मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)
Nagaland Board · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) — Nagaland Board Class 11 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 11 students started this chapter today
पाठ के साथ
1मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर:
मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा इसलिए कहा गया है क्योंकि —
1. वे नानबाइयों की तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं और अपने खानदानी पेशे को पूरी निष्ठा एवं कुशलता से निभाते आए हैं।
2. वे छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने में माहिर हैं — बाकरखानी, शीरमाल, ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, रूमाली, गाव-दीदा, गाजेबान, तुनकी आदि।
3. उनका मानना है कि रोटी बनाने का हुनर केवल किताबों से नहीं, बल्कि व्यावहारिक तालीम (प्रशिक्षण) से आता है। वे इस कला को जीवित रखने के लिए कारीगरों को प्रशिक्षित करते हैं।
4. वे रोटी बनाने की कला को एक पवित्र विरासत मानते हैं और उसे आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।
इन्हीं कारणों से उन्हें नानबाइयों का मसीहा (उद्धारकर्ता/महान व्यक्ति) कहा गया है।
2लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?Show solution
उत्तर:
लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास उनसे बातचीत करने और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से गई थीं। मियाँ नसीरुद्दीन मटियामहल के प्रसिद्ध नानबाई थे जो छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर थे। लेखिका उनके खानदानी पेशे, रोटी बनाने की कला, उनके जीवन-अनुभव और उनकी विशेषताओं के बारे में जानना चाहती थीं। संक्षेप में, लेखिका एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) लेने के उद्देश्य से उनके पास गई थीं ताकि उनके व्यक्तित्व और कार्य को पाठकों के सामने प्रस्तुत कर सकें।
3बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?Show solution
उत्तर:
जब लेखिका ने बादशाह के नाम का प्रसंग छेड़ा तो मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी इसलिए खत्म होने लगी क्योंकि —
1. मियाँ नसीरुद्दीन एक स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर व्यक्ति थे। वे अपनी कला और मेहनत को किसी बादशाह या शाही संरक्षण से जोड़कर नहीं देखते थे।
2. उनके लिए उनका हुनर ही उनकी असली पहचान थी, न कि किसी बादशाह से संबंध।
3. वे अपनी कला को स्वयं के परिश्रम और पारिवारिक विरासत का फल मानते थे। बादशाह का नाम लेकर उनकी कला को किसी और से जोड़ना उन्हें उचित नहीं लगा।
4. संभवतः उन्हें लगा कि लेखिका उनकी कला की महत्ता को बादशाह के संदर्भ में देख रही हैं, जबकि उनकी दृष्टि में उनकी कला स्वयंसिद्ध थी।
इस प्रकार बादशाह का प्रसंग उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाता था, इसलिए उनकी रुचि समाप्त होने लगी।
4मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देख यह मज़मून न छेड़ने का फ़ैसला किया – इस कथन के पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।Show solution
इस कथन से पहले का प्रसंग:
लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन से बातचीत कर रही थीं। बातों-बातों में लेखिका के मन में आया कि वे मियाँ से पूछें कि उनके बेटे-बेटियाँ हैं या नहीं, अर्थात् उनके परिवार के बारे में जानकारी लें। यह एक व्यक्तिगत और संवेदनशील विषय था।
कथन का स्पष्टीकरण:
जब लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर गौर किया तो उन्हें वहाँ एक दबे हुए तूफान (अंधड़) के संकेत दिखे — अर्थात् मियाँ का चेहरा किसी भीतरी दर्द, तनाव या नाराज़गी का संकेत दे रहा था। लेखिका ने समझदारी दिखाते हुए यह विषय (परिवार के बारे में पूछना) न छेड़ने का निर्णय किया।
इस कथन के बाद का प्रसंग:
लेखिका ने विषय बदलते हुए पूछा — 'ये कारीगर लोग आपकी शागिर्दी करते हैं?' इस पर मियाँ ने बताया कि वे कारीगरों को गिनकर मजूरी देते हैं — दो रुपये मन आटे की और चार रुपये मन मैदे की।
निष्कर्ष:
इस कथन से स्पष्ट होता है कि लेखिका एक कुशल साक्षात्कारकर्ता थीं जो मियाँ के मनोभावों को पढ़ सकती थीं और उचित समय पर संवेदनशील विषयों से बचना जानती थीं।
5पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?Show solution
उत्तर:
लेखिका कृष्णा सोबती ने मियाँ नसीरुद्दीन का अत्यंत जीवंत और प्रभावशाली शब्दचित्र निम्नलिखित रूप में खींचा है —
1. शारीरिक वर्णन:
मियाँ नसीरुद्दीन की आँखें कंचे जैसी चमकदार हैं। उनके चेहरे पर भाव तुरंत बदलते हैं — कभी रुखाई, कभी गर्व, कभी पुरानी यादों की उदासी।
2. स्वभाव और व्यक्तित्व:
- वे स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी हैं।
- वे कम बोलते हैं, पर जो बोलते हैं वह सटीक और प्रभावशाली होता है।
- वे रुखाई से जवाब देते हैं — 'अपने कारीगर, और कौन होंगे!'
- वे अपने काम को लेकर गंभीर और समर्पित हैं।
3. कला के प्रति समर्पण:
वे छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने में माहिर हैं और इस कला को खानदानी विरासत मानते हैं। उनका कहना है — 'तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है।'
4. पुरानी यादों का दर्द:
जब वे पुराने जमाने और कद्रदानों को याद करते हैं तो उनकी आँखों में उदासी छा जाती है — 'उतर गए वे जमाने।'
5. भाषा-शैली:
लेखिका ने उर्दू मिश्रित हिंदी के माध्यम से मियाँ के व्यक्तित्व को और अधिक प्रामाणिक बनाया है।
निष्कर्ष: इस प्रकार लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन को एक जीवंत, स्वाभिमानी, कला-प्रेमी और परंपरा के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया है।
पाठ के आस-पास
1मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?Show solution
मियाँ नसीरुद्दीन की निम्नलिखित बातें मुझे अच्छी लगीं —
1. अपने काम के प्रति समर्पण: वे अपने खानदानी पेशे को पूरी निष्ठा से निभाते हैं और उसे गर्व के साथ आगे बढ़ाते हैं।
2. व्यावहारिक ज्ञान पर बल: उनका यह कथन — 'तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है' — बताता है कि वे किताबी ज्ञान से अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण को महत्त्व देते हैं। यह बात आज भी प्रासंगिक है।
3. स्वाभिमान: वे किसी के आगे झुकते नहीं, अपनी बात सीधे और स्पष्ट रूप से कहते हैं।
4. परंपरा का सम्मान: वे अपनी पारिवारिक विरासत को जीवित रखने के लिए प्रयासरत हैं।
5. कला के प्रति जागरूकता: वे रोटी बनाने को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक कला मानते हैं और उसकी बारीकियों को जानते हैं।
2तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है – यहाँ लेखक ने तालीम शब्द का दो बार प्रयोग क्यों किया है? क्या आप दूसरी बार आए तालीम शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए।Show solution
तालीम शब्द के दो बार प्रयोग का कारण:
यहाँ 'तालीम' शब्द का दो बार प्रयोग दो अलग-अलग अर्थों में किया गया है —
- पहला 'तालीम' — सामान्य शिक्षा या पढ़ाई के अर्थ में (किताबी ज्ञान)।
- दूसरा 'तालीम' — व्यावहारिक प्रशिक्षण या हुनर सीखने के अर्थ में (कार्य-कौशल)।
मियाँ का आशय यह है कि केवल किताबी पढ़ाई से काम नहीं चलता; असली महत्त्व तो व्यावहारिक प्रशिक्षण (हुनर) का है। इस प्रकार एक ही शब्द के दो प्रयोग से वाक्य में गहराई और व्यंग्य दोनों आ जाते हैं।
दूसरे 'तालीम' के स्थान पर वैकल्पिक शब्द:
दूसरे 'तालीम' की जगह निम्नलिखित शब्द रखे जा सकते हैं —
- प्रशिक्षण — 'तालीम की प्रशिक्षण ही बड़ी चीज़ होती है।'
- हुनर — 'तालीम की हुनर ही बड़ी चीज़ होती है।'
- कार्य-कौशल — 'तालीम की कार्य-कौशल ही बड़ी चीज़ होती है।'
- सीख — 'तालीम की सीख ही बड़ी चीज़ होती है।'
3मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिसने अपने खानदानी व्यवसाय को अपनाया। वर्तमान समय में प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं। ऐसा क्यों?Show solution
वर्तमान समय में लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को न अपनाने के निम्नलिखित कारण हैं —
1. आधुनिक शिक्षा का प्रभाव: आज की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रबंधक आदि बनने के लिए प्रेरित करती है। पारंपरिक व्यवसायों को हेय दृष्टि से देखा जाता है।
2. आर्थिक कारण: पारंपरिक व्यवसायों में आय अनिश्चित और कम होती है, जबकि नौकरियों में नियमित वेतन मिलता है।
3. सामाजिक प्रतिष्ठा: समाज में पारंपरिक कारीगरी या शिल्प को उतनी प्रतिष्ठा नहीं मिलती जितनी आधुनिक पेशों को।
4. मशीनीकरण: मशीनों के आने से हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की माँग घट गई है, जिससे इन व्यवसायों में रोजगार के अवसर कम हो गए हैं।
5. बदलती जीवनशैली: आधुनिक जीवनशैली में लोगों की रुचियाँ और आवश्यकताएँ बदल गई हैं।
6. कद्रदानों की कमी: जैसा मियाँ नसीरुद्दीन ने कहा — 'उतर गए वे जमाने और गए वे कद्रदान' — आज पारंपरिक कला की सराहना करने वाले कम हो गए हैं।
निष्कर्ष: यह एक गंभीर सामाजिक समस्या है। पारंपरिक व्यवसायों को बचाने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
4मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है – अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें।Show solution
टिप्पणी:
मियाँ नसीरुद्दीन ने जब लेखिका को बहुत सारे प्रश्न पूछते देखा तो उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा — 'कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है।'
इस कथन में अखबार (पत्रकारिता) की भूमिका पर महत्त्वपूर्ण टिप्पणी छिपी है —
1. पत्रकारिता की जिज्ञासु प्रवृत्ति: पत्रकार का काम ही होता है — खोजना, प्रश्न पूछना और सच्चाई को सामने लाना। मियाँ ने इसे 'खुराफ़ात' (शरारत) कहा, पर यही पत्रकारिता की शक्ति है।
2. अखबार की सकारात्मक भूमिका: अखबार समाज का दर्पण होता है। यह आम लोगों की कहानियाँ, उनकी कला, उनके संघर्ष को सामने लाता है। मियाँ नसीरुद्दीन जैसे कारीगरों की कहानी अखबार के माध्यम से ही समाज तक पहुँच सकती है।
3. व्यंग्य का भाव: मियाँ का यह कथन व्यंग्यात्मक है। वे पत्रकारिता को 'खुराफ़ात' कहकर दरअसल यह बता रहे हैं कि उन्हें अधिक प्रश्न पसंद नहीं।
4. निष्कर्ष: अखबार की भूमिका समाज में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। वह लोगों को जागरूक करता है, परंपराओं को संरक्षित करता है और सत्य को उजागर करता है। मियाँ की 'खुराफ़ात' वाली टिप्पणी दरअसल पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता — जिज्ञासा — को ही रेखांकित करती है।
पकवानों को जानें
1पाठ में आए रोटियों के अलग-अलग नामों की सूची बनाएँ और इनके बारे में जानकारी प्राप्त करें।Show solution
| रोटी का नाम | विशेषता |
|---|---|
| बाकरखानी | मोटी, कुरकुरी और परतदार रोटी जो मैदे से बनती है; मुगलकाल से प्रचलित है। |
| शीरमाल | दूध और केसर से बनी मीठी, मुलायम रोटी; ईरानी मूल की है। |
| ताफ़तान | मैदे, दूध और अंडे से बनी मुलायम रोटी; ईरानी परंपरा से आई है। |
| बेसनी | बेसन (चने के आटे) से बनी रोटी। |
| खमीरी | खमीर (यीस्ट) से बनी फूली हुई रोटी; नरम और स्वादिष्ट होती है। |
| रूमाली | रूमाल की तरह बड़ी और बहुत पतली रोटी; तवे को उलटकर पकाई जाती है। |
| गाव-दीदा | एक विशेष प्रकार की मोटी रोटी। |
| गाजेबान | एक विशेष प्रकार की रोटी। |
| तुनकी | पापड़ से भी अधिक पतली रोटी; बनाने में अत्यंत कुशलता चाहिए। |
निष्कर्ष: ये सभी रोटियाँ भारतीय-मुगल पाक-कला की अमूल्य धरोहर हैं और इनमें से कई आज भी पुरानी दिल्ली के नानबाइयों द्वारा बनाई जाती हैं।
भाषा की बात
1तीन चार वाक्यों में अनुकूल प्रसंग तैयार कर नीचे दिए गए वाक्यों का इस्तेमाल करें।
क. पंचहजारी अंदाज़ से सिर हिलाया।
ख. आँखों के कंचे हम पर फेर दिए।
ग. आ बैठे उन्हीं के ठीये पर।Show solution
रमेश बाबू मुहल्ले के सबसे अनुभवी और रोबदार बुजुर्ग थे। जब भी कोई उनसे सलाह माँगता, वे चुपचाप सुनते और फिर गर्व से पंचहजारी अंदाज़ से सिर हिलाया — मानो कह रहे हों कि हाँ, यही सही है। उनके इस अंदाज़ में एक अजीब रौब था जो सामने वाले को निरुत्तर कर देता था।
---
ख. आँखों के कंचे हम पर फेर दिए:
हम चुपचाप उस्ताद जी की दुकान पर बैठे थे। जब हमने उनसे उनकी कला के बारे में कुछ पूछा तो उन्होंने एकदम से आँखों के कंचे हम पर फेर दिए — जैसे हम कोई बड़ी गलती कर रहे हों। उनकी तीखी नज़र से हम सहम गए और चुप हो गए।
---
ग. आ बैठे उन्हीं के ठीये पर:
चाचा रहमान की चाय की दुकान पर रोज़ शाम को मुहल्ले के लोग जमा होते थे। एक दिन चाचा कहीं गए हुए थे, पर उनके चाहने वाले आ बैठे उन्हीं के ठीये पर — उनकी पुरानी कुर्सी पर, उनकी पुरानी जगह पर। उस जगह में ही एक अजीब सुकून था।
2बिटर-बिटर देखना – यहाँ देखने के एक खास तरीके को प्रकट किया गया है? देखने संबंधी इस प्रकार के चार क्रिया-विशेषणों का प्रयोग कर वाक्य बनाइए।Show solution
देखने संबंधी चार क्रिया-विशेषणों के वाक्य:
1. टकटकी लगाकर देखना (एकटक देखना):
2. तिरछी नज़र से देखना (संदेह या व्यंग्य से देखना):
3. घूर-घूरकर देखना (क्रोध या चुनौती से देखना):
4. झाँक-झाँककर देखना (चोरी-छिपे या जिज्ञासा से देखना):
3नीचे दिए वाक्यों में अर्थ पर बल देने के लिए शब्द-क्रम परिवर्तित किया गया है। सामान्यतः इन वाक्यों को किस क्रम में लिखा जाता है? लिखें।
क. मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए।
ख. निकाल लेंगे वक्त थोड़ा।
ग. दिमाग में चक्कर काट गई है बात।
घ. रोटी जनाब पकती है आँच से।Show solution
सामान्य शब्द-क्रम में वाक्य:
क. परिवर्तित: मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए।
ख. परिवर्तित: निकाल लेंगे वक्त थोड़ा।
ग. परिवर्तित: दिमाग में चक्कर काट गई है बात।
घ. परिवर्तित: रोटी जनाब पकती है आँच से।
विशेष: परिवर्तित शब्द-क्रम में जिस शब्द को वाक्य के आरंभ में रखा जाता है, उस पर विशेष बल पड़ता है। यह हिंदी भाषा की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है।
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) for Nagaland Board Class 11 Hindi?
How to score full marks in मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) — Nagaland Board Class 11 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) Class 11 Hindi?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती)
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Syllabus
What topics to cover
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Concept Maps
See how topics connect visually
For serious students
Get the full मियाँ नसीरुद्दीन (कृष्णा सोबती) chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Nagaland Board Class 11 Hindi.