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Chapter 2 of 15
NCERT Solutions

माता का अँचल-शिवपूजन सहाय

Meghalaya Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for माता का अँचल-शिवपूजन सहाय — Meghalaya Board Class 10 Hindi.

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यह चित्र भोलानाथ की बचपन की दिनचर्या को दर्शाता है, जिसमें वह अपने पिता के साथ पूजा करना, रामायण पाठ के दौरान आईने में देखना, राम-नाम लिखना, और मछलियों को चारा खिलाना शामिल है।
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प्रश्न-अध्यास

1प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?Show solution
बच्चा पिता से अधिक जुड़ा था, क्योंकि वह उनके साथ पूजा, खेल और दिनभर की गतिविधियों में रहता था। फिर भी विपदा के समय वह माँ के पास जाता है, क्योंकि माँ का आँचल उसे सुरक्षा, ममता और शांति देता है। चोट लगने, डर लगने या घबराने पर बच्चे को पिता से अधिक माँ की गोद और आँचल में सुकून मिलता है। इसलिए संकट में वह स्वाभाविक रूप से माँ की शरण लेता है।

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2आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?Show solution
भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना भूल जाता है, क्योंकि उसे अपने खेल-व्यवहार में बाल-संग का आनंद मिल जाता है। साथी मिलते ही उसका ध्यान डर और रोने से हटकर खेल, शरारत और तुकबंदियों पर चला जाता है। बच्चों की टोली उसे फिर से उत्साह, अपनापन और मस्ती** दे देती है।

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3आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।Show solution
अपने खेलों से जुड़ी तुकबंदी का एक उदाहरण इस प्रकार है—

“अम्मा पकाई गरर-गरर पूआ, हम खाइब पूआ, ना खेलब जुआ।”

या

“एक पइसा की लाई, बाजार में छितराई, बरखा उधरे बिलाई।”

आप अपनी याद की कोई भी ऐसी तुकबंदी लिख सकते हैं।

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4भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?Show solution
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और सामग्री आज के खेलों से बहुत भिन्न हैं। उनके खेल गाँव के खुले चबूतरे, आँगन, खेत, बाग और गली में होते थे। वे काठ का घोड़ा, कनस्तर, चूहेदानी, घिरनी, मूँज की रस्सी, मिट्टी, कंकड़, ढेले, तिनके, ठीकरों जैसी साधारण चीज़ों से खेल बना लेते थे।

इसके विपरीत हमारे समय में खेलों के लिए बल्ला, गेंद, बैडमिंटन, फुटबॉल, खिलौने, मोबाइल या वीडियो गेम जैसी बनी-बनाई चीज़ें अधिक होती हैं। आज के खेलों में सुविधा है, जबकि उनके खेलों में रचनात्मकता, कल्पना और गाँव की मिट्टी की सहजता थी।

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5पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?Show solution
पाठ के कई प्रसंग दिल को छूते हैं। जैसे—

- पिता का बच्चे को भोलानाथ कहकर प्यार से पुकारना।
- पिता का उसे नहलाकर, पूजा में साथ बिठाना और रामनाम लिखना।
- माँ का अपने आँचल में छिपाकर बच्चे को सुरक्षा देना।
- चोट लगने पर माँ का घबराकर रो पड़ना और बार-बार बच्चे को चूमना।
- पिता का भी दौड़कर आना, बच्चे को गोद में लेना और मनाने की कोशिश करना।

इन प्रसंगों में माता-पिता का स्नेह, बच्चे की मासूमियत और परिवार का अपनापन बहुत सुंदर ढंग से दिखता है।

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6इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।Show solution
तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्रामीण संस्कृति में कई परिवर्तन दिखाई देते हैं। पहले गाँवों में बच्चों के खेल प्रकृति और घर-आँगन से जुड़े होते थे; अब उनमें शहरी प्रभाव और तकनीक बढ़ गई है। पहले लोग सामूहिक रूप से मिलकर खेल, मेले, बरात और खेती के दृश्य रचते थे; अब जीवन अधिक व्यस्त और व्यक्तिगत हो गया है।

पहले साधन कम थे, पर कल्पना और सहयोग अधिक था। आज गाँवों में सड़क, बिजली, शिक्षा, संचार, परिवहन और आधुनिक वस्तुओं का विस्तार हुआ है। साथ ही, परंपरागत खेल, लोकगीत, सामूहिकता और लोकजीवन कुछ हद तक कम हुआ है।

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7पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
8यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
9माता का आँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
10बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?
11इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
12फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़िए।

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Sources & Official References

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