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Chapter 3 of 21
Practice Quiz

आहवान

NIOS · Class 10 · Hindi

Practice quiz for आहवान — NIOS Class 10 Hindi. MCQs and questions with answers to test your preparation.

44 questions30 flashcards5 concepts

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एक इन्फोग्राफिक जो कर्म (परिश्रम, पुरुषार्थ) और भाग्य (आलस्य, अकर्मण्यता) के बीच के अंतर को दर्शाता है, उनके परिणामों और तुलसीदास तथा कठोपनिषद् के उद्धरणों के साथ।
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Quick Quiz: आहवान

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1

कविता में कवि देशवासियों से व्यर्थ क्यों न बैठने को कहा है?

2

'पाठ पौरुष का पढ़ो' से कवि का क्या तात्पर्य है?

3

कविता के अनुसार सामने का ग्रास भी मुँह में कैसे जाता है?

4

'कर्म-तैल बिना कभी विधि-दीप जल सकता नहीं' में कौन सा अलंकार है?

44 Questions·
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Sample Questions

1multiple choice
1 marks

'विविध सुमनों की एक माला' से कवि का क्या अभिप्राय है?

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विभिन्न धर्मों के लोगों में एकता

'विविध सुमनों की एक माला' एक सुंदर दृष्टांत है जो भारत की एकता को दर्शाता है। जैसे अलग-अलग रंग, आकार और सुगंध के फूलों को मिलाकर एक सुंदर माला बनती है, वैसे ही भारत में रहने वाले विभिन्न धर्मों, जातियों, संप्रदायों के लोग मिलकर एक सुंदर और मज़बूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। यह 'अनेकता में एकता' के सिद्धांत को प्रकट करता है।

2multiple choice
1 marks

कविता के अनुसार भाग्यवाद का क्या दुष्प्रभाव होता है?

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व्यक्ति आलसी और अकर्मण्य बन जाता है

कविता में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भाग्यवाद व्यक्ति को आलसी बना देता है। जब व्यक्ति सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देता है, तो वह स्वयं कोई प्रयास नहीं करता। 'दैव के सिर दोष अपना मढ़ रहे' कहकर कवि दिखाते हैं कि लोग अपनी असफलता के लिए भाग्य को दोषी ठहराते हैं। यह प्रवृत्ति व्यक्ति को कर्महीन और निष्क्रिय बना देती है, जो प्रगति के लिए हानिकारक है।

3multiple choice
1 marks

कविता में 'हा! ध्यान उद्यम का' में 'हा' किस भाव को प्रकट करता है?

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खेद या दुख

'हा' एक विस्मयादिबोधक शब्द है जो खेद, दुख या पीड़ा को प्रकट करता है। यहाँ कवि को इस बात का दुख है कि देशवासी उद्यम या परिश्रम के बारे में नहीं सोचते। वे आलस्य में डूबे रहते हैं और कोई प्रयास नहीं करते। कवि का यह खेद प्रकट करता है कि लोग इतने सरल सिद्धांत को भी नहीं समझते कि परिश्रम के बिना कुछ भी प्राप्त नहीं होता।

4multiple choice
1 marks

'साँचे बिना कुछ आप ढल सकता नहीं' से क्या तात्पर्य है?

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बिना योजना और कर्म के कुछ नहीं बनता

यह पंक्ति एक दृष्टांत है जहाँ साँचे का अर्थ योजना और परिश्रम से है। जिस प्रकार कोई भी मूर्ति बनाने के लिए पहले उसका साँचा या फर्मा तैयार करना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन में कुछ भी प्राप्त करने के लिए पहले योजना बनानी पड़ती है और फिर उस पर परिश्रम करना पड़ता है। बिना तैयारी और कर्म के कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in आहवान for NIOS Class 10 Hindi?
Key topics in आहवान include आहवान कविता की मुख्य अवधारणाएं, आह्वान कविता का संपूर्ण विश्लेषण, आहवान कविता का विषय विस्तार. These are the concepts NIOS Class 10 examiners draw on most — study them first, then practise related questions.
How to score full marks in आहवान — NIOS Class 10 Hindi?
Understand the core concepts first, then work through the 44 practice questions available for this chapter. Revise formulas and definitions regularly, and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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