भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? (भारतेंदु हरिश्चंद्र)
Bihar Board · Class 11 · Hindi
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प्रश्न-अभ्यास
1पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि 'इस अभागे आलसी देश में जो कुछ हो जाए वही बहुत कुछ है' क्यों कहा गया है?Show solution
व्याख्या एवं उत्तर:
लेखक ने यह वाक्य भारतवासियों की आलस्य, उदासीनता और निष्क्रियता पर व्यंग्य करते हुए कहा है। भारतेंदु के अनुसार इस देश की निम्नलिखित विशेषताएँ इसे 'अभागा और आलसी' बनाती हैं:
1. आलस्य: यहाँ के लोग परिश्रम से जी चुराते हैं। मेहनत करने की प्रवृत्ति नहीं है।
2. अज्ञान: लोग शिक्षा और ज्ञान से दूर हैं, दुनिया की खबर नहीं रखते।
3. परावलंबन: लोग विदेशी वस्तुओं और विदेशी भाषा पर निर्भर हैं, स्वयं कुछ बनाने में असमर्थ हैं।
4. मत-मतांतर: धार्मिक और जातीय भेदभाव के कारण एकता का अभाव है।
5. नेतृत्व की कमी: देश को सही दिशा में चलाने वाला कोई नहीं है।
इन सब कारणों से देश की दशा इतनी दयनीय हो गई है कि यहाँ कोई भी छोटा-सा सुधार या प्रगति हो जाए तो वह भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लेखक का आशय है कि जब देश इतना पिछड़ा और निष्क्रिय हो, तो थोड़ी-सी भी उन्नति 'बहुत कुछ' लगती है।
निष्कर्ष: यह वाक्य देशवासियों को झकझोरने और उनमें जागरूकता लाने के लिए व्यंग्यात्मक ढंग से कहा गया है।
2'जहाँ रॉबर्ट साहब बहादुर जैसे कलेक्टर हों, वहाँ क्यों न ऐसा समाज हो' वाक्य में लेखक ने किस प्रकार के समाज की कल्पना की है?Show solution
व्याख्या एवं उत्तर:
इस वाक्य में लेखक ने एक ऐसे समाज की कल्पना की है जो अंग्रेज़ अधिकारियों की छत्रछाया में पूरी तरह परतंत्र, निष्क्रिय और आत्मनिर्भरता से रहित हो गया है। रॉबर्ट साहब जैसे कलेक्टर के शासन में:
1. परावलंबी समाज: लोग स्वयं निर्णय लेने में असमर्थ हो जाते हैं, हर काम के लिए शासक पर निर्भर रहते हैं।
2. भोग-विलासी समाज: ऐसे शासन में समाज के धनी वर्ग के लोग रंगमहलों में डूबे रहते हैं और देश की चिंता नहीं करते।
3. अज्ञानी और उदासीन समाज: लोग दुनिया से बेखबर रहते हैं, शिक्षा और उन्नति की ओर ध्यान नहीं देते।
4. विभाजित समाज: जातीय और धार्मिक भेदभाव से ग्रस्त समाज जो एकजुट नहीं हो पाता।
लेखक का व्यंग्य यह है कि जब शासन विदेशी हो और समाज में जागरूकता न हो, तो ऐसा पतित और परावलंबी समाज स्वाभाविक रूप से बन जाता है।
निष्कर्ष: लेखक इस वाक्य के माध्यम से देशवासियों को सचेत करना चाहता है कि विदेशी शासन में रहकर समाज का पतन अनिवार्य है, अतः स्वावलंबन और जागरूकता आवश्यक है।
3जिस प्रकार ट्रेन बिना इंजिन के नहीं चल सकती ठीक उसी प्रकार 'हिंदुस्तानी लोगों को कोई चलानेवाला हो' से लेखक ने अपने देश की खराबियों के मूल कारण खोजने के लिए क्यों कहा है?Show solution
व्याख्या एवं उत्तर:
लेखक ने ट्रेन और इंजिन का उदाहरण देकर यह स्पष्ट किया है कि जिस प्रकार रेलगाड़ी बिना इंजिन के एक इंच भी नहीं चल सकती, उसी प्रकार भारतवासी बिना किसी सक्षम नेतृत्व के उन्नति नहीं कर सकते।
देश की खराबियों के मूल कारण इस प्रकार हैं:
1. नेतृत्व का अभाव: देश में कोई ऐसा सशक्त नेता या मार्गदर्शक नहीं है जो जनता को सही दिशा दे सके।
2. एकता की कमी: बिना नेतृत्व के लोग बिखरे हुए हैं, एकजुट होकर काम नहीं कर पाते।
3. जागरूकता का अभाव: लोगों को यह भी नहीं पता कि उनकी समस्याएँ क्या हैं और उनका समाधान कैसे हो।
4. परावलंबन: विदेशी शासन के कारण देशवासी स्वयं निर्णय लेने में असमर्थ हो गए हैं।
लेखक का मानना है कि यदि देश को एक सुयोग्य, देशभक्त और दूरदर्शी नेतृत्व मिले तो देश की सभी खराबियाँ दूर हो सकती हैं। इसीलिए उन्होंने मूल कारण के रूप में नेतृत्व के अभाव को रेखांकित किया।
निष्कर्ष: लेखक का संदेश है कि देश की उन्नति के लिए सबसे पहले एक सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है जो जनता को जागरूक कर सही मार्ग पर ले जाए।
4देश की सब प्रकार से उन्नति हो, इसके लिए लेखक ने जो उपाय बताए उनमें से किन्हीं चार का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।Show solution
लेखक द्वारा बताए गए चार उपाय:
1. स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग:
लेखक ने कहा कि हमें विदेशी वस्तुओं का उपयोग बंद करके स्वदेशी वस्तुएँ अपनानी चाहिए। उदाहरण के रूप में उन्होंने बताया कि हम अमेरिका की बनी धोती, इंग्लैंड का कपड़ा, फ्रांस की कैंची और जर्मनी की मोमबत्ती उपयोग करते हैं। यदि हम अपने देश में ये वस्तुएँ बनाएँ तो धन देश में ही रहेगा।
2. आपसी एकता और प्रेम:
लेखक ने कहा कि बंगाली, मराठा, पंजाबी, मदरासी, हिंदू, मुसलमान, जैन सभी को एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए। मत-मतांतर का आग्रह छोड़कर 'जो हिंदुस्तान में रहे वह हिंदू' — इस महामंत्र को अपनाना चाहिए।
3. परिश्रम की आदत:
बचपन से ही बच्चों में मेहनत करने की आदत डालनी चाहिए। सौ-सौ महलों के लाड़-प्यार में पलकर दुनिया से बेखबर रहना उचित नहीं। उदाहरण: यूरोपीय देशों में बच्चों को बचपन से ही परिश्रमी बनाया जाता है।
4. अपनी भाषा में उन्नति:
लेखक ने कहा कि परदेशी भाषा का भरोसा छोड़कर अपनी भाषा में शिक्षा और उन्नति करनी चाहिए। जो किताबें, खेल और बातचीत देश की भलाई करें, वही अपनानी चाहिए।
निष्कर्ष: इन उपायों को अपनाकर देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति संभव है।
5लेखक जनता से मत-मतांतर छोड़कर आपसी प्रेम बढ़ाने का आग्रह क्यों करता है?Show solution
व्याख्या एवं उत्तर:
लेखक जनता से मत-मतांतर छोड़कर आपसी प्रेम बढ़ाने का आग्रह निम्नलिखित कारणों से करता है:
1. राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता:
भारत में अनेक धर्म, जाति और संप्रदाय हैं। यदि ये सब आपस में लड़ते रहेंगे तो देश कभी उन्नति नहीं कर सकता। एकजुट होकर ही विदेशी शासन का सामना किया जा सकता है।
2. विदेशी शासन का लाभ उठाना:
अंग्रेज़ 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाते थे। धार्मिक और जातीय विभाजन को बढ़ावा देकर वे भारतीयों को कमज़ोर रखते थे। आपसी प्रेम से यह षड्यंत्र विफल हो सकता था।
3. आर्थिक उन्नति:
जब सभी मिलकर काम करेंगे — चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों — तो देश की कारीगरी और व्यापार बढ़ेगा और धन देश में ही रहेगा।
4. सामाजिक सद्भाव:
लेखक का महामंत्र है — 'जो हिंदुस्तान में रहे, चाहे किसी रंग, किसी जाति का क्यों न हो, वह हिंदू।' इससे सामाजिक सद्भाव और भाईचारा बढ़ेगा।
निष्कर्ष: लेखक का मानना है कि धार्मिक और जातीय विभाजन देश की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है। आपसी प्रेम और एकता ही देश को शक्तिशाली बना सकती है।
6आज देश की आर्थिक स्थिति के संदर्भ में नीचे दिए गए वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए— 'जैसे हजार धारा होकर गंगा समुद्र में मिली हैं, वैसे ही तुम्हारी लक्ष्मी हजार तरह से इंग्लैंड, फरांसीस, जर्मनी, अमेरिका को जाती हैं।'Show solution
आशय:
इस वाक्य में लेखक ने एक सटीक उपमा के माध्यम से भारत की आर्थिक दुर्दशा का चित्रण किया है।
जिस प्रकार गंगा नदी हजारों धाराओं में बँटकर अंततः समुद्र में विलीन हो जाती है और उसका जल वापस नहीं आता, उसी प्रकार भारत की संपत्ति (लक्ष्मी) हजारों तरीकों से विदेशों — इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका — को चली जाती है और वापस नहीं आती।
वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता:
1. विदेशी वस्तुओं का आयात: आज भी भारत अरबों रुपये की विदेशी वस्तुएँ आयात करता है — इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, तेल आदि। इससे भारत का धन विदेश जाता है।
2. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: विदेशी कंपनियाँ भारत में व्यापार करके अपना मुनाफा विदेश ले जाती हैं।
3. विदेशी ब्रांड: भारतीय उपभोक्ता विदेशी ब्रांडों पर अधिक खर्च करते हैं।
4. तकनीकी निर्भरता: भारत अभी भी उच्च तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर है।
उपाय: 'मेक इन इंडिया', 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी योजनाएँ इसी समस्या का समाधान करने का प्रयास हैं।
निष्कर्ष: लेखक का यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। स्वदेशी अपनाकर ही देश की आर्थिक उन्नति संभव है।
7आपके विचार से देश की उन्नति किस प्रकार संभव है? कोई चार उदाहरण तर्क सहित दीजिए।Show solution
देश की उन्नति के चार उपाय (तर्क सहित):
1. शिक्षा का प्रसार:
शिक्षा किसी भी देश की उन्नति की नींव है। जब देश का प्रत्येक नागरिक शिक्षित होगा तो वह अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेगा, वैज्ञानिक सोच विकसित होगी और देश तकनीकी रूप से आगे बढ़ेगा। उदाहरण: जापान ने शिक्षा को प्राथमिकता देकर द्वितीय विश्वयुद्ध की तबाही के बाद भी विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाई।
2. स्वदेशी उद्योगों का विकास:
यदि हम अपने देश में ही वस्तुओं का निर्माण करें तो रोज़गार बढ़ेगा, धन देश में रहेगा और आर्थिक निर्भरता कम होगी। उदाहरण: 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत मोबाइल फोन निर्माण में भारत आत्मनिर्भर होता जा रहा है।
3. सामाजिक एकता और सद्भाव:
जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव को भुलाकर यदि सभी नागरिक मिलकर काम करें तो देश की शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी। उदाहरण: स्वतंत्रता संग्राम में सभी वर्गों ने मिलकर अंग्रेज़ों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया।
4. विज्ञान और तकनीक में निवेश:
आधुनिक युग में वही देश आगे है जो विज्ञान और तकनीक में अग्रणी है। अनुसंधान और नवाचार में निवेश से देश की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। उदाहरण: इसरो ने कम लागत में मंगलयान भेजकर विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
निष्कर्ष: देश की उन्नति के लिए शिक्षा, स्वदेशी उद्योग, एकता और तकनीकी विकास — ये चारों मिलकर काम करें तो भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है।
8भाषण की किन्हीं चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए कि पाठ 'भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?' एक भाषण है।Show solution
भाषण की चार विशेषताएँ:
1. श्रोताओं को सीधे संबोधन:
भाषण में वक्ता अपने श्रोताओं को सीधे 'आप', 'तुम', 'भाइयो' आदि कहकर संबोधित करता है।
*उदाहरण:* पाठ में — 'भाई हिंदुओ!', 'भाइयो, अब तो नींद से चौंको' — यह सीधा संबोधन भाषण की पहचान है।
2. भावनात्मक अपील:
भाषण में श्रोताओं की भावनाओं को जगाने के लिए प्रेरणादायक और भावपूर्ण भाषा का प्रयोग होता है।
*उदाहरण:* 'हाय अफ्रासोस, तुम ऐसे हो गए कि अपने निज के काम की वस्तु भी नहीं बना सकते।' — यह भावनात्मक अपील है।
3. उदाहरण और दृष्टांतों का प्रयोग:
भाषण को प्रभावशाली बनाने के लिए उदाहरण, कहानियाँ और दृष्टांत दिए जाते हैं।
*उदाहरण:* 'एक बेफिकरे माँगनी का कपड़ा पहिनकर किसी महफिल में गए' — यह दृष्टांत विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता को स्पष्ट करता है।
4. आह्वान और प्रेरणा:
भाषण में श्रोताओं को कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
*उदाहरण:* 'अपने देश की सब प्रकार उन्नति करो। जिसमें तुम्हारी भलाई हो वैसी ही किताब पढ़ो, वैसे ही खेल खेलो।' — यह स्पष्ट आह्वान है।
निष्कर्ष: उपर्युक्त सभी विशेषताएँ इस पाठ में स्पष्ट रूप से दिखती हैं, अतः यह पाठ निश्चित रूप से एक प्रभावशाली भाषण है।
9'अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो' से लेखक का क्या तात्पर्य है? वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।Show solution
लेखक का तात्पर्य:
लेखक का आशय है कि देश की उन्नति तभी संभव है जब हम अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा को माध्यम बनाकर शिक्षा, व्यापार, विज्ञान और साहित्य का विकास करें। विदेशी भाषा पर निर्भरता से:
- हम अपनी संस्कृति और पहचान खो देते हैं।
- आम जनता शिक्षा से वंचित रह जाती है क्योंकि विदेशी भाषा सबकी पहुँच में नहीं होती।
- देश का बौद्धिक विकास रुक जाता है।
भारतेंदु का मानना था कि जब तक हम अपनी भाषा में ज्ञान-विज्ञान का विकास नहीं करेंगे, तब तक देश की वास्तविक उन्नति संभव नहीं है।
वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता:
1. शिक्षा नीति 2020: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पर बल दिया गया है, जो भारतेंदु के विचारों की पुष्टि करती है।
2. तकनीकी विकास: आज हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में तकनीकी और वैज्ञानिक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
3. न्यायपालिका और प्रशासन: उच्च न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
4. चुनौती: आज भी अंग्रेज़ी को प्रतिष्ठा की भाषा माना जाता है और हिंदी माध्यम के छात्रों को कमतर आँका जाता है — यह भारतेंदु की चिंता आज भी प्रासंगिक है।
निष्कर्ष: भारतेंदु का यह विचार आज भी उतना ही सत्य और प्रासंगिक है। अपनी भाषा में उन्नति करना राष्ट्रीय स्वाभिमान और वास्तविक विकास दोनों के लिए आवश्यक है।
10(क)निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए — (क) सास के अनुमोदन से……………फिर परदेस चला जाएगा।Show solution
व्याख्या:
इस गद्यांश में भारतेंदु ने एक व्यंग्यात्मक दृष्टांत के माध्यम से भारतीय समाज की उस मानसिकता पर प्रहार किया है जिसमें लोग अपने स्वार्थ और सुविधा के लिए देश की उपेक्षा करते हैं।
लेखक का आशय है कि जिस प्रकार एक दामाद सास की अनुमति और आशीर्वाद लेकर ससुराल में कुछ दिन रहता है, अपना काम निकालता है और फिर परदेस चला जाता है — उसी प्रकार अंग्रेज़ और अन्य विदेशी व्यापारी भारत में आते हैं, यहाँ की संपत्ति और संसाधनों का उपयोग करते हैं, धन कमाते हैं और फिर अपने देश लौट जाते हैं। भारत उनके लिए केवल एक साधन है, न कि अपना देश।
इस दृष्टांत के माध्यम से लेखक यह भी बताना चाहता है कि भारतवासी इस स्थिति को समझते हुए भी चुप रहते हैं, जैसे सास दामाद को मना नहीं कर पाती।
विशेष: इस गद्यांश में लेखक ने पारिवारिक संबंधों के उदाहरण से एक जटिल आर्थिक-राजनीतिक सत्य को सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
10(ख)निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए — (ख) दरिद्र कुंडुबी इस तरह……………वही दशा हिंदुस्तान की है।Show solution
व्याख्या:
इस गद्यांश में भारतेंदु ने एक दरिद्र (गरीब) कुनबे (परिवार) का उदाहरण देकर भारत की तत्कालीन दयनीय आर्थिक और सामाजिक स्थिति का चित्रण किया है।
लेखक का आशय है कि जिस प्रकार एक गरीब परिवार में सभी सदस्य अपनी-अपनी ज़रूरतों और समस्याओं में इतने उलझे रहते हैं कि वे एकजुट होकर परिवार की उन्नति के बारे में नहीं सोच पाते — कोई बीमार है, कोई भूखा है, कोई आपस में लड़ रहा है — ठीक वैसी ही दशा हिंदुस्तान की है।
भारत में भी:
- लोग जातीय और धार्मिक विवादों में उलझे हैं।
- गरीबी और अज्ञान के कारण लोग देश की बड़ी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे पाते।
- आपसी फूट के कारण कोई सामूहिक प्रयास नहीं हो पाता।
विशेष: यह उपमा अत्यंत सटीक और मार्मिक है। लेखक ने एक साधारण पारिवारिक दृश्य के माध्यम से राष्ट्रीय समस्या को बड़े प्रभावशाली ढंग से उजागर किया है।
10(ग)निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए — (ग) वास्तविक धर्म तो……………शोध और बदले जा सकते हैं।Show solution
व्याख्या:
इस गद्यांश में भारतेंदु ने धर्म के वास्तविक स्वरूप और उसके बाह्य आडंबरों में अंतर स्पष्ट किया है।
लेखक का कहना है कि वास्तविक धर्म वह है जो मनुष्य को सत्य, प्रेम, करुणा, परोपकार और नैतिकता की ओर ले जाए। यह धर्म शाश्वत और अपरिवर्तनीय है।
किंतु धर्म के नाम पर जो बाह्य आचार-विचार, कर्मकांड, रीति-रिवाज और परंपराएँ प्रचलित हैं, वे मनुष्य-निर्मित हैं। इन्हें समय और परिस्थिति के अनुसार शोधा (परिष्कृत) और बदला जा सकता है। यदि कोई परंपरा समाज के लिए हानिकारक हो तो उसे त्यागना ही उचित है।
लेखक का संदेश है कि धर्म के नाम पर रूढ़िवादिता और अंधविश्वास को पकड़े रहना उचित नहीं। समाज की उन्नति के लिए धार्मिक सुधार आवश्यक है।
विशेष: यह विचार भारतेंदु की प्रगतिशील और सुधारवादी दृष्टि को दर्शाता है। वे धर्म के विरोधी नहीं थे, बल्कि धर्म के नाम पर फैले पाखंड और रूढ़िवाद के विरोधी थे।
योग्यता-विस्तार
1देश की उन्नति के लिए भारतेंदु ने जो आह्वान किया है उसे विस्तार से लिखिए।Show solution
भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपने भाषण में देशवासियों से निम्नलिखित आह्वान किया:
1. नींद से जागने का आह्वान:
'भाइयो, अब तो नींद से चौंको' — लेखक ने देशवासियों को उनकी उदासीनता और आलस्य से जगाने का आह्वान किया।
2. स्वदेशी अपनाने का आह्वान:
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके स्वदेशी वस्तुएँ अपनाने का आग्रह किया ताकि देश का धन देश में रहे।
3. एकता का आह्वान:
बंगाली, मराठा, पंजाबी, मदरासी, हिंदू, मुसलमान, जैन — सभी को एक-दूसरे का हाथ थामने का आह्वान किया।
4. परिश्रम का आह्वान:
बचपन से मेहनत की आदत डालने और आलस्य त्यागने का आग्रह किया।
5. अपनी भाषा में उन्नति का आह्वान:
परदेशी भाषा का मोह छोड़कर अपनी भाषा में शिक्षा और उन्नति करने का आह्वान किया।
6. मत-मतांतर छोड़ने का आह्वान:
धार्मिक और जातीय विभेद भुलाकर राष्ट्रीय एकता स्थापित करने का आग्रह किया।
7. देशहित में सोचने का आह्वान:
जो किताबें, खेल और बातचीत देश की भलाई करें, वही अपनाने का आह्वान किया।
निष्कर्ष: भारतेंदु का यह आह्वान आज भी उतना ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।
2पाठ में आए बोलचाल के शब्दों की सूची बनाइए और उनके अर्थ लिखिए।Show solution
| बोलचाल का शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अफ्रासोस | खेद, दुख, अफसोस |
| बेफिकरे | लापरवाह, निश्चिंत |
| माँगनी | उधार ली हुई, माँगी हुई |
| महफिल | सभा, बैठक |
| मूर्छे | मूँछें |
| रहै | रहे |
| पहिनकर | पहनकर |
| अंगा | कुर्ता, ऊपरी वस्त्र |
| सिर झारना | सिर खुजलाना |
| बेखबर | अनजान, जानकारी न होना |
| कमबख्ती | अभागापन, दुर्भाग्य |
| चौंको | जागो, सचेत हो जाओ |
| मसल | मिसाल, उदाहरण |
| तुच्छ | छोटी, साधारण |
| परदेस | विदेश, दूसरा देश |
| लाड़-प्यार | दुलार, स्नेह |
| मत-मतांतर | विभिन्न धर्म और संप्रदाय |
| जाप | बार-बार दोहराना |
नोट: पाठ की भाषा खड़ी बोली हिंदी का प्रारंभिक रूप है जिसमें उर्दू, फारसी और देशज शब्दों का मिश्रण है।
3भारतेंदु उर्दू में किस उपनाम से कविताएँ लिखते थे? उनकी कुछ उर्दू कविताएँ ढूँढ़कर लिखिए।Show solution
भारतेंदु हरिश्चंद्र उर्दू में 'रसा' उपनाम से कविताएँ लिखते थे।
परिचय: भारतेंदु बहुभाषाविद् थे। वे हिंदी, उर्दू, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी — सभी भाषाओं में लिखते थे। उर्दू में उनकी रचनाएँ 'रसा' नाम से प्रसिद्ध हैं।
उनकी उर्दू कविताओं के उदाहरण:
*(विद्यार्थियों को निर्देश: उर्दू कविताएँ पुस्तकालय में उपलब्ध भारतेंदु की रचनावली या इंटरनेट पर 'भारतेंदु रसा उर्दू कविता' खोजकर प्राप्त करें।)*
उनकी उर्दू रचनाओं में गज़लें और नज़्में प्रमुख हैं जिनमें देशप्रेम, समाज-सुधार और श्रृंगार के भाव मिलते हैं।
नोट: यह प्रश्न स्वाध्याय पर आधारित है। विद्यार्थी भारतेंदु की संपूर्ण रचनावली या किसी साहित्यिक संग्रह से उनकी उर्दू कविताएँ खोजकर लिखें।
4पृथ्वीराज चौहान की कथा अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
परिचय: पृथ्वीराज चौहान (1149-1192 ई.) दिल्ली और अजमेर के महान राजपूत शासक थे। वे 'राय पिथौरा' के नाम से भी जाने जाते थे।
वीरता: पृथ्वीराज चौहान अत्यंत वीर और पराक्रमी योद्धा थे। उन्होंने अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की। उनके दरबार में चंदबरदाई जैसे महाकवि थे जिन्होंने 'पृथ्वीराज रासो' की रचना की।
तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): मोहम्मद गोरी ने भारत पर आक्रमण किया। तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज ने गोरी को बुरी तरह पराजित किया और उसे जीवनदान दे दिया।
तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): गोरी ने पुनः आक्रमण किया। इस बार पृथ्वीराज के सामंतों की फूट और रणनीतिक कमज़ोरी के कारण वे पराजित हुए और बंदी बना लिए गए।
शब्दभेदी बाण: बंदी अवस्था में पृथ्वीराज को अंधा कर दिया गया। किंतु चंदबरदाई की सहायता से उन्होंने गोरी की आवाज़ सुनकर शब्दभेदी बाण से उसे मार डाला और फिर स्वयं भी वीरगति को प्राप्त हुए।
महत्त्व: पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के अंतिम स्वतंत्र हिंदू सम्राट माने जाते हैं। उनकी वीरता और बलिदान आज भी प्रेरणादायक है।
भारतेंदु का संदर्भ: भारतेंदु ने पृथ्वीराज का उल्लेख इसलिए किया क्योंकि उनकी पराजय के बाद भारत में विदेशी शासन का लंबा दौर शुरू हुआ, जो भारतीयों की फूट और अदूरदर्शिता का परिणाम था।
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