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Chapter 6 of 38
NCERT Solutions

बिस्कोहर की माटी

Odisha Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for बिस्कोहर की माटी — Odisha Board Class 12 Hindi.

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एक इन्फोग्राफिक जो ग्रामीण जीवन की प्रकृति पर निर्भरता को दर्शाता है, जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक आपदाओं (जैसे अकाल में कमल ककड़ी का उपयोग, बाढ़ से होने वाली परेशानियाँ) दोनों को दिखाया गया
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12 Questions Solved · 2 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1कोइयाँ किसे कहते हैं? उसकी विशेषताएँ बताइए।Show solution
दिया गया: पाठ 'बिस्कोहर की माटी' में लेखक ने कोइयाँ का वर्णन किया है।

उत्तर:
कोइयाँ एक जलीय पुष्प है जिसे 'कुमुद' भी कहते हैं। इसे कोकाबेली या कुइयाँ के नाम से भी जाना जाता है। यह तालाबों और जलाशयों में उगता है।

कोइयाँ की विशेषताएँ:
1. यह एक जलपुष्प है जो तालाबों में खिलता है।
2. इसका रंग सफेद होता है और यह अत्यंत सुंदर दिखता है।
3. इसमें मनमोहक सुगंध होती है।
4. यह औषधीय गुणों से भी युक्त होता है — अर्थात् यह केवल सुगंध ही नहीं देता, दवा का काम भी करता है।
5. यह ग्रामीण परिवेश की प्रकृति का एक अभिन्न अंग है।
6. इसका तना 'भसीण' (कमलनाल) कहलाता है।

निष्कर्ष: कोइयाँ ग्रामीण जीवन और प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक है जो लेखक की बचपन की स्मृतियों से गहराई से जुड़ा है।
2'बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है'—टिप्पणी कीजिए।Show solution
दिया गया: यह कथन लेखक बिसनाथ का है जो माँ और बच्चे के संबंध की गहराई को व्यक्त करता है।

टिप्पणी:

इस कथन में लेखक ने माँ के दूध को केवल एक शारीरिक पोषण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे माँ और बच्चे के बीच के समस्त भावनात्मक, आत्मिक और सामाजिक संबंधों का आधार बताया है।

1. शारीरिक पोषण से परे: माँ का दूध बच्चे को केवल पोषण नहीं देता, बल्कि माँ की ममता, स्नेह और उष्णता भी प्रदान करता है।

2. भावनात्मक बंधन: दूध पीते समय बच्चा माँ की गोद में होता है — यह स्पर्श, यह निकटता बच्चे के मन में माँ के प्रति असीम प्रेम और सुरक्षा की भावना जगाती है।

3. जीवन-चरित: 'जीवन-चरित' शब्द से लेखक का आशय है कि माँ के दूध के साथ बच्चे को माँ के संस्कार, उसकी भाषा, उसकी संस्कृति और उसका स्वभाव भी मिलता है। यह एक पूरी जीवन-यात्रा का आरंभ है।

4. आत्मिक संबंध: माँ और बच्चे का यह संबंध केवल जैविक नहीं, आत्मिक भी है। माँ का दूध पीते हुए बच्चा माँ की आत्मा से जुड़ता है।

निष्कर्ष: लेखक का यह कथन अत्यंत गहन और मार्मिक है। यह बताता है कि माँ और बच्चे का संबंध संसार का सबसे पवित्र और गहरा संबंध है, जिसकी नींव माँ के दूध से पड़ती है।
3बिसनाथ पर क्या अत्याचार हो गया?Show solution
दिया गया: पाठ 'बिस्कोहर की माटी' में लेखक बिसनाथ अपने बचपन की एक घटना का वर्णन करते हैं।

उत्तर:
बिसनाथ पर यह 'अत्याचार' हुआ कि उनकी माँ ने उन्हें दूध पिलाना बंद कर दिया। जब बिसनाथ कुछ बड़े हो गए तो माँ ने स्तनपान बंद करने का निर्णय लिया। इसके लिए माँ ने अपने स्तनों पर नीम का कड़वा रस या कोई कड़वी चीज़ लगा दी, ताकि बच्चा दूध पीने की कोशिश करे तो कड़वाहट के कारण मुँह फेर ले।

बिसनाथ के लिए यह एक बड़ा आघात था क्योंकि:
1. माँ की गोद और माँ का दूध उनके लिए सबसे बड़ा सुख और सुरक्षा का स्थान था।
2. अचानक इस सुख से वंचित होना उन्हें 'अत्याचार' जैसा लगा।
3. यह उनके लिए माँ से पहली बार अलगाव का अनुभव था।

लेखक ने इसे व्यंग्यपूर्वक 'अत्याचार' कहा है, जो बचपन की मासूमियत और माँ के प्रति असीम लगाव को दर्शाता है।
4गरमी और लू से बचने के उपायों का विवरण दीजिए। क्या आप भी उन उपायों से परिचित हैं?Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक ने बिस्कोहर गाँव में गरमी और लू से बचने के पारंपरिक उपायों का वर्णन किया है।

गरमी और लू से बचने के उपाय:

1. कच्चे आम का पना: कच्चे आम को भूनकर उसका पना (शरबत) बनाया जाता था। इसे पीने से लू नहीं लगती।

2. प्याज साथ रखना: लू से बचने के लिए लोग जेब में कच्चा प्याज रखते थे। माना जाता है कि प्याज लू के प्रभाव को रोकता है।

3. सत्तू का सेवन: जौ या चने का सत्तू पानी में घोलकर पीने से शरीर ठंडा रहता है और लू नहीं लगती।

4. ठंडे पानी का उपयोग: तालाब या कुएँ के ठंडे पानी से नहाना और पीना।

5. छाँव में रहना: दोपहर की तेज धूप में घर से बाहर न निकलना।

6. आँख आने पर उपाय: गरमियों में आँख आने (नेत्र रोग) पर नीम के पत्तों का रस या ठंडे पानी से आँखें धोना।

क्या हम इन उपायों से परिचित हैं?
हाँ, इनमें से अधिकांश उपाय आज भी प्रचलित हैं। कच्चे आम का पना, सत्तू और प्याज का उपयोग आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में किया जाता है। ये उपाय वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी सिद्ध हुए हैं।
5लेखक बिसनाथ ने किन आधारों पर अपनी माँ की तुलना बतख से की है?Show solution
दिया गया: लेखक बिसनाथ ने अपनी माँ की तुलना बतख से की है।

तुलना के आधार:

1. बच्चों को साथ लेकर चलना: जिस प्रकार बतख अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे और अपने साथ लेकर चलती है, उसी प्रकार लेखक की माँ भी अपने बच्चों को सदा अपने साथ रखती थीं।

2. सुरक्षा का भाव: बतख अपने बच्चों को हर खतरे से बचाती है। माँ भी अपने बच्चों को हर विपत्ति और कठिनाई से बचाने के लिए सदा तत्पर रहती थीं।

3. ममता और वात्सल्य: बतख की ममता और उसके बच्चों के प्रति उसका समर्पण माँ की ममता से मेल खाता है।

4. निरंतर देखभाल: बतख जैसे अपने बच्चों की निरंतर देखभाल करती है, वैसे ही माँ भी बिसनाथ और उनके भाई-बहनों की हर समय देखभाल करती थीं।

निष्कर्ष: यह तुलना अत्यंत सटीक और भावपूर्ण है। लेखक ने इस उपमा के माध्यम से माँ की ममता, सुरक्षा और वात्सल्य को बड़े ही सरल और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है।
6बिस्कोहर में हुई बरसात का जो वर्णन बिसनाथ ने किया है उसे अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक बिसनाथ ने बिस्कोहर गाँव में होने वाली बरसात का सजीव वर्णन किया है।

बरसात का वर्णन:

बिस्कोहर में जब बरसात आती थी तो पूरा वातावरण बदल जाता था। गरमी की तपन के बाद जब पहली बारिश की बूँदें धरती पर पड़ती थीं तो मिट्टी की सोंधी-सोंधी खुशबू चारों ओर फैल जाती थी।

1. आकाश का दृश्य: काले-काले बादल आकाश में छा जाते थे और बिजली चमकती थी।

2. धरती का रूपांतरण: बारिश से सूखी धरती हरी-भरी हो जाती थी। खेत-खलिहान, तालाब और नदियाँ पानी से भर जाते थे।

3. तालाबों का भरना: गाँव के तालाब बरसात के पानी से लबालब भर जाते थे। उनमें कमल, कोइयाँ और अन्य जलीय पुष्प खिल उठते थे।

4. खेतों में पानी: खेतों में पानी भर जाता था और किसान खुशी से झूम उठते थे।

5. प्रकृति का उल्लास: पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सभी बरसात का स्वागत करते थे। मेंढकों की टर्र-टर्र और पक्षियों का कलरव वातावरण को संगीतमय बना देता था।

6. बच्चों का आनंद: बच्चे बारिश में भीगते और खेलते थे।

निष्कर्ष: लेखक का यह वर्णन अत्यंत जीवंत और चित्रात्मक है जो पाठक को बिस्कोहर की बरसात का साक्षात अनुभव कराता है।
7'फूल केवल गंध ही नहीं देते दवा भी करते हैं', कैसे?Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक ने फूलों के औषधीय गुणों का वर्णन किया है।

उत्तर:

फूल केवल सौंदर्य और सुगंध के लिए ही नहीं होते, बल्कि उनमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। लेखक ने पाठ में इसका विस्तार से वर्णन किया है:

1. कोइयाँ (कुमुद): यह जलपुष्प औषधीय गुणों से युक्त है। इसका उपयोग विभिन्न रोगों में किया जाता है।

2. नीम के फूल: नीम के फूल और पत्तियाँ एंटीसेप्टिक होती हैं। इनका उपयोग त्वचा रोगों और आँखों के रोगों में होता है।

3. गुलाब: गुलाब के फूल से गुलाब जल बनता है जो आँखों की जलन और त्वचा के लिए लाभकारी है।

4. तुलसी: तुलसी के फूल और पत्तियाँ सर्दी, खाँसी और बुखार में उपयोगी हैं।

5. पारिजात (हरसिंगार): इसके फूलों का उपयोग बुखार और जोड़ों के दर्द में किया जाता है।

6. गेंदे के फूल: इनका उपयोग घाव भरने और त्वचा रोगों में होता है।

निष्कर्ष: प्रकृति ने फूलों को सुगंध के साथ-साथ औषधीय शक्ति भी दी है। हमारे पूर्वज इन गुणों से भली-भाँति परिचित थे और इनका उपयोग लोक-चिकित्सा में करते थे।
8'प्रकृति सजीव नारी बन गई'—इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: यह कथन पाठ 'बिस्कोहर की माटी' से लिया गया है जिसमें लेखक ने प्रकृति को नारी के रूप में देखा है।

लेखक की मान्यताएँ:

1. प्रकृति संबंधी मान्यता:
लेखक प्रकृति को निर्जीव नहीं मानते। उनके लिए प्रकृति एक जीवंत सत्ता है जो साँस लेती है, महसूस करती है और अपनी भावनाएँ व्यक्त करती है। बरसात में भीगी धरती, खिले हुए फूल, बहती नदियाँ — ये सब प्रकृति के जीवंत रूप हैं।

2. नारी संबंधी मान्यता:
लेखक नारी को सृजन, ममता और सौंदर्य का प्रतीक मानते हैं। जिस प्रकार नारी जीवन को जन्म देती है और उसका पोषण करती है, उसी प्रकार प्रकृति भी समस्त जीवन की जननी है। नारी और प्रकृति दोनों में सृजनशीलता, उर्वरता और ममता का गुण समान है।

3. सौंदर्य संबंधी मान्यता:
लेखक का सौंदर्यबोध बाहरी आडंबर से परे है। वे प्रकृति के सहज सौंदर्य में नारी का सौंदर्य देखते हैं। खिले हुए फूल, हरे-भरे खेत, भरे हुए तालाब — ये सब नारी के विभिन्न रूपों की तरह हैं।

4. एकात्मकता का भाव:
लेखक प्रकृति और नारी को एक-दूसरे का पर्याय मानते हैं। दोनों में जीवन देने की, पोषण करने की और सौंदर्य बिखेरने की क्षमता है।

निष्कर्ष: लेखक की यह मान्यता भारतीय परंपरा के अनुरूप है जहाँ धरती को माँ और प्रकृति को नारी के रूप में देखा जाता है। यह दृष्टि अत्यंत काव्यात्मक और दार्शनिक है।
9ऐसी कौन सी स्मृति है जिसके साथ लेखक को मृत्यु का बोध अजीब तौर से जुड़ा मिलता है?Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक बिसनाथ ने एक ऐसी स्मृति का उल्लेख किया है जो मृत्यु के बोध से जुड़ी है।

उत्तर:

लेखक को साँप से जुड़ी स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तरह से जुड़ा मिलता है। बिस्कोहर के परिवेश में अनेक प्रकार के साँप पाए जाते थे। लेखक ने बचपन में साँपों को देखा था और उनसे जुड़ी घटनाएँ उनके मन में गहरी छाप छोड़ गई थीं।

साँप जीवन और मृत्यु दोनों का प्रतीक है — एक ओर वह भयावह और मृत्युदायी है, दूसरी ओर वह प्रकृति का एक अभिन्न अंग है। बचपन में जब भी लेखक ने साँप देखा या साँप के काटने की कोई घटना सुनी, तो मृत्यु का भय उनके मन में घर कर गया।

इसके अतिरिक्त, गाँव में किसी की मृत्यु से जुड़ी स्मृतियाँ भी लेखक के मन में गहरी हैं। बचपन में मृत्यु का पहला साक्षात्कार एक अजीब और अविस्मरणीय अनुभव होता है जो जीवन भर मन में बना रहता है।

निष्कर्ष: लेखक की यह स्मृति बताती है कि बचपन के अनुभव कितने गहरे होते हैं। मृत्यु का यह बोध उन्हें जीवन की क्षणभंगुरता का एहसास कराता है और उनकी रचनाओं में एक गहरी संवेदनशीलता का स्रोत बनता है।

योग्यता-विस्तार

1पाठ में आए फूलों के नाम, साँपों के नाम छाँटिए और उनके रूप, रंग, विशेषताओं के बारे में लिखिए।Show solution
दिया गया: पाठ 'बिस्कोहर की माटी' में अनेक फूलों और साँपों का उल्लेख है।

पाठ में आए फूलों के नाम और उनकी विशेषताएँ:

| फूल का नाम | रूप-रंग | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| कोइयाँ (कुमुद) | सफेद रंग, जलपुष्प | तालाबों में खिलता है, सुगंधित, औषधीय गुण युक्त |
| कमल | गुलाबी/सफेद | जलाशयों में खिलता है, पवित्रता का प्रतीक, भसीण (कमलनाल) खाने योग्य |
| नीम के फूल | छोटे, सफेद | कड़वे, एंटीसेप्टिक, औषधीय |
| पारिजात (हरसिंगार) | सफेद-नारंगी | रात को खिलता है, सुगंधित, औषधीय |

पाठ में आए साँपों के नाम और उनकी विशेषताएँ:

| साँप का नाम | रूप-रंग | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| नाग | काला/भूरा | विषैला, फन फैलाता है, पूजनीय भी |
| धामिन | पीला-भूरा | लंबा, तेज़ गति से चलता है, कम विषैला |
| करैत | काला, पतला | अत्यंत विषैला, रात को सक्रिय |

निष्कर्ष: पाठ में प्रकृति के इन तत्वों का वर्णन ग्रामीण जीवन की विविधता और समृद्धि को दर्शाता है।
2इस पाठ से गाँव के बारे में आपको क्या-क्या जानकारियाँ मिलीं? लिखिए।Show solution
दिया गया: पाठ 'बिस्कोहर की माटी' एक संस्मरणात्मक रचना है जिसमें लेखक ने अपने गाँव बिस्कोहर का जीवंत चित्रण किया है।

गाँव के बारे में प्राप्त जानकारियाँ:

1. प्राकृतिक परिवेश:
- गाँव में तालाब, नदियाँ और जलाशय थे जिनमें कमल, कोइयाँ जैसे जलपुष्प खिलते थे।
- गाँव के आसपास खेत-खलिहान और हरियाली थी।
- भीटे (टीले) और बरहे (सिंचाई नालियाँ) गाँव की भूगोल का हिस्सा थे।

2. कृषि और जीविका:
- गाँव की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी।
- सिंघाड़ा जैसे जलीय फल उगाए जाते थे।
- खेतों की सिंचाई के लिए बरहे (नालियाँ) बनाई जाती थीं।

3. ऋतु-चक्र और जीवन:
- गरमी में लू चलती थी और लोग पना, सत्तू, प्याज से बचाव करते थे।
- बरसात में तालाब भर जाते थे और प्रकृति हरी-भरी हो जाती थी।

4. लोक-जीवन और परंपराएँ:
- माँ का दूध पिलाना और उसे बंद करने की परंपरा।
- लोक-चिकित्सा का प्रचलन।
- साँपों का भय और उनसे जुड़ी मान्यताएँ।

5. सामाजिक जीवन:
- संयुक्त परिवार की परंपरा।
- पड़ोसियों के साथ मिल-जुलकर रहना।

निष्कर्ष: इस पाठ से भारतीय ग्रामीण जीवन की एक समृद्ध और जीवंत तस्वीर उभरती है।
3वर्तमान समय-समाज में माताएँ नवजात शिशु को दूध नहीं पिलाना चाहतीं। आपके विचार से माँ और बच्चे पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है?Show solution
दिया गया: यह एक विचार-विमर्श आधारित प्रश्न है जो वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से संबंधित है।

माँ पर प्रभाव:

1. शारीरिक प्रभाव: स्तनपान न कराने से माँ को स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। स्तनपान कराने से प्रसव के बाद माँ का शरीर जल्दी सामान्य होता है।

2. भावनात्मक प्रभाव: स्तनपान के दौरान माँ और बच्चे के बीच जो भावनात्मक बंधन बनता है, वह नहीं बन पाता। माँ बच्चे से उतनी गहराई से नहीं जुड़ पाती।

3. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: कुछ माताओं में प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) की संभावना बढ़ जाती है।

बच्चे पर प्रभाव:

1. शारीरिक प्रभाव: माँ के दूध में वे सभी पोषक तत्व होते हैं जो बच्चे के विकास के लिए आवश्यक हैं। इसके अभाव में बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है।

2. भावनात्मक प्रभाव: माँ के स्पर्श और निकटता से वंचित बच्चे में असुरक्षा की भावना विकसित हो सकती है।

3. बौद्धिक विकास: शोध बताते हैं कि स्तनपान करने वाले बच्चों का बौद्धिक विकास बेहतर होता है।

निष्कर्ष: माँ का दूध बच्चे के लिए अमृत के समान है। आधुनिक जीवनशैली और सौंदर्य-चेतना के कारण माताओं का यह निर्णय माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक है। समाज और परिवार को माताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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