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Chapter 23 of 30
NCERT Solutions

वाख

Bihar Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for वाख — Bihar Board Class 9 Hindi.

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8 Questions Solved · 2 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1'रस्सी' यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है?Show solution
दिया गया है: ललदाद के वाख में 'रस्सी' शब्द का प्रयोग।

उत्तर:
'रस्सी' यहाँ साँस (प्राण-शक्ति) के लिए प्रयुक्त हुआ है। कवयित्री ने इस रस्सी को कच्चे धागे की बताया है — अर्थात् यह अत्यंत कमज़ोर और नाशवान है। जिस प्रकार कच्चे धागे की रस्सी कभी भी टूट सकती है, उसी प्रकार मनुष्य की साँसें भी कभी भी समाप्त हो सकती हैं। इस प्रतीक के माध्यम से कवयित्री ने मानव-जीवन की क्षणभंगुरता और अनिश्चितता को व्यक्त किया है।
2कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं?Show solution
दिया गया है: कवयित्री मुक्ति के लिए प्रयास कर रही है, फिर भी सफलता नहीं मिल रही।

उत्तर:
कवयित्री के मुक्ति के प्रयास इसलिए व्यर्थ हो रहे हैं क्योंकि —

1. उनका जीवन-रूपी कच्चे सकोरे (कमज़ोर मिट्टी के बर्तन) जैसा है, जो संसार-सागर को पार करने में असमर्थ है।
2. साँसों की रस्सी कच्चे धागे की तरह कमज़ोर है — कभी भी टूट सकती है।
3. कवयित्री सीधी राह (सत्य और ईश्वर का मार्ग) पर न चलकर सांसारिक छल-छद्म के रास्ते पर चलती रही।
4. उन्होंने आत्मालोचन (जेब टटोलना) किया तो पाया कि उनके पास कोई सद्गुण या पुण्य-संचय नहीं है।

इस प्रकार सही मार्ग और सद्कर्मों के अभाव में मुक्ति के सारे प्रयास निष्फल हो रहे हैं।
3कवयित्री का 'घर जाने की चाह' से क्या तात्पर्य है?Show solution
दिया गया है: कवयित्री को 'घर जाने की चाह' है।

उत्तर:
'घर जाने की चाह' से कवयित्री का तात्पर्य ईश्वर से मिलन अथवा मोक्ष-प्राप्ति से है। यहाँ 'घर' का अर्थ वह परम धाम है जहाँ आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है। कवयित्री इस नश्वर संसार-सागर को पार करके अपने वास्तविक घर — अर्थात् ईश्वर की शरण — में पहुँचना चाहती है। यह आत्मा की उस स्वाभाविक लालसा को व्यक्त करता है जो उसे उसके मूल स्रोत (परमात्मा) की ओर खींचती है।
4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।
(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,
न खाकर बनेगा अहंकारी।
Show solution
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।

भाव: इस पंक्ति में 'जेब टटोलना' का अर्थ है आत्मालोचन करना — अपने भीतर झाँककर देखना। 'कौड़ी न पाई' का अर्थ है कि आत्म-परीक्षण करने पर कवयित्री को अपने भीतर कोई सद्गुण, पुण्य या आध्यात्मिक संपदा नहीं मिली। अर्थात् जब उन्होंने अपने जीवन का लेखा-जोखा किया तो पाया कि उनके पास ईश्वर को अर्पित करने योग्य कोई भी सत्कर्म या भक्ति नहीं है। यह पंक्ति आत्म-ग्लानि और विनम्रता को व्यक्त करती है।

---

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं, न खाकर बनेगा अहंकारी।

भाव: इस पंक्ति में कवयित्री दो अतियों से बचने का संदेश दे रही हैं —
- 'खा-खाकर' — अत्यधिक भोग-विलास में लिप्त रहने से आत्मिक उन्नति नहीं होती।
- 'न खाकर' — पूर्ण उपवास और कठोर तपस्या करने से अहंकार उत्पन्न होता है कि 'मैंने बड़ी साधना की'।

कवयित्री का संदेश है कि मध्यम मार्ग (संतुलित जीवन) ही श्रेयस्कर है। न अति-भोग, न अति-त्याग — बल्कि समभाव से जीना ही ईश्वर-प्राप्ति का सही मार्ग है।
5बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललदाद ने क्या उपाय सुझाया है?Show solution
दिया गया है: बंद द्वार की साँकल खोलने का उपाय।

उत्तर:
'बंद द्वार की साँकल' से तात्पर्य बंद चेतना या अज्ञान के आवरण से है जो आत्मा को परमात्मा से अलग रखता है।

ललदाद ने इसे खोलने के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं:

1. सम (शम) भाव — अंतःकरण और बाह्य इंद्रियों का निग्रह करना।
2. समभावी बनना — सभी के प्रति समानता की भावना रखना।
3. आत्म-ज्ञान — स्वयं को जानना ही ईश्वर को जानना है।
4. हिंदू-मुसलमान का भेद न करना — सर्वत्र एक ही ईश्वर (शिव) को देखना।

इन उपायों से मन की बंद साँकल खुलेगी, चेतना व्यापक होगी और मन मुक्त होगा।
6ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं, लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्ति नहीं होती। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है?Show solution
दिया गया है: हठयोग जैसी कठिन साधना से भी लक्ष्य प्राप्त नहीं होता।

उत्तर:
यह भाव निम्नलिखित पंक्तियों में व्यक्त हुआ है —

"सुषुम-सेतु पर खड़ी थी,\text{"सुषुम-सेतु पर खड़ी थी,}
गई न सीधी राह।"\text{गई न सीधी राह।"}

स्पष्टीकरण: 'सुषुम-सेतु' से तात्पर्य सुषुम्ना नाड़ी रूपी पुल से है जो हठयोग की एक कठिन साधना-विधि है। कवयित्री कहती हैं कि वे इस कठिन हठयोग की साधना पर खड़ी रहीं, परंतु फिर भी सीधी राह (ईश्वर-प्राप्ति का सच्चा मार्ग) पर नहीं चल सकीं। इसका अर्थ है कि केवल बाह्य कठिन साधनाओं से ईश्वर-प्राप्ति नहीं होती, उसके लिए आंतरिक शुद्धि और सच्ची भक्ति आवश्यक है।
7'ज्ञानी' से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?Show solution
दिया गया है: चौथे वाख में 'ज्ञानी' शब्द का प्रयोग।

उत्तर:
कवयित्री ललदाद के अनुसार 'ज्ञानी' वह व्यक्ति है जो स्वयं को जानता है — अर्थात् जिसे आत्म-ज्ञान प्राप्त है। कवयित्री कहती हैं —

*"ज्ञानी है तो स्वयं को जान,
वही है साहिब से पहचान।"*

इसका अभिप्राय यह है कि जो व्यक्ति अपनी आत्मा को पहचान लेता है, वही वास्तव में ज्ञानी है और उसी को ईश्वर (साहिब) की पहचान होती है। ज्ञानी वह नहीं जो केवल शास्त्र पढ़े या बाह्य आडंबर करे, बल्कि ज्ञानी वह है जो हिंदू-मुसलमान का भेद मिटाकर सर्वत्र एक ही ईश्वर को देखे और आत्म-साक्षात्कार करे।

रचना और अभिव्यक्ति

8हमारे संतों, भक्तों और महापुरुषों ने बार-बार चेताया है कि मनुष्यों में परस्पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, लेकिन आज भी हमारे समाज में भेदभाव दिखाई देता है—
(क) आपकी दृष्टि में इस कारण देश और समाज को क्या हानि हो रही है?
(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए अपने सुझाव दीजिए।
Show solution
(क) भेदभाव से देश और समाज को हानि:

जाति, धर्म, लिंग और वर्ग के आधार पर भेदभाव से देश और समाज को निम्नलिखित हानियाँ हो रही हैं —

1. राष्ट्रीय एकता को खतरा — सांप्रदायिक दंगे और जातीय हिंसा देश की एकता और अखंडता को कमज़ोर करते हैं।
2. विकास में बाधा — जब समाज का एक वर्ग शिक्षा और अवसरों से वंचित रहता है तो देश का समग्र विकास रुक जाता है।
3. प्रतिभा का नाश — भेदभाव के कारण कई प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाते।
4. सामाजिक अशांति — आपसी वैमनस्य और घृणा से समाज में अशांति और असुरक्षा का वातावरण बनता है।
5. मानवीय गरिमा का हनन — भेदभाव मनुष्य की मूलभूत गरिमा और समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

---

(ख) भेदभाव मिटाने के सुझाव:

1. शिक्षा — विद्यालयों में समानता, भाईचारे और सहिष्णुता के मूल्यों की शिक्षा दी जाए।
2. अंतर-धार्मिक संवाद — विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाए।
3. कानून का पालन — भेदभाव विरोधी कानूनों को कड़ाई से लागू किया जाए।
4. मीडिया की भूमिका — मीडिया और सोशल मीडिया पर भेदभाव फैलाने वाली सामग्री पर रोक लगाई जाए।
5. महापुरुषों के विचारों का प्रचार — ललदाद, कबीर, मीरा, गाँधी जैसे संतों और महापुरुषों के समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया जाए।
6. व्यक्तिगत स्तर पर — प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में भेदभाव न करने का संकल्प ले।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in वाख for Bihar Board Class 9 Hindi?
वाख covers several key topics that are frequently asked in Bihar Board Class 9 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
How to score full marks in वाख — Bihar Board Class 9 Hindi?
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Sources & Official References

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