लखनवी अंदाज़
Meghalaya Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for लखनवी अंदाज़ — Meghalaya Board Class 10 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying लखनवी अंदाज़? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 10 students started this chapter today

Super Tutor has 6+ illustrations like this for लखनवी अंदाज़ alone — flashcards, concept maps, and step-by-step visuals.
See them allलखनवी अंदाज़ — प्रश्न-अभ्यास (यशपाल)
1लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?Show solution
उत्तर:
लेखक को नवाब साहब के निम्नलिखित हाव-भावों से यह महसूस हुआ कि वे बातचीत के लिए उत्सुक नहीं हैं—
1. नज़रें फेर लेना: जब लेखक डिब्बे में दाखिल हुए तो नवाब साहब ने उनकी ओर देखकर तुरंत नज़रें खिड़की की तरफ फेर लीं, जैसे उनका आना अच्छा न लगा हो।
2. असंतोष का भाव: नवाब साहब के चेहरे पर यह भाव स्पष्ट था कि किसी अपरिचित का एकांत में आ जाना उन्हें पसंद नहीं आया।
3. संगति के लिए उत्साह न दिखाना: नवाब साहब ने लेखक की उपस्थिति को स्वीकार तो किया, परंतु बातचीत शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की।
4. खीरे में व्यस्त हो जाना: वे लेखक को अनदेखा करते हुए अपने खीरे की तैयारी में लग गए, जिससे स्पष्ट था कि वे अकेले रहना चाहते थे।
निष्कर्ष: इन सभी हाव-भावों से लेखक को स्पष्ट हो गया कि नवाब साहब उनसे बातचीत करने के इच्छुक नहीं हैं।
2नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?Show solution
नवाब साहब ने ऐसा क्यों किया होगा — संभावित कारण:
1. दिखावे की प्रवृत्ति: नवाब साहब एक अपरिचित व्यक्ति (लेखक) के सामने खीरा खाना अपनी शान के खिलाफ समझते थे। वे यह दिखाना चाहते थे कि वे खाने-पीने के मामले में बहुत नफ़ासत (सफाई/शालीनता) रखते हैं।
2. झूठी शान बनाए रखना: खीरा एक साधारण खाद्य पदार्थ है। नवाब साहब नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें खीरा खाते देखे, इसलिए उन्होंने केवल सूँघकर ही संतुष्टि का नाटक किया।
3. लखनवी तहज़ीब का प्रदर्शन: वे यह जताना चाहते थे कि उनके लिए खाने की सुगंध और कल्पना ही पर्याप्त है — यही उनकी 'खानदानी रईसी' है।
स्वभाव का संकेत:
नवाब साहब का यह व्यवहार उनके दिखावटी, आडंबरपूर्ण और पतनशील सामंती स्वभाव को इंगित करता है। वे वास्तविकता से दूर, केवल बाहरी शान-शौकत और नकली नवाबी तहज़ीब में जीते हैं। उनकी यह 'नफ़ासत' असल में खोखली है — पेट भूखा है, पर दिखावे के लिए खाना फेंक दिया। यह उनके पाखंड और झूठे अभिमान का प्रतीक है।
3बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?Show solution
विचार:
यशपाल का यह कथन 'नयी कहानी' आंदोलन पर एक तीखा व्यंग्य है। वे उन लेखकों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो बिना ठोस कथ्य, पात्र और घटनाओं के केवल 'नयापन' के नाम पर खोखली रचनाएँ लिखते हैं।
मेरी सहमति/असहमति:
मैं यशपाल के इस विचार से आंशिक रूप से सहमत हूँ —
- असहमति के कारण: एक सार्थक कहानी के लिए विचार, घटना और पात्र आवश्यक तत्त्व हैं। इनके बिना कहानी निर्जीव और अर्थहीन होती है। पाठक को कहानी से कुछ न कुछ संदेश, भाव या अनुभव मिलना चाहिए।
- सहमति के कारण: यशपाल का व्यंग्य उचित है। कुछ आधुनिक लेखक केवल प्रयोगवाद के नाम पर ऐसी रचनाएँ लिखते हैं जो पाठक को कुछ नहीं देतीं। ऐसी कहानियाँ नवाब साहब के खीरे की तरह हैं — दिखावा बहुत, सार कुछ नहीं।
निष्कर्ष: एक अच्छी कहानी के लिए विचार, घटना और पात्र अनिवार्य हैं। केवल कल्पना और दिखावे से साहित्य नहीं बनता।
4आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?Show solution
वैकल्पिक शीर्षक:
इस निबंध को निम्नलिखित नामों में से कोई भी दिया जा सकता है —
1. 'नवाबी नफ़ासत' — क्योंकि पूरी कहानी नवाब साहब की झूठी नफ़ासत और शान के इर्द-गिर्द घूमती है।
2. 'खोखली शान' — क्योंकि नवाब साहब की तहज़ीब केवल दिखावटी है, उसमें कोई वास्तविकता नहीं।
3. 'दिखावे का खीरा' — क्योंकि खीरा इस पूरी कहानी का केंद्रीय प्रतीक है और नवाब साहब का व्यवहार दिखावे का प्रतीक है।
4. 'पतनशील नवाबी' — क्योंकि यह रचना सामंती वर्ग के पतन और उनकी खोखली जीवन-शैली को उजागर करती है।
मेरी पसंद: मैं इसे 'खोखली नवाबी' नाम देना चाहूँगा, क्योंकि यह शीर्षक कहानी के मूल व्यंग्य को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
5(क)नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।Show solution
नवाब साहब द्वारा खीरा तैयार करने की प्रक्रिया (अपने शब्दों में):
नवाब साहब ने पहले सीट के नीचे से एक अखबार निकाला और उसे सीट पर बिछा दिया। फिर उन्होंने दो खीरे निकाले और उन्हें लोटे के पानी से धोया। इसके बाद जेब से चाकू निकालकर बड़े करीने से दोनों खीरों के सिरे काटे। फिर खीरों को गोदकर उनका झाग निकाला ताकि कड़वाहट दूर हो जाए। इसके बाद उन्होंने खीरों को लंबाई में फाँकों में काटा। फिर उन फाँकों पर बड़े सलीके से नमक और लाल मिर्च बुरकी (छिड़की)। अब वे फाँकें तैयार थीं — चमकती हुई, रसीली और सुगंधित। परंतु नवाब साहब ने उन्हें खाया नहीं। वे एक-एक फाँक को नाक के पास ले जाते, उसकी सुगंध लेते और फिर खिड़की से बाहर फेंक देते। इस प्रकार सारी फाँकें बाहर फेंककर उन्होंने तौलिए से हाथ और होंठ पोंछे और गर्व से लेखक की ओर देखा।
5(ख)किन-किन चीजों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?Show solution
रसास्वादन का अर्थ है — किसी चीज़ का पूरा आनंद लेना। मैं निम्नलिखित चीज़ों का रसास्वादन इस प्रकार करता/करती हूँ —
1. संगीत सुनना: पसंदीदा संगीत सुनने के लिए मैं एकांत में बैठता/बैठती हूँ, कानों में इयरफोन लगाता/लगाती हूँ और आँखें बंद करके पूरी तरह संगीत में डूब जाता/जाती हूँ।
2. अच्छा भोजन खाना: किसी विशेष व्यंजन का आनंद लेने के लिए मैं पहले उसकी सुगंध लेता/लेती हूँ, फिर धीरे-धीरे खाता/खाती हूँ ताकि हर स्वाद महसूस हो।
3. पुस्तक पढ़ना: कोई रोचक पुस्तक पढ़ने के लिए मैं शांत वातावरण चुनता/चुनती हूँ, चाय का कप साथ रखता/रखती हूँ और बिना किसी व्यवधान के पढ़ता/पढ़ती हूँ।
4. प्रकृति का आनंद: सुबह की ताज़ी हवा और पक्षियों की आवाज़ का आनंद लेने के लिए मैं बगीचे में बैठता/बैठती हूँ।
निष्कर्ष: रसास्वादन के लिए मन की एकाग्रता और उचित वातावरण सबसे ज़रूरी है।
6खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा। किसी एक के बारे में लिखिए।Show solution
नवाबों की एक प्रसिद्ध सनक:
लखनऊ के नवाबों की सनकों के बारे में बहुत-सी कहानियाँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध सनक यह थी कि नवाब वाजिद अली शाह को कबूतरबाज़ी का बहुत शौक था। वे अपने महल में सैकड़ों कबूतर पालते थे और उनकी देखभाल पर भारी धनराशि खर्च करते थे। उनके दरबार में कबूतरों की उड़ान प्रतियोगिताएँ होती थीं।
इसी प्रकार कुछ नवाबों को पतंगबाज़ी की ऐसी सनक थी कि वे राज-काज छोड़कर घंटों पतंग उड़ाते रहते थे। उनकी पतंगें रेशम की होती थीं और डोर सोने-चाँदी के तारों से बनी होती थी।
प्रेमचंद की कहानी 'शतरंज के खिलाड़ी' में भी दो नवाबों की सनक का वर्णन है जो अवध पर अंग्रेज़ों के कब्ज़े की परवाह किए बिना शतरंज खेलते रहते हैं।
निष्कर्ष: ये सनकें पतनशील सामंती वर्ग की विलासिता और वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।
7क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।Show solution
हाँ, सनक का एक सकारात्मक रूप भी हो सकता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य या कार्य के प्रति इतना समर्पित हो जाता है कि उसे 'सनक' कहा जाने लगे, तो वह सनक रचनात्मक और उपयोगी बन जाती है।
सकारात्मक सनकों के उदाहरण:
1. वैज्ञानिकों की सनक: थॉमस एडिसन को बिजली के बल्ब का आविष्कार करने की ऐसी सनक थी कि उन्होंने हज़ारों बार असफल होने के बाद भी प्रयास नहीं छोड़ा। यह सनक मानवता के लिए वरदान बनी।
2. कलाकारों की सनक: कुछ चित्रकार और मूर्तिकार अपनी कला में इतने डूब जाते हैं कि खाना-पीना भूल जाते हैं। यह सनक उन्हें महान कलाकार बनाती है।
3. समाज-सुधारकों की सनक: महात्मा गांधी की सत्य और अहिंसा के प्रति सनक ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई।
4. खिलाड़ियों की सनक: किसी खेल में श्रेष्ठता पाने की सनक खिलाड़ी को ओलंपिक चैंपियन बना देती है।
निष्कर्ष: जब सनक किसी रचनात्मक, सामाजिक या वैज्ञानिक उद्देश्य की ओर हो, तो वह सकारात्मक होती है और समाज को लाभ पहुँचाती है।
8निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए—
(क) एक सफ्रेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
(ग) टाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
(घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
(ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा।
(छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
(ज) जेब से चाकू निकाला।Show solution
क्रिया-भेद की जानकारी:
- अकर्मक क्रिया: जिसका फल कर्ता पर पड़े, कर्म की आवश्यकता न हो।
- सकर्मक क्रिया: जिसका फल कर्म पर पड़े, कर्म की आवश्यकता हो।
| वाक्य | क्रियापद | क्रिया-भेद |
|---|---|---|
| (क) एक सफ्रेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। | बैठे थे | अकर्मक क्रिया |
| (ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। | दिखाया | सकर्मक क्रिया |
| (ग) टाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। | है | अकर्मक क्रिया |
| (घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे। | खरीदे होंगे | सकर्मक क्रिया |
| (ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला। | काटे, निकाला | सकर्मक क्रिया |
| (च) नवाब साहब ने ... फाँकों की ओर देखा। | देखा | सकर्मक क्रिया |
| (छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए। | लेट गए | अकर्मक क्रिया |
| (ज) जेब से चाकू निकाला। | निकाला | सकर्मक क्रिया |
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in लखनवी अंदाज़ for Meghalaya Board Class 10 Hindi?
How to score full marks in लखनवी अंदाज़ — Meghalaya Board Class 10 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for लखनवी अंदाज़ Class 10 Hindi?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for लखनवी अंदाज़
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Syllabus
What topics to cover
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Concept Maps
See how topics connect visually
For serious students
Get the full लखनवी अंदाज़ chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Meghalaya Board Class 10 Hindi.