कबीर के दोहे - कबीर
CBSE · Class 8 · Hindi
Practice quiz for कबीर के दोहे - कबीर — CBSE Class 8 Hindi. MCQs and questions with answers to test your preparation.
Interactive on Super Tutor
Studying कबीर के दोहे - कबीर? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for practice quiz and more.
1,000+ Class 8 students started this chapter today
Quick Quiz: कबीर के दोहे - कबीर
0/4Tap an answer to check it instantly. No sign-up needed for these 4.
कबीरदास के अनुसार सबसे बड़ा तप क्या है?
कबीर के अनुसार खजूर के पेड़ की तरह कैसे व्यक्ति व्यर्थ है?
गुरु और गोविंद के सामने कबीर किसे प्रणाम करना चाहते हैं?
कबीर के अनुसार किस प्रकार की वाणी बोलनी चाहिए?
Sample Questions
निंदक को पास रखने से क्या फायदा है?
Show answer
वह हमारी कमियां बताकर हमें सुधारता है
कबीर कहते हैं 'निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाया। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाया।' निंदक को पास रखने से यह फायदा है कि वह बिना पानी और साबुन के ही हमें स्वच्छ बना देता है। यानी वह हमारी बुराइयों और कमियों को बताता रहता है जिससे हम सुधर जाते हैं। निंदा सुनकर व्यक्ति अपनी गलतियों को पहचानता है और उन्हें दूर करने का प्रयास करता है।
साधु को सूप के समान क्यों कहा गया है?
Show answer
क्योंकि वह अच्छे-बुरे में भेद करता है
कबीर कहते हैं 'साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाया। सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाया।' सूप का काम होता है अनाज को साफ करना - अच्छे अनाज को अलग करना और भूसा उड़ा देना। इसी तरह साधु भी समाज में अच्छी बातों को अपनाता है और बुरी बातों को छोड़ देता है। वह सार रूप ज्ञान को ग्रहण करता है और व्यर्थ की बातों को त्याग देता है।
मन को पंछी कहने का क्या अर्थ है?
Show answer
मन चंचल है और भटकता रहता है
कबीर कहते हैं 'कबिरा मन पंछी भया, भवै तहाँ तहाँ जाया। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाया।' मन को पंछी इसलिए कहा गया है क्योंकि पक्षी की तरह मन भी चंचल होता है और इधर-उधर भटकता रहता है। जैसे पक्षी एक डाल से दूसरी डाल पर उड़ता रहता है, वैसे ही मन भी एक विषय से दूसरे विषय पर जाता रहता है। संगति के अनुसार मन का प्रभाव भी बदलता रहता है।
कबीर के अनुसार अति किस बात की हानिकारक है?
Show answer
सभी कामों की
कबीर कहते हैं 'अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।' इस दोहे में कबीर यह संदेश देते हैं कि किसी भी काम की अति हानिकारक है। न तो ज्यादा बोलना अच्छा है न बिल्कुल चुप रहना। न तो अधिक बारिश अच्छी है न अधिक धूप। जीवन में संतुलन होना आवश्यक है। मध्यम मार्ग अपनाना सबसे उत्तम है।
+41 more questions available
Practice AllFrequently Asked Questions
What are the important topics in कबीर के दोहे - कबीर for CBSE Class 8 Hindi?
How to score full marks in कबीर के दोहे - कबीर — CBSE Class 8 Hindi?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for कबीर के दोहे - कबीर
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Concept Maps
See how topics connect visually
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Syllabus
What topics to cover
NCERT Solutions
Every textbook question solved step by step
For serious students
Get the full कबीर के दोहे - कबीर chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for CBSE Class 8 Hindi.