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Chapter 22 of 30
NCERT Solutions

गीत-अगीत

Haryana Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for गीत-अगीत — Haryana Board Class 9 Hindi.

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12 Questions Solved · 1 Section

प्रश्न-अभ्यास — गीत-अगीत

1(क)नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे संबंधित पंक्तियों को लिखिए।Show solution
उत्तर:

नदी वेगवती होकर किनारों से कुछ कहते हुए बह जाती है — वह अपना गीत गाती हुई आगे निकल जाती है। यह देखकर तट पर खड़ा गुलाब सोचता है कि काश! विधाता ने उसे भी स्वर दिया होता, तो वह भी अपने पत्तों के सपनों का गीत जग को सुनाता। संबंधित पंक्तियाँ इस प्रकार हैं —

"देते स्वर यदि मुझे विधाता,\text{"देते स्वर यदि मुझे विधाता,}
अपने पत्तुर के सपनों का\text{अपने पत्तुर के सपनों का}
मैं भी जग को गीत सुनाता।"\text{मैं भी जग को गीत सुनाता।"}

अर्थात् गुलाब के मन में यह इच्छा जागती है कि वह भी नदी की तरह अपनी भावनाओं को गीत के रूप में व्यक्त कर सके, किंतु वह मूक है — उसका गीत अगीत (अनकहा) ही रह जाता है।
1(ख)जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?Show solution
उत्तर:

जब शुक (नर तोता) वसंती किरणों में पत्तों से छनकर आती धूप के बीच मधुर स्वर में गाता है, तो शुकी (मादा तोता) के हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वह अंडे सेते हुए उस गीत को सुनती है और उसका हृदय प्रेम-भाव से भर उठता है। वह सोचती है — "मैं गीत की कड़ी क्यों न बन सकी?" अर्थात् उसके मन में यह इच्छा उठती है कि वह भी उस गीत में सम्मिलित हो जाए, उसका हिस्सा बन जाए। शुक का गाया गीत शुकी के अंतर्मन को आंदोलित कर देता है और वह प्रेम-विह्वल हो उठती है।
1(ग)प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की क्या इच्छा होती है?Show solution
उत्तर:

जब प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए गीत गाता है, तब प्रेमिका के मन में यह तीव्र इच्छा होती है कि वह स्वयं उस गीत की एक कड़ी बन जाए — अर्थात् वह उस गीत में घुल-मिल जाए, उसका अभिन्न अंग बन जाए। वह चाहती है कि उसके प्रेमी का गीत और उसकी भावनाएँ एकाकार हो जाएँ। प्रेमिका का यह भाव अनकहा (अगीत) रहता है, किंतु वह गीत से कम सुंदर नहीं होता।
1(घ)प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति-चित्रण को लिखिए।Show solution
उत्तर:

प्रथम छंद में कवि ने नदी और गुलाब के माध्यम से अत्यंत सुंदर प्रकृति-चित्रण किया है —

- नदी का चित्रण: नदी वेगवती (तेज गति से बहने वाली) है। वह अपने किनारों (उपलों) से कुछ कहते हुए — जैसे उनसे बातें करते हुए — आगे बह जाती है। उसका यह बहना एक गीत की तरह है।

- गुलाब का चित्रण: नदी के तट पर एक गुलाब खड़ा है। वह मूक है, बोल नहीं सकता, किंतु उसके मन में भी भावनाओं का सागर उमड़ रहा है। वह सोचता है कि काश उसे भी स्वर मिला होता।

इस प्रकार प्रथम छंद में बहती नदी और तट पर खड़े गुलाब का जीवंत एवं भावपूर्ण प्रकृति-चित्रण हुआ है।
1(ङ)प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंध की व्याख्या कीजिए।Show solution
उत्तर:

इस कविता में कवि ने दिखाया है कि पशु-पक्षी प्रकृति के साथ गहरे और आत्मीय संबंध में बँधे हैं —

- शुक और वसंत: शुक (तोता) वसंत ऋतु में घनी डाल पर बैठकर गाता है। वसंती किरणें पत्तों से छनकर उसके अंग को छूती हैं — यह प्रकृति और पक्षी का एक अद्भुत तादात्म्य है।

- शुकी और घोंसला: शुकी घोंसले में बैठकर अंडे सेती है। वह प्रकृति की गोद में अपने जीवन-चक्र को पूरा करती है।

इस प्रकार पशु-पक्षी प्रकृति से अलग नहीं हैं — वे उसी का अंग हैं। उनकी भावनाएँ, उनके गीत और उनका जीवन प्रकृति के साथ मिलकर एक सुंदर सामंजस्य बनाते हैं।
1(च)मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
उत्तर:

प्रकृति मनुष्य को भावनात्मक रूप से गहराई से आंदोलित करती है। कविता में नदी का बहना, गुलाब का मूक खड़ा रहना, वसंती किरणों का पत्तों से छनकर आना — ये सभी दृश्य मनुष्य के मन में भावनाओं की लहरें उठाते हैं।

प्रकृति मनुष्य को प्रेरित करती है कि वह अपनी भावनाओं को व्यक्त करे — गीत गाए। जब प्रेमी प्रकृति की गोद में बैठकर गीत गाता है, तो प्रकृति उसकी भावनाओं को और गहरा कर देती है। इस प्रकार प्रकृति मनुष्य को सौंदर्य-बोध, प्रेम और अभिव्यक्ति की ओर प्रेरित करती है। वह मनुष्य के अंतर्मन को झकझोरती है और उसे गीत रचने के लिए उद्वेलित करती है।
1(छ)सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।Show solution
उत्तर:

हाँ, अगीत भी होता है और वह गीत से कम सुंदर नहीं होता। कविता में कवि ने यही केंद्रीय प्रश्न उठाया है — गीत सुंदर है या अगीत?

- गीत वह है जो स्वर में, शब्दों में व्यक्त होता है — जैसे नदी का बहते हुए किनारों से कुछ कहना, शुक का गाना, प्रेमी का गीत।

- अगीत वह है जो मन में रहता है, अनकहा रहता है — जैसे गुलाब की मूक भावनाएँ, शुकी का मन ही मन सोचना, प्रेमिका का गीत की कड़ी बनने की इच्छा।

कवि का मत है कि अगीत — अर्थात् अनकही भावनाएँ — भी उतनी ही सुंदर और मार्मिक होती हैं जितना गाया हुआ गीत। कभी-कभी जो कहा नहीं जाता, वह और भी गहरा होता है। इसलिए अगीत का अपना एक विशेष सौंदर्य है।
1(ज)'गीत-अगीत' के केंद्रीय भाव को लिखिए।Show solution
उत्तर:

'गीत-अगीत' कविता का केंद्रीय भाव यह है कि अभिव्यक्त भावनाएँ (गीत) और अनभिव्यक्त भावनाएँ (अगीत) — दोनों ही समान रूप से सुंदर और मूल्यवान हैं।

कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने तीन उदाहरणों के माध्यम से यह भाव व्यक्त किया है —
1. नदी का गीत और गुलाब का अगीत
2. शुक का गीत और शुकी का अगीत
3. प्रेमी का गीत और प्रेमिका का अगीत

तीनों स्थितियों में कवि यह प्रश्न उठाता है — "गीत, अगीत, कौन सुंदर है?" — और पाठक को यह अनुभव कराता है कि जो भावनाएँ मन में उठती हैं, अनकही रह जाती हैं, वे भी उतनी ही हृदयस्पर्शी होती हैं। प्रकृति, पशु-पक्षी और मनुष्य — सभी के जीवन में गीत और अगीत दोनों का अस्तित्व है।
2(क)संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए — अपने पत्तुर के सपनों का / मैं भी जग को गीत सुनाताShow solution
संदर्भ: ये पंक्तियाँ रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित कविता 'गीत-अगीत' से ली गई हैं। इसमें नदी के तट पर खड़ा गुलाब अपनी मनोव्यथा व्यक्त कर रहा है।

प्रसंग: नदी वेगवती होकर किनारों से कुछ कहते हुए बह जाती है। यह देखकर तट पर खड़ा गुलाब सोचता है —

व्याख्या: गुलाब कहता है — "यदि विधाता (ईश्वर) ने मुझे भी स्वर (आवाज़) दिया होता, तो मैं भी अपने पत्तों में छिपे सपनों का गीत इस संसार को सुनाता।" गुलाब के पत्तों में जो भावनाएँ, जो सपने हैं — वे अनकहे हैं, अगीत हैं। वह मूक है, इसलिए अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर सकता। यह पंक्तियाँ उन सभी प्राणियों की व्यथा को व्यक्त करती हैं जो भावनाओं से भरे हैं किंतु उन्हें व्यक्त करने में असमर्थ हैं।

विशेष: यहाँ गुलाब का मानवीकरण (Personification) किया गया है। 'पत्तुर के सपने' एक सुंदर बिंब है।
2(ख)संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए — गाता शुक जब किरण वसंती / छूती अंग पर्ण से छनकरShow solution
संदर्भ: ये पंक्तियाँ रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'गीत-अगीत' से ली गई हैं। इसमें शुक और शुकी के माध्यम से गीत और अगीत का सौंदर्य दर्शाया गया है।

प्रसंग: शुक (नर तोता) घनी डाल पर बैठकर गाता है और शुकी (मादा तोता) घोंसले में अंडे सेती हुई उसे सुनती है।

व्याख्या: जब वसंत ऋतु की सुनहरी किरणें पत्तों (पर्ण) से छनकर शुक के अंग को स्पर्श करती हैं, उस मनोरम वातावरण में शुक मधुर स्वर में गाता है। वसंती किरणों का पत्तों से छनकर आना एक अत्यंत सुंदर प्राकृतिक दृश्य है। यह वातावरण शुक को गाने के लिए प्रेरित करता है। प्रकृति और पक्षी का यह तादात्म्य कविता को जीवंत बना देता है।

विशेष: इन पंक्तियों में प्रकृति का सजीव चित्रण है। 'किरण वसंती' और 'पर्ण से छनकर' में दृश्य-बिंब की सुंदरता है।
2(ग)संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिए — हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की / बिधना यों मन में गुनती हैShow solution
संदर्भ: ये पंक्तियाँ रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'गीत-अगीत' से ली गई हैं। इसमें शुकी की मनोदशा का वर्णन है।

प्रसंग: शुक मधुर गीत गा रहा है और शुकी घोंसले में बैठकर अंडे सेती हुई उसे सुन रही है।

व्याख्या: शुकी शुक का गीत सुनकर मन ही मन सोचती है — "विधाता (भाग्य/ईश्वर) ने मुझे उस गीत की एक कड़ी क्यों नहीं बनाया?" अर्थात् वह चाहती है कि वह भी उस गीत में सम्मिलित हो जाए, उसका अंग बन जाए। 'बिधना' (विधाता/भाग्य) से वह यह प्रश्न करती है। यह उसका अगीत है — मन में उठी भावना जो बाहर नहीं आ सकी। यह पंक्तियाँ अनकही भावनाओं की गहराई और उनके सौंदर्य को दर्शाती हैं।

विशेष: 'गुनती है' शब्द में शुकी के मनन-चिंतन का सुंदर चित्रण है। यहाँ अगीत की सुंदरता को रेखांकित किया गया है।
3निम्नलिखित में 'वाक्य-विचलन' को समझते हुए प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए — (क) देते स्वर यदि मुझे विधाता (ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर (ग) गूँज रहा शुक का स्वर वन में (घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की (ङ) शुकी बैठ अंडे है सेतीShow solution
वाक्य-विचलन का अर्थ है — काव्य में लय, छंद या भाव की आवश्यकता के कारण शब्दों का क्रम सामान्य गद्य-क्रम से भिन्न कर दिया जाता है। नीचे प्रत्येक का प्रचलित वाक्य-विन्यास दिया गया है —

(क) देते स्वर यदि मुझे विधाता
यदि विधाता मुझे स्वर देते।\Rightarrow \text{यदि विधाता मुझे स्वर देते।}

(ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर
शुक उस घनी डाल पर बैठा।\Rightarrow \text{शुक उस घनी डाल पर बैठा।}

(ग) गूँज रहा शुक का स्वर वन में
शुक का स्वर वन में गूँज रहा है।\Rightarrow \text{शुक का स्वर वन में गूँज रहा है।}

(घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
मैं गीत की कड़ी क्यों न हुई?\Rightarrow \text{मैं गीत की कड़ी क्यों न हुई?}

(ङ) शुकी बैठ अंडे है सेती
शुकी बैठकर अंडे सेती है।\Rightarrow \text{शुकी बैठकर अंडे सेती है।}

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