नौबतखाने में इबादत
CBSE · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for नौबतखाने में इबादत — CBSE Class 10 Hindi.
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1शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?Show solution
उत्तर:
शहनाई की दुनिया में डुमराँव को निम्नलिखित कारणों से याद किया जाता है—
1. रीड (नरकट) का स्रोत: शहनाई बजाने के लिए जिस रीड (नरकट) की आवश्यकता होती है, वह डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। इस नरकट से ही शहनाई की रीढ़ बनाई जाती है, जिसे फूँककर शहनाई बजाई जाती है।
2. बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि: विश्वविख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव में ही हुआ था। उनके परदादा और पिता भी वहीं के निवासी थे।
निष्कर्ष: इस प्रकार डुमराँव एक ओर शहनाई के लिए आवश्यक नरकट की भूमि है, तो दूसरी ओर शहनाई के महान साधक बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि भी है। इसीलिए शहनाई की दुनिया में डुमराँव को सदा याद किया जाता है।
2बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर:
बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहे जाने के निम्नलिखित कारण हैं—
1. मंगल अवसरों पर शहनाई: शहनाई को भारतीय परंपरा में मांगलिक वाद्य माना जाता है। विवाह, पूजा-पाठ, उत्सव आदि शुभ अवसरों पर शहनाई बजाई जाती है।
2. काशी विश्वनाथ मंदिर में वादन: बिस्मिल्ला खाँ प्रतिदिन काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर शहनाई बजाते थे। उनकी शहनाई की धुन मंदिर के वातावरण को पवित्र और मंगलमय बनाती थी।
3. स्वतंत्रता दिवस पर वादन: 15 अगस्त 1947 को लालकिले पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई बजाई थी। यह स्वतंत्र भारत के लिए सबसे बड़ा मंगल अवसर था।
4. जीवनभर साधना: उन्होंने जीवनभर शहनाई को ईश्वर की इबादत का माध्यम मानकर बजाया।
निष्कर्ष: इन्हीं कारणों से बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया है।
3सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' की उपाधि क्यों दी गई होगी?Show solution
सुषिर-वाद्यों का अर्थ:
सुषिर का अर्थ है — छिद्र या छेद। जिन वाद्य यंत्रों में छेद होते हैं और जिन्हें फूँककर बजाया जाता है, उन्हें सुषिर-वाद्य कहते हैं। जैसे — बाँसुरी, शहनाई, नागस्वरम्, अलगोजा आदि।
शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' की उपाधि के कारण:
1. मधुर और विशिष्ट ध्वनि: शहनाई की ध्वनि अत्यंत मधुर, गहरी और हृदयस्पर्शी होती है। यह अन्य सुषिर वाद्यों की तुलना में अधिक प्रभावशाली है।
2. व्यापक स्वर-सीमा: शहनाई में सुर की विविधता और गहराई अन्य वाद्यों से अधिक होती है।
3. मांगलिक महत्त्व: शहनाई को मंदिरों, विवाह-समारोहों और राष्ट्रीय उत्सवों में बजाया जाता है, जो इसकी श्रेष्ठता को दर्शाता है।
4. भावनात्मक प्रभाव: शहनाई की धुन सुनने वाले के मन में भक्ति, प्रेम और आनंद की भावना जगाती है।
निष्कर्ष: इन्हीं विशेषताओं के कारण शहनाई को सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ अर्थात् 'शाह' की उपाधि दी गई होगी।
4आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) 'फटा सुर न बख्शें। लुगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।'
(ख) 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'Show solution
आशय:
यह कथन बिस्मिल्ला खाँ की संगीत के प्रति अटूट निष्ठा और भौतिक वस्तुओं के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। जब किसी ने उन्हें भारतरत्न मिलने पर बधाई दी और उनकी पत्नी ने नई साड़ी (लुगिया) की माँग की, तो उन्होंने कहा — 'ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि मुझे बेसुरा न करे, फटा हुआ सुर न दे। साड़ी तो कपड़े का टुकड़ा है, आज फटी है तो कल सिल जाएगी, लेकिन सुर एक बार बिगड़ जाए तो वापस नहीं आता।'
इस कथन से स्पष्ट होता है कि बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत और सुर ही सबसे बड़ी संपत्ति थी। वे भौतिक सुख-सुविधाओं की अपेक्षा अपनी कला को अधिक महत्त्व देते थे।
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(ख) 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'
आशय:
यह बिस्मिल्ला खाँ की ईश्वर से की गई प्रार्थना है। वे ईश्वर से माँगते हैं कि उन्हें ऐसा सुर दे जो इतना प्रभावशाली हो कि सुनने वाले की आँखों से स्वतः ही सच्चे और निश्छल आँसू बह निकलें — जैसे मोती बिना किसी कारण के चमकते हैं।
इस कथन से उनकी संगीत के प्रति गहरी आस्था, विनम्रता और ईश्वर-भक्ति का पता चलता है। वे संगीत को ईश्वर की देन मानते थे और चाहते थे कि उनका संगीत श्रोताओं के हृदय को सच्चे भाव से स्पर्श करे।
5काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?Show solution
उत्तर:
काशी में हो रहे निम्नलिखित परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे—
1. संगीत की उपेक्षा: काशी में शास्त्रीय संगीत की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही थी। संगीत के प्रति लोगों की रुचि और आदर कम होता जा रहा था।
2. गायकों-वादकों का पलायन: काशी के प्रतिभाशाली संगीतकार और कलाकार रोजी-रोटी की तलाश में काशी छोड़कर मुंबई जैसे महानगरों में जा रहे थे।
3. सांप्रदायिक सद्भाव का ह्रास: काशी में हिंदू-मुस्लिम एकता की जो परंपरा थी, वह कमजोर पड़ रही थी। बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे और इस बदलाव से दुखी होते थे।
4. मंगलध्वनि का लोप: काशी के मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में पहले जो संगीत की परंपरा थी, वह धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही थी।
5. भौतिकवाद का बढ़ना: लोग कला और संस्कृति की जगह भौतिक सुख-सुविधाओं को अधिक महत्त्व देने लगे थे।
निष्कर्ष: इन परिवर्तनों को देखकर बिस्मिल्ला खाँ बहुत व्यथित होते थे क्योंकि काशी उनके लिए केवल एक शहर नहीं, बल्कि संगीत और संस्कृति की आत्मा थी।
6पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि—
(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इनसान थे।Show solution
पाठ में निम्नलिखित प्रसंग इसके प्रमाण हैं—
1. मंदिर में शहनाई वादन: बिस्मिल्ला खाँ मुसलमान होते हुए भी काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर नियमित रूप से शहनाई बजाते थे। वे बालाजी मंदिर और विश्वनाथ मंदिर दोनों में श्रद्धापूर्वक वादन करते थे।
2. सरस्वती की उपासना: वे संगीत की देवी सरस्वती को मानते थे और उनकी पूजा करते थे।
3. मुहर्रम में भागीदारी: वे मुहर्रम के अवसर पर भी शहनाई बजाते थे और इस पर्व से गहरे जुड़े थे।
4. गंगा से प्रेम: वे गंगा को माँ मानते थे और काशी छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते थे।
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(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इनसान थे:
1. सादगी और विनम्रता: भारतरत्न जैसा सर्वोच्च सम्मान पाने के बाद भी वे सादगी से जीते रहे। उन्होंने कभी अहंकार नहीं किया।
2. निःस्वार्थ भाव: वे संगीत को ईश्वर की इबादत मानते थे, न कि धन कमाने का साधन।
3. देश-प्रेम: विदेश में बसने के प्रस्ताव को उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि काशी और गंगा को छोड़कर वे कहीं नहीं जा सकते।
4. सांप्रदायिक सद्भाव: उन्होंने जीवनभर हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
5. ईश्वर के प्रति समर्पण: वे हमेशा ईश्वर से अच्छे सुर की प्रार्थना करते थे, न कि धन-दौलत की।
7बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?Show solution
उत्तर:
बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को समृद्ध करने वाली घटनाएँ और व्यक्ति निम्नलिखित हैं—
व्यक्ति:
1. मामू अली बख्श खाँ: बिस्मिल्ला खाँ के मामू और गुरु अली बख्श खाँ काशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे। बालक बिस्मिल्ला उनके पीछे-पीछे जाते और उनका वादन सुनते। उन्हीं से उन्होंने शहनाई की प्रारंभिक शिक्षा ली।
2. रसूलनबाई और बतूलनबाई: ये दोनों गायिकाएँ थीं जिनका गायन सुनकर बिस्मिल्ला खाँ के संगीत में ठुमरी का भाव और मिठास आई।
घटनाएँ:
1. बालपन में मामू का वादन सुनना: बचपन में मामू के पीछे-पीछे मंदिर जाना और उनका वादन सुनना उनकी संगीत-रुचि का आधार बना।
2. काशी विश्वनाथ मंदिर में रियाज: वे प्रतिदिन बालाजी मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर रियाज करते थे। इस नियमित साधना ने उनके वादन को परिपक्व बनाया।
3. गंगा किनारे रियाज: गंगा के किनारे बैठकर शहनाई बजाना उनकी दिनचर्या थी। गंगा की लहरों और प्रकृति ने उनके संगीत को गहराई दी।
4. मुहर्रम का पर्व: मुहर्रम के दौरान आठ किलोमीटर तक पैदल चलकर शहनाई बजाना उनकी संगीत-साधना का अभिन्न अंग था।
निष्कर्ष: इन व्यक्तियों और घटनाओं ने मिलकर बिस्मिल्ला खाँ को एक महान संगीतकार बनाया।
8बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?Show solution
उत्तर:
बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया—
1. संगीत के प्रति समर्पण: उन्होंने जीवनभर संगीत की साधना की। भारतरत्न मिलने के बाद भी उनकी दिनचर्या नहीं बदली। वे अंतिम समय तक रियाज करते रहे।
2. सादगी और विनम्रता: इतने बड़े सम्मान के बावजूद वे सादे जीवन जीते रहे। उनमें कभी अहंकार नहीं आया।
3. धर्मनिरपेक्षता: मुसलमान होते हुए भी वे हिंदू मंदिरों में शहनाई बजाते थे और सरस्वती की उपासना करते थे। यह उनकी उदार सोच का प्रमाण है।
4. देशभक्ति: विदेश में बसने के प्रस्ताव को उन्होंने ठुकरा दिया। काशी और गंगा के प्रति उनका प्रेम अटूट था।
5. ईश्वर के प्रति आस्था: वे संगीत को ईश्वर की इबादत मानते थे। उनकी प्रार्थना हमेशा अच्छे सुर के लिए होती थी।
6. निःस्वार्थता: उन्होंने कभी संगीत को धन कमाने का साधन नहीं बनाया।
निष्कर्ष: बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सादगी, समर्पण और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना आज के समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है।
9मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
मुहर्रम इस्लाम का एक महत्त्वपूर्ण पर्व है जो हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। बिस्मिल्ला खाँ का इस पर्व से गहरा भावनात्मक जुड़ाव था।
जुड़ाव के प्रमुख बिंदु:
1. आठ किलोमीटर की यात्रा: मुहर्रम के अवसर पर बिस्मिल्ला खाँ पूरे आठ किलोमीटर तक पैदल चलते हुए शहनाई बजाते थे। यह उनकी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक था।
2. दुलदुल का जुलूस: मुहर्रम के जुलूस में दुलदुल (हजरत इमाम हुसैन के घोड़े का प्रतीक) के साथ शहनाई बजाना उनकी परंपरा थी।
3. भावनात्मक संबंध: मुहर्रम उनके लिए केवल एक धार्मिक पर्व नहीं था, बल्कि यह उनकी आत्मा से जुड़ा था। इस अवसर पर उनकी शहनाई में एक विशेष करुणा और भाव होता था।
4. बचपन से परंपरा: यह परंपरा उनके बचपन से चली आ रही थी और जीवनभर निभाई।
निष्कर्ष: मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ का जुड़ाव यह सिद्ध करता है कि वे केवल एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और धर्मनिष्ठ इनसान भी थे।
10बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
बिस्मिल्ला खाँ वास्तव में कला के अनन्य उपासक थे। इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं—
1. आजीवन रियाज: उन्होंने जीवन के अंतिम क्षण तक शहनाई का रियाज जारी रखा। उम्र और सम्मान ने उनकी साधना को कभी प्रभावित नहीं किया।
2. सुर को सर्वोच्च प्राथमिकता: जब उनकी पत्नी ने नई साड़ी माँगी, तो उन्होंने कहा — 'फटा सुर न बख्शें, लुगिया का क्या है।' यह कथन सिद्ध करता है कि उनके लिए कला भौतिक वस्तुओं से बढ़कर थी।
3. ईश्वर से सुर की प्रार्थना: वे ईश्वर से धन-दौलत नहीं, बल्कि अच्छे सुर की प्रार्थना करते थे — 'मेरे मालिक सुर बख्श दे।'
4. विदेश जाने से इनकार: अमेरिका में बसने के प्रस्ताव को उन्होंने इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वहाँ काशी और गंगा नहीं थी — उनकी कला का पोषण करने वाला वातावरण नहीं था।
5. संगीत को इबादत मानना: वे शहनाई वादन को ईश्वर की उपासना मानते थे। उनके लिए मंदिर में शहनाई बजाना और नमाज पढ़ना एक ही था।
निष्कर्ष: उपर्युक्त तर्कों से स्पष्ट है कि बिस्मिल्ला खाँ कला के सच्चे और अनन्य उपासक थे। उनके लिए शहनाई केवल वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य और ईश्वर से जोड़ने का माध्यम था।
11निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए—
(क) यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।
(ख) रीढ़ अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
(ग) रीढ़ नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।
(ड) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।Show solution
मिश्र वाक्य: वह वाक्य जिसमें एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों।
(क) यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।
- प्रधान उपवाक्य: यह जरूर है
- आश्रित उपवाक्य: कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं
- भेद: संज्ञा उपवाक्य (क्योंकि यह 'यह' का विस्तार करता है)
(ख) रीढ़ अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
- प्रधान उपवाक्य: रीढ़ अंदर से पोली होती है
- आश्रित उपवाक्य: जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है
- भेद: विशेषण उपवाक्य (क्योंकि यह 'रीढ़' संज्ञा की विशेषता बताता है)
(ग) रीढ़ नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।
- प्रधान उपवाक्य: रीढ़ नरकट से बनाई जाती है
- आश्रित उपवाक्य: जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है
- भेद: विशेषण उपवाक्य (क्योंकि यह 'नरकट' की विशेषता बताता है)
(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा।
- प्रधान उपवाक्य: उनको यकीन है
- आश्रित उपवाक्य: कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा
- भेद: संज्ञा उपवाक्य (क्योंकि यह 'यकीन' का विषय बताता है)
(ड) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
- प्रधान उपवाक्य: हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है
- आश्रित उपवाक्य: जिसकी गमक उसी में समाई है
- भेद: विशेषण उपवाक्य (क्योंकि यह 'वरदान' की विशेषता बताता है)
(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।
- प्रधान उपवाक्य: खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है
- आश्रित उपवाक्य: कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा
- भेद: संज्ञा उपवाक्य (क्योंकि यह 'यही' का विस्तार करता है)
12निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में बदलिए—
(क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।
(ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
(ग) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुगिया पे नाहीं।
(घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।Show solution
(क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।
मिश्रित वाक्य: यह जो बालसुलभ हँसी है, इसी में कई यादें बंद हैं।
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(ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
मिश्रित वाक्य: काशी में जो संगीत आयोजन की परंपरा है, वह बहुत प्राचीन एवं अद्भुत है।
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(ग) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुगिया पे नाहीं।
मिश्रित वाक्य: धत्! पगली, जो भारतरत्न हमको मिला है, वह शहनईया पे मिला है, लुगिया पे नाहीं।
---
(घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।
मिश्रित वाक्य: जो काशी का नायाब हीरा है, वह हमेशा से दो कौमों को प्रेरणा देता रहा है कि वे एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहें।
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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