसन्नता होती थी, वह अब समाप्त हो गई।

(ग) 'तुम्हारे भरकम शरीर से' — संबंध कारक (तुम्हारे): अतिथि के शरीर के कारण चादर पर सलवटें पड़ गईं।

(घ) 'तुम फिल्मी पत्रिका के पन्ने पलट रहे हो' — कर्ता के रूप में: अतिथि की निष्क्रियता और बेपरवाही पर व्यंग्य।

(ङ) 'तुम जा नहीं रहे' — कर्ता के रूप में: अतिथि के न जाने पर लेखक की खीझ और निराशा व्यक्त होती है।

निष्कर्ष: 'तुम' और उसके रूप (तुम्हें, तुम्हारे, तुम्हारा) पूरे पाठ में अतिथि को सीधे संबोधित करने के लिए प्रयुक्त हुए हैं, जिससे पाठ में एक व्यक्तिगत और व्यंग्यात्मक स्वर उत्पन्न होता है।

योग्यता-विस्तार

1'अतिथि देवो भव' उक्ति की व्याख्या करें तथा आधुनिक युग के संदर्भ में इसका आकलन करें।Show solution
उत्तर:

'अतिथि देवो भव' की व्याख्या:

'अतिथि देवो भव' एक प्राचीन भारतीय संस्कृत उक्ति है जिसका अर्थ है — 'अतिथि देवता के समान होता है।' भारतीय संस्कृति में अतिथि-सत्कार को सर्वोच्च धर्म माना गया है। बिना बुलाए आए मेहमान का भी आदर-सत्कार करना गृहस्थ का कर्तव्य समझा जाता था।

आधुनिक युग के संदर्भ में आकलन:

आधुनिक युग में जीवन की परिस्थितियाँ बदल गई हैं। आज के व्यस्त और महँगे जीवन में लंबे समय तक अतिथि का सत्कार करना कठिन हो गया है। इस पाठ में लेखक ने व्यंग्यात्मक ढंग से यह दर्शाया है कि यदि अतिथि स्वयं शिष्टाचार का पालन न करे और अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रुका रहे, तो 'अतिथि देवो भव' की भावना कमज़ोर पड़ जाती है। आज इस उक्ति का पालन तभी संभव है जब अतिथि और मेज़बान — दोनों अपनी-अपनी सीमाओं का ध्यान रखें।
2विद्यार्थी अपने घर आए अतिथियों के सत्कार का अनुभव कक्षा में सुनाएँ।Show solution
उत्तर (संकेत): यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करें। उदाहरण के लिए —

एक बार हमारे घर हमारे चाचाजी परिवार सहित आए। पहले दो दिन बहुत अच्छे बीते — माँ ने विशेष पकवान बनाए, हम सब साथ घूमने गए। परंतु जब वे एक सप्ताह से अधिक रुक गए, तो घर का बजट और दिनचर्या प्रभावित होने लगी। इस अनुभव से मुझे इस पाठ की भावना भली-भाँति समझ में आई।
3अतिथि के अपेक्षा से अधिक रुक जाने पर लेखक की क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ हुईं, उन्हें क्रम से छाँटकर लिखिए।Show solution
उत्तर: अतिथि के अपेक्षा से अधिक रुकने पर लेखक की प्रतिक्रियाएँ क्रमशः इस प्रकार रहीं —

1. पहला दिन: हार्दिक स्वागत, मुस्कुराहट, विशेष भोजन-व्यवस्था।
2. दूसरा दिन: सत्कार जारी, परंतु मन में हल्की बेचैनी।
3. तीसरा दिन: अतिथि द्वारा कपड़े लॉण्ड्री पर देने की बात सुनकर 'बटुए का काँपना' — आर्थिक चिंता और मानसिक आघात।
4. चौथा दिन: मुस्कुराहट का लुप्त होना, बातचीत बंद, उपन्यास पढ़ने में व्यस्त होना, उदासीनता।
5. आगे: भावनाओं का गालियों में बदलना, सहनशीलता की सीमा समाप्त होना।
6. अंत में: अतिथि से मन ही मन 'गेट आउट' कहने की इच्छा और उसे सम्मानपूर्वक विदा करने की प्रार्थना।

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