गिल्लू
Tripura Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for गिल्लू — Tripura Board Class 9 Hindi.
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Explore the full setबोध-प्रश्न — गिल्लू (संचयन, कक्षा 9)
1सोनजुही में लगी पीली कली को देख लेखिका के मन में कौन से विचार उमड़ने लगे?Show solution
उत्तर: सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका के मन में गिल्लू की याद उमड़ आई। उन्हें लगा कि यह छोटी-सी पीली कली और कोई नहीं, बल्कि उनका प्रिय गिल्लू ही है जो इस लता में खिल उठा है। लेखिका को विश्वास था कि गिल्लू का वह लघु शरीर मिट्टी में मिलकर इसी सोनजुही की जड़ों में समा गया है और वसंत के आगमन पर वह पीताभ (पीले रंग के) छोटे-छोटे फूलों के रूप में खिल उठेगा। इस प्रकार लेखिका के मन में पुनर्जन्म और प्रकृति के साथ एकाकार हो जाने के भावपूर्ण विचार उमड़ने लगे।
2पाठ के आधार पर कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर:
समादरित (सम्मानित) होने का कारण: भारतीय संस्कृति और परंपरा में कौए को पितरों का प्रतीक माना जाता है। पितृपक्ष में कौए को भोजन कराना पुण्य का काम समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत पूर्वजों की आत्मा कौए के रूप में आकर भोजन ग्रहण करती है। इसी कारण कौआ समादरित (आदर पाने योग्य) है।
अनादरित (अनादर पाने योग्य) होने का कारण: पाठ में वर्णन है कि कौओं ने मिलकर गिल्लू पर आक्रमण किया और उसे घायल कर दिया। कौए का स्वभाव शोरगुल करने वाला, दूसरों को कष्ट देने वाला और अशुभ माना जाता है। इसी कारण वह अनादरित भी है।
निष्कर्ष: इस प्रकार कौआ एक ऐसा प्राणी है जो एक ओर धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टि से सम्मान पाता है और दूसरी ओर अपने स्वभाव एवं कार्यों के कारण अनादर का पात्र बनता है।
3गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया?Show solution
उत्तर: गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार निम्नलिखित प्रकार से किया गया:
1. उठाना: लेखिका ने उस मरणासन्न (मृत्यु के निकट) बच्चे को कौओं से बचाकर उठाया।
2. सफाई: रुई से उसके घावों को धीरे-धीरे साफ किया गया।
3. दवा लगाना: घावों पर पेनिसिलिन (antiseptic) दवा लगाई गई।
4. गर्माहट देना: उसे एक छोटी-सी डलिया में रुई बिछाकर उसमें रखा गया ताकि उसे गर्माहट मिले।
5. तरल आहार: उसे बचाने के लिए आँखों की ड्रॉपर से थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाया गया।
इस सावधानीपूर्ण उपचार और देखभाल के कारण गिल्लू धीरे-धीरे स्वस्थ हो गया।
4लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था?Show solution
उत्तर: लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू निम्नलिखित चेष्टाएँ करता था:
1. वह लेखिका के पैर तक आकर सर्र से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेज़ी से उतर आता।
2. यह क्रिया वह तब तक दोहराता रहता जब तक लेखिका उसकी ओर ध्यान न दे दें।
3. इस प्रकार अपनी चंचल और तीव्र गति से वह लेखिका को अपनी ओर देखने पर विवश कर देता था।
गिल्लू की यह चेष्टाएँ उसके लेखिका के प्रति गहरे लगाव और स्नेह को दर्शाती थीं।
5गिल्लू को मुक्त करने की आवश्यकता क्यों समझी गई और उसके लिए लेखिका ने क्या उपाय किया?Show solution
मुक्त करने की आवश्यकता:
जब बसंत का मौसम आया तो बाहर की गिलहरियाँ खिड़की की जाली के पास आकर चिक-चिक करने लगीं। गिल्लू भी उनकी ओर आकर्षित होने लगा। लेखिका को अनुभव हुआ कि गिल्लू अब बड़ा हो गया है और उसे भी अपने साथियों के साथ प्राकृतिक वातावरण में रहने का अधिकार है। एक पिंजरे जैसे बंद कमरे में रखना उसके लिए उचित नहीं था। उसे प्रकृति की खुली दुनिया में विचरण करने देना आवश्यक था।
लेखिका द्वारा किया गया उपाय:
लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया ताकि गिल्लू बाहर आ-जा सके। इससे गिल्लू दिन में बाहर जाकर अन्य गिलहरियों के साथ खेलता और शाम होने पर वापस अपने झूले में लौट आता। इस प्रकार उसे स्वतंत्रता भी मिली और लेखिका का साथ भी बना रहा।
6गिल्लू किन अर्थों में परिचारिका की भूमिका निभा रहा था?Show solution
उत्तर: जब लेखिका मोटर दुर्घटना में घायल होकर बिस्तर पर लेटी थीं, तब गिल्लू ने एक सच्ची परिचारिका (nurse) की भाँति उनकी सेवा की:
1. साथ रहना: गिल्लू तकिए पर लेखिका के सिर के पास बैठा रहता था और उन्हें अकेला नहीं छोड़ता था।
2. सेवा करना: वह अपने नन्हे-नन्हे पंजों से लेखिका के सिर और बालों को धीरे-धीरे सहलाता रहता था।
3. भोजन त्यागना: जब लेखिका को भूख नहीं लगती थी, तो गिल्लू भी काजू (जो उसका प्रिय भोजन था) नहीं खाता था।
इस प्रकार गिल्लू ने अपनी सहज वृत्ति से एक समर्पित परिचारिका की भूमिका निभाई और लेखिका के प्रति अपना गहरा प्रेम प्रकट किया।
7गिल्लू की किन चेष्टाओं से यह आभास मिलने लगा था कि अब उसका अंत समय समीप है?Show solution
उत्तर: गिल्लू की निम्नलिखित चेष्टाओं से उसके अंत समय के निकट होने का आभास मिलने लगा था:
1. भोजन त्यागना: उस दिन गिल्लू ने दिन भर कुछ नहीं खाया, जबकि वह पहले बड़े चाव से काजू और अन्य चीजें खाता था।
2. बाहर न जाना: वह उस दिन बाहर भी नहीं गया, जबकि वह प्रतिदिन बाहर जाकर खेलता था।
3. झूले से उतरना: रात में अंत की यातना में भी वह अपने झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आया।
4. उँगली पकड़ना: उसने लेखिका की वही उँगली अपने ठंडे पंजों से पकड़ ली जिसे उसने अपने बचपन की मरणासन्न अवस्था में पकड़ा था — मानो वह अंत में भी उसी आश्रय को खोज रहा था।
5. पंजों का ठंडा होना: उसके पंजे बहुत ठंडे हो रहे थे जो जीवन-शक्ति के क्षीण होने का संकेत था।
8'प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया'—का आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
आशय: इस पंक्ति में लेखिका ने गिल्लू की मृत्यु को अत्यंत काव्यात्मक और भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया है।
- 'प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ' — अर्थात् भोर होते ही, सूर्योदय की पहली किरण फूटते ही।
- 'किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया' — अर्थात् गिल्लू की इस जीवन में मृत्यु हो गई, परंतु लेखिका को विश्वास है कि मृत्यु अंत नहीं है। वह इस जीवन की नींद सोकर किसी नए जीवन में, किसी नए रूप में जागेगा — शायद सोनजुही के पीले फूल के रूप में।
निष्कर्ष: इस पंक्ति में पुनर्जन्म की आस्था, मृत्यु के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण और गिल्लू के प्रति लेखिका का गहरा भावनात्मक लगाव एक साथ व्यक्त हुआ है। मृत्यु को 'सोना' और नए जीवन को 'जागना' कहकर लेखिका ने मृत्यु की पीड़ा को एक सुंदर आशा में बदल दिया है।
9सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?Show solution
उत्तर: सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में यह विश्वास जन्म लेता है कि —
गिल्लू का वह छोटा-सा शरीर (लघुगात) मिट्टी में मिलकर इसी सोनजुही की जड़ों का पोषण करेगा और किसी वसंती दिन वह जुही के पीताभ (पीले रंग के) छोटे-छोटे फूलों के रूप में खिल उठेगा।
अर्थात् लेखिका को यह विश्वास है कि मृत्यु के बाद भी जीवन का अंत नहीं होता — प्रकृति के चक्र में सब कुछ नए रूप में लौट आता है। गिल्लू जो सोनजुही से सबसे अधिक प्रेम करता था, वह उसी लता में समाकर पुनः फूल के रूप में खिलेगा। यह विश्वास लेखिका को संतोष और सांत्वना देता है। इसमें पुनर्जन्म की आस्था के साथ-साथ मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध की भावना भी निहित है।
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