साँवले सपनों की याद
Haryana Board · Class 9 · Hindi
NCERT Solutions for साँवले सपनों की याद — Haryana Board Class 9 Hindi.
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See them allप्रश्न-अभ्यास — साँवले सपनों की याद (जाबिर हुसैन)
1किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया?Show solution
उत्तर:
बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक गौरैया घायल होकर गिर पड़ी। उस गौरैया के गले पर नीला रंग था, जिसे देखकर सालिम अली के मन में जिज्ञासा जागी। वे उस नीले कंठ वाली गौरैया के बारे में जानने के लिए बेचैन हो उठे। इस जिज्ञासा ने उन्हें पक्षियों की दुनिया की ओर खींचा और वे पक्षी-विज्ञान के अध्ययन में जुट गए। यही वह घटना थी जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी और उन्हें एक महान पक्षी प्रेमी एवं पक्षी-विज्ञानी बना दिया। सारी जिंदगी वह नीले कंठ की गौरैया उन्हें खोज के नए-नए रास्तों की तरफ़ ले जाती रही।
2सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्यावरण से संबंधित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं?Show solution
उत्तर:
सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने संभवतः निम्नलिखित पर्यावरणीय खतरों का चित्र खींचा होगा:
1. वनों की अंधाधुंध कटाई — जिससे पक्षियों और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
2. जैव-विविधता का विनाश — दुर्लभ पक्षियों और वनस्पतियों की प्रजातियाँ लुप्त होती जा रही हैं।
3. नदियों और जल-स्रोतों का प्रदूषण — जिससे जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व खतरे में है।
4. साइलेंट वैली जैसे दुर्लभ पारिस्थितिक तंत्र का विनाश — विकास के नाम पर प्रकृति के अनमोल खजाने को नष्ट किया जा रहा है।
5. मानव-जनित प्रदूषण — जो समूचे पर्यावरण को असंतुलित कर रहा है।
इन खतरों की गंभीरता को सुनकर प्रधानमंत्री की आँखें नम हो गई थीं, क्योंकि सालिम अली ने बड़े मार्मिक ढंग से प्रकृति के विनाश का चित्र प्रस्तुत किया था।
3लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि 'मेरी छत पर बैठने वाली गौरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है?'Show solution
उत्तर:
फ्रीडा ने यह बात इसलिए कही होगी क्योंकि लॉरेंस एक गहरे प्रकृति-प्रेमी थे। वे प्रकृति के इतने करीब थे कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी उनके जीवन के अभिन्न अंग बन गए थे। लॉरेंस का अधिकांश समय प्रकृति की गोद में बीतता था। छत पर बैठी गौरैया ने लॉरेंस को उनके प्राकृतिक परिवेश में बहुत करीब से देखा था — उनकी सहजता, उनका खुलापन, उनका सादा-दिल स्वभाव सब कुछ।
फ्रीडा का यह कथन व्यंग्यात्मक भी है और भावनात्मक भी। वे कहना चाहती हैं कि लॉरेंस प्रकृति के साथ इतने एकाकार हो गए थे कि प्रकृति के जीव उन्हें उनसे भी बेहतर जानते थे। साथ ही यह भी संकेत है कि लॉरेंस के व्यक्तित्व को शब्दों में बाँधना कठिन है — उन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है, जैसे प्रकृति को।
4आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक जिंदगी का प्रतिरूप बन गए थे।
(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा!
(ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।Show solution
आशय: इस पंक्ति में लेखक ने सालिम अली की तुलना डी. एच. लॉरेंस से की है। जिस प्रकार लॉरेंस प्रकृति के साथ पूरी तरह एकाकार हो गए थे और उनका जीवन प्रकृति की सहजता, सरलता और स्वाभाविकता का जीवंत उदाहरण था, उसी प्रकार सालिम अली भी प्रकृति के साथ इतने घुल-मिल गए थे कि वे स्वयं प्रकृति का एक अंग बन गए। उनका जीवन कृत्रिमता से परे, पूरी तरह नैसर्गिक (स्वाभाविक) था। वे पक्षियों की खोज में जंगलों, पहाड़ों और वादियों में भटकते रहे — यही उनकी सहज जीवन-शैली थी।
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(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा!
आशय: यह पंक्ति उस मृत पक्षी के संदर्भ में है जो एयरगन की गोली से घायल होकर गिर पड़ा था। लेखक कहना चाहता है कि एक बार जो जीवन चला जाता है, वह किसी भी कीमत पर वापस नहीं आता। चाहे कोई अपनी शरीर की गर्मी और हृदय की धड़कन भी उस पक्षी को दे दे, तब भी वह मृत पक्षी पुनः जीवित नहीं हो सकता और न ही अपने सपनों के गीत गा सकता है। यह पंक्ति जीवन की अपरिवर्तनीयता और मृत्यु की अटलता को व्यक्त करती है। साथ ही यह सालिम अली की मृत्यु पर लेखक की गहरी पीड़ा का भी प्रतीक है।
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(ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।
आशय: इस पंक्ति में लेखक ने सालिम अली के विशाल व्यक्तित्व को रेखांकित किया है। 'टापू' सीमित, अलग-थलग और संकुचित होता है, जबकि 'अथाह सागर' असीमित, गहरा और विस्तृत होता है। सालिम अली ने अपने ज्ञान, अनुभव और पक्षी-प्रेम को किसी एक सीमित क्षेत्र तक नहीं रखा, बल्कि उनका कार्य-क्षेत्र, उनकी जानकारी और उनका योगदान इतना विशाल था कि वे प्रकृति की दुनिया में एक अथाह सागर की तरह फैले हुए थे। उनका व्यक्तित्व संकुचित नहीं था — वे सबको अपने में समेटने वाले, सर्वव्यापी और गहन थे।
5इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइए।Show solution
इस पाठ में लेखक जाबिर हुसैन की भाषा-शैली की निम्नलिखित चार प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. उर्दू-हिंदी मिश्रित भाषा (हिंदुस्तानी शैली):
लेखक ने हिंदी और उर्दू के शब्दों का सुंदर समन्वय किया है। 'हुजूम', 'वादी', 'हरारत', 'यायावरी', 'नैसर्गिक' जैसे शब्दों का प्रयोग भाषा को समृद्ध बनाता है।
2. चित्रात्मक एवं बिम्बात्मक शैली:
लेखक ने ऐसे बिम्बों और चित्रों का प्रयोग किया है जो पाठक की आँखों के सामने दृश्य उपस्थित कर देते हैं। जैसे — 'गले में लंबी दूरबीन लटकाए' सालिम अली का चित्र।
3. प्रतीकात्मक एवं रूपकात्मक भाषा:
लेखक ने 'टापू' और 'अथाह सागर' जैसे प्रतीकों का प्रयोग करके गहरी बात को सरल ढंग से कहा है। भाषा में रूपक और उपमाओं का सुंदर प्रयोग है।
4. भावात्मक एवं संवेदनशील शैली:
पाठ में लेखक की भावनाएँ स्पष्ट रूप से झलकती हैं। 'मेरी आँखें नम हैं, सालिम अली, तुम लौटोगे ना!' जैसी पंक्तियाँ पाठक के हृदय को छू लेती हैं। भाषा में गहरी संवेदनशीलता और भावुकता है।
6इस पाठ में लेखक ने सालिम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है उसे अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
लेखक जाबिर हुसैन ने इस पाठ में सालिम अली के व्यक्तित्व का एक जीवंत और प्रेरणादायक चित्र प्रस्तुत किया है। उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. जिज्ञासु स्वभाव: बचपन में एयरगन से घायल नीले कंठ की गौरैया ने उनके मन में जो जिज्ञासा जगाई, वह जीवन भर बनी रही। वे हमेशा नई खोज के लिए उत्सुक रहते थे।
2. भ्रमणशील एवं यायावर: सालिम अली का स्वभाव घुमक्कड़ था। वे पक्षियों की खोज में देश-विदेश के जंगलों, पहाड़ों और वादियों में भटकते रहते थे।
3. प्रकृति-प्रेमी: वे प्रकृति के साथ इतने एकाकार थे कि लेखक ने उन्हें 'नैसर्गिक जिंदगी का प्रतिरूप' कहा है।
4. दृढ़ निश्चयी: जीवन की ऊँचाइयों में उनका विश्वास एक क्षण के लिए भी नहीं डिगा।
5. पर्यावरण के प्रति सजग: वे पर्यावरण की रक्षा के लिए सदैव चिंतित रहते थे। उन्होंने प्रधानमंत्री तक से मिलकर पर्यावरण बचाने की अपील की।
6. विशाल व्यक्तित्व: वे 'टापू' नहीं, 'अथाह सागर' थे — उनका ज्ञान और योगदान असीमित था।
संक्षेप में, सालिम अली एक ऐसे महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपना सारा जीवन पक्षियों और प्रकृति की सेवा में समर्पित कर दिया।
7'साँवले सपनों की याद' शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए।Show solution
'साँवले सपनों की याद' शीर्षक अत्यंत सार्थक, काव्यात्मक और भावपूर्ण है।
'साँवले सपने' का अर्थ:
'साँवले' शब्द यहाँ दो अर्थों में प्रयुक्त है — एक तो यह उन अधूरे, अस्पष्ट और मनोरम सपनों की ओर संकेत करता है जो सालिम अली ने प्रकृति और पक्षियों के संरक्षण के लिए देखे थे। दूसरे, 'साँवला' रंग प्रकृति की उस गहराई और रहस्यमयता का प्रतीक है जिसे सालिम अली जीवन भर खोजते रहे।
'याद' का महत्त्व:
यह पाठ सालिम अली की मृत्यु के बाद लिखा गया एक संस्मरण है। लेखक उनकी स्मृतियों को जीवित रखना चाहता है। 'याद' शब्द उस विरह-वेदना और श्रद्धांजलि को व्यक्त करता है जो लेखक के मन में सालिम अली के जाने के बाद उत्पन्न हुई है।
शीर्षक की सार्थकता:
सालिम अली के वे सपने — पक्षियों की खोज, प्रकृति का संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा — उनके जाने के बाद भी अधूरे हैं। ये सपने 'साँवले' इसलिए हैं क्योंकि ये पूरी तरह साकार नहीं हो सके। इस प्रकार यह शीर्षक पाठ के भाव, विषय और संवेदना को पूरी तरह समेटता है और इसे पूर्णतः सार्थक बनाता है।
8प्रस्तुत पाठ सालिम अली की पर्यावरण के प्रति चिंता को भी व्यक्त करता है। पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं?Show solution
सालिम अली ने अपना सारा जीवन पर्यावरण और पक्षियों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उनकी इस चिंता से प्रेरणा लेते हुए हम भी पर्यावरण की रक्षा में निम्नलिखित योगदान दे सकते हैं:
1. वृक्षारोपण: अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाएँ और उनकी देखभाल करें। पेड़ पक्षियों के आवास और भोजन के स्रोत हैं।
2. जल संरक्षण: पानी की बर्बादी रोकें। नदियों और तालाबों को प्रदूषित न होने दें, क्योंकि ये जलीय जीवों और पक्षियों के जीवन-स्रोत हैं।
3. प्लास्टिक का उपयोग कम करें: प्लास्टिक पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है। कपड़े के थैलों का उपयोग करें।
4. पक्षियों की रक्षा: पक्षियों के शिकार का विरोध करें। घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें।
5. जागरूकता फैलाएँ: अपने परिवार, मित्रों और समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाएँ।
6. ऊर्जा की बचत: बिजली और ईंधन का अनावश्यक उपयोग न करें, जिससे प्रदूषण कम हो।
इस प्रकार हम सालिम अली के सपनों को साकार करने में अपना योगदान दे सकते हैं।
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