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Chapter 18 of 32
NCERT Solutions

कर चले हम फ़िदा

Meghalaya Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for कर चले हम फ़िदा — Meghalaya Board Class 10 Hindi.

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एक टाइमलाइन जो कैफ़ी आज़मी के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाती है, जिसमें उनका जन्म, साहित्यिक पहचान, फ़िल्मी करियर, प्रमुख कविता संग्रह और प्राप्त पुरस्कार शामिल हैं।
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13 Questions Solved · 3 Sections

प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?Show solution
दिया गया: 'कर चले हम फ़िदा' गीत कैफ़ी आज़मी द्वारा लिखा गया है।

उत्तर: हाँ, इस गीत की एक स्पष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। निर्माता चेतन आनंद ने इसी युद्ध पर 'हकीकत' नामक फ़िल्म बनाई थी, जिसके लिए कैफ़ी आज़मी ने यह गीत लिखा था। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने हिमालय की बर्फीली चोटियों पर अपने प्राण न्योछावर करते हुए देश की रक्षा की थी। गीत में उन्हीं वीर सैनिकों की शहादत और देशभक्ति का वर्णन है।
2'सर हिमालय का हमने न झुकने दिया', इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?Show solution
दिया गया: पंक्ति — 'सर हिमालय का हमने न झुकने दिया'

उत्तर: इस पंक्ति में हिमालय भारत देश के मान, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। हिमालय भारत का प्रहरी है — वह सदा से ऊँचा, अटल और अजेय रहा है। सैनिकों ने यह संकल्प लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे भारत के इस गौरव को, इसकी प्रतिष्ठा को कभी झुकने नहीं देंगे। अर्थात् शत्रु के सामने देश का सिर कभी नहीं झुकेगा।
3इस गीत में धरती को दुलहन क्यों कहा गया है?Show solution
दिया गया: गीत में धरती को 'दुलहन' कहा गया है।

उत्तर: इस गीत में धरती को दुलहन इसलिए कहा गया है क्योंकि —
- जिस प्रकार दुलहन अत्यंत सुंदर, प्रिय और पवित्र होती है, उसी प्रकार भारत की यह धरती भी सैनिकों को अत्यंत प्रिय है।
- सैनिक इस धरती से उतना ही प्रेम करते हैं जितना एक दूल्हा अपनी दुलहन से करता है।
- वे इस धरती की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर करने को तैयार हैं।
- इस प्रकार 'दुलहन' शब्द धरती के प्रति सैनिकों के अगाध प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है।
4गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह जाते हैं?Show solution
दिया गया: प्रश्न गीतों की विशेषता के बारे में है।

उत्तर: गीतों में निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं जिनके कारण वे जीवन भर याद रह जाते हैं —
1. संगीतात्मकता — गीतों में लय, ताल और धुन होती है जो मन को सहज ही आकर्षित करती है।
2. भावात्मकता — गीत हृदय की गहरी भावनाओं को व्यक्त करते हैं, जो सुनने वाले के मन को छू जाती हैं।
3. सरल भाषा — गीतों की भाषा सरल और प्रवाहमयी होती है जो आसानी से कंठस्थ हो जाती है।
4. दोहराव — गीतों में मुखड़े की पुनरावृत्ति होती है जो उन्हें स्मरणीय बनाती है।
5. जीवन से जुड़ाव — गीत जीवन के सुख-दुख, प्रेम, देशभक्ति आदि भावों से जुड़े होते हैं।
5कवि ने 'साथियो' संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?Show solution
दिया गया: गीत में 'साथियो' संबोधन का प्रयोग हुआ है।

उत्तर: कवि ने 'साथियो' संबोधन का प्रयोग देश के उन वीर सैनिकों के लिए किया है जो युद्ध के मैदान में देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर रहे हैं। ये वे साथी हैं जो एक ही लक्ष्य — देश की रक्षा — के लिए एकजुट होकर लड़ रहे हैं। इसके साथ ही यह संबोधन देश के प्रत्येक नागरिक के लिए भी है जिन्हें देश की रक्षा का दायित्व सौंपा जा रहा है।
6कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?Show solution
दिया गया: गीत में 'काफ़िले' का उल्लेख है।

उत्तर: कवि ने इस कविता में देशभक्ति, बलिदान और वीरता के काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है। यह काफ़िला उन वीर सैनिकों और देशभक्तों का है जो युगों से देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करते आए हैं। मरने वाले सैनिक अपने साथियों से कह रहे हैं कि हम तो चले जाएँगे, परंतु तुम इस देशभक्ति और बलिदान की परंपरा को आगे बढ़ाते रहना — यह काफ़िला कभी रुकना नहीं चाहिए।
7इस गीत में 'सर पर कफ़न बाँधना' किस ओर संकेत करता है?Show solution
दिया गया: गीत में 'सर पर कफ़न बाँधना' पंक्ति आई है।

उत्तर: 'सर पर कफ़न बाँधना' एक मुहावरा है जिसका अर्थ है — मृत्यु की परवाह न करते हुए, जान हथेली पर लेकर चलना। इस गीत में यह पंक्ति सैनिकों की उस मनोवृत्ति की ओर संकेत करती है जिसमें वे देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने को सदा तैयार रहते हैं। उन्हें अपनी मृत्यु का कोई भय नहीं है। वे पूरी तरह जानते हैं कि युद्ध में जाने का अर्थ मृत्यु भी हो सकती है, फिर भी वे हँसते-हँसते देश के लिए बलिदान देने को तत्पर हैं।
8इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
दिया गया: 'कर चले हम फ़िदा' — कैफ़ी आज़मी द्वारा रचित गीत।

उत्तर (प्रतिपाद्य): यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। इसका केंद्रीय भाव देशभक्ति, बलिदान और राष्ट्र-प्रेम है।

इस गीत में एक मरणासन्न सैनिक अपने साथियों को संबोधित करते हुए कह रहा है कि हमने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर लड़ते हुए हमने देश का मान-सम्मान बचाए रखा। अब हम जा रहे हैं, परंतु इस देश को — इस दुलहन को — तुम्हारे हवाले कर रहे हैं। तुम इसकी रक्षा करना।

कवि ने राम-रावण और सीता के प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि देश की मर्यादा की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। गीत का मूल संदेश यह है कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए बलिदान की परंपरा को सदा जीवित रखना चाहिए।

प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

1साँस थमती गई, नब्ज जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
Show solution
प्रसंग: ये पंक्तियाँ कैफ़ी आज़मी के गीत 'कर चले हम फ़िदा' से ली गई हैं।

भाव: इन पंक्तियों में सैनिकों की अदम्य वीरता और अटूट संकल्प का वर्णन है। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर युद्ध करते हुए सैनिकों की साँसें रुकने लगीं, नाड़ी (नब्ज) ठंड से जमने लगी — अर्थात् शरीर जवाब देने लगा, मृत्यु निकट आने लगी। परंतु इन सब कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने कदम नहीं रोके। वे आगे बढ़ते रहे।

विशेष: यह पंक्तियाँ सैनिकों की उस अदम्य जिजीविषा और देशभक्ति को दर्शाती हैं जिसके सामने शारीरिक कष्ट और मृत्यु का भय भी तुच्छ है। 'साँस थमती गई' और 'नब्ज जमती गई' — दोनों में क्रमिक गिरावट का भाव है जो स्थिति की गंभीरता को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
2खींच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई
Show solution
प्रसंग: ये पंक्तियाँ कैफ़ी आज़मी के गीत 'कर चले हम फ़िदा' से ली गई हैं।

भाव: इन पंक्तियों में कवि ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा है कि अपने रक्त से धरती पर एक ऐसी रेखा खींच दो जिसे शत्रु कभी पार न कर सके। यहाँ 'रावन' शत्रु देश (चीन) का प्रतीक है — वह शत्रु जो दुष्ट, आक्रामक और अत्याचारी है।

विशेष: 'खूँ से लकीर खींचना' का अर्थ है — अपने बलिदान से देश की सीमा को इतना सुरक्षित कर देना कि कोई भी शत्रु उसे पार न कर सके। रामायण के प्रतीक का प्रयोग करके कवि ने यह स्पष्ट किया है कि जिस प्रकार लक्ष्मण-रेखा को रावण ने पार किया था और सीता का अपहरण हुआ था, उसी प्रकार यदि हमने सीमा की रक्षा न की तो देश की मर्यादा खतरे में पड़ जाएगी।
3छू न पाए सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
Show solution
प्रसंग: ये पंक्तियाँ कैफ़ी आज़मी के गीत 'कर चले हम फ़िदा' से ली गई हैं।

भाव: इन पंक्तियों में 'सीता' भारत माता का प्रतीक है — पवित्र, सम्माननीय और रक्षणीय। कवि कह रहा है कि कोई भी शत्रु इस देश की मर्यादा को, इसकी पवित्रता को छू भी न पाए।

इसके साथ ही कवि अपने साथी सैनिकों से कहता है — 'राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो' — अर्थात् अब तुम्हें ही राम की तरह नेतृत्व करना है और लक्ष्मण की तरह रक्षक बनना है। हम तो शहीद हो रहे हैं, परंतु देश की रक्षा का दायित्व अब तुम्हारे कंधों पर है।

विशेष: रामायण के पात्रों — राम, लक्ष्मण और सीता — का प्रतीकात्मक प्रयोग गीत को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। यह पंक्तियाँ देशवासियों में जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध जगाती हैं।

भाषा अध्ययन

1इस गीत में कुछ विशिष्ट प्रयोग हुए हैं। गीत के संदर्भ में उनका आशय स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
कट गए सर, नब्ज जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे
Show solution
दिया गया: चार विशिष्ट प्रयोग — कट गए सर, नब्ज जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे।

(i) कट गए सर
- गीत में आशय: देश की रक्षा के लिए सैनिकों ने अपने सिर कटा दिए — अर्थात् वे शहीद हो गए। यह बलिदान का प्रतीक है।
- वाक्य प्रयोग: देश की आन-बान-शान की रक्षा के लिए न जाने कितने वीरों के सर कट गए, पर उन्होंने पीठ नहीं दिखाई।

(ii) नब्ज जमती गई
- गीत में आशय: हिमालय की भीषण ठंड में सैनिकों की नाड़ी (नब्ज) जमने लगी — अर्थात् शरीर शिथिल पड़ने लगा, मृत्यु निकट आने लगी।
- वाक्य प्रयोग: बर्फीले तूफान में घंटों खड़े रहने से उस सैनिक की नब्ज जमती गई, फिर भी उसने अपना पद नहीं छोड़ा।

(iii) जान देने की रुत
- गीत में आशय: वह समय या मौसम जब देश के लिए प्राण न्योछावर करने का अवसर आता है। यहाँ युद्ध का समय 'जान देने की रुत' है।
- वाक्य प्रयोग: जब देश पर संकट आया तो वह जान देने की रुत थी और हमारे सैनिकों ने हँसते-हँसते उसे स्वीकार किया।

(iv) हाथ उठने लगे
- गीत में आशय: शत्रु का हाथ देश की ओर, देश की मर्यादा की ओर उठने लगे — अर्थात् शत्रु आक्रमण करने लगे।
- वाक्य प्रयोग: जब भी किसी दुश्मन के हाथ हमारी मातृभूमि की ओर उठने लगे, हमारे वीर सैनिक उसे तोड़ देते हैं।
2ध्यान दीजिए संबोधन में बहुवचन 'शब्द रूप' पर अनुस्वार का प्रयोग नहीं होता; जैसे—भाइयों, बहिनों, देवियों, सज्जनों आदि।Show solution
दिया गया: संबोधन में बहुवचन पर अनुस्वार न लगाने का नियम।

स्पष्टीकरण: हिंदी व्याकरण के अनुसार जब हम किसी को संबोधित करते हैं (संबोधन कारक) तो बहुवचन रूप में अनुस्वार (ं) का प्रयोग नहीं होता।

उदाहरण:

| सामान्य बहुवचन (अनुस्वार सहित) | संबोधन बहुवचन (अनुस्वार रहित) |
|---|---|
| भाइयों ने कहा | हे भाइयो! |
| बहिनों ने गाया | हे बहिनो! |
| देवियों को प्रणाम | हे देवियो! |
| सज्जनों की सभा | हे सज्जनो! |
| साथियों के साथ | हे साथियो! |

नियम: संबोधन में 'ओ' की मात्रा लगती है, 'ओं' (अनुस्वार सहित) नहीं। जैसे — 'साथियो' (संबोधन), 'साथियों' (सामान्य बहुवचन)।

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