कवित्त (घनानंद) — Flashcards
Nagaland Board · Class 12 · Hindi
20 flashcards for कवित्त (घनानंद) (Nagaland Board Class 12 Hindi) to test yourself on key terms and facts. Sample: "घनानंद का साहित्यिक परिचय क्या है?"
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घनानंद का साहित्यिक परिचय क्या है?
Answer
घनानंद सन् १६७३-१७६० के कवि थे। वे रीतिकाल के रीतिमुक्त या स्वच्छंद काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि थे। वे निंबार्क संप्रदाय के भक्त कवि थे और प्रेम की पीड़ा के कवि माने जाते हैं।…
घनानंद का दरबारी जीवन किससे जुड़ा था?
Answer
घनानंद दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के मीर मुंशी थे। बादशाह के दरबार में उनका पद महत्वपूर्ण था, लेकिन सुजान के प्रेम के कारण हुई बे-अदबी से उन्हें दरबार से निकाल दिया गया।…
सुजान घनानंद के काव्य में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Answer
सुजान घनानंद की प्रेमिका थीं, जिनसे उनका अटूट प्रेम था। बाद में उनकी बेवफ़ाई से कवि दुखी हुए। उनकी रचनाओं में ‘सुजान’ नाम प्रतीकात्मक रूप से बार-बार आता है और वही विरह-भाव का केंद्र बन जाता है।…
घनानंद को ‘साक्षात रसमूर्ति’ क्यों कहा गया है?
Answer
घनानंद की रचनाओं में प्रेम का अत्यंत गंभीर, निर्मल, आवेगमय और व्याकुल कर देने वाला रूप मिलता है। भाव की गहराई और काव्य-सौंदर्य के कारण उन्हें साक्षात रसमूर्ति कहा गया है।…
घनानंद की भाषा की मुख्य विशेषता क्या है?
Answer
घनानंद की भाषा परिष्कृत और साहित्यिक ब्रजभाषा है। उसमें कोमलता, मधुरता और व्यंजकता का चरम विकास मिलता है। वे ब्रजभाषा के प्रवीण ही नहीं, सर्जनात्मक काव्यभाषा के प्रणेता भी माने जाते हैं।…
घनानंद की काव्य-कला में कौन-सा विशेष मेल मिलता है?
Answer
उनकी काव्य-कला में सहजता और वचन-वक्रता का अद्भुत मेल मिलता है। साथ ही लाक्षणिकता, वक्रोक्ति, वाग्विदग्धता और अलंकारों का कुशल प्रयोग दिखाई देता है।…
प्रस्तुत दोनों कवित्तों का मुख्य विषय क्या है?
Answer
इन दोनों कवित्तों में कवि अपनी प्रेमिका सुजान के दर्शन की अभिलाषा प्रकट करता है। पहला कवित्त प्रतीक्षा और संदेश की भावना से जुड़ा है, जबकि दूसरा कवित्त टालमटोल और उदासीनता पर आधारित है।…
‘चाहत चलन ये सँदेसो ले सुजान को॥’ का भाव क्या है?
Answer
इस पंक्ति में कवि की प्रबल इच्छा है कि उसके प्राण सुजान के पास संदेश लेकर जाएँ। यहाँ प्रेम की तड़प, प्रतीक्षा और मिलन की उत्कंठा व्यक्त हुई है।…
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