Skip to main content
Chapter 2 of 39
NCERT Solutions

हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी

Meghalaya Board · Class 11 · Hindi

NCERT Solutions for हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी — Meghalaya Board Class 11 Hindi.

45 questions20 flashcards5 concepts

Interactive on Super Tutor

Studying हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी? Get the full interactive chapter.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.

1,000+ Class 11 students started this chapter today

7 Questions Solved · 1 Section

प्रश्न-अभ्यास — हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी

1लेखक ने अपने पाँच मित्रों के जो शब्द-चित्र प्रस्तुत किए हैं, उनसे उनके अलग-अलग व्यक्तित्व की झलक मिलती है। फिर भी वे घनिष्ठ मित्र हैं, कैसे?Show solution
दिया गया है: लेखक मकबूल फिदा हुसैन ने अपनी आत्मकथा में पाँच मित्रों — बाकर, अहमद, शकील, रज्जाक और सुल्तान — का शब्द-चित्र खींचा है।

विचार-बिंदु:

यद्यपि इन पाँचों मित्रों के स्वभाव, रुचि और व्यक्तित्व एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं — कोई शांत है, कोई चुलबुला, कोई धार्मिक प्रवृत्ति का, कोई व्यावहारिक — फिर भी उनकी मित्रता गहरी और अटूट है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

1. साझा परिवेश: सभी मित्र एक ही मोहल्ले और समान सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं, जिससे उनके बीच स्वाभाविक आत्मीयता बन जाती है।

2. परस्पर स्वीकृति: वे एक-दूसरे की कमियों और खूबियों को बिना किसी आलोचना के स्वीकार करते हैं। भिन्नता उनके बीच दूरी नहीं, बल्कि विविधता का रंग भरती है।

3. बचपन की मित्रता: बचपन से साथ खेलने-बढ़ने के कारण उनके बीच एक भावनातत्मक बंधन बन गया है जो व्यक्तित्व की भिन्नता से ऊपर है।

4. एक-दूसरे का सहयोग: विपत्ति और खुशी दोनों में साथ रहने की आदत ने उनकी मित्रता को और मजबूत किया।

निष्कर्ष: सच्ची मित्रता व्यक्तित्व की समानता पर नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी होती है। इसीलिए ये पाँचों मित्र अलग-अलग स्वभाव के होते हुए भी घनिष्ठ मित्र हैं।
2'प्रतिभा छुपाये नहीं छुपती' कथन के आधार पर मकबूल फिदा हुसैन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।Show solution
दिया गया है: यह कथन मकबूल फिदा हुसैन की जन्मजात कलात्मक प्रतिभा पर आधारित है।

व्याख्या एवं उदाहरण:

मकबूल फिदा हुसैन एक साधारण परिवार में पले-बढ़े, परंतु उनकी कलात्मक प्रतिभा हर परिस्थिति में स्वयं को प्रकट करती रही:

1. बचपन में ही कला की झलक: बचपन में ही उन्होंने दीवारों, जमीन और कागज पर चित्र बनाने शुरू कर दिए थे। उनकी यह स्वाभाविक प्रवृत्ति किसी प्रशिक्षण की मोहताज नहीं थी।

2. दुकान पर बैठकर भी कला: जब वे अपने पिता की दुकान पर बैठते थे, तब भी वे खाली समय में स्केच बनाते रहते थे। व्यापार की जगह भी उनकी कूँची चलती रहती थी।

3. पोर्ट्रेट बनाकर पहचान: उन्होंने मोहल्ले के लोगों के पोर्ट्रेट बनाए, जिससे उनकी प्रतिभा की चर्चा चारों ओर फैल गई।

4. बेंद्रे जी की नजर: प्रसिद्ध चित्रकार बेंद्रे ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके पिता को सलाह दी कि इस बालक को कला की शिक्षा दिलाई जाए।

5. संघर्ष में भी कला जीवित: मुंबई में आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने सिनेमा के बोर्ड पेंट किए, फर्नीचर पर नक्काशी की — परंतु कला से नाता नहीं तोड़ा।

निष्कर्ष: हुसैन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची प्रतिभा को न गरीबी दबा सकती है, न परंपराएँ। वह हर हाल में, हर जगह अपना रास्ता बना ही लेती है।
3'लेखक जन्मजात कलाकार है।'–इस आत्मकथा में सबसे पहले यह कहाँ उद्घाटित होता है?Show solution
दिया गया है: मकबूल फिदा हुसैन की आत्मकथा 'हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी'।

उत्तर:

इस आत्मकथा में लेखक की जन्मजात कलाकार होने की झलक सबसे पहले उनके बचपन के वर्णन में मिलती है।

जब मकबूल बहुत छोटे थे, तब वे घर की दीवारों पर, जमीन पर और जो भी सतह मिले उस पर रेखाएँ और आकृतियाँ बनाने लगते थे। उन्हें किसी ने यह नहीं सिखाया था — यह उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति थी।

इसके अतिरिक्त, जब वे अपने पिता की दुकान पर बैठते थे, तब भी वे कागज पर स्केच बनाते रहते थे। यह उनकी वह अदम्य कलात्मक ऊर्जा थी जो किसी भी परिस्थिति में रुकती नहीं थी।

निष्कर्ष: आत्मकथा में सबसे पहले बचपन की इन्हीं घटनाओं के माध्यम से यह उद्घाटित होता है कि हुसैन जन्मजात कलाकार हैं — उनकी कला किसी बाहरी प्रेरणा की नहीं, बल्कि भीतर से उमड़ने वाली स्वाभाविक अभिव्यक्ति है।
4दुकान पर बैठे-बैठे भी मकबूल के भीतर का कलाकार उसके किन कार्यकलापों से अभिव्यक्त होता है?Show solution
दिया गया है: मकबूल अपने पिता की दुकान पर बैठते थे।

उत्तर:

दुकान पर बैठे-बैठे भी मकबूल के भीतर का कलाकार निम्नलिखित कार्यकलापों से अभिव्यक्त होता है:

1. स्केच बनाना: दुकान पर खाली समय में वे कागज पर लोगों के, वस्तुओं के और आसपास के दृश्यों के स्केच बनाते रहते थे।

2. पोर्ट्रेट बनाना: वे मोहल्ले में आने-जाने वाले लोगों के पोर्ट्रेट (हाथ से बनाई तस्वीरें) बनाते थे। इससे उनकी कला की चर्चा मोहल्ले में फैल गई।

3. रंगों और रेखाओं से खेलना: दुकान की दीवारों या उपलब्ध सतहों पर रेखाएँ खींचना और रंगों से प्रयोग करना उनकी आदत थी।

4. ग्राहकों का निरीक्षण: वे दुकान पर आने वाले ग्राहकों के चेहरों, हाव-भाव और वेशभूषा को ध्यान से देखते थे — एक कलाकार की दृष्टि से — और उन्हें अपनी कला में उतारते थे।

निष्कर्ष: दुकान उनके लिए केवल व्यापार की जगह नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच था जहाँ उनकी कलात्मक दृष्टि निरंतर सक्रिय रहती थी। यही उनकी जन्मजात प्रतिभा का प्रमाण है।
5प्रचार-प्रसार के पुराने तरीकों और वर्तमान तरीकों में क्या फर्क आया है? पाठ के आधार पर बताएँ।Show solution
दिया गया है: पाठ में हुसैन ने अपने समय के प्रचार-प्रसार के तरीकों का उल्लेख किया है।

पुराने तरीके:

1. हाथ से बने बोर्ड और पोस्टर: पहले दुकानों, सिनेमाघरों और मेलों के लिए हाथ से बड़े-बड़े बोर्ड और पोस्टर बनाए जाते थे। हुसैन स्वयं मुंबई में सिनेमा के बड़े-बड़े बोर्ड पेंट करते थे।

2. दीवार-लेखन: दीवारों पर हाथ से लिखकर या चित्र बनाकर प्रचार किया जाता था।

3. मुनादी और ढोल: गाँवों और कस्बों में ढोल पीटकर या मुनादी (घोषणा) करके प्रचार होता था।

4. मेले और नुक्कड़: मेलों और सार्वजनिक स्थानों पर सीधे लोगों से संपर्क करके प्रचार किया जाता था।

वर्तमान तरीके:

1. मशीनी छपाई: अब कंप्यूटर और प्रिंटिंग मशीनों से रंगीन पोस्टर, बैनर और होर्डिंग तैयार होते हैं।

2. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया: टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार होता है।

3. डिजिटल विज्ञापन: मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल माध्यमों से विज्ञापन पलक झपकते ही लाखों लोगों तक पहुँच जाता है।

निष्कर्ष: पुराने तरीकों में मानवीय श्रम, कला और व्यक्तिगत स्पर्श था, जबकि वर्तमान तरीके तेज, व्यापक और तकनीक-आधारित हैं। परंतु पुराने तरीकों में एक जीवंत कलात्मकता थी जो आज के यांत्रिक युग में दुर्लभ हो गई है।
6कला के प्रति लोगों का नजरिया पहले कैसा था? उसमें अब क्या बदलाव आया है?Show solution
दिया गया है: पाठ में लेखक ने कला के प्रति समाज के बदलते दृष्टिकोण का उल्लेख किया है।

पहले का नजरिया:

1. कला केवल अमीरों के लिए: पहले कला को राजे-महाराजों और धनी वर्ग का शौक माना जाता था। यह महलों और हवेलियों की दीवारों की 'लटकन' मात्र थी।

2. सामान्य जन से दूरी: आम लोग कला को अपने जीवन से असंबद्ध मानते थे। कला उनके लिए न तो उपयोगी थी, न सुलभ।

3. धार्मिक और सामाजिक बंधन: मजहबी और सामाजिक रूढ़ियों के कारण कला को संदेह की दृष्टि से देखा जाता था। काजी और मौलवियों के प्रभाव वाले समाज में चित्रकारी को अच्छा नहीं माना जाता था।

4. कलाकार की उपेक्षा: कलाकार को समाज में सम्मानजनक स्थान नहीं मिलता था; उसे व्यावहारिक दृष्टि से 'निकम्मा' समझा जाता था।

अब का बदलाव:

1. कला का लोकतंत्रीकरण: अब कला महलों से उतरकर आम जनजीवन का हिस्सा बन गई है — कारखानों, स्कूलों, सड़कों तक पहुँच गई है।

2. कलाकार को सम्मान: आज कलाकारों को समाज में प्रतिष्ठा मिलती है। हुसैन जैसे कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाते हैं।

3. कला शिक्षा का प्रसार: अब कला विद्यालयों और महाविद्यालयों में कला की शिक्षा दी जाती है और इसे एक वैध करियर के रूप में स्वीकार किया जाता है।

4. व्यावसायिक महत्त्व: विज्ञापन, फिल्म, डिजाइन आदि क्षेत्रों में कला का व्यावसायिक उपयोग बढ़ा है।

निष्कर्ष: कला के प्रति समाज का दृष्टिकोण संकुचित से व्यापक हुआ है। यह परिवर्तन हुसैन जैसे कलाकारों के संघर्ष और समर्पण का ही परिणाम है।
7मकबूल के पिता के व्यक्तित्व की तुलना अपने पिता के व्यक्तित्व से कीजिए?Show solution
दिया गया है: पाठ में मकबूल के पिता की रोशनखयाली और उदार सोच का वर्णन है।

मकबूल के पिता का व्यक्तित्व:

1. रोशनखयाल (उदारमना): वे अपने समय से आगे की सोच रखते थे। इंदौर जैसे परंपरावादी माहौल में, जहाँ काजी और मौलवियों का प्रभाव था, उन्होंने अपने बेटे को कला की राह चुनने की अनुमति दी।

2. बेटे की प्रतिभा को पहचाना: उन्होंने बेंद्रे जी की सलाह को गंभीरता से लिया और मकबूल की कलात्मक प्रतिभा को समझा।

3. परंपराओं से ऊपर उठे: उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों और धार्मिक बंधनों को दरकिनार करते हुए कहा — *"बेटा जाओ, और जिंदगी को रंगों से भर दो।"*

4. बेटे के सपनों का सम्मान: उन्होंने अपनी इच्छाएँ बेटे पर नहीं थोपीं, बल्कि उसकी रुचि और प्रतिभा को प्राथमिकता दी।

अपने पिता के व्यक्तित्व से तुलना:

*(यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। नीचे एक आदर्श उत्तर का ढाँचा दिया गया है जिसे विद्यार्थी अपने अनुसार भर सकते हैं।)*

| तुलना-बिंदु | मकबूल के पिता | मेरे पिता |
|---|---|---|
| सोच | रोशनखयाल, उदार | परंपरागत / आधुनिक (जैसा हो) |
| बच्चे की रुचि के प्रति | पूर्ण समर्थन | समर्थन / सीमित समर्थन |
| सामाजिक दबाव | परवाह नहीं की | प्रभावित / अप्रभावित |
| प्रेरणा देने का तरीका | प्रोत्साहन के शब्द | अपने तरीके से |

निष्कर्ष: मकबूल के पिता एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे जिन्होंने अपने समय की सीमाओं को तोड़कर अपने बेटे को उसके सपनों की उड़ान भरने दी। एक आदर्श पिता वही होता है जो अपने बच्चे की प्रतिभा को पहचाने और उसे सही दिशा में प्रोत्साहित करे — चाहे समाज कुछ भी कहे।

*(विद्यार्थी इस उत्तर में अपने पिता के वास्तविक गुणों का उल्लेख करके इसे और अधिक व्यक्तिगत एवं प्रभावशाली बना सकते हैं।)*

Stuck on a step?

Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.

Ask a Doubt Free

Frequently Asked Questions

What are the important topics in हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी for Meghalaya Board Class 11 Hindi?
हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी covers several key topics that are frequently asked in Meghalaya Board Class 11 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
How to score full marks in हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी — Meghalaya Board Class 11 Hindi?
Understand the core concepts first, then work through the 45 practice questions available for this chapter. Revise formulas and definitions regularly, and use flashcards for quick recall before the exam.
Where can I get free NCERT Solutions for हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी Class 11 Hindi?
This page has free step-by-step NCERT Solutions for every exercise question in हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी (Meghalaya Board Class 11 Hindi) — written the way examiners award marks: given, formula, working, answer.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

For serious students

Get the full हुसैन की कहानी अपनी ज़बानी chapter — for free.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Meghalaya Board Class 11 Hindi.