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Chapter 20 of 30
NCERT Solutions

दोहे

Himachal Pradesh Board · Class 9 · Hindi

NCERT Solutions for दोहे — Himachal Pradesh Board Class 9 Hindi.

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19 Questions Solved · 4 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1(क)प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने प्रेम की तुलना धागे से की है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि प्रेम का संबंध अत्यंत कोमल और नाजुक होता है। जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाने पर जोड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है और वह पहले जैसा सीधा नहीं रहता, उसी प्रकार प्रेम का धागा (संबंध) एक बार टूट जाने पर — अर्थात् मनमुटाव या विश्वासघात हो जाने पर — फिर से पहले जैसा नहीं हो पाता। भले ही दोनों पक्ष मिल जाएँ, परंतु उनके बीच कड़वाहट की गाँठ बनी रहती है। इसीलिए प्रेम-संबंध को सँभालकर रखना चाहिए, उसे टूटने नहीं देना चाहिए।
1(ख)हमें अपना दु:ख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने मन की व्यथा छिपाने का परामर्श दिया है।

उत्तर: रहीम के अनुसार हमें अपना दु:ख दूसरों पर इसलिए प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि संसार में कोई भी हमारे दु:ख को सच्चे मन से बाँटता नहीं। जब हम अपनी व्यथा दूसरों को सुनाते हैं तो लोग हमारी बात सुनकर मन-ही-मन प्रसन्न होते हैं और हमारा उपहास करते हैं। वे हमारे दु:ख को बाँटते नहीं, बल्कि हमारी पीड़ा पर हँसते हैं। इस प्रकार दु:ख बताने से दु:ख कम नहीं होता, उल्टे हम दूसरों की हँसी के पात्र बन जाते हैं। अतः अपनी व्यथा को मन में ही रखना श्रेयस्कर है।
1(ग)रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने उपयोगिता के आधार पर तुलना की है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि सागर का जल विशाल होते हुए भी खारा होने के कारण किसी के काम नहीं आता — न पीने के, न सींचने के। इसके विपरीत, कीचड़ में भरा थोड़ा-सा पंक जल (गंदला पानी) छोटे-छोटे जीव-जंतुओं और पशु-पक्षियों की प्यास बुझाता है, उनके जीवन का आधार बनता है। इसीलिए रहीम ने पंक जल को सागर से अधिक धन्य (श्रेष्ठ) कहा है। भाव यह है कि जो वस्तु या व्यक्ति दूसरों के काम आए, वही सच्चे अर्थों में महान है — केवल बड़ा या विशाल होना पर्याप्त नहीं।
1(घ)एक को साधने से सब कैसे सध जाता है?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने मूल को सींचने का उदाहरण दिया है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार किसी पेड़ की जड़ को सींचने से उसके सभी अंग — तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल और फल — सब तृप्त हो जाते हैं, उसी प्रकार यदि हम किसी एक मूल (मुख्य) तत्व को साध लें तो उससे जुड़ी सभी बातें स्वतः सिद्ध हो जाती हैं। अर्थात् जड़ (मूल कारण) को पकड़ लेने से सब कुछ प्राप्त हो जाता है। जैसे ईश्वर को साध लेने से सांसारिक सभी सुख मिल जाते हैं। इसीलिए रहीम एक को साधने पर बल देते हैं।
1(ङ)जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने अपनी संपत्ति के महत्व को समझाया है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि कमल (जलज) का जीवन जल पर निर्भर है। जब तालाब सूख जाता है और कमल जलहीन हो जाता है, तब सूर्य भी उसकी रक्षा नहीं कर पाता, क्योंकि सूर्य की किरणें कमल को जीवन देने में असमर्थ हैं — वह तो जल से ही जीवित रहता है। इसी प्रकार जब मनुष्य के पास अपनी संपत्ति (साधन) नहीं होती, तो विपत्ति के समय कोई भी — चाहे वह कितना भी शक्तिशाली मित्र या संबंधी हो — उसकी सहायता नहीं कर सकता। अतः अपनी संपत्ति और साधन बनाए रखना आवश्यक है।
1(च)अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने चित्रकूट को विपदाग्रस्त लोगों का आश्रय-स्थल बताया है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि चित्रकूट वह स्थान है जहाँ विपत्ति में पड़े लोग आते हैं। अवध नरेश श्री राम को भी वनवास की विपत्ति आने पर चित्रकूट जाना पड़ा था। पिता दशरथ के वचन और माता कैकेयी के वरदान के कारण राम को चौदह वर्ष का वनवास मिला और वे अयोध्या छोड़कर चित्रकूट में निवास करने गए। इस प्रकार रहीम यह बताना चाहते हैं कि चित्रकूट दुखियों और विपत्तिग्रस्त लोगों का आश्रय-स्थल है।
1(छ)'नट' किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने नट के उदाहरण से कुंडलिनी शक्ति का संकेत दिया है।

उत्तर: रहीम कहते हैं कि नट (कलाबाज) अपनी कुंडली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है। वह अपने शरीर को सिकोड़कर, कुंडली बनाकर ऊपर चढ़ने में सफल होता है। यहाँ रहीम का संकेत योग-साधना की ओर भी है — जिस प्रकार योगी कुंडलिनी शक्ति को जागृत करके ऊपर उठता है, उसी प्रकार नट कुंडली मारकर ऊपर चढ़ जाता है। भाव यह है कि विशेष कला या साधना में निपुण होने पर मनुष्य उन्नति करता है।
1(ज)'मोती, मानुष, चून' के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया भाव: रहीम ने 'पानी' शब्द के तीन अर्थों में पानी का महत्व बताया है।

उत्तर: रहीम ने 'पानी' शब्द का प्रयोग तीन अर्थों में किया है —

1. मोती के संदर्भ में — मोती की चमक ही उसका 'पानी' (आभा/चमक) है। यदि मोती की चमक चली जाए तो वह बेकार हो जाता है।

2. मानुष (मनुष्य) के संदर्भ में — मनुष्य का 'पानी' अर्थात् उसकी इज्जत, मान-सम्मान और आत्म-गौरव है। यदि मनुष्य का सम्मान चला जाए तो वह समाज में जीने योग्य नहीं रहता।

3. चून (आटे) के संदर्भ में — आटे का 'पानी' वास्तविक जल है। बिना पानी के आटा गूँधा नहीं जा सकता और रोटी नहीं बन सकती, अर्थात् जीवन-निर्वाह संभव नहीं।

इस प्रकार तीनों के लिए 'पानी' अनिवार्य है — बिना पानी के मोती, मनुष्य और आटा — तीनों का अस्तित्व व्यर्थ हो जाता है।

प्रश्न 2 — भाव स्पष्ट कीजिए

2(क)टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के प्रेम-संबंध विषयक दोहे से ली गई है।

भाव: इस पंक्ति में रहीम कहते हैं कि प्रेम का धागा (संबंध) एक बार टूट जाने पर फिर से जुड़ता नहीं और यदि जुड़ भी जाए तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। गाँठ का अर्थ है — मन में कड़वाहट, संदेह या दूरी का बना रहना। जिस प्रकार टूटे धागे को जोड़ने पर गाँठ पड़ जाती है और वह पहले जैसा सुंदर नहीं रहता, उसी प्रकार एक बार टूटे हुए प्रेम-संबंध में पहले जैसी मधुरता और विश्वास नहीं रह पाता। अतः प्रेम-संबंध को सँभालकर रखना चाहिए।
2(ख)सुनि अटिलैहें लोग सब, बाँटि न लैहें कोय।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के दु:ख छिपाने संबंधी दोहे से ली गई है।

भाव: रहीम कहते हैं कि जब हम अपनी व्यथा (दु:ख) दूसरों को सुनाते हैं, तो सभी लोग उसे सुनकर मन-ही-मन प्रसन्न होते हैं और हमारा उपहास करते हैं — परंतु कोई भी हमारे दु:ख को वास्तव में बाँटता (कम करता) नहीं। संसार में सच्चे हमदर्द बहुत कम होते हैं। अधिकांश लोग दूसरों के दु:ख में सहानुभूति दिखाने का नाटक करते हैं, किंतु भीतर से प्रसन्न होते हैं। इसीलिए अपनी व्यथा को मन में ही रखना उचित है।
2(ग)रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के मूल को सींचने संबंधी दोहे से ली गई है।

भाव: रहीम कहते हैं कि पेड़ की जड़ (मूल) को सींचने से पेड़ भरपूर फूलता-फलता है। यहाँ 'मूल' का अर्थ है — किसी भी कार्य का मूल आधार या कारण। यदि हम मूल कारण को ही साध लें, तो उससे जुड़ी सभी बातें स्वतः सिद्ध हो जाती हैं। जैसे ईश्वर-भक्ति को साधने से सभी सुख मिलते हैं। अनावश्यक शाखाओं (बाहरी बातों) पर ध्यान देने की बजाय मूल पर ध्यान देना चाहिए।
2(घ)दौरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के दोहे की विशेषता बताने वाली पंक्ति है।

भाव: रहीम कहते हैं कि दोहा छंद अर्थ की दृष्टि से बहुत गहरा और विस्तृत होता है, परंतु उसमें अक्षर (शब्द) बहुत कम होते हैं। अर्थात् दोहे में थोड़े शब्दों में बहुत गहरी और व्यापक बात कही जाती है। यह दोहे की सबसे बड़ी विशेषता है — 'अल्पाक्षरता और गहन अर्थवत्ता'। जैसे सागर की गहराई को थोड़े से शब्दों में नहीं नापा जा सकता, वैसे ही दोहे का अर्थ अत्यंत गहरा होता है।
2(ङ)नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के संगीत और त्याग संबंधी दोहे से ली गई है।

भाव: रहीम कहते हैं कि हिरण (मृग) संगीत की मधुर ध्वनि (नाद) पर इतना मुग्ध हो जाता है कि वह अपना शरीर तक न्योछावर कर देता है — अर्थात् शिकारी की बाँसुरी सुनकर वह उसके पास चला आता है और अपनी जान गँवा देता है। इसके विपरीत, मनुष्य धन के लिए अपना सब कुछ — यहाँ तक कि अपना मन, आत्मा और सम्मान — भी बेच देता है। भाव यह है कि मनुष्य धन के लोभ में पड़कर हिरण से भी अधिक मूर्खता करता है।
2(च)जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के छोटी वस्तुओं के महत्व संबंधी दोहे से ली गई है।

भाव: रहीम कहते हैं कि जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती। अर्थात् प्रत्येक वस्तु का अपना महत्व और उपयोग होता है। छोटी वस्तु को तुच्छ समझकर फेंक नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह किसी विशेष अवसर पर बड़े काम आ सकती है। बड़ी और शक्तिशाली वस्तु हर जगह उपयोगी नहीं होती। इसीलिए छोटे लोगों और छोटी वस्तुओं को भी सम्मान देना चाहिए।
2(छ)पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।Show solution
प्रसंग: यह पंक्ति रहीम के 'पानी' के महत्व संबंधी प्रसिद्ध दोहे से ली गई है।

भाव: रहीम कहते हैं कि पानी चले जाने पर मोती, मनुष्य और आटा — तीनों का उद्धार नहीं हो सकता।
- मोती का पानी (चमक) चली जाने पर वह बेकार हो जाता है।
- मनुष्य का पानी (इज्जत/सम्मान) चला जाने पर वह समाज में जीने योग्य नहीं रहता।
- चून (आटे) का पानी (जल) न मिलने पर रोटी नहीं बन सकती और जीवन-निर्वाह असंभव हो जाता है।

इस प्रकार 'पानी' तीनों के लिए अनिवार्य है और इसके बिना तीनों का अस्तित्व व्यर्थ है।

प्रश्न 3 — भाव की पंक्तियाँ

3(क)जिस पर विपदा पड़ती है वही इस देश में आता है — इस भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है?Show solution
उत्तर: इस भाव को पाठ में निम्नलिखित पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है —

"जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।\text{"जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।}
चंदन विष व्यापत नहिं, लिपटे रहत भुजंग।।"\text{चंदन विष व्यापत नहिं, लिपटे रहत भुजंग।।"}

तथा विशेष रूप से —

"रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय।\text{"रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय।}
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।"\text{हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।"}

एवं चित्रकूट संबंधी दोहे की पंक्तियाँ —

"चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।\text{"चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।}
जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस।।"\text{जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस।।"}

यही पंक्तियाँ इस भाव को सबसे सटीक रूप से अभिव्यक्त करती हैं।
3(ख)कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती — इस भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है?Show solution
उत्तर: इस भाव को पाठ में निम्नलिखित पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है —

"बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।\text{"बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।}
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।।"\text{रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय।।"}

भाव: जिस प्रकार फटे हुए दूध को लाख मथने पर भी मक्खन नहीं निकलता, उसी प्रकार एक बार बिगड़ी हुई बात को लाख प्रयास करने पर भी ठीक नहीं किया जा सकता।
3(ग)पानी के बिना सब सूना है अत: पानी अवश्य रखना चाहिए — इस भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है?Show solution
उत्तर: इस भाव को पाठ में निम्नलिखित पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है —

"रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।\text{"रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।}
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।"\text{पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।"}

भाव: रहीम कहते हैं कि पानी (चमक, सम्मान और जल) को सदा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि बिना पानी के सब कुछ सूना (व्यर्थ) हो जाता है।

प्रश्न 4 — शब्दों के प्रचलित रूप

4उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए।Show solution
उदाहरण: कोय — कोई, जे — जो

| पाठ का शब्द | प्रचलित रूप |
|---|---|
| ज्यों | जैसे / जिस तरह |
| कछु | कुछ |
| नहिं | नहीं |
| कोय | कोई |
| धनि | धन्य |
| आखर | अक्षर |
| जिय | जी / मन / हृदय |
| थोरे | थोड़े |
| होय | हो |
| माखन | मक्खन |
| तरवारि | तलवार |
| सींचिबो | सींचना |
| मूलहिं | मूल को / जड़ को |
| पिअत | पीते |
| पिआसो | प्यासा |
| बिगरी | बिगड़ी |
| आवे | आए |
| सहाय | सहायता |
| ऊबरै | उबरे / बचे |
| बिनु | बिना |
| बिथा | व्यथा |
| अठिलैहैं | इठलाएँगे / उपहास करेंगे |
| परि जाय | पड़ जाए |

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