कबीर के दोहे - कबीर — NCERT Solutions
CBSE · Class 8 · Hindi
NCERT Solutions for कबीर के दोहे - कबीर, CBSE Class 8 Hindi: 50 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 8 Hindi syllabus.
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मेरी समझ से
(क)(1)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँव। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताया।" इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?Show solution
सही उत्तर: ★ गुरु का महत्व
स्पष्टीकरण: इस दोहे में कबीर कहते हैं कि जब गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों एक साथ सामने खड़े हों तो पहले किसके चरण स्पर्श करें? कबीर गुरु को प्रणाम करना उचित मानते हैं क्योंकि गुरु ने ही गोविंद का परिचय कराया। अतः इस दोहे में मुख्य रूप से गुरु के महत्व का वर्णन है।
(क)(2)"अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।" इस दोहे का मूल संदेश क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
स्पष्टीकरण: इस दोहे में कबीर ने बोलने, चुप रहने, वर्षा और धूप — सभी के अत्यधिक होने को हानिकारक बताया है। चाहे बात वाणी की हो या प्रकृति की, अति हर जगह नुकसानदेह होती है। इसलिए दोहे का मूल संदेश है — हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
(क)(3)"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर।" यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?Show solution
सही उत्तर: ★ दूसरों के काम आना
स्पष्टीकरण: खजूर का पेड़ ऊँचा तो होता है परंतु न तो राहगीर को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से मिलते हैं। कबीर इस उदाहरण से बताते हैं कि केवल बड़ा या संपन्न होना पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति को दूसरों के काम आना चाहिए — यही सच्ची महानता है।
(क)(4)"ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय।" इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
स्पष्टीकरण: कबीर कहते हैं कि अहंकार छोड़कर मधुर वाणी बोलने से न केवल सुनने वाले को शीतलता (शांति) मिलती है, बल्कि बोलने वाला स्वयं भी शांत और प्रसन्न रहता है। अतः मधुर वाणी का सबसे बड़ा लाभ है — दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलना।
(क)(5)"साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।" इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?Show solution
सही उत्तर: ★ सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
★ सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
स्पष्टीकरण: इस दोहे में दो निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं — (1) सत्य बोलना और उसका पालन करना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है, और (2) जिसके हृदय में सत्य बसता है, उसके हृदय में स्वयं गुरु (ज्ञान का प्रकाश) निवास करते हैं। अतः सत्य एक महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है।
(क)(6)"निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय।" यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?Show solution
सही उत्तर: ★ आलोचकों को पास रखना चाहिए
स्पष्टीकरण: कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति हमारी निंदा या आलोचना करता है, उसे अपने आँगन में कुटिया बनाकर पास रखना चाहिए। वह बिना पानी और साबुन के ही हमारे स्वभाव को निर्मल (शुद्ध) कर देता है। अतः यहाँ आलोचकों को पास रखने के दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है।
(क)(7)"साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय।" इस दोहे में 'सूप' किसका प्रतीक है?Show solution
सही उत्तर: ★ विवेक और सूझबूझ का
स्पष्टीकरण: सूप (अनाज फटकने का उपकरण) सार (अच्छे दाने) को रख लेता है और थोथे (बेकार भूसे) को उड़ा देता है। इसी प्रकार एक विवेकशील साधु या व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करता है और बुरी बातों को छोड़ देता है। अतः 'सूप' यहाँ विवेक और सूझबूझ का प्रतीक है।
(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें:
- प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।
- दोहे की पंक्तियों को ध्यान से पढ़कर उनका अर्थ समझें।
- यदि किसी साथी ने अलग उत्तर चुना है तो उसके तर्क को सुनें और विचार करें।
- अंत में समूह मिलकर सबसे उपयुक्त उत्तर पर सहमति बनाएँ।
उदाहरण: दोहा (1) में 'गोविंद दियो बताय' पंक्ति स्पष्ट करती है कि गुरु ने ईश्वर का परिचय कराया, इसलिए 'गुरु का महत्व' सबसे उपयुक्त उत्तर है।
मिलकर करें मिलान
(क)पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही मिलान) |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव। | 3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | 6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं। |
| 5. | साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है। |
| 7. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है। |
| 8. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए। |
(ख)नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही मिलान) |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव। | 8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया। | 2. औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। |
| 5. | साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 4. सार सार को गहि रहे, थोथा देइ उड़ाय। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 7. जो जैसी संगति करे, सो तैसा फल पाय। |
| 7. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर। |
| 8. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 3. जाके हिरवे साँच है, ता हिरवे गुरु आपा। |
पंक्तियों पर चर्चा
(क)"कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करे सो तैसा फल पाय" — इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार समूह में साझा कीजिए।Show solution
दोहे का अर्थ:
कबीर कहते हैं कि मनुष्य का मन एक पंछी की तरह है जो जहाँ चाहे वहाँ उड़ जाता है — अर्थात मन चंचल है और किसी भी दिशा में भटक सकता है। इसीलिए संगति का बहुत महत्व है। जो व्यक्ति जैसी संगति करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है।
विस्तृत विवेचन:
- यदि मन अच्छे लोगों की संगति में जाता है तो अच्छे विचार, अच्छी आदतें और सफलता मिलती है।
- यदि मन बुरी संगति में पड़ जाए तो बुरी आदतें और असफलता मिलती है।
- इसीलिए कहावत है — 'जैसा संग वैसा रंग।'
निष्कर्ष: मन को सही दिशा में नियंत्रित करना और अच्छी संगति चुनना जीवन में सफलता की कुंजी है।
(ख)"साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिरवे साँच है ता हिरवे गुरु आपा।" — इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार समूह में साझा कीजिए।Show solution
दोहे का अर्थ:
कबीर कहते हैं कि सत्य बोलने और उसका पालन करने के समान कोई तपस्या नहीं है — अर्थात सत्य ही सबसे बड़ी साधना है। इसी प्रकार झूठ बोलने के समान कोई पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य बसता है, उसके हृदय में स्वयं गुरु (ज्ञान का प्रकाश) निवास करते हैं।
विस्तृत विवेचन:
- सत्य बोलना कठिन होता है, इसलिए यह एक प्रकार की तपस्या है।
- झूठ बोलने से मन में अशांति, भय और अविश्वास उत्पन्न होता है — यही पाप है।
- जो व्यक्ति सत्यनिष्ठ होता है, उसे किसी बाहरी गुरु की आवश्यकता नहीं — उसका अपना विवेक ही उसका गुरु बन जाता है।
निष्कर्ष: सत्य जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है और यही मनुष्य को सच्चा ज्ञान और शांति प्रदान करता है।
सोच-विचार के लिए
(क)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँव।" इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।Show solution
मेरे विचार:
हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ कि गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- ज्ञान का स्रोत: गुरु ही हमें ईश्वर, जीवन और संसार का ज्ञान देते हैं। बिना गुरु के हम ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग नहीं जान सकते।
- मार्गदर्शक: जीवन में जब हम भटकते हैं, तब गुरु ही हमें सही राह दिखाते हैं।
- व्यावहारिक दृष्टि: ईश्वर अदृश्य हैं, परंतु गुरु हमारे सामने होते हैं और हमारी हर कठिनाई में सहायता करते हैं।
- कबीर का आशय: कबीर यह नहीं कह रहे कि ईश्वर से बड़ा कोई है, बल्कि वे यह कह रहे हैं कि गुरु ने ही ईश्वर का परिचय कराया, इसलिए पहले गुरु को प्रणाम करना उचित है।
निष्कर्ष: गुरु और ईश्वर दोनों का अपना-अपना महत्व है। गुरु वह माध्यम है जो हमें ईश्वर तक पहुँचाता है।
(ख)"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।" इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए?Show solution
बड़े या संपन्न व्यक्ति में होनी चाहिए ये विशेषताएँ:
- परोपकार की भावना: जैसे बरगद का पेड़ सबको छाया देता है, वैसे ही बड़े व्यक्ति को दूसरों की सहायता करनी चाहिए।
- विनम्रता: जितना बड़ा व्यक्ति होता है, उसे उतना ही विनम्र होना चाहिए। अहंकार से बचना चाहिए।
- सुलभता: उसके पास जाना और उससे सहायता माँगना आसान होना चाहिए।
- उदारता: अपनी संपत्ति, ज्ञान और समय को दूसरों के साथ बाँटने की भावना होनी चाहिए।
- सहानुभूति: दूसरों के दुख-दर्द को समझने और उनकी मदद करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
- नैतिकता: बड़े पद या धन का दुरुपयोग न करके सदाचार का पालन करना चाहिए।
निष्कर्ष: सच्ची महानता वही है जो दूसरों के काम आए। केवल ऊँचाई या संपन्नता से महानता नहीं आती।
(ग)"ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया।" क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।Show solution
हाँ, शब्दों का प्रभाव स्वयं पर भी पड़ता है।
कारण:
- जब हम क्रोध में कठोर शब्द बोलते हैं तो हमारा मन भी अशांत और व्याकुल हो जाता है।
- जब हम मधुर और सकारात्मक शब्द बोलते हैं तो हमें स्वयं भी प्रसन्नता और शांति का अनुभव होता है।
- वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह सिद्ध है कि सकारात्मक बोलने से मस्तिष्क में अच्छे रसायन (हार्मोन) उत्पन्न होते हैं।
उदाहरण:
एक बार मेरे मित्र ने परीक्षा में कम अंक आने पर निराश होकर कहा — 'मैं कुछ नहीं कर सकता।' इससे उसका आत्मविश्वास और कम हो गया। जब मैंने उसे प्रोत्साहित करते हुए कहा — 'तुम अगली बार जरूर अच्छा करोगे, तुम्हारे अंदर क्षमता है' — तो न केवल उसका मनोबल बढ़ा, बल्कि मुझे भी अच्छा लगा।
निष्कर्ष: शब्द दोधारी तलवार की तरह होते हैं — वे दूसरों को और स्वयं को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।
(ड)"जो जैसी संगति करे सो तैसा फल पाय।" हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।Show solution
संगति का प्रभाव:
संगति का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम जिन लोगों के साथ रहते हैं, धीरे-धीरे उनके विचार, आदतें और व्यवहार हमारे अंदर भी आने लगते हैं।
अच्छी संगति के प्रभाव:
- अच्छे मित्रों के साथ रहने से पढ़ाई में रुचि बढ़ती है।
- सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहने से हम भी आशावादी बनते हैं।
- परिश्रमी लोगों की संगति में हम भी मेहनती बनते हैं।
बुरी संगति के प्रभाव:
- गलत आदतों वाले मित्रों के साथ रहने से हम भी उन आदतों को अपना सकते हैं।
- नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहने से हमारा आत्मविश्वास कम होता है।
उदाहरण:
एक विद्यार्थी जो पहले पढ़ाई में कमजोर था, जब उसने मेहनती और होशियार छात्रों के साथ पढ़ना शुरू किया तो उसके अंक भी सुधर गए। इसके विपरीत, एक अच्छा छात्र जब आलसी मित्रों के साथ रहने लगा तो उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई।
निष्कर्ष: 'जैसा संग वैसा रंग' — इसलिए हमें सदैव अच्छी संगति चुननी चाहिए।
दोहे की रचना
(क)(1)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।Show solution
एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले शब्दों वाली पंक्तियाँ (अनुप्रास अलंकार):
- "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'बराबर' शब्द दो बार आया है (यहाँ 'ब' से शुरू होने वाले शब्द)।
- "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय" — 'स' अक्षर से — साधू, सूप, सुभाय।
- "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'स' से — सार-सार।
- "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय" — 'ब' से — बिन, बिना।
- "साँच बराबर... साँच है" — 'स' से — साँच, साँच।
(क)(2)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक शब्द एक साथ दो बार आया है।Show solution
एक शब्द दो बार आने वाली पंक्तियाँ:
- "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'सार-सार' शब्द दो बार आया है।
- "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।" — 'अति' शब्द चार बार आया है।
- "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव" — यहाँ 'ग' से गुरु, गोविंद दोनों आए हैं।
(क)(3)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है, एक ही पंक्ति में आए हैं।Show solution
लगभग एक जैसे शब्दों वाली पंक्तियाँ:
- "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप" — 'बोलना' और 'चूप' (विपरीत अर्थ, समान संरचना)।
- "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'साँच' और 'झूठ', 'तप' और 'पाप' (समान संरचना वाले शब्द-युग्म)।
- "औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय" — 'सीतल' शब्द दोनों पंक्तियों में आया है, केवल संदर्भ बदला है।
- "बड़ा हुआ तो क्या हुआ" — 'हुआ' शब्द दो बार, मात्रा-भेद नहीं पर पुनरावृत्ति है।
(क)(4)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग किया गया है।Show solution
विपरीतार्थक शब्दों वाली पंक्तियाँ:
- "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप" — 'बोलना' और 'चूप' विपरीतार्थक हैं।
- "अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप" — 'बरसना' (वर्षा) और 'धूप' विपरीतार्थक हैं।
- "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'साँच' और 'झूठ' विपरीतार्थक हैं।
- "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'सार' (सारवान) और 'थोथा' (निरर्थक) विपरीतार्थक हैं।
(क)(5)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है।Show solution
तुलना (उपमा अलंकार) वाली पंक्तियाँ:
- "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर" — व्यक्ति की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है।
- "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय" — साधु की तुलना सूप से की गई है।
- "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय" — मन की तुलना पंछी से की गई है।
- "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय" — निंदक की तुलना साबुन-पानी से की गई है।
(क)(6)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है।Show solution
रूपक अलंकार (किसी को अन्य नाम देना) वाली पंक्तियाँ:
- "कबिरा मन पंछी भया" — यहाँ मन को 'पंछी' नाम दिया गया है। मन को सीधे पंछी कह दिया गया है।
- "जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आपा" — यहाँ सत्य को 'गुरु' का रूप दिया गया है — सत्यनिष्ठ हृदय में गुरु स्वयं निवास करते हैं।
(क)(7)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है।Show solution
अलग वर्तनी वाले शब्दों के उदाहरण:
- 'चूप' — सामान्य वर्तनी 'चुप' है, परंतु दोहे में 'चूप' लिखा गया है।
- 'बानी' — सामान्य वर्तनी 'वाणी' है, परंतु दोहे में 'बानी' लिखा गया है।
- 'सीतल' — सामान्य वर्तनी 'शीतल' है, परंतु दोहे में 'सीतल' लिखा गया है।
- 'हिरदे' — सामान्य वर्तनी 'हृदय' है, परंतु दोहे में 'हिरदे' लिखा गया है।
- 'नियरे' — सामान्य वर्तनी 'निकट' या 'नजदीक' है, परंतु दोहे में 'नियरे' लिखा गया है।
- 'तहवाँ' — सामान्य वर्तनी 'वहाँ' है, परंतु दोहे में 'तहवाँ' लिखा गया है।
(क)(8)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।Show solution
उदाहरण द्वारा बात समझाने वाली पंक्तियाँ:
- "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।" — खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर बताया गया है कि केवल बड़ा होना पर्याप्त नहीं।
- "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।" — सूप का उदाहरण देकर विवेकशील व्यक्ति के गुण समझाए गए हैं।
- "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।" — साबुन और पानी का उदाहरण देकर निंदक का महत्व समझाया गया है।
- "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।" — पंछी का उदाहरण देकर मन की चंचलता समझाई गई है।
(ख)अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।Show solution
यह एक समूह-प्रस्तुति गतिविधि है। इसके लिए:
- प्रत्येक समूह अपनी सूची तैयार करे।
- कक्षा में बारी-बारी से प्रत्येक समूह अपनी सूची प्रस्तुत करे।
- अन्य समूहों के साथियों से सुझाव और प्रतिक्रिया लें।
- सभी समूहों की सूचियों को मिलाकर एक संपूर्ण सूची तैयार करें।
इस प्रकार कबीर के दोहों की काव्य-विशेषताओं की एक व्यापक सूची बनाई जा सकती है।
अनुमान और कल्पना से
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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