श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श समाज-( बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर) (Part 2) — Flashcards
Meghalaya Board · Class 12 · Hindi
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आंबेडकर की प्रथम प्रकाशित कृति कौन-सी थी और उसका महत्व क्या है?
Answer
आंबेडकर की प्रथम प्रकाशित कृति 'द कास्ट्स इन इंडिया' थी, जो 1917 में प्रकाशित हुई। यह उनकी प्रारंभिक वैचारिक दृष्टि और समाज-विश्लेषण की शुरुआत को दिखाती है।…
आंबेडकर की पीएच.डी. थीसिस क्या थी?
Answer
आंबेडकर की पीएच.डी. थीसिस 'द एबोलुशन ऑफ प्रोविंशियल फ़ायनांस इन ब्रिटिश इंडिया' थी, जो 1916 की थी। यह उनके गहरे आर्थिक और प्रशासनिक अध्ययन को दर्शाती है।…
आंबेडकर को उच्चतर शिक्षा के लिए किन स्थानों की ओर प्रोत्साहन मिला?
Answer
आंबेडकर बड़ौदा नरेश के प्रोत्साहन पर उच्चतर शिक्षा के लिए न्यूयार्क और फिर लंदन गए। यह उनकी विद्वत्ता के विकास में महत्वपूर्ण चरण था।…
आंबेडकर के चिंतन और रचनात्मकता के तीन प्रेरक व्यक्ति कौन थे?
Answer
आंबेडकर के चिंतन और रचनात्मकता के तीन प्रेरक व्यक्ति बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले थे। इन तीनों ने समता, मानवता और सामाजिक सुधार की दिशा में उनकी सोच को प्रभावित किया।…
जाति-प्रथा को केवल श्रम विभाजन क्यों नहीं कहा जा सकता?
Answer
जाति-प्रथा केवल श्रम विभाजन नहीं, बल्कि श्रमिक-विभाजन का भी रूप है। सामान्य श्रम विभाजन समाज की आवश्यकता है, लेकिन जाति-प्रथा श्रमिकों को अस्वाभाविक ढंग से अलग करती है और उन्हें ऊँच-नीच भी ठहराती है।…
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा में मूल अंतर क्या है?
Answer
श्रम विभाजन सभ्य समाज की आवश्यकता है और यह व्यक्ति की क्षमता तथा रुचि के अनुसार हो सकता है। जाति-प्रथा में यह विभाजन व्यक्ति की रुचि पर नहीं, बल्कि जन्म और सामाजिक स्तर पर आधारित होता है। इसलिए जाति-प…
जाति-प्रथा में पेशा कैसे निर्धारित होता है?
Answer
जाति-प्रथा में पेशा व्यक्ति की क्षमता या रुचि से नहीं, बल्कि माता-पिता के सामाजिक स्तर के आधार पर गर्भधारण के समय से ही पूर्वनिर्धारित कर दिया जाता है। यह मनुष्य की स्वतंत्र पसंद को रोकता है।…
हिंदू धर्म की जाति-प्रथा व्यक्ति को अपने पैतृक पेशे से भिन्न पेशा चुनने की अनुमति क्यों नहीं देती?
Answer
जाति-प्रथा व्यक्ति को अपने पैतृक पेशे से भिन्न पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती, चाहे वह उस नए पेशे में पारंगत ही क्यों न हो। इससे व्यक्ति की क्षमता का सही उपयोग नहीं हो पाता।…
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