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Chapter 5 of 10
NCERT Solutions

कबीर के दोहे

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for कबीर के दोहे — CBSE Class 8 Hindi.

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50 Questions Solved · 13 Sections

मेरी समझ से

(क)(1)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँव। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताया।" इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?Show solution
सही उत्तर: ★ गुरु का महत्व

स्पष्टीकरण: इस दोहे में कबीर कहते हैं कि जब गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों एक साथ सामने खड़े हों तो पहले किसके चरण स्पर्श करें? कबीर गुरु को प्रणाम करना उचित मानते हैं क्योंकि गुरु ने ही गोविंद का परिचय कराया। अतः इस दोहे में मुख्य रूप से गुरु के महत्व का वर्णन है।
(क)(2)"अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।" इस दोहे का मूल संदेश क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है

स्पष्टीकरण: इस दोहे में कबीर ने बोलने, चुप रहने, वर्षा और धूप — सभी के अत्यधिक होने को हानिकारक बताया है। चाहे बात वाणी की हो या प्रकृति की, अति हर जगह नुकसानदेह होती है। इसलिए दोहे का मूल संदेश है — हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।
(क)(3)"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर।" यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?Show solution
सही उत्तर: ★ दूसरों के काम आना

स्पष्टीकरण: खजूर का पेड़ ऊँचा तो होता है परंतु न तो राहगीर को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से मिलते हैं। कबीर इस उदाहरण से बताते हैं कि केवल बड़ा या संपन्न होना पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति को दूसरों के काम आना चाहिए — यही सच्ची महानता है।
(क)(4)"ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय।" इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है

स्पष्टीकरण: कबीर कहते हैं कि अहंकार छोड़कर मधुर वाणी बोलने से न केवल सुनने वाले को शीतलता (शांति) मिलती है, बल्कि बोलने वाला स्वयं भी शांत और प्रसन्न रहता है। अतः मधुर वाणी का सबसे बड़ा लाभ है — दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलना।
(क)(5)"साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।" इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?Show solution
सही उत्तर: ★ सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
★ सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है

स्पष्टीकरण: इस दोहे में दो निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं — (1) सत्य बोलना और उसका पालन करना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है, और (2) जिसके हृदय में सत्य बसता है, उसके हृदय में स्वयं गुरु (ज्ञान का प्रकाश) निवास करते हैं। अतः सत्य एक महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है।
(क)(6)"निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय।" यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?Show solution
सही उत्तर: ★ आलोचकों को पास रखना चाहिए

स्पष्टीकरण: कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति हमारी निंदा या आलोचना करता है, उसे अपने आँगन में कुटिया बनाकर पास रखना चाहिए। वह बिना पानी और साबुन के ही हमारे स्वभाव को निर्मल (शुद्ध) कर देता है। अतः यहाँ आलोचकों को पास रखने के दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है।
(क)(7)"साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय।" इस दोहे में 'सूप' किसका प्रतीक है?Show solution
सही उत्तर: ★ विवेक और सूझबूझ का

स्पष्टीकरण: सूप (अनाज फटकने का उपकरण) सार (अच्छे दाने) को रख लेता है और थोथे (बेकार भूसे) को उड़ा देता है। इसी प्रकार एक विवेकशील साधु या व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करता है और बुरी बातों को छोड़ देता है। अतः 'सूप' यहाँ विवेक और सूझबूझ का प्रतीक है।
(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें:

1. प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।
2. दोहे की पंक्तियों को ध्यान से पढ़कर उनका अर्थ समझें।
3. यदि किसी साथी ने अलग उत्तर चुना है तो उसके तर्क को सुनें और विचार करें।
4. अंत में समूह मिलकर सबसे उपयुक्त उत्तर पर सहमति बनाएँ।

उदाहरण: दोहा (1) में 'गोविंद दियो बताय' पंक्ति स्पष्ट करती है कि गुरु ने ईश्वर का परिचय कराया, इसलिए 'गुरु का महत्व' सबसे उपयुक्त उत्तर है।

मिलकर करें मिलान

(क)पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:

| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही मिलान) |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव। | 3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 5. जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | 6. हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं। |
| 5. | साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 7. विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 4. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है। |
| 7. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है। |
| 8. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 2. बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए। |
(ख)नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:

| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही मिलान) |
|---|---|---|
| 1. | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव। | 8. बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय। |
| 2. | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | 6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। |
| 3. | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया। | 2. औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय। |
| 4. | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | 1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। |
| 5. | साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | 4. सार सार को गहि रहे, थोथा देइ उड़ाय। |
| 6. | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | 7. जो जैसी संगति करे, सो तैसा फल पाय। |
| 7. | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | 5. पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर। |
| 8. | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | 3. जाके हिरवे साँच है, ता हिरवे गुरु आपा। |

पंक्तियों पर चर्चा

(क)"कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करे सो तैसा फल पाय" — इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार समूह में साझा कीजिए।Show solution
दोहे का अर्थ:

कबीर कहते हैं कि मनुष्य का मन एक पंछी की तरह है जो जहाँ चाहे वहाँ उड़ जाता है — अर्थात मन चंचल है और किसी भी दिशा में भटक सकता है। इसीलिए संगति का बहुत महत्व है। जो व्यक्ति जैसी संगति करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है।

विस्तृत विवेचन:
- यदि मन अच्छे लोगों की संगति में जाता है तो अच्छे विचार, अच्छी आदतें और सफलता मिलती है।
- यदि मन बुरी संगति में पड़ जाए तो बुरी आदतें और असफलता मिलती है।
- इसीलिए कहावत है — 'जैसा संग वैसा रंग।'

निष्कर्ष: मन को सही दिशा में नियंत्रित करना और अच्छी संगति चुनना जीवन में सफलता की कुंजी है।
(ख)"साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिरवे साँच है ता हिरवे गुरु आपा।" — इन पंक्तियों का अर्थ अपने विचार समूह में साझा कीजिए।Show solution
दोहे का अर्थ:

कबीर कहते हैं कि सत्य बोलने और उसका पालन करने के समान कोई तपस्या नहीं है — अर्थात सत्य ही सबसे बड़ी साधना है। इसी प्रकार झूठ बोलने के समान कोई पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य बसता है, उसके हृदय में स्वयं गुरु (ज्ञान का प्रकाश) निवास करते हैं।

विस्तृत विवेचन:
- सत्य बोलना कठिन होता है, इसलिए यह एक प्रकार की तपस्या है।
- झूठ बोलने से मन में अशांति, भय और अविश्वास उत्पन्न होता है — यही पाप है।
- जो व्यक्ति सत्यनिष्ठ होता है, उसे किसी बाहरी गुरु की आवश्यकता नहीं — उसका अपना विवेक ही उसका गुरु बन जाता है।

निष्कर्ष: सत्य जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है और यही मनुष्य को सच्चा ज्ञान और शांति प्रदान करता है।

सोच-विचार के लिए

(क)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँव।" इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।Show solution
मेरे विचार:

हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ कि गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

1. ज्ञान का स्रोत: गुरु ही हमें ईश्वर, जीवन और संसार का ज्ञान देते हैं। बिना गुरु के हम ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग नहीं जान सकते।

2. मार्गदर्शक: जीवन में जब हम भटकते हैं, तब गुरु ही हमें सही राह दिखाते हैं।

3. व्यावहारिक दृष्टि: ईश्वर अदृश्य हैं, परंतु गुरु हमारे सामने होते हैं और हमारी हर कठिनाई में सहायता करते हैं।

4. कबीर का आशय: कबीर यह नहीं कह रहे कि ईश्वर से बड़ा कोई है, बल्कि वे यह कह रहे हैं कि गुरु ने ही ईश्वर का परिचय कराया, इसलिए पहले गुरु को प्रणाम करना उचित है।

निष्कर्ष: गुरु और ईश्वर दोनों का अपना-अपना महत्व है। गुरु वह माध्यम है जो हमें ईश्वर तक पहुँचाता है।
(ख)"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।" इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए?Show solution
बड़े या संपन्न व्यक्ति में होनी चाहिए ये विशेषताएँ:

1. परोपकार की भावना: जैसे बरगद का पेड़ सबको छाया देता है, वैसे ही बड़े व्यक्ति को दूसरों की सहायता करनी चाहिए।

2. विनम्रता: जितना बड़ा व्यक्ति होता है, उसे उतना ही विनम्र होना चाहिए। अहंकार से बचना चाहिए।

3. सुलभता: उसके पास जाना और उससे सहायता माँगना आसान होना चाहिए।

4. उदारता: अपनी संपत्ति, ज्ञान और समय को दूसरों के साथ बाँटने की भावना होनी चाहिए।

5. सहानुभूति: दूसरों के दुख-दर्द को समझने और उनकी मदद करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

6. नैतिकता: बड़े पद या धन का दुरुपयोग न करके सदाचार का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष: सच्ची महानता वही है जो दूसरों के काम आए। केवल ऊँचाई या संपन्नता से महानता नहीं आती।
(ग)"ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया।" क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।Show solution
हाँ, शब्दों का प्रभाव स्वयं पर भी पड़ता है।

कारण:
1. जब हम क्रोध में कठोर शब्द बोलते हैं तो हमारा मन भी अशांत और व्याकुल हो जाता है।
2. जब हम मधुर और सकारात्मक शब्द बोलते हैं तो हमें स्वयं भी प्रसन्नता और शांति का अनुभव होता है।
3. वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह सिद्ध है कि सकारात्मक बोलने से मस्तिष्क में अच्छे रसायन (हार्मोन) उत्पन्न होते हैं।

उदाहरण:
एक बार मेरे मित्र ने परीक्षा में कम अंक आने पर निराश होकर कहा — 'मैं कुछ नहीं कर सकता।' इससे उसका आत्मविश्वास और कम हो गया। जब मैंने उसे प्रोत्साहित करते हुए कहा — 'तुम अगली बार जरूर अच्छा करोगे, तुम्हारे अंदर क्षमता है' — तो न केवल उसका मनोबल बढ़ा, बल्कि मुझे भी अच्छा लगा।

निष्कर्ष: शब्द दोधारी तलवार की तरह होते हैं — वे दूसरों को और स्वयं को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।
(ड)"जो जैसी संगति करे सो तैसा फल पाय।" हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।Show solution
संगति का प्रभाव:

संगति का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हम जिन लोगों के साथ रहते हैं, धीरे-धीरे उनके विचार, आदतें और व्यवहार हमारे अंदर भी आने लगते हैं।

अच्छी संगति के प्रभाव:
- अच्छे मित्रों के साथ रहने से पढ़ाई में रुचि बढ़ती है।
- सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहने से हम भी आशावादी बनते हैं।
- परिश्रमी लोगों की संगति में हम भी मेहनती बनते हैं।

बुरी संगति के प्रभाव:
- गलत आदतों वाले मित्रों के साथ रहने से हम भी उन आदतों को अपना सकते हैं।
- नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहने से हमारा आत्मविश्वास कम होता है।

उदाहरण:
एक विद्यार्थी जो पहले पढ़ाई में कमजोर था, जब उसने मेहनती और होशियार छात्रों के साथ पढ़ना शुरू किया तो उसके अंक भी सुधर गए। इसके विपरीत, एक अच्छा छात्र जब आलसी मित्रों के साथ रहने लगा तो उसकी पढ़ाई प्रभावित हुई।

निष्कर्ष: 'जैसा संग वैसा रंग' — इसलिए हमें सदैव अच्छी संगति चुननी चाहिए।

दोहे की रचना

(क)(1)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।Show solution
एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले शब्दों वाली पंक्तियाँ (अनुप्रास अलंकार):

1. "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'बराबर' शब्द दो बार आया है (यहाँ 'ब' से शुरू होने वाले शब्द)।
2. "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय" — 'स' अक्षर से — साधू, सूप, सुभाय।
3. "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'स' से — सार-सार।
4. "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय" — 'ब' से — बिन, बिना।
5. "साँच बराबर... साँच है" — 'स' से — साँच, साँच।
(क)(2)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक शब्द एक साथ दो बार आया है।Show solution
एक शब्द दो बार आने वाली पंक्तियाँ:

1. "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'सार-सार' शब्द दो बार आया है।
2. "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।" — 'अति' शब्द चार बार आया है।
3. "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव" — यहाँ 'ग' से गुरु, गोविंद दोनों आए हैं।
(क)(3)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है, एक ही पंक्ति में आए हैं।Show solution
लगभग एक जैसे शब्दों वाली पंक्तियाँ:

1. "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप" — 'बोलना' और 'चूप' (विपरीत अर्थ, समान संरचना)।
2. "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'साँच' और 'झूठ', 'तप' और 'पाप' (समान संरचना वाले शब्द-युग्म)।
3. "औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय" — 'सीतल' शब्द दोनों पंक्तियों में आया है, केवल संदर्भ बदला है।
4. "बड़ा हुआ तो क्या हुआ" — 'हुआ' शब्द दो बार, मात्रा-भेद नहीं पर पुनरावृत्ति है।
(क)(4)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग किया गया है।Show solution
विपरीतार्थक शब्दों वाली पंक्तियाँ:

1. "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप" — 'बोलना' और 'चूप' विपरीतार्थक हैं।
2. "अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप" — 'बरसना' (वर्षा) और 'धूप' विपरीतार्थक हैं।
3. "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप" — 'साँच' और 'झूठ' विपरीतार्थक हैं।
4. "सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय" — 'सार' (सारवान) और 'थोथा' (निरर्थक) विपरीतार्थक हैं।
(क)(5)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है।Show solution
तुलना (उपमा अलंकार) वाली पंक्तियाँ:

1. "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर" — व्यक्ति की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है।
2. "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय" — साधु की तुलना सूप से की गई है।
3. "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय" — मन की तुलना पंछी से की गई है।
4. "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय" — निंदक की तुलना साबुन-पानी से की गई है।
(क)(6)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है।Show solution
रूपक अलंकार (किसी को अन्य नाम देना) वाली पंक्तियाँ:

1. "कबिरा मन पंछी भया" — यहाँ मन को 'पंछी' नाम दिया गया है। मन को सीधे पंछी कह दिया गया है।
2. "जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आपा" — यहाँ सत्य को 'गुरु' का रूप दिया गया है — सत्यनिष्ठ हृदय में गुरु स्वयं निवास करते हैं।
(क)(7)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है।Show solution
अलग वर्तनी वाले शब्दों के उदाहरण:

1. 'चूप' — सामान्य वर्तनी 'चुप' है, परंतु दोहे में 'चूप' लिखा गया है।
2. 'बानी' — सामान्य वर्तनी 'वाणी' है, परंतु दोहे में 'बानी' लिखा गया है।
3. 'सीतल' — सामान्य वर्तनी 'शीतल' है, परंतु दोहे में 'सीतल' लिखा गया है।
4. 'हिरदे' — सामान्य वर्तनी 'हृदय' है, परंतु दोहे में 'हिरदे' लिखा गया है।
5. 'नियरे' — सामान्य वर्तनी 'निकट' या 'नजदीक' है, परंतु दोहे में 'नियरे' लिखा गया है।
6. 'तहवाँ' — सामान्य वर्तनी 'वहाँ' है, परंतु दोहे में 'तहवाँ' लिखा गया है।
(क)(8)दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।Show solution
उदाहरण द्वारा बात समझाने वाली पंक्तियाँ:

1. "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।" — खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर बताया गया है कि केवल बड़ा होना पर्याप्त नहीं।

2. "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।" — सूप का उदाहरण देकर विवेकशील व्यक्ति के गुण समझाए गए हैं।

3. "बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।" — साबुन और पानी का उदाहरण देकर निंदक का महत्व समझाया गया है।

4. "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।" — पंछी का उदाहरण देकर मन की चंचलता समझाई गई है।
(ख)अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।Show solution
यह एक समूह-प्रस्तुति गतिविधि है। इसके लिए:

1. प्रत्येक समूह अपनी सूची तैयार करे।
2. कक्षा में बारी-बारी से प्रत्येक समूह अपनी सूची प्रस्तुत करे।
3. अन्य समूहों के साथियों से सुझाव और प्रतिक्रिया लें।
4. सभी समूहों की सूचियों को मिलाकर एक संपूर्ण सूची तैयार करें।

इस प्रकार कबीर के दोहों की काव्य-विशेषताओं की एक व्यापक सूची बनाई जा सकती है।

अनुमान और कल्पना से

(क)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागों पाँय।" — (i) यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों? (ii) यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?Show solution
(i) मेरा निर्णय:

यदि मेरे सामने यह स्थिति होती तो मैं भी कबीर की तरह पहले गुरु के चरण स्पर्श करता। इसका कारण यह है कि गुरु ने ही मुझे ईश्वर का परिचय कराया, जीवन का सही मार्ग दिखाया और ज्ञान दिया। गुरु के बिना ईश्वर तक पहुँचना संभव नहीं होता। गुरु हमारे सामने प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होते हैं और हमारी हर कठिनाई में सहायता करते हैं।

(ii) यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता:

- ज्ञान का प्रसार नहीं होता और मानव सभ्यता का विकास रुक जाता।
- बच्चे पढ़ना-लिखना नहीं सीख पाते।
- विज्ञान, कला, संगीत, साहित्य — किसी भी क्षेत्र में प्रगति नहीं होती।
- नैतिक मूल्यों और जीवन-दर्शन का ज्ञान अगली पीढ़ी तक नहीं पहुँचता।
- समाज अव्यवस्थित और अज्ञानी रहता।

निष्कर्ष: गुरु और शिक्षक समाज की नींव हैं। उनके बिना न व्यक्ति का विकास संभव है और न समाज का।
(ख)"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप!" — (i) यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? (ii) यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं? (iii) आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?Show solution
(i) अत्यधिक बोलने या चुप रहने के प्रभाव:

अत्यधिक बोलने के दुष्प्रभाव:
- लोग उस व्यक्ति की बातों को गंभीरता से नहीं लेते।
- कभी-कभी गलत बात मुँह से निकल जाती है जिससे संबंध बिगड़ते हैं।
- दूसरों को परेशानी होती है।

अत्यधिक चुप रहने के दुष्प्रभाव:
- व्यक्ति अपनी बात नहीं कह पाता, जिससे गलतफहमियाँ बढ़ती हैं।
- समाज में उसकी उपस्थिति कम महत्वपूर्ण लगती है।
- अवसाद और अकेलेपन की समस्या हो सकती है।

(ii) वर्षा अधिक या कम होने के परिणाम:

अत्यधिक वर्षा: बाढ़, फसलों का नुकसान, घरों का डूबना, महामारी।

कम वर्षा: सूखा, अकाल, पीने के पानी की कमी, फसलों का नष्ट होना।

(iii) अत्यधिक मोबाइल/मल्टीमीडिया प्रयोग के परिणाम:
- आँखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- पढ़ाई और अन्य कार्यों में ध्यान नहीं लगता।
- नींद की समस्या होती है।
- सामाजिक संबंध कमजोर होते हैं।
- साइबर अपराध का शिकार होने का खतरा बढ़ता है।

निष्कर्ष: हर चीज में संतुलन आवश्यक है — यही कबीर का संदेश है।
(ग)"साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप!" — (i) झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? (ii) कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?Show solution
(i) झूठ बोलने के प्रभाव:

1. विश्वास टूटता है: एक बार झूठ पकड़े जाने पर लोग हम पर विश्वास नहीं करते।
2. मानसिक अशांति: झूठ को छुपाने के लिए और झूठ बोलने पड़ते हैं, जिससे मन में भय और बेचैनी रहती है।
3. सामाजिक प्रतिष्ठा घटती है: झूठे व्यक्ति को समाज में सम्मान नहीं मिलता।
4. आत्मसम्मान कम होता है: झूठ बोलने वाला स्वयं भी अपने आप को कमजोर महसूस करता है।
5. संबंध बिगड़ते हैं: परिवार और मित्रों से संबंध खराब होते हैं।

(ii) गलत उत्तर पर अंक मिलने की स्थिति में:

मैं तुरंत अपने शिक्षक के पास जाकर विनम्रतापूर्वक बताऊँगा कि मेरा उत्तर गलत था और मुझे अंक नहीं मिलने चाहिए। यह सत्य का पालन करना है। भले ही इससे मेरे अंक कम हो जाएँ, परंतु मेरी ईमानदारी और आत्मसम्मान बना रहेगा। शिक्षक भी मेरी ईमानदारी की प्रशंसा करेंगे।

निष्कर्ष: सत्य बोलना कठिन हो सकता है, परंतु यही सच्चा साहस और तपस्या है।
(घ)"ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय!" — (i) यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं? (ii) क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो?Show solution
(i) सभी की वाणी मधुर होने पर परिवर्तन:

1. झगड़े और विवाद कम होंगे: मधुर वाणी से गलतफहमियाँ दूर होती हैं।
2. परिवारों में सुख-शांति बढ़ेगी: घर का वातावरण प्रेमपूर्ण होगा।
3. समाज में सौहार्द बढ़ेगा: लोग एक-दूसरे की सहायता करने के लिए तत्पर रहेंगे।
4. मानसिक स्वास्थ्य सुधरेगा: तनाव और अवसाद कम होगा।
5. राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी: विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम बढ़ेगा।

(ii) कटु वचन बोलना आवश्यक होने की परिस्थितियाँ:

हाँ, कुछ परिस्थितियों में कठोर शब्द बोलना आवश्यक हो सकता है:
1. जब कोई अन्याय हो रहा हो और उसका विरोध करना जरूरी हो।
2. जब किसी को उसकी गंभीर गलती का एहसास कराना हो।
3. जब कोई बच्चा या व्यक्ति गलत रास्ते पर जा रहा हो।

परंतु ऐसे में भी शब्द कठोर नहीं, बल्कि स्पष्ट और दृढ़ होने चाहिए — क्रोध में नहीं, विवेक से बोलना चाहिए।
(ड)"बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर!" — (i) यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे 'बड़े होने या संपन्न होने' का क्या अर्थ बताएँगे? (ii) खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? (iii) आप अपनी कक्षा का मॉनीटर चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?Show solution
(i) अहंकारी व्यक्ति को समझाना:

मैं उस व्यक्ति को बताऊँगा कि सच्ची महानता केवल धन, पद या ऊँचाई में नहीं है। जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा होने के बावजूद किसी राहगीर को छाया नहीं देता और उसके फल भी आसानी से नहीं मिलते — उसी प्रकार यदि आपकी संपन्नता या बड़ाई दूसरों के काम नहीं आती, तो वह व्यर्थ है। सच्चा बड़ा वह है जो दूसरों की सहायता करे, विनम्र रहे और समाज के लिए उपयोगी हो।

(ii) खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्षों की उपयोगिता:

- खजूर: इसके फल (खजूर) बहुत पौष्टिक होते हैं; इसकी पत्तियों से टोकरियाँ और चटाइयाँ बनती हैं; इसकी लकड़ी निर्माण कार्य में आती है।
- नारियल: नारियल पानी स्वास्थ्यवर्धक है; नारियल तेल, दूध और गिरी उपयोगी हैं; इसकी जटा से रस्सी बनती है; पत्तियों से छप्पर बनाए जाते हैं।

अतः ये वृक्ष अनुपयोगी नहीं हैं, परंतु उनका लाभ उठाने के लिए प्रयास करना पड़ता है।

(iii) मॉनीटर चुनने के लिए विशेषताएँ:

1. नेतृत्व क्षमता: सभी को साथ लेकर चलने की योग्यता।
2. ईमानदारी: सत्य बोलने और न्यायपूर्ण व्यवहार करने की आदत।
3. जिम्मेदारी: कक्षा के कार्यों को समय पर पूरा करने की भावना।
4. सहयोग की भावना: सभी सहपाठियों की सहायता करने की इच्छा।
5. विनम्रता: अहंकार से मुक्त और सबके साथ मधुर व्यवहार।
6. अनुशासन: स्वयं अनुशासित रहना और दूसरों को भी प्रेरित करना।
(च)"निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय!" — (i) यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा? (ii) यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?Show solution
(i) गलतियाँ बताने वाले से लाभ:

1. आत्म-सुधार का अवसर: हमें अपनी कमियों का पता चलता है जिन्हें हम स्वयं नहीं देख पाते।
2. बेहतर बनने की प्रेरणा: आलोचना हमें और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करती है।
3. अहंकार से मुक्ति: जब कोई हमारी गलतियाँ बताता है तो हम विनम्र बनते हैं।
4. सफलता की राह: गलतियों को सुधारकर हम सफलता की ओर बढ़ते हैं।
5. सच्चा मित्र: जो हमारी गलतियाँ बताए, वही सच्चा हितैषी है।

(ii) यदि कोई गलतियाँ न बताए:

1. लोग अपनी गलतियों में ही डूबे रहेंगे और सुधार नहीं होगा।
2. समाज में भ्रष्टाचार और अनैतिकता बढ़ेगी।
3. व्यक्ति का विकास रुक जाएगा।
4. झूठी प्रशंसा से अहंकार बढ़ेगा।
5. समाज कमजोर और पिछड़ा बनेगा।

निष्कर्ष: आलोचना को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए — यह हमारे विकास का सबसे बड़ा साधन है।
(छ)"साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय!" — (i) कल्पना कीजिए कि आपके पास 'सूप' जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे? (ii) यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?Show solution
(i) 'सूप' जैसी विशेषता होने पर जीवन में परिवर्तन:

यदि मेरे पास सूप जैसी विवेक-शक्ति हो तो:
1. मैं अच्छी बातों, आदतों और विचारों को ग्रहण करूँगा और बुरी बातों को छोड़ दूँगा।
2. सही मित्रों का चुनाव कर पाऊँगा।
3. इंटरनेट और मीडिया पर उपलब्ध सूचनाओं में से सही और उपयोगी जानकारी छाँट पाऊँगा।
4. जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी।
5. समय और ऊर्जा का सदुपयोग होगा।

(ii) बिना सोचे-समझे हर बात स्वीकार करने के प्रभाव:

1. गलत सूचनाओं का शिकार: हम अफवाहों और झूठी खबरों पर विश्वास कर लेंगे।
2. गलत संगति: बुरे लोगों के प्रभाव में आ जाएँगे।
3. निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होगी: हम दूसरों पर निर्भर हो जाएँगे।
4. साइबर अपराध का खतरा: इंटरनेट पर हर लिंक या संदेश पर क्लिक करने से धोखाधड़ी हो सकती है।
5. व्यक्तित्व का विकास नहीं होगा: हम अपनी पहचान खो देंगे।
(ज)"कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय!" — (i) यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों? (ii) संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?Show solution
(i) मन को पंछी की तरह उड़ाना:

यदि मेरा मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो मैं उसे ले जाता:
1. महान विद्वानों और संतों के पास — उनसे ज्ञान और जीवन की सच्चाई सीखने के लिए।
2. प्रकृति की गोद में — पहाड़ों, नदियों और जंगलों में — मन की शांति के लिए।
3. उन स्थानों पर जहाँ लोग दुखी हैं — उनकी सहायता करने का संकल्प लेने के लिए।
4. अपने सपनों की दुनिया में — जहाँ सभी लोग सुखी, शिक्षित और स्वस्थ हों।

(ii) संगति के प्रभाव:

सकारात्मक प्रभाव:
- अच्छी संगति से अच्छी आदतें, सकारात्मक सोच और सफलता मिलती है।
- परिश्रमी लोगों के साथ रहने से हम भी मेहनती बनते हैं।
- ज्ञानी लोगों की संगति से हमारा ज्ञान बढ़ता है।

नकारात्मक प्रभाव:
- बुरी संगति से बुरी आदतें लगती हैं।
- आलसी लोगों के साथ रहने से हम भी आलसी बन जाते हैं।
- नकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहने से हमारा आत्मविश्वास कम होता है।

निष्कर्ष: 'जैसा संग वैसा रंग' — इसलिए सदैव अच्छी संगति चुनें।

वाद-विवाद

(क)(ख)(ग)"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।" इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिए।Show solution
पक्ष में तर्क (संतुलन आवश्यक है):

1. वाणी पर संयम: आज सोशल मीडिया के युग में अत्यधिक बोलने (पोस्ट करने) से अफवाहें फैलती हैं, इसलिए संयम जरूरी है।
2. प्रकृति का संतुलन: जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा या सूखे की समस्या बढ़ रही है — यह दोहा आज भी प्रासंगिक है।
3. स्वास्थ्य: अत्यधिक धूप से त्वचा रोग और अत्यधिक वर्षा से बाढ़ आती है।
4. व्यावसायिक जीवन: कार्यस्थल पर न अत्यधिक बोलना उचित है, न बिल्कुल चुप रहना।

विपक्ष में तर्क:

1. अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं: कभी-कभी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना जरूरी है।
2. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार है।
3. परिस्थिति के अनुसार: कभी-कभी अधिक बोलना या अधिक चुप रहना परिस्थिति की माँग हो सकती है।

निर्णायक मत:

दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद निष्कर्ष यह है कि कबीर का यह दोहा आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है। संतुलन ही जीवन का सबसे बड़ा सिद्धांत है — चाहे वाणी हो, प्रकृति हो या तकनीक का उपयोग।

दोहे और कहावतें

1"जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।" इस दोहे की दूसरी पंक्ति कहावत 'जैसा संग वैसा रंग' की तरह प्रयुक्त होती है। ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।Show solution
कहावतें और उन पर आधारित वाक्य:

1. कहावत: 'जैसा संग वैसा रंग'
वाक्य: रमेश ने जब से मेहनती छात्रों के साथ पढ़ना शुरू किया, उसके अंक भी सुधर गए — सच ही कहते हैं, जैसा संग वैसा रंग।

2. कहावत: 'करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान'
वाक्य: सुनीता गणित में कमजोर थी, परंतु रोज अभ्यास करने से वह कक्षा में प्रथम आ गई — करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।

3. कहावत: 'बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय'
वाक्य: मोहन ने पूरे साल पढ़ाई नहीं की और परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गया — बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय।

4. कहावत: 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता'
वाक्य: जब सभी विद्यार्थियों ने मिलकर सफाई अभियान में भाग लिया तो पूरा विद्यालय चमक उठा — अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

5. कहावत: 'सच्चाई की राह कठिन होती है पर मंजिल सुंदर होती है'
वाक्य: रीना ने परीक्षा में नकल नहीं की और कम अंक आए, परंतु उसे अपने ईमानदार प्रयास पर गर्व था।

पाठ से आगे — आपकी बात

(क)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौ पाँय!" क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।Show solution
मेरे जीवन का मार्गदर्शक:

हाँ, मेरे जीवन में मेरे हिंदी के शिक्षक श्री रामप्रसाद जी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने मुझे सही दिशा दिखाई।

जब मैं कक्षा छह में था, तब मुझे पढ़ाई में बिल्कुल रुचि नहीं थी। मैं अपना अधिकांश समय खेलने में बिताता था। तब श्री रामप्रसाद जी ने मुझे समझाया कि खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी जरूरी है। उन्होंने मुझे कहानियाँ और कविताएँ पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रेरणा से मुझे पढ़ाई में रुचि आई और मेरे अंक सुधरे।

उनका यह उपकार मैं कभी नहीं भूल सकता। वे मेरे लिए गुरु से बढ़कर हैं।

*(नोट: यह एक व्यक्तिगत उत्तर है। विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार लिखें।)*
(ख)"निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय!" क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।Show solution
मेरा अनुभव:

एक बार मेरी कक्षा-अध्यापिका ने मुझे बताया कि मेरी लिखावट बहुत खराब है और मैं उत्तर लिखते समय बिंदुओं में नहीं लिखता, जिससे परीक्षा में अंक कम मिलते हैं।

पहले तो मुझे बुरा लगा, परंतु जब मैंने सोचा तो समझ में आया कि वे सही कह रही थीं। मैंने रोज अभ्यास करके अपनी लिखावट सुधारी और उत्तर बिंदुओं में लिखना शुरू किया। अगली परीक्षा में मेरे अंक पहले से बहुत अधिक आए।

इस अनुभव से मैंने सीखा कि आलोचना को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। जो हमारी गलतियाँ बताए, वही हमारा सच्चा हितैषी है।

*(नोट: यह एक व्यक्तिगत उत्तर है। विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार लिखें।)*
(ग)"कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय!" क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे— मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।Show solution
मेरा अनुभव:

हाँ, मैंने यह अनुभव किया है। जब मैं उन मित्रों के साथ रहता था जो अधिक समय मोबाइल पर बिताते थे, तो मेरी भी पढ़ाई में रुचि कम हो गई थी और मैं भी अधिक समय मोबाइल पर बिताने लगा था।

परंतु जब मेरे माता-पिता ने मुझे एक पुस्तक-प्रेमी मित्र से मिलवाया, तो धीरे-धीरे मुझे भी पढ़ने की आदत लगी। उस मित्र की संगति में मैंने कई अच्छी पुस्तकें पढ़ीं और मेरे विचार भी सकारात्मक हो गए।

इस अनुभव से मुझे समझ में आया कि 'जैसा संग वैसा रंग' — संगति का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।

*(नोट: यह एक व्यक्तिगत उत्तर है। विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार लिखें।)*

सृजन

(क)"साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप!" इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा।Show solution
सत्य की जीत

रोहन अपनी कक्षा का होनहार छात्र था। एक बार वार्षिक क्रिकेट प्रतियोगिता में उसकी टीम फाइनल में पहुँची। मैच बहुत रोमांचक था और दोनों टीमें बराबरी पर थीं।

अंतिम ओवर में रोहन की टीम को जीत के लिए छह रन चाहिए थे। तभी एक विवादास्पद क्षण आया — रोहन के साथी खिलाड़ी ने गेंद को हाथ से छुआ, जो नियमों के विरुद्ध था। अंपायर ने नहीं देखा, परंतु रोहन ने देख लिया।

उसके साथियों ने कहा — 'चुप रहो, अंपायर ने नहीं देखा। हम जीत जाएँगे।'

परंतु रोहन ने अंपायर के पास जाकर सच बता दिया। उसकी टीम को पाँच रन की पेनल्टी मिली और वे मैच हार गए।

साथी नाराज हो गए। परंतु अगले दिन विद्यालय में प्रधानाचार्य ने सभाकक्ष में रोहन की ईमानदारी की प्रशंसा की और उसे 'सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी' का पुरस्कार दिया। उन्होंने कहा — 'जीत से बड़ा है ईमान।'

रोहन के साथियों को भी समझ में आया कि सत्य की राह कठिन होती है, परंतु उसका फल मीठा होता है।

शिक्षा: 'साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।'
(ख)"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागों पाँव!" इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।Show solution
मेरे प्रेरणादायक शिक्षक — श्री विनोद कुमार जी

कबीर ने कहा है — 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।' इस दोहे को पढ़कर मुझे अपने गणित के शिक्षक श्री विनोद कुमार जी की याद आती है।

साक्षात्कार के प्रमुख अंश:

जब मैंने उनसे पूछा — 'आपने शिक्षक बनने का निर्णय क्यों किया?' तो उन्होंने कहा — 'मेरे गुरुजी ने मुझे बताया था कि एक अच्छा शिक्षक हजारों जीवन बदल सकता है। मैं भी यही करना चाहता था।'

उनका योगदान:

श्री विनोद कुमार जी केवल गणित नहीं पढ़ाते, वे जीवन के सूत्र भी सिखाते हैं। उन्होंने मुझे सिखाया कि हर समस्या का हल होता है — बस धैर्य और परिश्रम चाहिए। उनकी कक्षा में कोई भी प्रश्न पूछने से नहीं डरता।

वे कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देते हैं। उनकी प्रेरणा से कई विद्यार्थी इंजीनियर और वैज्ञानिक बने हैं।

निष्कर्ष:

श्री विनोद कुमार जी जैसे शिक्षक ही समाज की असली नींव हैं। उनका योगदान किसी भी पुरस्कार से बड़ा है। कबीर के शब्दों में — ऐसे गुरु के चरणों में शत-शत नमन।

*(नोट: विद्यार्थी अपने शिक्षक से वास्तविक साक्षात्कार करके निबंध लिखें।)*

कबीर हमारे समय में

(क)कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।Show solution
कबीर आज के समय में इन विषयों पर कविता लिख सकते हैं:

1. सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग — झूठी खबरें फैलाने और समय बर्बाद करने पर।
2. पर्यावरण प्रदूषण — नदियों, वायु और भूमि के प्रदूषण पर।
3. जातिवाद और भेदभाव — आज भी समाज में व्याप्त असमानता पर।
4. भ्रष्टाचार — सरकारी और सामाजिक भ्रष्टाचार पर।
5. मोबाइल की लत — बच्चों और युवाओं में बढ़ती स्क्रीन-लत पर।
6. शिक्षा का व्यापारीकरण — शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर।
7. धार्मिक कट्टरता — धर्म के नाम पर हिंसा और भेदभाव पर।
8. महिला सशक्तिकरण — महिलाओं के अधिकारों और सम्मान पर।
9. साइबर अपराध — इंटरनेट पर होने वाली धोखाधड़ी पर।
10. उपभोक्तावाद — अत्यधिक भौतिकवाद और दिखावे पर।
(ख)इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।Show solution
विभिन्न विषयों पर दो-दो पंक्तियाँ:

1. सोशल मीडिया:
झूठी खबर न फैलाओ, सोच-समझकर बोल।
शब्दों का है बड़ा असर, मन का खोलो मोल।।

2. पर्यावरण:
नदियाँ रोती, पेड़ कटे, धरती करे पुकार।
प्रकृति को मत नष्ट करो, यही है जीवन-आधार।।

3. मोबाइल की लत:
मोबाइल में मत डूबो, जीवन है अनमोल।
संग-साथ का सुख लो, खोलो मन का बोल।।

4. भ्रष्टाचार:
साँच की राह पर चलो, झूठ से दूर रहो।
ईमानदारी ही है धन, यही सत्य कहो।।

5. शिक्षा:
गुरु का मान करो सदा, ज्ञान है सबसे बड़ा।
पढ़-लिखकर बनो महान, यही है जीवन-पथ सीधा।।

*(नोट: विद्यार्थी अपनी कल्पना और रचनात्मकता से और पंक्तियाँ लिख सकते हैं।)*

साइबर सुरक्षा और दोहे

(क)"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप!" इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?Show solution
इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के संकट:

1. गोपनीयता का खतरा: व्यक्तिगत जानकारी (जैसे — घर का पता, फोन नंबर, बैंक विवरण) साझा करने से साइबर अपराधी उसका दुरुपयोग कर सकते हैं।

2. अफवाहें फैलना: बिना जाँचे-परखे सूचनाएँ आगे भेजने से झूठी खबरें (Fake News) फैलती हैं जिससे समाज में भय और अशांति उत्पन्न होती है।

3. साइबर बुलिंग: किसी के बारे में गलत जानकारी साझा करने से उसे मानसिक कष्ट हो सकता है।

4. कानूनी समस्याएँ: गलत या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

5. वित्तीय धोखाधड़ी: बैंकिंग जानकारी साझा करने से आर्थिक नुकसान हो सकता है।

6. डिजिटल पहचान की चोरी: व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग करके कोई आपकी पहचान चुरा सकता है।

सुझाव: इंटरनेट पर सोच-समझकर और संतुलित रूप से सूचनाएँ साझा करें — 'अति' से बचें।
(ख)"साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय!" किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को 'सूप' की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?Show solution
जानकारी को 'सूप' की तरह छानने की आवश्यकता:

जैसे सूप अनाज में से सार (अच्छे दाने) रखता है और थोथा (भूसा) उड़ा देता है, उसी प्रकार इंटरनेट पर उपलब्ध असंख्य सूचनाओं में से उपयोगी जानकारी छाँटना आवश्यक है क्योंकि:

1. इंटरनेट पर सही और गलत दोनों प्रकार की जानकारी उपलब्ध है।
2. हर सूचना विश्वसनीय नहीं होती।
3. कुछ सूचनाएँ जानबूझकर भ्रामक बनाई जाती हैं।

उपयोगी और हानिकारक सूचना की पहचान कैसे करें:

1. स्रोत की जाँच करें: क्या यह जानकारी किसी विश्वसनीय वेबसाइट (जैसे — सरकारी वेबसाइट, प्रतिष्ठित समाचार पत्र) से है?

2. तथ्यों की पुष्टि करें: एक ही जानकारी को कम से कम दो-तीन विश्वसनीय स्रोतों से जाँचें।

3. भावनात्मक सामग्री से सावधान रहें: जो सूचना अत्यधिक भय, क्रोध या उत्साह उत्पन्न करे, उसे सावधानी से जाँचें।

4. व्यक्तिगत जानकारी माँगने वाले ईमेल/लिंक से बचें: ये साइबर ठगी के तरीके हो सकते हैं।

5. बड़ों से पूछें: संदिग्ध सूचना के बारे में माता-पिता या शिक्षक से परामर्श लें।

निष्कर्ष: डिजिटल युग में 'सूप' जैसी विवेक-शक्ति अत्यंत आवश्यक है।

आज के समय में

1अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।"


स्पष्टीकरण: अमित का मन पंछी की तरह गलत संगति में चला गया। जैसी संगति उसने की, वैसा ही फल (कम अंक) उसे मिला। यह दोहा बताता है कि संगति का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
2एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा — 'हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो' — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।"


स्पष्टीकरण: जैसे सूप सार (अच्छे दाने) रखता है और थोथा (भूसा) उड़ा देता है, उसी प्रकार इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं में से उपयोगी जानकारी को ग्रहण करना और बेकार को छोड़ देना आवश्यक है।
3एक मित्र आपकी गलत बात पर आलोचना करता है और आप सोचते हैं — 'आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है' — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।"


स्पष्टीकरण: जो मित्र हमारी गलतियाँ बताता है, वह हमारा सच्चा हितैषी है। वह बिना पानी और साबुन के ही हमारे स्वभाव को निर्मल (शुद्ध) कर देता है। ऐसे आलोचक को पास रखना चाहिए।
4रोमा ने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय।।"


स्पष्टीकरण: रोमा ने अहंकार और क्रोध में कठोर शब्द बोले जिससे वातावरण बिगड़ा। यदि वह अहंकार छोड़कर मधुर वाणी बोलती तो न केवल सहकर्मी को शांति मिलती, बल्कि वह स्वयं भी शांत रहती।
5कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान किया और रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा — 'बोलचाल में संतुलन आवश्यक है' — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।"


स्पष्टीकरण: मोहन का अत्यधिक बोलना और रमेश का बिल्कुल चुप रहना — दोनों ही अति हैं। कबीर का यह दोहा बताता है कि जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन आवश्यक है।
6सुरेश को 'प्रतिभा सम्मान' मिली तो उसने कहा — 'इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है' — इस घटना पर कौन-सा दोहा याद आता है?Show solution
इस घटना पर निम्नलिखित दोहा याद आता है:

"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँव।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।"


स्पष्टीकरण: सुरेश ने अपनी सफलता में गुरुजनों के योगदान को स्वीकार किया। यह कबीर के उस भाव को दर्शाता है जिसमें गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु ही हमें सही दिशा दिखाते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

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