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Chapter 18 of 30
NCERT Solutions

मेरे बचपन के दिन

Meghalaya Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for मेरे बचपन के दिन — Meghalaya Board Class 9 Hindi.

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महादेवी वर्मा के जन्म, प्रमुख रचनाएँ (काव्य-संग्रह, निबंध-संग्रह, संस्मरण/रेखाचित्र), प्रमुख पुरस्कार (ज्ञानपीठ, भारत भारती, पद्मभूषण), और निधन को दर्शाने वाला एक सूचनात्मक ग्राफिक।
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13 Questions Solved · 3 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1'मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।' इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि—
(क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी?
(ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं?
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(क) उस समय लड़कियों की दशा:

महादेवी वर्मा के समय (उन्नीसवीं-बीसवीं सदी के आरंभ में) लड़कियों की दशा अत्यंत दयनीय थी। उस काल में लड़की के जन्म को अशुभ माना जाता था। लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था। बाल-विवाह का प्रचलन था। घर की चारदीवारी में बंद रहना उनकी नियति थी। उन्हें पर्दे में रहना पड़ता था और समाज में उनका स्थान पुरुषों से बहुत नीचा था। लड़की के जन्म पर परिवार में शोक का वातावरण होता था। उन्हें बोझ समझा जाता था।

(ख) आज की परिस्थितियाँ:

आज की परिस्थितियाँ पहले से बेहतर हुई हैं, किंतु पूरी तरह सुधरी नहीं हैं। एक ओर लड़कियाँ शिक्षा, खेल, विज्ञान, राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं; वहीं दूसरी ओर कन्या-भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा अभी भी समाज में विद्यमान है। कुछ क्षेत्रों में लड़कियों के जन्म पर अभी भी दुख मनाया जाता है। सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाएँ चलाई हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि समस्या अभी भी बनी हुई है। समाज में जागरूकता बढ़ी है, परंतु मानसिकता में पूर्ण परिवर्तन अभी शेष है।
2लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाई?Show solution
दिया गया: महादेवी वर्मा के पिता उर्दू-फ़ारसी जानते थे और वे चाहते थे कि लेखिका भी इन भाषाओं को सीखे।

कारण:

लेखिका के पिता उर्दू-फ़ारसी के जानकार थे और उन्होंने लेखिका को उर्दू-फ़ारसी सिखाने का प्रयास किया। इसके लिए एक मौलवी साहब को नियुक्त भी किया गया। परंतु लेखिका की माँ संस्कृत की विदुषी थीं और वे हिंदी की उपासक थीं। माँ के प्रभाव में आकर लेखिका की रुचि हिंदी और संस्कृत की ओर हो गई। माँ ने उन्हें रामायण, महाभारत आदि हिंदी-संस्कृत ग्रंथों से परिचित कराया। इस प्रकार माँ के व्यक्तित्व और हिंदी-संस्कृत के प्रति उनके अनुराग का गहरा प्रभाव लेखिका पर पड़ा और वे उर्दू-फ़ारसी नहीं सीख पाईं।

निष्कर्ष: माँ के संस्कृत-हिंदी प्रेम और उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण लेखिका उर्दू-फ़ारसी नहीं सीख पाईं।
3लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?Show solution
लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:

1. विदुषी एवं शिक्षित: लेखिका की माँ संस्कृत की अच्छी जानकार थीं। वे हिंदी भी अच्छी तरह जानती थीं।

2. धार्मिक प्रवृत्ति: माँ धार्मिक स्वभाव की थीं। वे प्रतिदिन पूजा-पाठ करती थीं और गीता के श्लोक लिखती थीं।

3. संगीत-प्रेमी: माँ को मीरा के पद गाने का शौक था। वे सुरीली आवाज़ में भजन गाती थीं।

4. सुसंस्कृत एवं सुशील: माँ का व्यक्तित्व सुसंस्कृत था। वे परिवार को सुचारु रूप से चलाती थीं।

5. हिंदी-प्रेमी: माँ हिंदी भाषा की उपासक थीं। उन्होंने लेखिका में हिंदी के प्रति प्रेम जगाया।

6. प्रेरणास्रोत: माँ ने लेखिका को रामायण, महाभारत जैसे ग्रंथों से परिचित कराया और उनके साहित्यिक व्यक्तित्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निष्कर्ष: माँ का व्यक्तित्व बहुआयामी था — वे विदुषी, धार्मिक, संगीत-प्रेमी और हिंदी की उपासक थीं।
4जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा क्यों कहा है?Show solution
कारण:

लेखिका के परिवार और जवारा के नवाब के परिवार के बीच बहुत घनिष्ठ और आत्मीय संबंध थे। नवाब के परिवार की लड़कियाँ लेखिका के घर आती थीं और लेखिका उनके घर जाती थीं। दोनों परिवारों में हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं था। त्योहारों पर आपस में उपहार और मिठाइयाँ भेजी जाती थीं। नवाब के घर की बेगमें लेखिका की माँ को राखी बाँधती थीं।

आज के संदर्भ में यह सब स्वप्न जैसा इसलिए लगता है क्योंकि आज हिंदू-मुस्लिम संबंधों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। आज दोनों समुदायों के बीच इस प्रकार की आत्मीयता, सौहार्द और भाईचारा दुर्लभ हो गया है। धर्म के नाम पर समाज में विभाजन और वैमनस्य बढ़ा है। इसीलिए लेखिका को वे संबंध आज के परिप्रेक्ष्य में किसी स्वप्न की तरह अविश्वसनीय और असंभव-से लगते हैं।

निष्कर्ष: सांप्रदायिक सद्भाव और हिंदू-मुस्लिम एकता के वे दिन आज की परिस्थितियों में स्वप्न जैसे प्रतीत होते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

5जेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। जेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं/होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती?Show solution
यदि मैं जेबुन्निसा के स्थान पर होती/होता तो महादेवी जी से निम्नलिखित अपेक्षाएँ रखती/रखता:

1. मित्रता और सम्मान: मैं चाहती/चाहता कि महादेवी जी मुझे केवल सेवक नहीं, बल्कि एक सच्ची मित्र के रूप में स्वीकार करें।

2. शिक्षा में सहयोग: चूँकि महादेवी जी विदुषी थीं, मैं उनसे अपेक्षा करती/करता कि वे मुझे भी पढ़ने-लिखने में सहायता करें और ज्ञान प्रदान करें।

3. भावनात्मक समझ: मैं चाहती/चाहता कि महादेवी जी मेरी भावनाओं को समझें और मेरे साथ संवेदनशीलता से पेश आएँ।

4. पारस्परिक सहयोग: मैं अपेक्षा करती/करता कि हमारे बीच का संबंध एकतरफा न होकर पारस्परिक हो — जैसे मैं उनके लिए काम करती/करता, वैसे ही वे भी मेरी ज़रूरत के समय सहायता करें।

5. सांप्रदायिक सद्भाव: मैं चाहती/चाहता कि हमारे बीच हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद न हो और हम सच्ची सहेलियाँ/मित्र बनें।
6महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे/करेंगी?Show solution
यदि मुझे किसी प्रतियोगिता में इस प्रकार का कोई पुरस्कार मिला हो और उसे देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े, तो मेरे मन में मिश्रित भावनाएँ उत्पन्न होंगी:

एक ओर: पुरस्कार मिलने की खुशी होगी। वह पुरस्कार मेरी मेहनत और प्रतिभा का प्रमाण होगा, इसलिए उसे देने में थोड़ा संकोच भी होगा।

दूसरी ओर: जब मैं सोचूँगी/सोचूँगा कि यह पुरस्कार किसी बाढ़-पीड़ित, भूकंप-पीड़ित या किसी ज़रूरतमंद के काम आएगा, तो मन में एक अद्भुत संतोष और गर्व का अनुभव होगा। यह अनुभव पुरस्कार पाने की खुशी से कहीं अधिक बड़ा होगा।

महादेवी जी ने भी अपना चाँदी का कटोरा गांधी जी को दे दिया था। उनके उस त्याग से प्रेरणा लेकर मैं भी गर्व के साथ अपना पुरस्कार देशहित में समर्पित करूँगी/करूँगा। यह अनुभव आत्मिक संतुष्टि देने वाला होगा क्योंकि व्यक्तिगत संपत्ति से बड़ा राष्ट्र और समाज होता है।
7लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।Show solution
लेखिका महादेवी वर्मा ने अपने छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का बड़ा रोचक वर्णन किया है। उनके छात्रावास में विभिन्न प्रांतों और भाषाओं की लड़कियाँ रहती थीं। कोई मराठी बोलती थी, कोई बांग्ला, कोई उर्दू तो कोई हिंदी। इस विविधता के बावजूद सभी में आपसी प्रेम और सौहार्द था।

हिंदी में वर्णन:

महादेवी जी के छात्रावास में अनेक भाषाओं की छात्राएँ रहती थीं। उनमें से एक सुभद्राकुमारी चौहान थीं जो मराठी पृष्ठभूमि की थीं। जेबुन्निसा उर्दू जानती थी। इस प्रकार छात्रावास एक लघु भारत जैसा था जहाँ विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ और धर्मों की लड़कियाँ मिल-जुलकर रहती थीं। भाषाई भिन्नता के बावजूद उनमें एकता और मित्रता थी। यह बहुभाषी परिवेश भारत की 'अनेकता में एकता' की भावना का जीवंत उदाहरण था।
8महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।Show solution
बचपन की एक मधुर स्मृति

आज जब महादेवी जी का संस्मरण पढ़ा तो मन अनायास ही अपने बचपन की गलियों में भटकने लगा।

मुझे याद है, मैं तब शायद सात-आठ साल का/की था/थी। हमारे मोहल्ले में दीपावली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता था। हिंदू और मुस्लिम दोनों पड़ोसी मिलकर एक-दूसरे के घर मिठाइयाँ बाँटते थे। हमारे पड़ोस में रहमान चाचा का परिवार था। उनकी बेटी नाज़िया मेरी सबसे अच्छी सहेली थी। दीपावली पर वह मेरे साथ दीये जलाती थी और ईद पर मैं उनके घर सेवइयाँ खाने जाती/जाता था।

एक बार स्कूल में कविता-पाठ की प्रतियोगिता थी। मैंने बहुत मेहनत से एक कविता याद की थी। जब मेरा नाम पुकारा गया तो घबराहट के मारे मेरे पैर काँपने लगे। नाज़िया ने मेरा हाथ थामा और कहा — 'जा, तू ज़रूर जीतेगी/जीतेगा।' उसके उन शब्दों ने मुझे हिम्मत दी और मैंने आत्मविश्वास के साथ कविता सुनाई।

वे दिन सच में स्वर्णिम थे — निश्छल मित्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और बचपन की मासूमियत से भरे।
9महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।Show solution
दिनांक: __ / __ / ____

प्रिय डायरी,

आज विद्यालय में वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम था। मुझे हिंदी कविता-पाठ में भाग लेना था। सुबह से ही मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी। बार-बार कविता दोहराता/दोहराती रहा/रही, फिर भी लग रहा था कि सब भूल जाऊँगा/जाऊँगी।

जब मंच पर बैठे बच्चे एक-एक करके अपनी प्रस्तुति दे रहे थे, तो मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे थे। मन में विचार आया — 'क्या होगा अगर बीच में भूल गया/गई?' पेट में जैसे तितलियाँ उड़ रही थीं।

जब अध्यापिका ने मेरा नाम पुकारा तो एक पल के लिए लगा जैसे साँस रुक गई। मंच पर चढ़ते समय पैर लड़खड़ाए। माइक के सामने खड़े होकर जब सैकड़ों आँखें मुझे देखती दिखीं तो घबराहट चरम पर पहुँच गई।

पर जैसे ही पहली पंक्ति मुँह से निकली, धीरे-धीरे आत्मविश्वास लौटने लगा। कविता पूरी हुई और तालियाँ बजीं तो मन में जो खुशी हुई, वह अवर्णनीय थी।

आज समझ आया कि बेचैनी और घबराहट को जीतना ही असली जीत है।

तुम्हारा/तुम्हारी,
[नाम]

भाषा-अध्ययन

10पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए— विद्वान, अनंत, निरपराधी, दंड, शांति।Show solution
पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द:

| शब्द | विलोम शब्द |
|------|------------|
| विद्वान | मूर्ख |
| अनंत | सांत / सीमित |
| निरपराधी | अपराधी |
| दंड | पुरस्कार |
| शांति | अशांति |

नोट: ये विलोम शब्द पाठ के संदर्भ में खोजे गए हैं। पाठ में 'मूर्ख', 'अपराधी', 'पुरस्कार', 'अशांति' आदि शब्द प्रयुक्त हुए हैं।
11निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए—
निराहारी - निर् + आहार + ई
सांप्रदायिकता
अप्रसन्नता
अपनापन
किनारीदार
स्वतंत्रता
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शब्दों का उपसर्ग/प्रत्यय विश्लेषण:

1. निराहारी = निर् (उपसर्ग) + आहार (मूल शब्द) + ई (प्रत्यय)

2. सांप्रदायिकता = सम् (उपसर्ग) + प्रदाय (मूल शब्द) + इक + ता (प्रत्यय)
अथवा: सांप्रदायिक (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)

3. अप्रसन्नता = अ (उपसर्ग) + प्र (उपसर्ग) + सन्न (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
अथवा: अ (उपसर्ग) + प्रसन्न (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)

4. अपनापन = अपना (मूल शब्द) + पन (प्रत्यय)

5. किनारीदार = किनारी (मूल शब्द) + दार (प्रत्यय)

6. स्वतंत्रता = स्व (उपसर्ग) + तंत्र (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
अथवा: स्वतंत्र (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)
12निम्नलिखित उपसर्ग-प्रत्ययों की सहायता से दो-दो शब्द लिखिए—
उपसर्ग - अन्, अ, सत्, स्व, दुर्
प्रत्यय - दार, हार, वाला, अनीय
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उपसर्गों से बने शब्द:

| उपसर्ग | शब्द 1 | शब्द 2 |
|--------|--------|--------|
| अन् | अनजान | अनपढ़ |
| अ | अधर्म | अज्ञान |
| सत् | सत्कार | सत्कर्म |
| स्व | स्वदेश | स्वभाव |
| दुर् | दुर्गम | दुर्भाग्य |

प्रत्ययों से बने शब्द:

| प्रत्यय | शब्द 1 | शब्द 2 |
|---------|--------|--------|
| दार | ईमानदार | दुकानदार |
| हार | पालनहार | खेवनहार |
| वाला | दूधवाला | फलवाला |
| अनीय | पठनीय | दर्शनीय |
13पाठ में आए सामासिक पद छाँटकर विग्रह कीजिए—
पूजा-पाठ = पूजा और पाठ
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पाठ में आए सामासिक पद और उनका विग्रह:

| सामासिक पद | विग्रह | समास का नाम |
|------------|--------|-------------|
| पूजा-पाठ | पूजा और पाठ | द्वंद्व समास |
| माता-पिता | माता और पिता | द्वंद्व समास |
| दाल-रोटी | दाल और रोटी | द्वंद्व समास |
| हिंदू-मुस्लिम | हिंदू और मुस्लिम | द्वंद्व समास |
| पढ़ना-लिखना | पढ़ना और लिखना | द्वंद्व समास |
| देश-विदेश | देश और विदेश | द्वंद्व समास |

नोट: पाठ में मुख्यतः द्वंद्व समास के उदाहरण अधिक हैं। पाठ को पुनः पढ़कर अन्य सामासिक पद भी खोजे जा सकते हैं।

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Sources & Official References

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