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Chapter 36 of 39
NCERT Solutions

हस्तक्षेप (श्रीकांत वर्मा)

Jharkhand Board · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for हस्तक्षेप (श्रीकांत वर्मा) — Jharkhand Board Class 11 Hindi.

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11 Questions Solved · 2 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1मगध के माध्यम से 'हस्तक्षेप' कविता किस व्यवस्था की ओर इशारा कर रही है?Show solution
दिया गया है: श्रीकांत वर्मा की कविता 'हस्तक्षेप' में 'मगध' एक प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

व्याख्या:
'मगध' यहाँ केवल एक ऐतिहासिक स्थान नहीं है, बल्कि यह उस निरंकुश, दमनकारी और भ्रष्ट शासन-व्यवस्था का प्रतीक है जो आज के लोकतांत्रिक समाज में भी विद्यमान है। कविता के माध्यम से कवि उस व्यवस्था की ओर इशारा करता है जिसमें —

1. सत्ता का केंद्रीकरण हो जाता है और शासक वर्ग निरंकुश हो जाता है।
2. जनता को चुप रहने पर मजबूर किया जाता है — कोई छींकता नहीं, चीखता नहीं, टोकता नहीं।
3. प्रश्न उठाना खतरनाक माना जाता है और विरोध को कुचल दिया जाता है।
4. शांति के नाम पर दमन को उचित ठहराया जाता है।

इस प्रकार 'मगध' आधुनिक भारत की उस राजनीतिक व्यवस्था का प्रतीक है जहाँ सत्ता जनता की आवाज़ को दबाकर अपनी सुविधा के अनुसार 'व्यवस्था' और 'शांति' बनाए रखती है।

निष्कर्ष: कविता उस तानाशाही प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है जो लोकतंत्र के आवरण में छिपी रहती है।
2व्यवस्था को 'निरंकुश' प्रवृत्ति से बचाए रखने के लिए उसमें 'हस्तक्षेप' जरूरी है – कविता को दृष्टि में रखते हुए अपना मत दीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता 'हस्तक्षेप' में मगध की जनता शासन-व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करती।

मत एवं विश्लेषण:

हाँ, व्यवस्था को निरंकुश होने से बचाने के लिए हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है। कविता में मगध की जनता पूर्णतः निष्क्रिय है — वह न छींकती है, न चीखती है, न टोकती है। इस निष्क्रियता का परिणाम यह होता है कि सत्ता और अधिक निरंकुश हो जाती है।

हस्तक्षेप क्यों जरूरी है:

1. जवाबदेही सुनिश्चित होती है — जब जनता प्रश्न उठाती है तो शासक वर्ग उत्तरदायी बनता है।
2. अन्याय रुकता है — मुर्दे का हस्तक्षेप (प्रश्न — 'मनुष्य क्यों मरता है?') यह सिद्ध करता है कि एक प्रश्न भी व्यवस्था को हिला सकता है।
3. लोकतंत्र जीवित रहता है — बिना हस्तक्षेप के लोकतंत्र केवल नाम का रह जाता है।
4. कविता का संदेश — 'एक बार शुरू होने पर कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप' — यह पंक्ति बताती है कि हस्तक्षेप की शुरुआत एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।

निष्कर्ष: जब नागरिक चुप रहते हैं तो सत्ता मनमानी करती है। अतः सजग नागरिक का कर्तव्य है कि वह व्यवस्था में हस्तक्षेप करे, प्रश्न उठाए और अन्याय का विरोध करे।
3मगध निवासी किसी भी प्रकार से शासन व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से क्यों कतराते हैं?Show solution
दिया गया है: कविता में मगध के निवासी शासन-व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं करते।

कारण:

मगध निवासी निम्नलिखित कारणों से हस्तक्षेप करने से कतराते हैं —

1. भय और आतंक: सत्ता इतनी शक्तिशाली और दमनकारी है कि लोग डर के कारण चुप रहते हैं। विरोध करने पर दंड मिलने का भय रहता है।

2. 'रिवाज' बन जाना: कविता में कहा गया है कि चुप रहना एक 'रिवाज' बन गया है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यही परंपरा चली आ रही है, इसलिए लोग इसे स्वाभाविक मान लेते हैं।

3. व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता: प्रत्येक व्यक्ति अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। हस्तक्षेप करने पर जीवन खतरे में पड़ सकता है।

4. सामूहिक निष्क्रियता: जब सभी चुप हों तो अकेले बोलने का साहस नहीं होता। 'कोई नहीं करता' — यह भावना व्यक्ति को निष्क्रिय बना देती है।

5. व्यवस्था का प्रचार: शासन 'शांति' और 'व्यवस्था' के नाम पर विरोध को अनुचित ठहराता है, जिससे लोग स्वयं को दोषी महसूस करते हैं।

निष्कर्ष: भय, परंपरा और सामूहिक निष्क्रियता मिलकर मगध के निवासियों को हस्तक्षेप से रोकती हैं।
4'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं' – के आधार पर मगध की स्थिति का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता की पंक्ति — 'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं।'

भाव एवं वर्णन:

इस पंक्ति में कवि ने मगध की दयनीय स्थिति को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त किया है।

मगध की स्थिति:

1. नाम मात्र का अस्तित्व: मगध का नाम तो है, परंतु उसकी आत्मा — अर्थात् वहाँ के जीवंत, सक्रिय और स्वतंत्र नागरिक — समाप्त हो चुके हैं। यह एक खोखला राज्य बन गया है।

2. जीवन की असंभावना: वहाँ रहना इसलिए संभव नहीं क्योंकि वहाँ न स्वतंत्रता है, न न्याय है, न मानवीय गरिमा है। जहाँ मनुष्य बिना कारण मरते हों, वहाँ जीवन कैसा?

3. भ्रष्ट व्यवस्था: शासन इतना भ्रष्ट और दमनकारी हो गया है कि सामान्य जन का जीना दूभर हो गया है।

4. आधुनिक संदर्भ: यह केवल प्राचीन मगध की बात नहीं है। यह आज के उन सभी स्थानों की स्थिति है जहाँ तानाशाही, भ्रष्टाचार और दमन का राज है।

निष्कर्ष: मगध की यह स्थिति उस समाज का प्रतीक है जहाँ बाहर से सब ठीक दिखता है, परंतु भीतर से सब खोखला हो चुका है। वहाँ केवल शरीर हैं, आत्माएँ नहीं।
5मुर्दे का हस्तक्षेप क्या प्रश्न खड़ा करता है? प्रश्न की सार्थकता को कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता में जब कोई जीवित व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं करता, तब एक मुर्दा हस्तक्षेप करता है।

मुर्दे का प्रश्न:

मुर्दे का हस्तक्षेप यह प्रश्न खड़ा करता है — 'मनुष्य क्यों मरता है?'

प्रश्न की सार्थकता:

1. व्यंग्यात्मक विडंबना: जब जीवित लोग प्रश्न नहीं उठाते, तब एक मृत व्यक्ति प्रश्न उठाता है — यह अत्यंत व्यंग्यपूर्ण और मार्मिक है। इससे जीवित लोगों की मृत-समान स्थिति उजागर होती है।

2. व्यवस्था पर प्रहार: 'मनुष्य क्यों मरता है?' — यह प्रश्न सीधे शासन-व्यवस्था पर प्रहार करता है। यह पूछता है कि क्या मनुष्य की मृत्यु स्वाभाविक है या व्यवस्था की क्रूरता का परिणाम?

3. जवाबदेही की माँग: यह प्रश्न शासकों से उत्तर माँगता है — तुम्हारी नीतियों, तुम्हारे दमन, तुम्हारी उपेक्षा के कारण लोग मर रहे हैं।

4. जागृति का आह्वान: मुर्दे का यह प्रश्न जीवित लोगों को जगाने का प्रयास है — यदि मृत भी बोल सकता है, तो जीवित क्यों चुप हैं?

5. सार्वभौमिक प्रासंगिकता: यह प्रश्न केवल मगध का नहीं, हर उस समाज का है जहाँ अकाल मृत्यु, हत्या और दमन होता है।

निष्कर्ष: मुर्दे का हस्तक्षेप कविता का सबसे शक्तिशाली क्षण है जो व्यवस्था की क्रूरता को उजागर करता है और जीवित लोगों की चेतना को झकझोरता है।
6'मगध को बनाए रखना है, तो, मगध में शांति रहनी ही चाहिए' – भाव स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता की उक्त पंक्ति शासन-व्यवस्था के तर्क को प्रस्तुत करती है।

भाव:

इस पंक्ति में शासक वर्ग का वह तर्क प्रस्तुत किया गया है जिसके द्वारा वह जनता को चुप कराता है।

विस्तृत व्याख्या:

1. 'शांति' का भ्रामक अर्थ: यहाँ 'शांति' का अर्थ वास्तविक सुख-शांति नहीं है, बल्कि जनता की चुप्पी और निष्क्रियता है। शासक चाहता है कि कोई प्रश्न न उठाए, कोई विरोध न करे।

2. दमन को उचित ठहराना: 'मगध को बनाए रखना है' — इस बहाने से शासक किसी भी प्रकार के विरोध को 'मगध-विरोधी' घोषित कर देता है और दमन को न्यायसंगत बताता है।

3. व्यवस्था बनाम जनता: शासक की 'व्यवस्था' और 'शांति' वास्तव में जनता के हितों के विरुद्ध है। जनता की आवाज़ दबाकर जो शांति बनाई जाती है, वह वास्तव में दमन का दूसरा नाम है।

4. आधुनिक संदर्भ: आज भी सत्ताएँ 'राष्ट्रीय सुरक्षा', 'कानून-व्यवस्था' के नाम पर जनता की आवाज़ दबाती हैं — यह उसी प्रवृत्ति का प्रतीक है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति उस राजनीतिक छल को उजागर करती है जिसमें 'शांति' के नाम पर जनता को गुलाम बनाए रखा जाता है।
7'हस्तक्षेप' कविता सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होनेवाले प्रतिरोध की कविता है – स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता 'हस्तक्षेप' — श्रीकांत वर्मा।

स्पष्टीकरण:

यह कथन पूर्णतः सत्य है। कविता दो स्तरों पर काम करती है — सत्ता की क्रूरता और उसके विरुद्ध प्रतिरोध।

सत्ता की क्रूरता:

1. मगध में ऐसी व्यवस्था है जहाँ लोग छींकते तक नहीं — इतना भय और दमन है।
2. 'मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए' — इस नाम पर किसी भी विरोध को कुचला जाता है।
3. लोग बिना कारण मरते हैं — 'मनुष्य क्यों मरता है?' — यह प्रश्न सत्ता की क्रूरता को उजागर करता है।
4. 'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं' — सत्ता ने मगध को रहने योग्य नहीं छोड़ा।

प्रतिरोध:

1. मुर्दे का हस्तक्षेप — जब जीवित लोग चुप हैं, तब एक मृत व्यक्ति प्रश्न उठाता है — यह प्रतिरोध का सबसे शक्तिशाली रूप है।
2. 'एक बार शुरू होने पर कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप' — यह पंक्ति बताती है कि एक बार प्रतिरोध शुरू हो जाए तो वह अपरिहार्य हो जाता है।
3. कविता स्वयं एक प्रतिरोध का दस्तावेज़ है — कवि ने इस कविता के माध्यम से व्यवस्था पर प्रश्न उठाया है।

निष्कर्ष: कविता एक ओर सत्ता की क्रूरता का यथार्थ चित्रण करती है, तो दूसरी ओर यह संदेश देती है कि दमन जितना बढ़ता है, प्रतिरोध उतना ही अनिवार्य हो जाता है।
8निम्नलिखित लाक्षणिक प्रयोगों को स्पष्ट कीजिए – (क) कोई छींकता तक नहीं (ख) कोई चीखता तक नहीं (ग) कोई टोकता तक नहींShow solution
दिया गया है: कविता 'हस्तक्षेप' के लाक्षणिक प्रयोग।

(क) कोई छींकता तक नहीं:

लक्षणा: छींकना एक अनैच्छिक, स्वाभाविक शारीरिक क्रिया है जिसे रोका नहीं जा सकता।

भाव: जब कवि कहता है 'कोई छींकता तक नहीं' तो इसका अर्थ है कि मगध में भय का वातावरण इतना घना है कि लोग अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रियाएँ भी व्यक्त नहीं कर पाते। यहाँ तक कि जो क्रिया अनायास होती है, वह भी नहीं होती। यह पूर्ण दमन और भय का प्रतीक है।

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(ख) कोई चीखता तक नहीं:

लक्षणा: चीखना पीड़ा, भय या क्रोध की तीव्र अभिव्यक्ति है।

भाव: इसका अर्थ है कि मगध के लोग अपनी पीड़ा, कष्ट और अन्याय को भी व्यक्त नहीं कर पाते। जब मनुष्य असहनीय कष्ट में भी चीख नहीं सकता, तो यह उसकी पूर्ण विवशता और दासता का प्रतीक है। सत्ता ने उनकी आवाज़ को इस कदर दबा दिया है कि वे मूक हो गए हैं।

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(ग) कोई टोकता तक नहीं:

लक्षणा: टोकना अर्थात् किसी गलत काम पर आपत्ति जताना, रोकना।

भाव: इसका अर्थ है कि मगध में कोई भी शासन की गलत नीतियों, अन्याय और भ्रष्टाचार पर आपत्ति नहीं जताता। यह नागरिक चेतना की मृत्यु का प्रतीक है। जब नागरिक गलत को गलत कहना बंद कर दें, तो समझना चाहिए कि लोकतंत्र समाप्त हो गया है।

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समग्र भाव: तीनों लाक्षणिक प्रयोग मिलकर मगध की उस स्थिति को चित्रित करते हैं जहाँ स्वाभाविक प्रतिक्रिया से लेकर सचेत विरोध तक — सब कुछ समाप्त हो गया है।
9निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए – (क) मगध को बनाए रखना है, तो, ……… मगध है, तो शांति है (ख) मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए ……… क्या कहेंगे लोग? (ग) जब कोई नहीं करता ……… मनुष्य क्यों मरता है?Show solution
(क) मगध को बनाए रखना है, तो, ……… मगध है, तो शांति है

संदर्भ: यह पंक्तियाँ श्रीकांत वर्मा की कविता 'हस्तक्षेप' से ली गई हैं। इसमें शासक वर्ग का तर्क प्रस्तुत किया गया है।

व्याख्या:
शासक वर्ग यह तर्क देता है कि मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी चाहिए, और शांति तभी रहेगी जब मगध हो। यह एक चक्रीय तर्क (circular argument) है जिसमें 'मगध' और 'शांति' एक-दूसरे के पर्याय बना दिए गए हैं। वास्तव में यहाँ 'शांति' का अर्थ है — जनता की चुप्पी, उसका दमन। शासक 'मगध की रक्षा' के नाम पर किसी भी विरोध को कुचलना चाहता है। यह पंक्तियाँ उस राजनीतिक छल को उजागर करती हैं जिसमें 'राष्ट्र' और 'व्यवस्था' के नाम पर जनता की स्वतंत्रता छीन ली जाती है।

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(ख) मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए ……… क्या कहेंगे लोग?

संदर्भ: यह पंक्तियाँ उसी कविता से हैं जिसमें शासन-व्यवस्था के खोखले तर्कों को उजागर किया गया है।

व्याख्या:
शासक कहता है कि मगध में व्यवस्था रहनी चाहिए — परंतु यह 'व्यवस्था' किसके लिए है? यह व्यवस्था शासक वर्ग के हितों की रक्षा के लिए है, जनता के लिए नहीं। 'क्या कहेंगे लोग?' — यह पंक्ति शासक की लोक-लाज और छवि की चिंता को दर्शाती है। शासक को जनता के कष्ट की नहीं, बल्कि अपनी प्रतिष्ठा और छवि की चिंता है। यह व्यंग्य अत्यंत तीखा है — जहाँ लोग मर रहे हों, वहाँ शासक की चिंता यह है कि 'लोग क्या कहेंगे।'

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(ग) जब कोई नहीं करता ……… मनुष्य क्यों मरता है?

संदर्भ: यह कविता का सबसे मार्मिक और शक्तिशाली अंश है जिसमें एक मुर्दा हस्तक्षेप करता है।

व्याख्या:
जब मगध में कोई जीवित व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं करता — न छींकता है, न चीखता है, न टोकता है — तब एक मुर्दा हस्तक्षेप करता है और पूछता है — 'मनुष्य क्यों मरता है?' यह पंक्तियाँ अत्यंत व्यंग्यपूर्ण और मार्मिक हैं। इनमें कई अर्थ निहित हैं —

- जीवितों की मृत-समान स्थिति: जब जीवित लोग मुर्दों से भी अधिक चुप हों, तो यह उनकी आत्मिक मृत्यु है।
- व्यवस्था पर प्रश्न: 'मनुष्य क्यों मरता है?' — यह प्रश्न शासन से जवाब माँगता है। क्या मृत्यु स्वाभाविक है या व्यवस्था की क्रूरता का परिणाम?
- प्रतिरोध की अनिवार्यता: यह दर्शाता है कि प्रश्न और हस्तक्षेप को दबाया नहीं जा सकता — यदि जीवित नहीं बोलेंगे तो मुर्दे बोलेंगे।
- कविता का केंद्रीय संदेश: यह पंक्तियाँ पूरी कविता का सार हैं — दमन कितना भी हो, सत्य का प्रश्न अंततः उठता ही है।

योग्यता-विस्तार

1'एक बार शुरू होने पर कहीं नहीं रुकता हस्तक्षेप' — इस पंक्ति को केंद्र में रखकर परिचर्चा आयोजित करें।Show solution
परिचर्चा के लिए मुख्य बिंदु:

यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। कक्षा में परिचर्चा के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार किया जा सकता है —

1. हस्तक्षेप की शुरुआत: एक व्यक्ति का साहस दूसरों को प्रेरित करता है। जैसे एक दीपक से अनेक दीपक जलते हैं।

2. ऐतिहासिक उदाहरण: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक व्यक्ति (गाँधीजी) के हस्तक्षेप ने पूरे देश को जगा दिया। दांडी मार्च एक छोटा हस्तक्षेप था जो रुका नहीं।

3. सामाजिक आंदोलन: RTI (सूचना का अधिकार), अन्ना हजारे का आंदोलन — ये सब एक छोटे हस्तक्षेप से शुरू हुए और व्यापक हो गए।

4. व्यक्तिगत जीवन में: जब हम किसी अन्याय के विरुद्ध एक बार बोलते हैं, तो आत्मविश्वास बढ़ता है और हम बार-बार बोलने लगते हैं।

5. निष्कर्ष: हस्तक्षेप एक बार शुरू होने पर रुकता नहीं क्योंकि यह न्याय और सत्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है।
2'व्यक्तित्व के विकास में प्रश्न की भूमिका' विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।Show solution
चर्चा के लिए मुख्य बिंदु:

यह भी एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की जा सकती है —

1. प्रश्न — जिज्ञासा का प्रतीक: प्रश्न पूछना मानव की स्वाभाविक जिज्ञासा का प्रतीक है। जो प्रश्न पूछता है, वही सीखता है।

2. आलोचनात्मक सोच का विकास: प्रश्न पूछने से व्यक्ति में critical thinking विकसित होती है। वह किसी भी बात को आँख मूँदकर स्वीकार नहीं करता।

3. स्वतंत्र व्यक्तित्व: जो व्यक्ति प्रश्न पूछता है, वह स्वतंत्र रूप से सोचता है और किसी के दबाव में नहीं आता।

4. महान विभूतियों के उदाहरण: सुकरात, गाँधी, अंबेडकर — सभी ने प्रश्न पूछे और समाज को बदला।

5. कविता से संबंध: 'हस्तक्षेप' कविता में मुर्दे का प्रश्न — 'मनुष्य क्यों मरता है?' — यह दर्शाता है कि एक प्रश्न पूरी व्यवस्था को हिला सकता है।

6. निष्कर्ष: प्रश्न पूछना व्यक्तित्व के विकास की आधारशिला है। जो समाज प्रश्न पूछना बंद कर देता है, वह प्रगति करना भी बंद कर देता है।

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