कैदी और कोकिला
Tripura Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for कैदी और कोकिला — Tripura Board Class 9 Hindi.
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Get startedप्रश्न-अभ्यास
1कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी?Show solution
उत्तर:
कोयल की कूक सुनकर कवि की प्रतिक्रिया आश्चर्य, जिज्ञासा और भावुकता से भरी थी। कवि को पहले तो आश्चर्य हुआ कि इस घोर अँधेरी रात में कोयल क्यों बोल रही है। उसने सोचा कि कोयल की यह चीख किसी पीड़ा या संदेश की अभिव्यक्ति है। कवि ने कोयल से पूछा कि क्या उसे भी किसी ने कैद किया है, या वह किसी क्रांति का संदेश लेकर आई है। कवि के मन में यह भी भाव उठा कि कोयल स्वतंत्र होकर गा रही है जबकि वह स्वयं जेल की सलाखों के पीछे बंद है — इससे उसे ईर्ष्या और वेदना दोनों हुईं। कुल मिलाकर कोयल की कूक ने कवि के सोए हुए राष्ट्रीय भावों को जगा दिया।
2कवि ने कोकिल के बोलने के किन कारणों की संभावना बताई?Show solution
उत्तर:
कवि ने कोकिल के बोलने के निम्नलिखित संभावित कारण बताए —
1. क्रांति का संदेश: कोकिल शायद देश में क्रांति की आग भड़कने का संदेश लेकर आई है।
2. पीड़ा की अभिव्यक्ति: हो सकता है कोकिल भी किसी दुख या पीड़ा में है और इसीलिए रात के अँधेरे में चीख रही है।
3. स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा देना: कोकिल शायद जेल में बंद देशभक्तों को प्रेरित करने और उनका उत्साह बढ़ाने आई है।
4. ब्रिटिश शासन के अत्याचारों का विरोध: कोकिल की चीख शायद अंग्रेज़ी शासन के अत्याचारों के विरुद्ध विद्रोह का स्वर है।
5. कवि से मिलने की चाह: कोकिल शायद कवि की दशा देखकर दुखी होकर उससे मिलने आई है।
3किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है और क्यों?Show solution
उत्तर:
कविता में ब्रिटिश (अंग्रेज़ी) शासन की तुलना 'तम' (अंधकार) के प्रभाव से की गई है।
कारण:
- अंग्रेज़ी शासन में भारतीयों पर घोर अत्याचार होते थे, जैसे अंधकार में सब कुछ दब जाता है।
- जिस प्रकार तम (अंधकार) में कोई प्रकाश नहीं होता, उसी प्रकार ब्रिटिश शासन में भारतीयों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और अधिकारों का कोई प्रकाश नहीं था।
- अंधकार जैसे सब कुछ ढक लेता है, वैसे ही अंग्रेज़ी शासन ने भारतीयों की आवाज़, उनके अधिकार और उनकी स्वतंत्रता को दबा दिया था।
- इस शासन में देशभक्तों को जेलों में डाला जाता था, यातनाएँ दी जाती थीं — यह सब तम (अज्ञान और अन्याय) का ही प्रतीक है।
4कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जाने वाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।Show solution
उत्तर:
कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में निम्नलिखित यंत्रणाएँ दी जाती थीं —
1. हथकड़ियाँ और बेड़ियाँ: स्वतंत्रता सेनानियों के हाथों में हथकड़ियाँ और पैरों में बेड़ियाँ डाली जाती थीं।
2. कठोर शारीरिक श्रम: कैदियों से पेट पर जूआ लगाकर कुएँ से पानी खींचने जैसे कठोर काम करवाए जाते थे।
3. अपमानजनक व्यवहार: देशभक्तों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता था।
4. अँधेरी कोठरियाँ: जेल की कोठरियाँ अँधेरी और घुटन भरी होती थीं।
5. मानसिक यातना: देशभक्तों को उनके परिवार से दूर रखा जाता था, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा होती थी।
6. अपर्याप्त भोजन और सुविधाएँ: जेलों में खाने-पीने और रहने की उचित व्यवस्था नहीं थी।
इस प्रकार ब्रिटिश जेलें देशभक्तों के लिए नरक के समान थीं।
5भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) मृदुल वैभव की रखवाली-सी, कोकिल बोलो तो!
(ख) हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूँआ।Show solution
भाव: इस पंक्ति में कवि कोयल से पूछता है कि वह इस अर्धरात्रि में क्यों बोल रही है। कोयल की मधुर आवाज़ प्रकृति के कोमल और सुंदर वैभव की रक्षा करने वाली प्रतीत होती है। कवि का भाव यह है कि कोयल जैसे प्रकृति की सुंदरता, हरियाली, फूल-पत्तियों की रखवाली करती है — उसी प्रकार वह देश की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक धरोहर की भी रक्षक है। कवि उससे जानना चाहता है कि इस घोर अंधकार में वह किस उद्देश्य से बोल रही है।
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(ख) हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूँआ।
भाव: इन पंक्तियों में कवि ने व्यंग्य और वीरता का अद्भुत समन्वय किया है। जेल में कैदियों से पेट पर जूआ (बैलों वाली लकड़ी) बाँधकर कुएँ से पानी खींचने का काम करवाया जाता था। कवि कहता है कि वह यह कठोर श्रम करते हुए भी ब्रिटिश शासन की अकड़ और घमंड को समाप्त कर रहा है — जैसे कुएँ का पानी खींचकर उसे खाली किया जाता है, वैसे ही वह अपने संघर्ष से अंग्रेज़ों के अहंकार को खाली (नष्ट) कर रहा है। यह पंक्तियाँ कवि की अदम्य वीरता और राष्ट्रभक्ति को दर्शाती हैं।
6अर्धरात्रि में कोयल की चीख से कवि को क्या अंदेशा है?Show solution
उत्तर:
अर्धरात्रि में कोयल की चीख सुनकर कवि को निम्नलिखित अंदेशे (आशंकाएँ) होते हैं —
1. कवि को अंदेशा होता है कि कहीं देश में कोई बड़ी क्रांति या उथल-पुथल तो नहीं हो रही, जिसका संदेश लेकर कोयल आई है।
2. उसे यह भी आशंका होती है कि कोयल की यह असामान्य चीख किसी अशुभ घटना का संकेत तो नहीं है।
3. कवि सोचता है कि कोयल भी शायद किसी पीड़ा में है और उसकी चीख किसी विपदा की सूचना दे रही है।
4. कवि को यह भी अंदेशा होता है कि कोयल की यह आवाज़ देशभक्तों को जगाने और विद्रोह के लिए प्रेरित करने का संकेत है।
संक्षेप में, कोयल की रात्रिकालीन चीख कवि के मन में देश की स्थिति को लेकर अनेक प्रकार की आशंकाएँ और जिज्ञासाएँ उत्पन्न करती है।
7कवि को कोयल से ईर्ष्या क्यों हो रही है?Show solution
उत्तर:
कवि को कोयल से ईर्ष्या होने के निम्नलिखित कारण हैं —
1. स्वतंत्रता: कोयल स्वतंत्र रूप से जहाँ चाहे उड़ सकती है, गा सकती है, जबकि कवि जेल की सलाखों के पीछे कैद है।
2. मधुर गान: कोयल की मधुर कूक पर लोग 'वाह-वाह' करते हैं, उसकी प्रशंसा होती है, जबकि कवि का रोना भी गुनाह माना जाता है।
3. प्रकृति का सौंदर्य: कोयल हरे-भरे वृक्षों पर बैठकर प्रकृति का आनंद लेती है, जबकि कवि अँधेरी कोठरी में बंद है।
4. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: कोयल अपनी भावनाएँ स्वतंत्रतापूर्वक व्यक्त कर सकती है, परंतु कवि पर अनेक प्रतिबंध हैं।
इस प्रकार कोयल की स्वतंत्रता और कवि की पराधीनता के बीच की विषमता ही ईर्ष्या का मूल कारण है।
8कवि के स्मृति-पटल पर कोयल के गीतों की कौन सी मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं, जिन्हें वह अब नष्ट करने पर तुली है?Show solution
उत्तर:
कवि के स्मृति-पटल पर कोयल के गीतों की निम्नलिखित मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं —
1. वसंत ऋतु का आगमन: कोयल वसंत ऋतु में आम के बागों में बैठकर मधुर गीत गाती थी, जो मन को आनंदित कर देता था।
2. प्रकृति की सुंदरता: हरे-भरे वृक्षों, फूलों और प्रकृति के सौंदर्य के बीच कोयल का गान एक अद्भुत वातावरण बनाता था।
3. मधुर और कोमल स्वर: कोयल की कूक सुनकर मन में उल्लास और प्रसन्नता का संचार होता था।
4. शुभ संकेत: कोयल का गाना शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता था।
परंतु अब वही कोयल अर्धरात्रि में कर्कश स्वर में चीख रही है, जो उन सभी मधुर स्मृतियों को नष्ट कर रही है। कवि को दुख है कि कोयल की यह असामान्य चीख उसकी सुंदर यादों पर आघात कर रही है।
9हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर:
कविता में हथकड़ियों को गहना कहा गया है। इसके निम्नलिखित कारण हैं —
1. राष्ट्रभक्ति का प्रतीक: स्वतंत्रता सेनानियों के लिए हथकड़ियाँ किसी आभूषण से कम नहीं थीं, क्योंकि वे देश की आज़ादी के लिए पहनी गई थीं।
2. गर्व का भाव: जिस प्रकार गहने पहनने से गर्व और सम्मान की अनुभूति होती है, उसी प्रकार देश के लिए जेल जाना और हथकड़ियाँ पहनना कवि के लिए गर्व की बात थी।
3. व्यंग्य: यह एक व्यंग्योक्ति भी है — अंग्रेज़ सरकार ने जिसे दंड समझकर पहनाया, कवि उसे सम्मान का प्रतीक मानता है।
4. बलिदान की भावना: हथकड़ियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि कवि ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की तैयारी की है — यह त्याग ही उसका सबसे बड़ा आभूषण है।
इस प्रकार हथकड़ियों को गहना कहकर कवि ने अपनी देशभक्ति, वीरता और आत्मसम्मान को अभिव्यक्त किया है।
10'काली तू ... ऐ आली!'—इन पंक्तियों में 'काली' शब्द की आवृत्ति से उत्पन्न चमत्कार का विवेचन कीजिए।Show solution
उत्तर:
इन पंक्तियों में कवि ने 'काली' शब्द का बार-बार प्रयोग करके यमक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया है। प्रत्येक बार 'काली' शब्द का अर्थ भिन्न है —
| 'काली' का प्रयोग | अर्थ |
|---|---|
| काली तू (कोयल के लिए) | काले रंग की (कोयल का रंग काला होता है) |
| काली रात (रात के लिए) | अंधकारमय रात |
| काली जेल (जेल के लिए) | अँधेरी, भयावह जेल |
| काली (ब्रिटिश नीतियों के लिए) | क्रूर, अन्यायपूर्ण |
चमत्कार: एक ही शब्द 'काली' से कवि ने कोयल के रंग, रात के अंधकार, जेल की भयावहता और ब्रिटिश शासन की क्रूरता — सभी को एक साथ व्यक्त कर दिया है। इससे काव्य में अद्भुत चमत्कार उत्पन्न होता है। पाठक एक ही शब्द में अनेक अर्थों की गहराई अनुभव करता है। यह कवि की भाषा-कुशलता और काव्य-प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
11काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—
(क) किस दावानल की ज्वालाएँ हैं दीखीं?
(ख) तेरे गीत कहावें वाह, रोना भी है मुझे गुनाह!
देख विषमता तेरी-मेरी, बजा रही तिस पर रणभेरी!Show solution
काव्य-सौंदर्य:
- भाव-सौंदर्य: कवि कोयल से पूछता है कि उसने किस जंगल की आग की लपटें देखी हैं जो इस प्रकार बेचैन होकर चीख रही है। यहाँ 'दावानल' ब्रिटिश शासन के अत्याचारों और देश में फैली क्रांति की आग का प्रतीक है।
- अलंकार: 'दावानल की ज्वालाएँ' में रूपक अलंकार है — ब्रिटिश अत्याचार को दावानल (जंगल की आग) की संज्ञा दी गई है।
- भाषा: खड़ी बोली का सशक्त प्रयोग। प्रश्नवाचक शैली से जिज्ञासा और बेचैनी का भाव उत्पन्न होता है।
- प्रतीक: 'दावानल' क्रांति और विद्रोह का सशक्त प्रतीक है।
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(ख) तेरे गीत कहावें वाह, रोना भी है मुझे गुनाह!
देख विषमता तेरी-मेरी, बजा रही तिस पर रणभेरी!
काव्य-सौंदर्य:
- भाव-सौंदर्य: कवि और कोयल की स्थिति में गहरी विषमता है। कोयल के गाने पर प्रशंसा होती है, जबकि कवि का रोना भी अपराध माना जाता है। इस विषमता पर भी कवि रणभेरी (युद्ध का नगाड़ा) बजाने की बात करता है — अर्थात् संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त करता है।
- अलंकार: 'रणभेरी बजाना' में लक्षणा शक्ति है — संघर्ष और विद्रोह का भाव। 'वाह-गुनाह' में अंत्यानुप्रास अलंकार है।
- विरोधाभास: कोयल की प्रशंसा और कवि के रोने पर प्रतिबंध — यह विरोधाभास ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों को उजागर करता है।
- भाषा: सरल, प्रवाहमयी खड़ी बोली। 'रणभेरी' शब्द वीर रस का संचार करता है।
- शैली: व्यंग्यात्मक एवं ओजपूर्ण।
रचना और अभिव्यक्ति
12कवि जेल के आसपास अन्य पक्षियों का चहकना भी सुनता होगा लेकिन उसने कोकिला की ही बात क्यों की है?Show solution
कवि ने अन्य पक्षियों की बजाय केवल कोकिला (कोयल) की बात की है। इसके निम्नलिखित कारण हैं —
1. कोयल का विशेष महत्त्व: भारतीय साहित्य और संस्कृति में कोयल को सदा से मधुर गायन, वसंत और प्रेम का प्रतीक माना गया है। इसलिए उसकी रात्रिकालीन चीख असामान्य और ध्यान आकर्षित करने वाली थी।
2. विषमता का प्रभाव: कोयल जो सदा मधुर गाती है, उसका रात के अंधकार में चीखना एक तीव्र विरोधाभास उत्पन्न करता है — यह विरोधाभास ही कवि की पीड़ा और देश की दुर्दशा को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनता है।
3. राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक: कोयल की आवाज़ कवि को देश की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और स्वच्छंद जीवन की याद दिलाती है — जो उसे जेल में नहीं मिल सकती।
4. काव्यात्मक उपयुक्तता: कोयल की मधुर आवाज़ और कवि की पीड़ा के बीच का अंतर काव्य में अधिक प्रभावशाली और भावपूर्ण अभिव्यक्ति देता है।
इस प्रकार कोयल कवि की भावनाओं, देश की पीड़ा और स्वतंत्रता की आकांक्षा को व्यक्त करने का सबसे उपयुक्त माध्यम बनती है।
13आपके विचार से स्वतंत्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार क्यों किया जाता होगा?Show solution
ब्रिटिश शासन में स्वतंत्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार किए जाने के निम्नलिखित कारण रहे होंगे —
1. राजनीतिक उद्देश्य: अंग्रेज़ी सरकार स्वतंत्रता सेनानियों को अपराधी घोषित करके उनके आंदोलन को कमज़ोर करना चाहती थी, ताकि जनता उनका साथ न दे।
2. मनोबल तोड़ना: स्वतंत्रता सेनानियों को अपराधियों जैसा व्यवहार देकर उनका मनोबल तोड़ने और उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया जाता था।
3. कानूनी बहाना: ब्रिटिश सरकार ने ऐसे कानून बनाए थे जिनके अंतर्गत देशभक्ति के कार्य भी अपराध माने जाते थे — जैसे राजद्रोह कानून।
4. भय का वातावरण: यदि स्वतंत्रता सेनानियों को अपराधी माना जाए तो अन्य लोग आंदोलन में भाग लेने से डरेंगे — यह अंग्रेज़ों की चाल थी।
5. अंतर्राष्ट्रीय छवि: अंग्रेज़ यह दिखाना चाहते थे कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रख रहे हैं और भारतीय आंदोलनकारी 'उपद्रवी' हैं।
संक्षेप में, यह ब्रिटिश शासन की एक सुनियोजित नीति थी जिससे वे स्वतंत्रता आंदोलन को दबाना चाहते थे।
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