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Chapter 10 of 39
NCERT Solutions

अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय)

Bihar Board · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for अपू के साथ ढाई साल (सत्यजित राय) — Bihar Board Class 11 Hindi.

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14 Questions Solved · 3 Sections

पाठ के साथ

1पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?Show solution
दिया गया है: पथेर पांचाली फ़िल्म के निर्माण से संबंधित सत्यजित राय का संस्मरण।

उत्तर:
पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलने के निम्नलिखित कारण थे:

1. धन की कमी: फ़िल्म के निर्माण के लिए पर्याप्त धन नहीं था। जब भी पैसे मिलते, शूटिंग होती और पैसे खत्म होने पर काम रुक जाता।

2. मौसम पर निर्भरता: कई दृश्य विशेष मौसम में ही फ़िल्माए जा सकते थे, जैसे बारिश का दृश्य, कांस के फूलों का दृश्य आदि। इसलिए उचित मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।

3. कलाकारों की समस्याएँ: 'भूलो' नामक कुत्ते की मृत्यु हो गई, जिसके कारण दूसरा कुत्ता लाना पड़ा। इसी प्रकार श्रीनिवास (इंसुरेंस एजेंट की भूमिका निभाने वाले कलाकार) का निधन हो गया, जिससे बाकी दृश्यों को नए तरीके से फ़िल्माना पड़ा।

4. तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयाँ: शूटिंग स्थल की मरम्मत, उचित स्थान की खोज आदि में भी समय लगा।

इन सभी कारणों से फ़िल्म की शूटिंग ढाई साल तक चलती रही।
2'अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से 'कंटिन्युइटी' नदारद हो जाती' – इस कथन के पीछे क्या भाव है?Show solution
दिया गया है: यह कथन उस प्रसंग से संबंधित है जब काशफूल (कांस के फूल) वाले दृश्य की शूटिंग के दौरान आधा दृश्य एक मौसम में फ़िल्माया गया और बाकी आधा दूसरे मौसम में फ़िल्माना था।

भाव:
इस कथन के पीछे यह भाव है कि फ़िल्म में निरंतरता (Continuity) बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि एक ही दृश्य के दो हिस्से अलग-अलग समय या मौसम में फ़िल्माए जाएँ, तो दोनों हिस्सों में —
- प्रकाश की स्थिति,
- पेड़-पौधों का रंग-रूप,
- पात्रों की वेशभूषा और रूप-रंग,
- वातावरण

आदि में अंतर आ जाता है। इससे दर्शकों को दृश्य असंगत और अस्वाभाविक लगता है। फ़िल्म की विश्वसनीयता नष्ट हो जाती है। इसीलिए सत्यजित राय ने उस स्थान पर शूटिंग न करके दूसरी जगह उसी प्रकार के काशफूल ढूँढ़े और वहाँ शूटिंग पूरी की, ताकि दृश्य में एकरूपता बनी रहे।
3किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है?Show solution
दिया गया है: सत्यजित राय द्वारा फ़िल्म निर्माण के दौरान अपनाई गई विभिन्न तरकीबों का वर्णन।

उत्तर:
निम्नलिखित दो दृश्यों में दर्शक तरकीब को नहीं पहचान पाते:

पहला दृश्य — काशफूल (कांस के फूल) का दृश्य:
इस दृश्य का पहला आधा हिस्सा एक स्थान पर फ़िल्माया गया था। बाद में उस स्थान पर काशफूल नहीं रहे, इसलिए दूसरी जगह काशफूल ढूँढ़कर बाकी आधे दृश्य की शूटिंग की गई। दर्शक यह नहीं पहचान पाते कि यह दृश्य दो अलग-अलग स्थानों पर फ़िल्माया गया है।

दूसरा दृश्य — 'भूलो' कुत्ते का दृश्य:
फ़िल्म में 'भूलो' नामक कुत्ते की मृत्यु हो जाने के बाद उसी जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाया गया और उससे बाकी दृश्य पूरा किया गया। दर्शक यह नहीं पहचान पाते कि फ़िल्म में दो अलग-अलग कुत्तों का उपयोग किया गया है।

इन दोनों दृश्यों में निर्देशक की कुशलता के कारण दर्शकों को कोई असंगति महसूस नहीं होती।
4'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?Show solution
दिया गया है: फ़िल्म में 'भूलो' नामक कुत्ते की भूमिका और उससे जुड़ी समस्या।

उत्तर:
'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता इसलिए लाया गया क्योंकि शूटिंग के दौरान 'भूलो' की मृत्यु हो गई थी और फ़िल्म के कुछ दृश्य अभी भी शेष थे जिनमें उस कुत्ते की आवश्यकता थी।

दूसरे कुत्ते ने जो दृश्य पूरा किया:
दूसरे कुत्ते ने वह दृश्य पूरा किया जिसमें अपू और दुर्गा रेलगाड़ी देखने जाते हैं। इस दृश्य में कुत्ते को बच्चों के साथ काशफूलों के बीच से गुज़रते हुए दिखाया जाना था। चूँकि 'भूलो' की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उसी जैसा दिखने वाला दूसरा कुत्ता लाकर यह दृश्य पूरा किया गया। दर्शक फ़िल्म देखते समय यह अंतर नहीं पहचान पाए।
5फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को उनके गुज़र जाने के बाद किस प्रकार फ़िल्माया गया?Show solution
दिया गया है: फ़िल्म में श्रीनिवास की भूमिका और उनके निधन के बाद उत्पन्न समस्या का समाधान।

उत्तर:
श्रीनिवास की भूमिका:
श्रीनिवास फ़िल्म में इंसुरेंस एजेंट की भूमिका निभा रहे थे। वे एक अनुभवी और प्रतिभाशाली कलाकार थे।

उनके गुज़र जाने के बाद दृश्यों को फ़िल्माने का तरीका:
शूटिंग के दौरान श्रीनिवास का निधन हो गया, जबकि उनसे जुड़े कुछ दृश्य अभी भी शेष थे। इस समस्या का समाधान इस प्रकार किया गया:

- बाकी बचे दृश्यों में श्रीनिवास को सामने से नहीं दिखाया गया
- उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को उनके जैसी वेशभूषा पहनाकर केवल पीठ दिखाते हुए फ़िल्माया गया।
- इस तरकीब से दर्शकों को यह पता नहीं चला कि वह श्रीनिवास नहीं हैं।

इस प्रकार सत्यजित राय ने अपनी सूझ-बूझ से इस कठिन परिस्थिति का सामना किया और फ़िल्म को पूरा किया।
6बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ?Show solution
दिया गया है: फ़िल्म में बारिश के दृश्य की शूटिंग से संबंधित कठिनाई।

उत्तर:
मुश्किल:
बारिश का दृश्य फ़िल्माने के लिए वास्तविक बारिश की आवश्यकता थी। परंतु जब भी शूटिंग दल शूटिंग के लिए तैयार होता, बारिश नहीं होती और जब बारिश होती तो शूटिंग के लिए तैयारी नहीं होती या कोई अन्य समस्या आ जाती। उचित समय पर बारिश का न होना सबसे बड़ी मुश्किल थी।

समाधान:
अंततः सत्यजित राय को मानसून के मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ी। जब उचित समय पर अच्छी बारिश हुई, तब उन्होंने तुरंत अपनी पूरी टीम को तैयार किया और बारिश के दृश्य की शूटिंग पूरी की। इस प्रकार धैर्य और सही समय की प्रतीक्षा करके इस समस्या का समाधान हुआ। यह दृश्य फ़िल्म के सबसे प्रभावशाली दृश्यों में से एक बना।
7किसी फ़िल्म की शूटिंग करते समय फ़िल्मकार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।Show solution
दिया गया है: पाठ में वर्णित फ़िल्म निर्माण की विभिन्न कठिनाइयाँ।

उत्तर:
फ़िल्म की शूटिंग के दौरान फ़िल्मकार को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

1. धन की कमी: पर्याप्त बजट न होने से शूटिंग बार-बार रोकनी पड़ती है।

2. मौसम की अनिश्चितता: विशेष मौसम में फ़िल्माए जाने वाले दृश्यों के लिए उचित मौसम की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

3. कलाकारों की अनुपलब्धता या मृत्यु: किसी कलाकार के बीमार पड़ने, मृत्यु हो जाने या अनुपलब्ध होने पर दृश्यों को नए तरीके से फ़िल्माना पड़ता है।

4. कंटिन्युइटी बनाए रखना: लंबे समय तक चलने वाली शूटिंग में दृश्यों में निरंतरता बनाए रखना कठिन होता है।

5. स्थान की समस्या: उचित शूटिंग स्थल ढूँढ़ना और उसे तैयार करना समय और धन दोनों लेता है।

6. तकनीकी समस्याएँ: साउंड रिकॉर्डिंग, कैमरा आदि तकनीकी उपकरणों में खराबी आ सकती है।

7. जानवरों से जुड़ी समस्याएँ: जानवरों को निर्देशित करना कठिन होता है; उनकी मृत्यु या बीमारी से दृश्य अधूरे रह सकते हैं।

8. प्राकृतिक बाधाएँ: साँप जैसे जीव-जंतुओं का अचानक प्रकट होना शूटिंग में बाधा डाल सकता है।

9. स्थानीय लोगों का सहयोग: स्थानीय मान्यताओं और लोगों के सहयोग की आवश्यकता होती है।

10. समय प्रबंधन: सभी कलाकारों और तकनीशियनों की उपलब्धता एक साथ सुनिश्चित करना कठिन होता है।

पाठ के आस-पास

1तीन प्रसंगों में राय ने कुछ इस तरह की टिप्पणियाँ की हैं कि दर्शक पहचान नहीं पाते कि... या फ़िल्म देखते हुए इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि... इत्यादि। ये प्रसंग कौन से हैं, चर्चा करें और इसपर भी विचार करें कि शूटिंग के समय की असलियत फ़िल्म को देखते समय कैसे छिप जाती है।Show solution
दिया गया है: सत्यजित राय के संस्मरण में वर्णित तीन ऐसे प्रसंग जिनमें दर्शक तरकीब को नहीं पहचान पाते।

तीन प्रसंग:

प्रसंग 1 — काशफूल का दृश्य:
काशफूलों के बीच से अपू और दुर्गा के गुज़रने का दृश्य दो अलग-अलग स्थानों पर फ़िल्माया गया। पहले स्थान पर काशफूल समाप्त हो जाने के बाद दूसरी जगह काशफूल ढूँढ़कर शेष दृश्य फ़िल्माया गया। दर्शक यह नहीं पहचान पाते कि दोनों हिस्से अलग-अलग जगह फ़िल्माए गए हैं।

प्रसंग 2 — 'भूलो' कुत्ते का दृश्य:
'भूलो' की मृत्यु के बाद दूसरे कुत्ते से दृश्य पूरा किया गया। दर्शक दोनों कुत्तों में अंतर नहीं कर पाते।

प्रसंग 3 — श्रीनिवास के दृश्य:
श्रीनिवास के निधन के बाद उनकी जगह दूसरे व्यक्ति को उनकी वेशभूषा में पीठ दिखाकर फ़िल्माया गया। दर्शकों को यह अंतर नहीं दिखता।

शूटिंग की असलियत कैसे छिप जाती है:
फ़िल्म एक संपादित माध्यम है। कुशल संपादन (editing), उचित कैमरा कोण, प्रकाश व्यवस्था और निर्देशक की सूझ-बूझ से दर्शकों का ध्यान केवल कहानी और भावनाओं पर केंद्रित रहता है। दर्शक फ़िल्म में इतने डूब जाते हैं कि तकनीकी पहलुओं पर ध्यान नहीं देते। यही फ़िल्म-कला की सफलता है।
2मान लीजिए कि आपको अपने विद्यालय पर एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनानी है। इस तरह की फ़िल्म में आप किस तरह के दृश्यों को चित्रित करेंगे? फ़िल्म बनाने से पहले और बनाते समय किन बातों पर ध्यान देंगे?Show solution
उत्तर:

फ़िल्म में चित्रित किए जाने वाले दृश्य:
1. विद्यालय का बाहरी परिसर, प्रवेश द्वार और भवन।
2. प्रार्थना सभा का दृश्य।
3. कक्षाओं में शिक्षण का दृश्य।
4. प्रयोगशाला और पुस्तकालय में विद्यार्थियों की गतिविधियाँ।
5. खेल के मैदान में खेल-कूद के दृश्य।
6. सांस्कृतिक कार्यक्रम और वार्षिकोत्सव के दृश्य।
7. शिक्षकों और विद्यार्थियों के साक्षात्कार।
8. विद्यालय के इतिहास और उपलब्धियों का चित्रण।

फ़िल्म बनाने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:
1. विद्यालय प्रशासन से अनुमति लेना।
2. एक सुव्यवस्थित स्क्रिप्ट तैयार करना।
3. उचित कैमरा, माइक्रोफोन आदि उपकरणों की व्यवस्था करना।
4. फ़िल्माए जाने वाले दृश्यों की सूची बनाना।

फ़िल्म बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें:
1. प्रकाश और ध्वनि की उचित व्यवस्था।
2. कंटिन्युइटी बनाए रखना।
3. स्वाभाविक और सहज दृश्यों को प्राथमिकता देना।
4. संपादन में अनावश्यक दृश्यों को हटाना।
3पथेर पांचाली फ़िल्म में इंदिरा टाकरून की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी ढाई साल तक काम कर सकीं। यदि आधी फ़िल्म बनने के बाद चुन्नीबाला देवी की अचानक मृत्यु हो जाती तो सत्यजित राय क्या करते? चर्चा करें।Show solution
उत्तर (चर्चात्मक):
यह एक काल्पनिक परंतु विचारोत्तेजक प्रश्न है। यदि आधी फ़िल्म बनने के बाद चुन्नीबाला देवी की अचानक मृत्यु हो जाती, तो सत्यजित राय के सामने अत्यंत कठिन परिस्थिति उत्पन्न हो जाती, क्योंकि:

1. इंदिरा टाकरून की भूमिका केंद्रीय थी — वृद्धा इंदिरा टाकरून फ़िल्म की एक महत्त्वपूर्ण पात्र थीं। उनके बिना कहानी अधूरी रहती।

2. संभावित समाधान:
- सत्यजित राय श्रीनिवास वाली तरकीब अपनाते — किसी अन्य वृद्ध महिला को उसी वेशभूषा में पीठ दिखाकर फ़िल्माते।
- कुछ दृश्यों को पुनर्लेखन करके इंदिरा टाकरून की भूमिका को सीमित कर देते।
- यदि कोई उपाय न होता, तो संभव है कि फ़िल्म का निर्माण ही रोकना पड़ता।

3. निष्कर्ष: सत्यजित राय की रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता को देखते हुए वे कोई न कोई रास्ता अवश्य निकालते, जैसा उन्होंने श्रीनिवास और 'भूलो' के मामले में किया था। परंतु इंदिरा टाकरून जैसी केंद्रीय भूमिका के लिए यह और भी चुनौतीपूर्ण होता।
4पठित पाठ के आधार पर यह कह पाना कहाँ तक उचित है कि फ़िल्म को सत्यजित राय एक कला-माध्यम के रूप में देखते हैं, व्यावसायिक-माध्यम के रूप में नहीं?Show solution
उत्तर:
पठित पाठ के आधार पर यह कहना पूर्णतः उचित है कि सत्यजित राय फ़िल्म को कला-माध्यम के रूप में देखते थे, न कि व्यावसायिक माध्यम के रूप में। इसके निम्नलिखित प्रमाण पाठ में मिलते हैं:

1. धन की परवाह न करना: पैसे न होने पर भी उन्होंने फ़िल्म बनाना नहीं छोड़ा। जब पैसे मिले तब शूटिंग की, जब नहीं मिले तो प्रतीक्षा की। एक व्यावसायिक फ़िल्मकार इतना जोखिम नहीं उठाता।

2. प्रामाणिकता पर जोर: वे हर दृश्य को यथार्थ और प्रामाणिक बनाने के लिए प्रयासरत रहे। काशफूल के लिए दूसरी जगह जाना, असली बारिश का इंतज़ार करना — ये सब कला के प्रति समर्पण के प्रमाण हैं।

3. कंटिन्युइटी का ध्यान: वे फ़िल्म की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहते थे।

4. कठिन परिस्थितियों में भी कलात्मक दृष्टि: श्रीनिवास और 'भूलो' के जाने के बाद भी उन्होंने रचनात्मक समाधान निकाले।

निष्कर्ष: सत्यजित राय के लिए फ़िल्म केवल मनोरंजन या धन कमाने का साधन नहीं थी, बल्कि वह एक सशक्त कला-माध्यम था जिसके द्वारा वे जीवन की सच्चाइयों को दर्शकों तक पहुँचाना चाहते थे।

भाषा की बात

1पाठ में कई स्थानों पर तत्सम, तद्भव, क्षेत्रीय सभी प्रकार के शब्द एक साथ सहज भाव से आए हैं। ऐसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपनी प्रिय फ़िल्म पर एक अनुच्छेद लिखें।Show solution
उत्तर:
निम्नलिखित अनुच्छेद में तत्सम, तद्भव और क्षेत्रीय/विदेशी शब्दों का सहज प्रयोग किया गया है:

मेरी प्रिय फ़िल्म: लगान

मेरी सबसे प्रिय फ़िल्म 'लगान' है। यह फ़िल्म उस कालखंड की कहानी है जब हमारा देश अंग्रेज़ों की गुलामी में था। भुवन नामक एक साधारण किसान अपने गाँव के लोगों को लगान (कर) से मुक्ति दिलाने के लिए अंग्रेज़ अफ़सरों से क्रिकेट मैच की शर्त लगाता है। गाँव के लोग पहले तो सहम जाते हैं, पर भुवन की हिम्मत देखकर उसके साथ हो जाते हैं। फ़िल्म की शूटिंग गुजरात के भुज के पास हुई थी। इसका संगीत बेहद मधुर है और 'घनन घनन' जैसे गीत आज भी कानों में गूँजते हैं। इस फ़िल्म ने यह संदेश दिया कि एकता और साहस से बड़ी से बड़ी मुश्किल पार की जा सकती है। आमिर खान का अभिनय और आशुतोष गोवारिकर का निर्देशन दोनों ही लाजवाब हैं।
2हर क्षेत्र में कार्य करने या व्यवहार करने की अपनी निजी या विशिष्ट प्रकार की शब्दावली होती है। जैसे अपू के साथ ढाई साल पाठ में फ़िल्म से जुड़े शब्द शूटिंग, शॉट, सीन आदि। फ़िल्म से जुड़ी शब्दावली में से किन्हीं दस की सूची बनाइए।Show solution
उत्तर:
फ़िल्म से जुड़ी दस प्रमुख शब्दावली:

| क्र. | शब्द | अर्थ |
|-----|------|------|
| 1. | शूटिंग | फ़िल्म के दृश्यों को कैमरे में कैद करना |
| 2. | शॉट | कैमरे द्वारा एक बार में लिया गया दृश्य |
| 3. | सीन | दृश्य, कहानी का एक हिस्सा |
| 4. | एडिटिंग | फ़िल्म के दृश्यों को काट-छाँटकर जोड़ना |
| 5. | स्क्रिप्ट | फ़िल्म की पटकथा/संवाद |
| 6. | डायरेक्टर | फ़िल्म का निर्देशक |
| 7. | कंटिन्युइटी | दृश्यों में निरंतरता बनाए रखना |
| 8. | साउंड रिकॉर्डिंग | फ़िल्म की आवाज़ रिकॉर्ड करना |
| 9. | क्लोज़-अप | किसी वस्तु या चेहरे को बहुत पास से दिखाना |
| 10. | डबिंग | फ़िल्म में बाद में आवाज़ भरना |
3नीचे दिए गए शब्दों के पर्याय इस पाठ में ढूँढ़िए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए— इश्तहार, खुशकिस्मती, सीन, वृष्टि, जमाShow solution
उत्तर:
पाठ में दिए गए पर्याय और उनका वाक्य-प्रयोग:

1. इश्तहार → पर्याय: विज्ञापन
वाक्य: अखबार में फ़िल्म का विज्ञापन देखकर दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी।

2. खुशकिस्मती → पर्याय: सौभाग्य
वाक्य: यह हमारा सौभाग्य था कि ठीक समय पर बारिश हो गई और शूटिंग पूरी हो सकी।

3. सीन → पर्याय: दृश्य
वाक्य: फ़िल्म का अंतिम दृश्य बहुत भावुक करने वाला था।

4. वृष्टि → पर्याय: बारिश/वर्षा
वाक्य: मानसून में अच्छी वर्षा होने पर किसानों के चेहरे खिल उठे।

5. जमा → पर्याय: इकट्ठा/एकत्र
वाक्य: शूटिंग देखने के लिए गाँव के लोग वहाँ इकट्ठा हो गए।

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