भरत-राम का प्रेम / पद (तुलसीदास)
Nagaland Board · Class 12 · Hindi
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भरत के कथन 'हारेहुं खेल जितावहिं मोही' का क्या अर्थ है?
रामचरितमानस मुख्यतः किन छंदों में लिखा गया है?
'सिसुपन तें परिहरउं न संगू' का अर्थ क्या है?
'कबहुं न कीन्ह मोर मन भंगू' पंक्ति का भाव क्या है?
Sample Questions
तुलसीदास की कौन सी रचनाएं प्रामाणिक मानी जाती हैं? (एक से अधिक सही उत्तर)
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रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका
तुलसीदास की बारह कृतियां प्रामाणिक मानी जाती हैं, परंतु उनकी मुख्य ख्याति चार रचनाओं पर आधारित है। रामचरितमानस उनका सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है जो अवधी भाषा में लिखा गया। कवितावली कवित्त और सवैया छंद में रचित है। गीतावली पद शैली की रचना है। विनयपत्रिका में विनय और आत्म-निवेदन के पद हैं। ये चारों रचनाएं तुलसीदास की काव्य प्रतिभा का प्रमाण हैं।
माता कौशल्या के विरह की स्थिति में कौन से तत्व शामिल हैं? (एक से अधिक सही उत्तर)
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राम को जगाने की कोशिश करना, राम के जूते-चप्पल देखकर दुखी होना, चित्र की भांति स्थिर हो जाना
गीतावली के पहले पद में माता कौशल्या की विरह व्यथा का मार्मिक चित्रण है। वे राम के धनुष-बाण देखती हैं, उनके सुंदर जूते-चप्पल को बार-बार हृदय और आंखों से लगाती हैं। कभी वे राम को जगाने की कोशिश करती हैं मानो वे अभी भी वहां हों। राम के वनगमन को याद करके वे चित्र की भांति स्थिर हो जाती हैं। यह सब मातृ-प्रेम और विरह की गहरी पीड़ा को दर्शाता है।
तुलसीदास के काव्य की कौन सी विशेषताएं हैं? (एक से अधिक सही उत्तर)
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लोकमंगल की साधना, समन्वय की भावना, व्यापक जीवनानुभव, धार्मिक और सामाजिक दृष्टि
तुलसीदास को लोकमंगल और समन्वय का कवि कहा जाता है। उनका भावजगत धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत व्यापक है। उनके पास मानव-प्रकृति और जीवन-जगत संबंधी गहरी अंतर्दृष्टि थी। व्यापक जीवनानुभव के कारण ही वे लोकजीवन के विभिन्न पक्षों का उद्घाटन कर सके। उनके काव्य में विश्वबोध और आत्मबोध का अद्वितीय समन्वय हुआ है।
गीतावली के दूसरे पद में कौन से तत्व मिलते हैं? (एक से अधिक सही उत्तर)
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घोड़ों की दुखी दशा, भरत की देखभाल, माता का संदेश
गीतावली के दूसरे पद 'राघौ एक बार फिरि आवौ' में कौशल्या राम के प्रिय घोड़ों की दुखी दशा देखकर दुखी होती हैं। वे घोड़े जिन्हें राम अपने हाथों से प्यार करते और चुचुकारते थे, अब उदास हैं। भरत उनकी सौ गुना देखभाल करते हैं फिर भी वे दिन-दिन सूखते जाते हैं। माता पथिकों से राम को संदेश भेजने की बात करती हैं। यह सब विरह की गहरी पीड़ा को दर्शाता है।
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