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Chapter 3 of 30
NCERT Solutions

दुःख का अधिकार

Haryana Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for दुःख का अधिकार — Haryana Board Class 9 Hindi.

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An illustration showing how different types of clothing (poshak) represent different social classes and statuses in society, with examples of traditional Indian attire.
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28 Questions Solved · 6 Sections

मौखिक प्रश्न

1किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?Show solution
उत्तर:
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता चलता है। पोशाक यह बताती है कि व्यक्ति किस वर्ग या समाज से संबंध रखता है — वह अमीर है या गरीब, उच्च वर्ग का है या निम्न वर्ग का।
2खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था?Show solution
उत्तर:
खरबूजे बेचनेवाली स्त्री (बुद्धिया) के बेटे की मृत्यु को अभी एक दिन भी नहीं हुआ था। वह सूतक (मृत्यु के बाद का अशौच काल) में थी। लोगों का मानना था कि सूतक में उसके हाथ का छुआ सामान लेना अपवित्र होगा, इसलिए कोई उससे खरबूजे नहीं खरीद रहा था।
3उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?Show solution
उत्तर:
उस स्त्री को देखकर लेखक का मन व्यथित और करुणा से भर गया। वह उसके पास जाकर उसके दुःख का कारण जानना चाहता था, परंतु अपनी पोशाक (सामाजिक प्रतिष्ठा) के कारण वह उसके पास झुककर बैठ नहीं सका और दूर से ही उसे देखता रहा।
4उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था?Show solution
उत्तर:
उस स्त्री के लड़के (भगवाना) की मृत्यु साँप के काटने से हुई थी। वह खेत में काम करते समय साँप के काटने का शिकार हो गया था। माँ ने उसे बचाने के बहुत प्रयास किए, परंतु वह बच न सका।
5बुद्धिया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?Show solution
उत्तर:
बुद्धिया अत्यंत गरीब थी। उसके पास न कोई स्थायी आय का साधन था और न ही कोई संपत्ति। उसका परिवार दिन-प्रतिदिन की मजदूरी पर निर्भर था। ऐसी स्थिति में कोई भी उसे उधार देने का जोखिम नहीं उठाना चाहता था, क्योंकि उधार वापस मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

1मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?Show solution
उत्तर:
मनुष्य के जीवन में पोशाक का बहुत महत्व है। पोशाक केवल तन ढकने का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी दर्शाती है। पोशाक देखकर ही लोग किसी व्यक्ति के प्रति अपना व्यवहार और दृष्टिकोण निर्धारित करते हैं। यह समाज में व्यक्ति की पहचान और प्रतिष्ठा का प्रतीक बन जाती है।
2पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?Show solution
उत्तर:
जब हम किसी दुखी, पीड़ित या गरीब व्यक्ति के पास जाकर उसके दुःख में सहभागी होना चाहते हैं, तब हमारी उच्च वर्गीय पोशाक हमें रोक देती है। हम सोचते हैं कि यदि हम उस गरीब के पास बैठे तो हमारी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचेगी। इस प्रकार पोशाक हमारे लिए बंधन और अड़चन बन जाती है।
3लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया?Show solution
उत्तर:
लेखक उस स्त्री के रोने का कारण इसलिए नहीं जान पाया क्योंकि वह अच्छी पोशाक पहने हुए था। उसकी पोशाक उसे उस गरीब स्त्री के पास झुककर बैठने से रोक रही थी। वह उसके पास जाकर पूछना चाहता था, परंतु सामाजिक प्रतिष्ठा का बंधन उसे रोके रहा।
4भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?Show solution
उत्तर:
भगवाना अपने परिवार का निर्वाह खेतों में काम करके और सब्जी-फल बेचकर करता था। वह दूसरों के खेतों में मजदूरी करता था और खरबूजे आदि उगाकर बाजार में बेचता था। इसी आय से वह अपनी माँ, पत्नी और बच्चों का पेट पालता था।
5लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुद्धिया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी?Show solution
उत्तर:
लड़के की मृत्यु के बाद बुद्धिया के घर में खाने को कुछ नहीं था। उसके छोटे-छोटे पोते-पोतियाँ भूख से बिलबिला रहे थे। कोई उसे उधार देने को तैयार नहीं था। ऐसी विवशता में उसके पास खरबूजे बेचने के अलावा कोई चारा नहीं था, इसलिए वह दुःख में भी बाजार चल पड़ी।
6बुद्धिया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?Show solution
उत्तर:
लेखक के पड़ोस की संभ्रांत महिला के बेटे की मृत्यु पर वह महीनों शोक मनाती रही, बिस्तर पर पड़ी रही और उसे डॉक्टरों की देखभाल मिली। बुद्धिया भी माँ थी, उसका दुःख भी उतना ही गहरा था, परंतु गरीबी के कारण वह शोक मनाने का अधिकार भी नहीं रख सकती थी। इस तुलना से लेखक ने दिखाया कि दुःख मनाने का अधिकार भी केवल संपन्न लोगों को है।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1बाजार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
उत्तर:
बाजार के लोग उस स्त्री की निंदा कर रहे थे। कुछ लोग कह रहे थे कि इसका जवान बेटा कल ही मरा है और यह आज बाजार में खरबूजे बेचने चली आई — इसे जरा भी शर्म नहीं। कुछ लोगों ने कहा कि यह बेशर्म है, इसे धर्म-ईमान का कोई ख्याल नहीं। कुछ ने कहा कि इन गरीबों के लिए बेटा-बेटी, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है। लोग उसे हेय दृष्टि से देख रहे थे और उससे खरबूजे खरीदने को तैयार नहीं थे।
2पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला?Show solution
उत्तर:
पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को पता चला कि उस स्त्री का जवान बेटा भगवाना कल साँप के काटने से मर गया था। उसके घर में खाने को कुछ नहीं था और छोटे-छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे। बुद्धिया के पास न कोई संपत्ति थी और न कोई उसे उधार देने को तैयार था। इसीलिए विवश होकर वह बेटे की मृत्यु के दूसरे ही दिन खरबूजे बेचने आ गई थी।
3लड़के को बचाने के लिए बुद्धिया माँ ने क्या-क्या उपाय किए?Show solution
उत्तर:
साँप के काटने पर बुद्धिया ने अपने बेटे भगवाना को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उसने ओझा बुलाया जिसने झाड़-फूँक की। उसने अपने हाथों के छन्नी-ककना (गहने) बेचकर दवाई का इंतजाम किया। वह रात भर बेटे के पास बैठी रही। उसने भगवान से प्रार्थना की। परंतु इन सब उपायों के बावजूद भगवाना को नहीं बचाया जा सका और उसकी मृत्यु हो गई।
4लेखक ने बुद्धिया के दु:ख का अंदाजा कैसे लगाया?Show solution
उत्तर:
लेखक ने बुद्धिया के दुःख का अंदाजा अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला से तुलना करके लगाया। उस महिला का बेटा मरा था तो वह महीनों बिस्तर पर पड़ी रही, डॉक्टर बुलाए गए, उसे शोक मनाने की पूरी सुविधा मिली। बुद्धिया का दुःख भी उतना ही गहरा था — वह भी एक माँ थी जिसने अपना जवान बेटा खोया था। परंतु गरीबी ने उसे शोक मनाने का अवसर भी नहीं दिया। इसी तुलना से लेखक ने उसके असीम दुःख को समझा।
5इस पाठ का शीर्षक 'दु:ख का अधिकार' कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।Show solution
उत्तर:
पाठ का शीर्षक 'दुःख का अधिकार' पूर्णतः सार्थक है। इस पाठ में लेखक ने यह दिखाया है कि हमारे समाज में दुःख मनाने का अधिकार भी सबको समान रूप से प्राप्त नहीं है। संपन्न वर्ग की महिला महीनों शोक मना सकती है, परंतु गरीब बुद्धिया बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही खरबूजे बेचने को विवश है। समाज उसकी निंदा करता है, परंतु उसकी विवशता को नहीं समझता। यह शीर्षक सामाजिक असमानता पर गहरा व्यंग्य करता है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या गरीबों को दुःख मनाने का भी अधिकार नहीं है? इस प्रकार शीर्षक पाठ के मूल भाव को पूरी तरह व्यक्त करता है।

लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।Show solution
आशय:
इस पंक्ति में लेखक ने एक सुंदर उपमा का प्रयोग किया है। जिस प्रकार कटी हुई पतंग हवा के सहारे कुछ देर तक हवा में तैरती रहती है और एकदम जमीन पर नहीं गिरती, उसी प्रकार हमारी पोशाक (सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक) हमें किसी गरीब या दुखी व्यक्ति के पास झुककर बैठने से रोकती है। अर्थात् हमारी उच्च वर्गीय पोशाक हमें यह नहीं करने देती कि हम किसी गरीब के साथ बैठकर उसके दुःख में सहभागी हों। पोशाक हमारे और गरीबों के बीच एक अदृश्य दीवार खड़ी कर देती है।
2इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है।Show solution
आशय:
यह पंक्ति बाजार के उन लोगों की सोच को व्यक्त करती है जो बुद्धिया की निंदा कर रहे थे। इसका आशय यह है कि गरीब लोगों के लिए परिवार, रिश्ते-नाते, धर्म और ईमान — सब कुछ रोटी (जीविका) के अधीन है। जब पेट भरा नहीं होता तो कोई भी भावना, रिश्ता या धर्म काम नहीं आता। यह पंक्ति गरीबी की विवशता को दर्शाती है — गरीब व्यक्ति चाहकर भी अपने दुःख को नहीं मना सकता क्योंकि उसके लिए जीवित रहना पहली प्राथमिकता है। यह समाज के संपन्न वर्ग की संकुचित और असंवेदनशील सोच पर भी व्यंग्य है।
3शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और... दु:खी होने का भी एक अधिकार होता है।Show solution
आशय:
इस पंक्ति में लेखक ने समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। शोक और गम मनाना एक स्वाभाविक मानवीय भावना है, परंतु इसके लिए भी आर्थिक सुविधा की आवश्यकता होती है। संपन्न व्यक्ति महीनों शोक मना सकता है क्योंकि उसके पास खाने-पीने की चिंता नहीं होती। परंतु गरीब व्यक्ति को अपने प्रियजन की मृत्यु के तुरंत बाद ही रोजी-रोटी की चिंता करनी पड़ती है। इस प्रकार दुःख मनाने का अधिकार भी केवल संपन्न लोगों को है। यह पंक्ति सामाजिक और आर्थिक असमानता पर गहरी चोट करती है।

भाषा-अध्ययन

1पंचमाक्षर और अनुस्वार/अनुनासिक से संबंधित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो।Show solution
स्पष्टीकरण:

पंचमाक्षर: ङ, ञ, ण, न और म — ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं।

- इन्हें पूर्ण रूप में या अनुस्वार (˙\dot{}) के रूप में लिखा जा सकता है — दोनों शुद्ध हैं।
- उदाहरण: कण्ठ = कंठ, पतङ्ग = पतंग, चञ्चल = चंचल

- अपवाद: जब एक ही पंचमाक्षर दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा।
- उदाहरण: अम्मा, अन्न (यहाँ अनुस्वार नहीं लगेगा)

- यदि पंचमाक्षर के बाद अंतस्थ (य, र, ल, व) या ऊष्म (श, ष, स, ह) वर्ण हों तो अनुस्वार का प्रयोग होता है:
- संशय (न्), संरचना (न्), संवाद (म्), संहार (ङ्)

अनुस्वार (˙\dot{}) और अनुनासिक (~\tilde{}) में अंतर:
- अनुस्वार (बिंदु): व्यंजन के साथ प्रयुक्त होता है। उच्चारण में नासिकीय व्यंजन ध्वनि आती है।
- उदाहरण: संबंध, पतंग, ठंडा
- अनुनासिक (चंद्र-बिंदु): स्वर के साथ प्रयुक्त होता है। उच्चारण में हल्की नासिकीय ध्वनि आती है।
- उदाहरण: अँधेरा, बाँट, मुँह, महिलाएँ
2निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए — ईमान, बदन, अंदाज़ा, बेचैनी, गम, दर्जा, जमीन, जमाना, बरकतShow solution
उत्तर:

| शब्द | पर्याय |
|------|--------|
| ईमान | विश्वास, धर्म, सत्यनिष्ठा |
| बदन | शरीर, देह, तन |
| अंदाज़ा | अनुमान, अटकल, कयास |
| बेचैनी | व्याकुलता, अशांति, घबराहट |
| गम | दुःख, शोक, पीड़ा |
| दर्जा | स्तर, श्रेणी, पद |
| जमीन | भूमि, धरती, धरा |
| जमाना | युग, काल, समय |
| बरकत | समृद्धि, वृद्धि, उन्नति |
3निम्नलिखित उदाहरण के अनुसार पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए — उदाहरण: बेटा-बेटीShow solution
उत्तर:
पाठ में आए शब्द-युग्म निम्नलिखित हैं —

1. बेटा-बेटी
2. खसम-लुगाई
3. धर्म-ईमान
4. छन्नी-ककना
5. दुअन्नी-चवन्नी
6. पास-पड़ोस
7. झाड़ना-फूँकना
8. मुँह-अँधेरे
9. फफक-फफककर
10. बिलख-बिलखकर
11. तड़प-तड़पकर
12. लिपट-लिपटकर
4पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए — बंद दरवाजे खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना।Show solution
उत्तर:

1. बंद दरवाजे खोल देना: इसका अर्थ है — रास्ता बना देना, सहायता करना। पाठ के संदर्भ में — पोशाक व्यक्ति के लिए समाज में प्रवेश के बंद दरवाजे खोल देती है अर्थात् अच्छी पोशाक पहनने से लोग सम्मान देते हैं और हर जगह प्रवेश मिल जाता है।

2. निर्वाह करना: इसका अर्थ है — गुजारा करना, जीवन चलाना। पाठ के संदर्भ में — भगवाना मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का निर्वाह (गुजारा) करता था।

3. भूख से बिलबिलाना: इसका अर्थ है — भूख के कारण तड़पना, व्याकुल होना। पाठ के संदर्भ में — भगवाना के मरने के बाद उसके छोटे-छोटे बच्चे खाने के अभाव में भूख से बिलबिला रहे थे।

4. कोई चारा न होना: इसका अर्थ है — कोई उपाय न बचना, विवश हो जाना। पाठ के संदर्भ में — बुद्धिया के पास बेटे की मृत्यु के बाद भी खरबूजे बेचने के अलावा कोई चारा नहीं था क्योंकि घर में खाने को कुछ नहीं था।

5. शोक से द्रवित हो जाना: इसका अर्थ है — दुःख देखकर मन पिघल जाना, करुणा से भर जाना। पाठ के संदर्भ में — बुद्धिया का दुःख देखकर लेखक का मन शोक से द्रवित हो गया अर्थात् उसके मन में गहरी करुणा उत्पन्न हुई।
5निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।Show solution
उत्तर:

(क)

1. छन्नी-ककना — माँ ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपने छन्नी-ककना तक बेच दिए।

2. अढ़ाई-मास — अढ़ाई मास की मेहनत के बाद फसल तैयार हुई।

3. पास-पड़ोस — पास-पड़ोस के लोगों ने मिलकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता की।

4. दुअन्नी-चवन्नी — उस जमाने में दुअन्नी-चवन्नी में काफी सामान मिल जाता था।

5. मुँह-अँधेरे — किसान मुँह-अँधेरे उठकर खेत पर चले जाते हैं।

6. झाड़ना-फूँकना — गाँव में आज भी लोग बीमारी में झाड़ना-फूँकना कराते हैं।

(ख)

1. फफक-फफककर — माँ की मृत्यु की खबर सुनकर बच्चा फफक-फफककर रोने लगा।

2. बिलख-बिलखकर — परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर वह बिलख-बिलखकर रोई।

3. तड़प-तड़पकर — घायल पक्षी तड़प-तड़पकर जमीन पर गिर पड़ा।

4. लिपट-लिपटकर — बच्चा माँ से लिपट-लिपटकर रोने लगा।
6निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इस प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए।Show solution
उत्तर:

(क) दिए गए वाक्यों के आधार पर नए वाक्य:

1. 'उठते ही ... लगे' संरचना:
- बच्चे स्कूल पहुँचते ही खेलने लगे।
- वह घर आते ही सो गया।

2. 'उसके लिए तो ... ही होगा' संरचना:
- उसके लिए तो डॉक्टर को दिखाना ही होगा।
- परीक्षा में पास होने के लिए तो मेहनत करनी ही होगी।

3. 'चाहे ... ही क्यों न ...' संरचना:
- चाहे उसके लिए रात भर जागना ही क्यों न पड़े, वह काम पूरा करेगा।
- चाहे उसके लिए सारी जमा-पूँजी ही क्यों न लगानी पड़े, वह बेटे को पढ़ाएगा।

(ख) दिए गए वाक्यों के आधार पर नए वाक्य:

1. 'जैसी ... वैसी ...' संरचना:
- अरे, जैसी करनी होती है, वैसी भरनी पड़ती है।
- जैसी संगति होती है, वैसा ही असर पड़ता है।

2. 'जो एक दफे ... तो फिर न ...' संरचना:
- वह जो एक बार रूठ गया तो फिर न माना।
- वह जो एक दफे चला गया तो फिर न लौटा।

योग्यता-विस्तार

1'व्यक्ति की पहचान उसकी पोशाक से होती है।' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।Show solution
संकेत-बिंदु (परिचर्चा के लिए):

पक्ष में तर्क:
- पोशाक व्यक्ति की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।
- पहली मुलाकात में पोशाक ही व्यक्ति की पहचान बनती है।
- विभिन्न पेशों की पोशाक अलग-अलग होती है — डॉक्टर, पुलिस, सैनिक आदि।

विपक्ष में तर्क:
- व्यक्ति की असली पहचान उसके गुण, कर्म और व्यवहार से होती है।
- पोशाक बाहरी आवरण है, व्यक्तित्व आंतरिक होता है।
- केवल पोशाक से व्यक्ति का मूल्यांकन करना उचित नहीं।

निष्कर्ष: पोशाक प्रथम परिचय का माध्यम हो सकती है, परंतु व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके चरित्र और कर्मों से होती है।
2यदि आपने भगवानो की माँ जैसी किसी दुखिया को देखा है तो उसकी कहानी लिखिए।Show solution
संकेत (स्वयं लेखन के लिए):

विद्यार्थी अपने जीवन के अनुभव के आधार पर लिखें। कहानी में निम्नलिखित बिंदु शामिल करें:
- उस दुखिया का परिचय और उसकी परिस्थिति
- उसके दुःख का कारण
- समाज का उसके प्रति व्यवहार
- उसकी विवशता और संघर्ष
- आपके मन पर उसका प्रभाव

उदाहरण के रूप में एक संक्षिप्त कहानी:
हमारे मोहल्ले में रामकली नाम की एक बुजुर्ग महिला रहती थी। उसका इकलौता बेटा अचानक बीमार पड़ गया और चल बसा। घर में बहू और दो छोटे बच्चे थे। रामकली ने अपना सारा दुःख मन में दबाकर अगले ही दिन से सब्जी बेचना शुरू कर दिया क्योंकि घर में खाने को कुछ नहीं था। लोग उसे देखकर तरह-तरह की बातें करते, परंतु उसकी विवशता को कोई नहीं समझता था। उसकी आँखें हमेशा नम रहती थीं, परंतु रोटी के लिए उसे काम करना ही था।
3पता कीजिए कि कौन-से साँप विषैले होते हैं? उनके चित्र एकत्र कीजिए और भित्ति पत्रिका में लगाइए।Show solution
उत्तर (जानकारी):

भारत में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले साँप निम्नलिखित हैं:

1. कोबरा (नाग): यह भारत का सबसे प्रसिद्ध विषैला साँप है। इसके काटने से तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है।

2. करैत (Krait): यह रात में सक्रिय रहता है और इसका विष अत्यंत घातक होता है।

3. रसेल्स वाइपर: यह भारत में सबसे अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार साँप है।

4. सॉ-स्केल्ड वाइपर: यह छोटा परंतु अत्यंत विषैला साँप है।

5. किंग कोबरा: यह विश्व का सबसे लंबा विषैला साँप है।

सावधानी: साँप काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ और एंटी-वेनम इंजेक्शन लगवाएँ। झाड़-फूँक पर निर्भर न रहें।

*(चित्र एकत्र करने का कार्य विद्यार्थी स्वयं पुस्तकालय, इंटरनेट या विज्ञान की पुस्तकों से करें और भित्ति पत्रिका में लगाएँ।)*

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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