Skip to main content
Chapter 24 of 30
NCERT Solutions

सवैये

Himachal Pradesh Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for सवैये — Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi.

42 questions20 flashcards4 concepts

Interactive on Super Tutor

Studying सवैये? Get the full interactive chapter.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.

1,000+ Class 9 students started this chapter today

An infographic detailing the key biographical information of poet Raskhan, including his birth year (1548), original name (Syed Ibrahim), place of origin (near Delhi), devotion to Krishna, spiritual i
Super Tutor

Learn better with visuals Super Tutor has hundreds of illustrations like this across every chapter — all free to try.

Get started
12 Questions Solved · 1 Section

प्रश्न-अभ्यास — सवैये (रसखान) | क्षितिज, कक्षा 9

1ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है?Show solution
दिया गया है: रसखान के सवैये जिनमें ब्रजभूमि के प्रति गहरा अनुराग व्यक्त हुआ है।

उत्तर:
कवि रसखान ने ब्रजभूमि के प्रति अपना प्रेम निम्नलिखित रूपों में अभिव्यक्त किया है—

1. पुनर्जन्म की कामना के रूप में: कवि चाहता है कि यदि अगला जन्म मनुष्य के रूप में हो तो वह गोकुल के ग्वालों के बीच जन्म ले, और यदि पशु के रूप में हो तो नंद की गायों के बीच चरे।

2. पक्षी रूप में सान्निध्य की इच्छा: यदि पक्षी बने तो कालिंदी (यमुना) के किनारे कदंब की डालों पर निवास करे, जहाँ कृष्ण विहार करते हैं।

3. पत्थर बनकर भी ब्रज में रहने की इच्छा: यदि पाषाण बने तो उसी गोवर्धन पर्वत का अंग बने जिसे कृष्ण ने अपनी उँगली पर उठाया था।

4. सोने-चाँदी के महलों पर ब्रज की कुंजों को प्राथमिकता: कवि करोड़ों सोने-चाँदी के महलों को ब्रज के काँटेदार करील की कुंजों पर न्योछावर करने को तैयार है।

5. कृष्ण की वेशभूषा पर सर्वस्व अर्पण: कृष्ण की एक लाठी और कंबल (कामरिया) पर आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ वार देने की भावना।

निष्कर्ष: इस प्रकार कवि का ब्रजभूमि-प्रेम जन्म-जन्मांतर तक व्याप्त है और वह हर रूप में ब्रज का सान्निध्य चाहता है।
2कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं?Show solution
दिया गया है: रसखान के सवैये जिनमें ब्रज के प्राकृतिक स्थलों का उल्लेख है।

उत्तर:
कवि रसखान ब्रज के वन, बाग और तालाब को इसलिए निहारना चाहते हैं क्योंकि ये सभी स्थान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े हैं। ये वही वन हैं जहाँ कृष्ण ने बाल-लीलाएँ कीं, वही बाग हैं जहाँ उन्होंने रास रचाया, और वही तालाब हैं जहाँ उन्होंने जल-क्रीड़ा की। कवि के लिए ये स्थान केवल प्राकृतिक दृश्य नहीं हैं, बल्कि कृष्ण की स्मृतियों के पवित्र तीर्थ हैं। इन्हें देखकर कवि को कृष्ण के दर्शन का अनुभव होता है। इसीलिए वह पशु, पक्षी या पत्थर किसी भी रूप में ब्रज में रहकर इन स्थलों को निहारते रहना चाहता है।
3एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है?Show solution
दिया गया है: रसखान का वह सवैया जिसमें वे कृष्ण की लकुटी और कामरिया पर सर्वस्व वारने की बात करते हैं।

उत्तर:
कवि रसखान कृष्ण की एक साधारण-सी लाठी (लकुटी) और कंबल (कामरिया) पर तीनों लोकों का राज्य, आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ न्योछावर करने को तैयार हैं। इसका कारण यह है कि—

- कवि के लिए कृष्ण की वह साधारण वेशभूषा संसार की समस्त सम्पदाओं से अधिक मूल्यवान है।
- कृष्ण के प्रति उनका प्रेम इतना गहरा और निःस्वार्थ है कि सांसारिक वैभव उनकी दृष्टि में तुच्छ है।
- लकुटी और कामरिया कृष्ण के ग्वाले-रूप के प्रतीक हैं — वह सरल, निश्छल और प्रेमपूर्ण रूप जो कवि को सर्वाधिक प्रिय है।

निष्कर्ष: यह भक्ति की पराकाष्ठा है जहाँ भक्त के लिए प्रभु का एक साधारण चिह्न भी समस्त सांसारिक वैभव से बढ़कर होता है।
4सखी ने गोपी से कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया था? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया है: रसखान का तीसरा सवैया जिसमें सखी-गोपी संवाद है।

उत्तर:
सखी ने गोपी से कृष्ण का ग्वाले का रूप धारण करने का आग्रह किया। उसने कहा कि—

- सिर पर मोर-पंख का मुकुट धारण करो।
- गले में गुंजों की माला पहनो।
- तन पर पीले वस्त्र (पीतांबर) धारण करो।
- हाथ में लाठी लो।
- ललित त्रिभंगी मुद्रा में खड़े होओ।

सखी का यह आग्रह इसलिए था क्योंकि वह गोपी को कृष्ण के उस रूप में देखना चाहती थी जो उन्हें सर्वाधिक प्रिय था। कृष्ण का यह ग्वाला-रूप — मोर-मुकुट, गुंज-माला, पीतांबर और लाठी सहित — ब्रज की गोपियों के हृदय में बसा हुआ था। सखी चाहती थी कि गोपी इस रूप को धारण करके उसे कृष्ण के दर्शन का सुख दे।
5आपके विचार से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है?Show solution
दिया गया है: रसखान के सवैये जिनमें पशु, पक्षी और पत्थर बनने की कामना व्यक्त की गई है।

उत्तर:
कवि रसखान की कृष्ण-भक्ति इतनी गहरी और व्यापक है कि वे मनुष्य जन्म की प्रतीक्षा किए बिना, किसी भी रूप में कृष्ण का सान्निध्य पाना चाहते हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं—

1. भक्ति की तीव्रता: सच्चा भक्त प्रभु से एक पल भी दूर नहीं रहना चाहता। पशु, पक्षी या पत्थर बनकर भी वह कृष्ण के निकट रह सकता है।

2. ब्रज की पवित्रता: ब्रज की प्रत्येक वस्तु — चाहे वह गाय हो, पक्षी हो या पर्वत — कृष्ण की लीलाओं से पवित्र है। इसलिए उनमें से कोई भी रूप धारण करना कृष्ण-सान्निध्य का माध्यम बन सकता है।

3. निःस्वार्थ प्रेम: कवि को मोक्ष या स्वर्ग की कामना नहीं, केवल कृष्ण का साथ चाहिए — चाहे वह किसी भी रूप में मिले।

निष्कर्ष: यह भावना भक्ति की उस उच्चतम अवस्था को दर्शाती है जहाँ भक्त अपने इष्ट के लिए अपना सर्वस्व — यहाँ तक कि मनुष्य-जन्म भी — त्यागने को तैयार है।
6चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं?Show solution
दिया गया है: रसखान का चौथा सवैया जिसमें गोपियों की विवशता का वर्णन है।

उत्तर:
चौथे सवैये में गोपियाँ स्वयं को कृष्ण के मुख की मुस्कान के सामने पूर्णतः विवश पाती हैं। उनकी विवशता के कारण इस प्रकार हैं—

1. मुरली की मोहनी धुन: जब कृष्ण मंद-मंद मुरली बजाते हैं तो गोपियाँ कानों में उँगलियाँ डाल लेती हैं, फिर भी वह धुन उनके मन में उतर जाती है।

2. मोहनी तान: कृष्ण जब कोठे पर चढ़कर गाते हैं तो उनकी मोहनी तानें गोपियों को बेसुध कर देती हैं।

3. ब्रजवासियों की समझाइश व्यर्थ: ब्रज के लोग गोपियों को समझाते हैं, पर कोई भी समझाइश काम नहीं आती।

4. कृष्ण के मुख की मुस्कान: सबसे बड़ी विवशता यह है कि कृष्ण के मुख की मुस्कान को देखकर गोपियाँ अपने आप को सँभाल नहीं पातीं। वे बार-बार कहती हैं — 'सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै' — अर्थात् यह मुस्कान देखकर मन को वश में करना असंभव है।

निष्कर्ष: गोपियाँ कृष्ण के रूप, संगीत और मुस्कान के सम्मुख पूर्णतः असहाय हो जाती हैं — यही उनकी विवशता है।
7(क)भाव स्पष्ट कीजिए— कोटिक ए कलधौत के धाम करौल के कुंजन ऊपर वारौं।Show solution
दिया गया है: रसखान के दूसरे सवैये की यह पंक्ति।

प्रयुक्त शब्दों के अर्थ:
- कोटिक = करोड़ों
- कलधौत के धाम = सोने-चाँदी के महल
- करील = काँटेदार झाड़ी (ब्रज में पाई जाने वाली)
- कुंजन = कुंजों (वन-उपवनों) पर
- वारौं = न्योछावर करना

भाव:
कवि रसखान कहते हैं कि वे करोड़ों सोने-चाँदी के भव्य महलों को ब्रज के करील के काँटेदार झाड़-झंखाड़ों पर न्योछावर कर देंगे। अर्थात् संसार का समस्त वैभव और ऐश्वर्य उन्हें ब्रज की उस साधारण भूमि के सामने तुच्छ लगता है जहाँ कृष्ण ने अपनी लीलाएँ कीं। ब्रज की धूल, उसके वन और काँटेदार झाड़ियाँ भी कवि को स्वर्ण-महलों से अधिक प्रिय हैं क्योंकि वे कृष्ण की स्मृतियों से पवित्र हैं। यह पंक्ति कृष्ण-भक्ति और ब्रज-प्रेम की पराकाष्ठा को व्यक्त करती है।
7(ख)भाव स्पष्ट कीजिए— माइ री वा मुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै।Show solution
दिया गया है: रसखान के चौथे सवैये की अंतिम पंक्ति।

प्रयुक्त शब्दों के अर्थ:
- माइ री = हे माँ / हे सखी
- वा मुख की = उस (कृष्ण के) मुख की
- मुसकानि = मुस्कान
- सम्हारी न जैहै = सँभाली नहीं जाएगी (मन को वश में नहीं किया जा सकेगा)

भाव:
गोपी अपनी सखी से कह रही है — हे सखी! कृष्ण के उस मुख की मुस्कान को देखकर मन को सँभालना किसी भी तरह संभव नहीं होगा। 'न जैहै, न जैहै, न जैहै' की त्रिपुनरुक्ति से गोपी की पूर्ण विवशता और कृष्ण के प्रति उसके अनन्य प्रेम की गहराई व्यक्त होती है। कृष्ण की मुस्कान इतनी मोहक है कि उसके सामने सारे संयम, सारी समझाइश और सारे प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं। यह पंक्ति भक्ति और प्रेम की उस अवस्था को दर्शाती है जहाँ भक्त पूर्णतः ईश्वर के वश में हो जाता है।
8'कालिंदी कूल कदंब की डारन' में कौन-सा अलंकार है?Show solution
दिया गया है: रसखान के सवैये की यह पंक्ति।

उत्तर:
इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।

कारण:
'क' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है —
ालिंदीूलदंबारन\text{\textbf{क}ालिंदी} \quad \text{\textbf{क}ूल} \quad \text{\textbf{क}दंब} \quad \text{\textbf{क}ी} \quad \text{\textbf{ड}ारन}

'क', 'क', 'क', 'क' — एक ही व्यंजन वर्ण 'क' की एक से अधिक बार क्रमिक आवृत्ति होने के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार है। इससे पंक्ति में संगीतात्मकता और लय उत्पन्न होती है।
9काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए— या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी।Show solution
दिया गया है: रसखान के तीसरे सवैये की यह पंक्ति।

काव्य-सौंदर्य:

1. भाव-सौंदर्य:
गोपी कह रही है कि जो मुरली मुरलीधर (कृष्ण) के अधरों (होठों) पर रखी है, उसे वह अपने अधरों पर नहीं रखेगी। इसमें गोपी की ईर्ष्या और प्रेम दोनों व्यक्त हैं — वह कृष्ण के होठों की स्पर्श-पात्र मुरली से ईर्ष्या करती है और उसे अपने होठों पर रखने से मना करती है। यह प्रेम की सूक्ष्म और मनोवैज्ञानिक अभिव्यक्ति है।

2. अलंकार-सौंदर्य:
- यमक अलंकार: 'अधरान' (होठों पर) और 'अधरा' (होठों पर) — 'अधर' शब्द दो बार आया है, दोनों बार एक ही अर्थ में, किंतु भिन्न रूपों में।
- अनुप्रास अलंकार: 'मुरली मुरलीधर' में 'म' वर्ण की आवृत्ति तथा 'अधरान धरी अधरा' में 'अ' और 'ध' की आवृत्ति।
- पुनरुक्तिप्रकाश: 'अधरान...अधरा' में शब्द की पुनरावृत्ति से संगीतात्मकता।

3. भाषा-सौंदर्य:
- ब्रजभाषा का मधुर प्रयोग।
- शब्दों की ध्वन्यात्मकता से पंक्ति में संगीत उत्पन्न होता है।
- सरल किंतु भावपूर्ण शब्द-योजना।

4. रस: श्रृंगार रस (विप्रलंभ श्रृंगार) — गोपी की ईर्ष्या और प्रेम-विरह का सुंदर चित्रण।
10प्रस्तुत सवैयों में जिस प्रकार ब्रजभूमि के प्रति प्रेम अभिव्यक्त हुआ है, उसी तरह आप अपनी मातृभूमि के प्रति अपने मनोभावों को अभिव्यक्त कीजिए।Show solution
संकेत: यह रचनात्मक प्रश्न है। विद्यार्थी अपनी मातृभूमि के प्रति भावों को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर व्यक्त कर सकते हैं—

नमूना उत्तर:

मेरी मातृभूमि मुझे उतनी ही प्रिय है जितनी रसखान को ब्रजभूमि। इस धरती की मिट्टी में मेरे बचपन की यादें हैं, यहाँ के खेत-खलिहान, नदी-नाले और पहाड़ मुझे अपनी ओर खींचते हैं।

यदि मुझे दूसरा जन्म मिले तो मैं इसी धरती पर जन्म लेना चाहूँगा। यहाँ के हरे-भरे खेत, बहती नदियाँ, पक्षियों का कलरव और सुबह की ताज़ी हवा — ये सब मिलकर एक ऐसा स्वर्ग बनाते हैं जिसे छोड़कर मैं कहीं नहीं जाना चाहता।

संसार के सारे वैभव और विदेशों की चमक-दमक मुझे अपनी मातृभूमि की एक मुट्ठी मिट्टी के बराबर नहीं लगती। यह मेरी जन्मभूमि है, यहाँ की हर साँस में मेरे पूर्वजों का परिश्रम और त्याग समाया है।

*(विद्यार्थी अपने अनुभव और भावनाओं के अनुसार इसे और विस्तार दे सकते हैं।)*
11रसखान के इन सवैयों का शिक्षक की सहायता से कक्षा में आदर्श वाचन कीजिए। साथ ही किन्हीं दो सवैयों को कंठस्थ कीजिए।Show solution
संकेत: यह क्रियाकलाप-आधारित प्रश्न है।

आदर्श वाचन के लिए सुझाव:
1. सवैये को पढ़ने से पहले उसका अर्थ भली-भाँति समझ लें।
2. ब्रजभाषा के शब्दों का सही उच्चारण करें।
3. भाव के अनुसार आवाज़ में उतार-चढ़ाव लाएँ।
4. लय और ताल का ध्यान रखें क्योंकि सवैया एक छंद है।
5. शिक्षक के आदर्श वाचन को ध्यान से सुनें और उसका अनुसरण करें।

कंठस्थ करने के लिए सुझाव:
- पहले और दूसरे सवैये को कंठस्थ करना अपेक्षाकृत सरल है।
- प्रतिदिन दोहराने से सवैये याद हो जाएँगे।

*(यह प्रश्न कक्षा में व्यावहारिक रूप से करने के लिए है।)*

Stuck on a step?

Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.

Ask a Doubt Free

Frequently Asked Questions

What are the important topics in सवैये for Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi?
सवैये covers several key topics that are frequently asked in Himachal Pradesh Board Class 9 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
How to score full marks in सवैये — Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi?
Understand the core concepts first, then work through the 42 practice questions available for this chapter. Revise formulas and definitions regularly, and use flashcards for quick recall before the exam.
Where can I get free NCERT Solutions for सवैये Class 9 Hindi?
This page has free step-by-step NCERT Solutions for every exercise question in सवैये (Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi) — written the way examiners award marks: given, formula, working, answer.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

For serious students

Get the full सवैये chapter — for free.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi.