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Chapter 30 of 30
NCERT Solutions

बच्चे काम पर जा रहे हैं

Bihar Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for बच्चे काम पर जा रहे हैं — Bihar Board Class 9 Hindi.

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10 Questions Solved · 3 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आपके मन-मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है उसे लिखकर व्यक्त कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता की पहली दो पंक्तियाँ — 'कोहरे से ढकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं।'

विचार एवं उत्तर:
कविता की पहली दो पंक्तियाँ पढ़ते ही मन में एक अत्यंत करुण और हृदयविदारक चित्र उभरता है। सुबह का समय है, चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ है। ठंड इतनी अधिक है कि साँस लेने पर भाप निकलती है। ऐसे कड़कड़ाती ठंड के मौसम में जब सामान्य बच्चे रजाई में दुबके होते हैं, तब छोटे-छोटे, मासूम बच्चे — जिनके हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए — काम पर जाने के लिए सड़क पर निकल पड़े हैं। उनके चेहरे पर बचपन की मुस्कान नहीं, बल्कि थकान और मजबूरी के भाव हैं। यह चित्र समाज की उस क्रूर वास्तविकता को उजागर करता है जहाँ गरीबी बच्चों से उनका बचपन छीन लेती है।
2कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल के रूप में पूछा जाना चाहिए कि 'काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?' कवि की दृष्टि में उसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए?Show solution
दिया गया: कवि राजेश जोशी की कविता 'बच्चे काम पर जा रहे हैं'।

अवधारणा: प्रश्न चेतना जगाता है, विवरण उदासीनता को बढ़ावा देता है।

उत्तर:
कवि की दृष्टि में इस बात को प्रश्न के रूप में इसलिए पूछा जाना चाहिए क्योंकि —

1. जागरूकता उत्पन्न करना: जब हम किसी बात को विवरण के रूप में कहते हैं, तो वह एक सामान्य तथ्य बनकर रह जाती है और लोग उसे अनदेखा कर देते हैं। परंतु जब उसे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है, तो वह पाठक/श्रोता के मन में बेचैनी और जिज्ञासा उत्पन्न करता है।

2. उत्तरदायित्व का बोध: 'काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?' — यह प्रश्न समाज, सरकार और प्रत्येक नागरिक को उनकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाता है।

3. समस्या के मूल कारण की खोज: प्रश्न हमें सोचने पर विवश करता है कि इसके पीछे गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक असमानता जैसे कारण हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है।

4. संवेदनशीलता जगाना: प्रश्न मनुष्य की सुप्त संवेदनाओं को जगाता है और उसे कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार कवि चाहता है कि यह प्रश्न हर व्यक्ति के मन में गूँजे और वह बाल श्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए सक्रिय हो।
3सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से बच्चे वंचित क्यों हैं?Show solution
दिया गया: कविता में बच्चों के काम पर जाने का संदर्भ।

उत्तर:
सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से बच्चे निम्नलिखित कारणों से वंचित हैं —

1. गरीबी: इन बच्चों के परिवार अत्यंत निर्धन हैं। उनके पास दो वक्त की रोटी जुटाना भी कठिन है, ऐसे में खिलौने, किताबें या मनोरंजन के साधन खरीदना असंभव है।

2. सामाजिक असमानता: समाज में धन का असमान वितरण है। एक वर्ग के पास सभी सुख-सुविधाएँ हैं, जबकि दूसरा वर्ग बुनियादी जरूरतों से भी वंचित है।

3. बाल श्रम की विवशता: इन बच्चों को कम उम्र में ही काम पर जाना पड़ता है, जिससे उनके पास खेलने-कूदने और पढ़ने का न समय है, न साधन।

4. शिक्षा का अभाव: शिक्षा से वंचित होने के कारण ये बच्चे उस चक्र से बाहर नहीं निकल पाते जो उन्हें सुविधाओं से दूर रखता है।

5. सरकारी उदासीनता: बाल कल्याण की योजनाएँ पूरी तरह लागू न होने के कारण भी ये बच्चे अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।
4दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं?Show solution
दिया गया: समाज में बाल श्रम के प्रति उदासीनता का संदर्भ।

उत्तर:
इस उदासीनता के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं —

1. अभ्यस्तता: लोग इस दृश्य को इतनी बार देख चुके हैं कि यह उनके लिए सामान्य बात बन गई है। जो चीज रोज दिखती है, उस पर ध्यान देना बंद हो जाता है।

2. स्वार्थपरता: आधुनिक जीवन में लोग अपनी समस्याओं में इतने व्यस्त हैं कि दूसरों की पीड़ा उन्हें प्रभावित नहीं करती।

3. संवेदनहीनता: समाज में संवेदनशीलता का ह्रास हुआ है। लोग सोचते हैं कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

4. सामाजिक स्वीकृति: कुछ लोग बाल श्रम को गरीब परिवारों की मजबूरी मानकर स्वीकार कर लेते हैं और इसे बदलने की कोशिश नहीं करते।

5. जागरूकता का अभाव: बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं कि बाल श्रम एक अपराध है और संविधान इसे प्रतिबंधित करता है।

6. व्यवस्था पर निर्भरता: लोग सोचते हैं कि यह सरकार और प्रशासन का काम है, वे स्वयं कुछ नहीं कर सकते।

निष्कर्ष: यह उदासीनता समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है। जब तक प्रत्येक नागरिक इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, बाल श्रम समाप्त नहीं होगा।
5आपने अपने शहर में बच्चों को कब-कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है?Show solution
नोट: यह प्रश्न छात्र के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। नीचे एक आदर्श उत्तर दिया जा रहा है जिसे छात्र अपने अनुभव के अनुसार परिवर्तित कर सकते हैं।

उत्तर:
मैंने अपने शहर में बच्चों को निम्नलिखित स्थानों पर और समयों पर काम करते देखा है —

1. ढाबों और होटलों में: सुबह से रात तक छोटे-छोटे बच्चे बर्तन माँजते, खाना परोसते और सफाई करते दिखते हैं।

2. चाय की दुकानों पर: सुबह-सुबह स्कूल जाने के समय ये बच्चे चाय बनाते और ग्राहकों को देते दिखते हैं।

3. ईंट-भट्टों पर: गर्मियों की छुट्टियों में मैंने देखा है कि बच्चे ईंटें ढोने का काम करते हैं।

4. कूड़ा बीनते हुए: सुबह के समय सड़कों पर बच्चे कूड़े के ढेर से काम की चीजें बीनते दिखते हैं।

5. घरेलू काम में: कुछ घरों में छोटी उम्र की लड़कियाँ घरेलू नौकर के रूप में काम करती हैं।

6. दुकानों पर: बाजार में कई दुकानों पर बच्चे सामान उठाने-रखने का काम करते हैं।

यह सब देखकर मन में बहुत दुख होता है और लगता है कि इन बच्चों का बचपन छिन रहा है।
6बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है?Show solution
दिया गया: कविता 'बच्चे काम पर जा रहे हैं' — राजेश जोशी।

अवधारणा: बचपन मानव जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण अवस्था है।

उत्तर:
बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान इसलिए है क्योंकि —

1. बचपन का नाश: बचपन जीवन का सबसे सुंदर और निश्चिंत काल होता है। जब बच्चे काम पर जाते हैं तो उनका यह अनमोल काल हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है, जो कभी वापस नहीं आता।

2. भविष्य की बर्बादी: बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। जब वे शिक्षा और विकास से वंचित रहते हैं, तो पूरे देश और समाज का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

3. मानवता पर कलंक: बच्चों से उनका बचपन छीनना पूरी मानवता के लिए शर्म की बात है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारी सभ्यता और विकास खोखला है।

4. शारीरिक और मानसिक क्षति: कम उम्र में काम करने से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है, जो एक अपूरणीय क्षति है।

5. सामाजिक असंतुलन: जब एक वर्ग के बच्चे खेलते-पढ़ते हैं और दूसरे वर्ग के बच्चे काम करते हैं, तो यह सामाजिक असमानता की भयावह स्थिति को दर्शाता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार बाल श्रम केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सभ्यता के लिए एक बड़ा हादसा है।

रचना और अभिव्यक्ति

7काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने-आप को रखकर देखिए। आपको जो महसूस होता है उसे लिखिए।Show solution
नोट: यह प्रश्न कल्पनाशीलता और संवेदनशीलता पर आधारित है। नीचे एक आदर्श उत्तर दिया जा रहा है।

उत्तर:
जब मैं अपने-आप को उस बच्चे की जगह रखकर सोचता/सोचती हूँ जो काम पर जा रहा है, तो मेरे मन में अनेक भावनाएँ उमड़ती हैं —

सुबह उठते ही मन में यह इच्छा होती है कि काश! आज स्कूल जा सकता/सकती। जब मैं अपनी उम्र के बच्चों को स्कूल की वर्दी पहनकर, बस्ता लटकाए जाते देखता/देखती हूँ, तो मन में एक टीस उठती है। मेरा भी मन करता है कि मैं भी उनके साथ पढ़ूँ, खेलूँ, हँसूँ।

लेकिन घर की गरीबी और माँ-बाप की मजबूरी देखकर मन को समझाना पड़ता है। भारी मन से काम पर निकल पड़ता/पड़ती हूँ। हाथों में किताब की जगह झाड़ू या बर्तन होते हैं। दिन भर काम करते-करते थकान होती है, पर रुकने की इजाजत नहीं।

सबसे अधिक दुख तब होता है जब मालिक डाँटता है या मारता है। मन में गुस्सा आता है, पर कुछ कह नहीं सकता/सकती। रात को घर लौटने पर इतनी थकान होती है कि सपने देखने की भी शक्ति नहीं बचती।

काश! कोई होता जो मुझे भी पढ़ने का मौका देता, मेरे बचपन को वापस लौटाता।
8आपके विचार से बच्चों को काम पर क्यों नहीं भेजा जाना चाहिए? उन्हें क्या करने के मौके मिलने चाहिए?Show solution
दिया गया: बाल श्रम की समस्या और बच्चों के अधिकारों का संदर्भ।

उत्तर:

बच्चों को काम पर न भेजने के कारण:

1. शारीरिक विकास: बचपन में शरीर का विकास होता है। काम करने से यह विकास बाधित होता है और बच्चे कुपोषण तथा बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।

2. मानसिक विकास: बचपन में मस्तिष्क सबसे तेजी से विकसित होता है। काम के बोझ से मानसिक विकास रुक जाता है।

3. शिक्षा का अधिकार: भारतीय संविधान के अनुसार 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। काम पर जाने से यह अधिकार छिन जाता है।

4. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: बचपन में काम का बोझ बच्चों को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर बनाता है। वे हीनभावना और अवसाद के शिकार हो जाते हैं।

5. संविधान का उल्लंघन: अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना कानूनी अपराध है।

बच्चों को मिलने चाहिए ये अवसर:

1. शिक्षा का अवसर — गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क शिक्षा।
2. खेलकूद का अवसर — शारीरिक और मानसिक विकास के लिए।
3. कला और संगीत — रचनात्मकता के विकास के लिए।
4. स्वास्थ्य सुविधाएँ — स्वस्थ और पोषणयुक्त जीवन के लिए।
5. प्रेम और सुरक्षा — परिवार और समाज का संरक्षण।

निष्कर्ष: बच्चे देश का भविष्य हैं। उनका सर्वांगीण विकास ही एक स्वस्थ और समृद्ध समाज की नींव है।

पाठेतर सक्रियता

किसी कामकाजी बच्चे से संवाद कीजिए और पता लगाइए कि वह अपने काम करने की बात को किस भाव से लेता/लेती है?Show solution
नोट: यह गतिविधि-आधारित प्रश्न है। छात्र स्वयं किसी कामकाजी बच्चे से बात करें। नीचे एक आदर्श संवाद का उदाहरण दिया जा रहा है —

आदर्श उत्तर:
मैंने अपने मोहल्ले के एक ढाबे पर काम करने वाले रमेश (काल्पनिक नाम) से बात की। वह लगभग 10 वर्ष का था।

जब मैंने उससे पूछा कि वह काम करने के बारे में क्या सोचता है, तो उसने बताया कि शुरू में उसे बहुत बुरा लगता था। वह स्कूल जाना चाहता था, पर घर की गरीबी के कारण काम करना पड़ता है। अब वह इसे अपनी नियति मान चुका है। उसके चेहरे पर एक उदासी थी जो उसकी बातों से भी झलक रही थी। उसने कहा — 'क्या करें, घर में खाने को नहीं है, तो काम तो करना ही पड़ेगा।'

यह सुनकर मन बहुत दुखी हुआ।
जब वह अपनी उम्र के बच्चों को खेलने/पढ़ने जाते देखता/देखती है तो कैसा महसूस करता/करती है?Show solution
नोट: यह गतिविधि-आधारित प्रश्न है। नीचे एक आदर्श उत्तर दिया जा रहा है —

आदर्श उत्तर:
जब मैंने रमेश से पूछा कि जब वह अपनी उम्र के बच्चों को खेलते-पढ़ते देखता है तो कैसा महसूस करता है, तो उसकी आँखें भर आईं। उसने कहा — 'बहुत बुरा लगता है। मन करता है कि मैं भी उनके साथ खेलूँ, स्कूल जाऊँ। पर क्या करूँ, मेरी किस्मत में यही लिखा है।'

उसकी बातों से स्पष्ट था कि वह अपनी स्थिति से दुखी है, पर मजबूर है। उसके मन में एक टीस है जो उसे हमेशा सताती है। यह देखकर मन में यह संकल्प जागा कि हमें बाल श्रम के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।

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