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Chapter 2 of 15
NCERT Solutions

माता का अँचल-शिवपूजन सहाय (Part 2) — NCERT Solutions

Bihar Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for माता का अँचल-शिवपूजन सहाय (Part 2), Bihar Board Class 10 Hindi: 12 textbook questions solved step by step.

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यह चित्र भोलानाथ की बचपन की दिनचर्या को दर्शाता है, जिसमें वह अपने पिता के साथ पूजा करना, रामायण पाठ के दौरान आईने में देखना, राम-नाम लिखना, और मछलियों को चारा खिलाना शामिल है।
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12 Questions Solved · 1 Section

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अभ्यास प्रश्न (कृतिका-2, कक्षा 10)

1प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?Show solution

दिया गया है: पाठ 'माता का अँचल' में भोलानाथ का अपने बाबूजी से गहरा लगाव दिखाया गया है — वह उनके साथ पूजा करता है, उनके साथ खेलता है, उनकी नकल उतारता है। फिर भी साँप देखकर भागने पर वह माँ की गोद में जाकर छिपता है।

कारण:

  1. माँ का आँचल सुरक्षा का प्रतीक है। बच्चे के मन में माँ की गोद सबसे सुरक्षित स्थान होती है। विपदा, भय या दर्द के समय बच्चा स्वाभाविक रूप से माँ के पास दौड़ता है क्योंकि माँ का स्पर्श, उसकी ममता और उसका आँचल तुरंत सांत्वना देते हैं।
  1. पिता का प्रेम खेल-साथी जैसा है। बाबूजी का प्रेम मित्रवत् और उत्साहवर्धक है, जबकि माँ का प्रेम करुणामय और सुरक्षात्मक है। संकट के समय बच्चे को करुणा और ममता की आवश्यकता होती है, न कि साहस की।
  1. माँ की प्रतिक्रिया तत्काल और भावनात्मक होती है। माँ बच्चे को देखते ही रो पड़ती है, उसे गले लगाती है, घावों पर हल्दी लगाती है — यह भावनात्मक सुरक्षा बच्चे को चाहिए होती है।

निष्कर्ष: पिता का प्रेम जहाँ बच्चे को साहसी और क्रियाशील बनाता है, वहीं माँ का प्रेम उसे भावनात्मक आश्रय देता है। इसीलिए विपदा में बच्चा माँ की शरण लेता है।

2आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?Show solution

दिया गया है: पाठ में भोलानाथ जब भी रोता है या सिसकता है, तो अपने साथियों को देखकर उसका रोना बंद हो जाता है।

कारण:

  1. बचपन में साथियों का विशेष महत्त्व होता है। बच्चों की दुनिया उनके खेल-साथियों के इर्द-गिर्द घूमती है। साथियों को देखते ही मन में खेल, मस्ती और उत्साह की भावना जाग उठती है जो दुख को पीछे धकेल देती है।
  1. बच्चों का मन चंचल और वर्तमान में जीने वाला होता है। बच्चे अपने दुख को अधिक देर तक नहीं ढोते। साथियों की उपस्थिति उनका ध्यान तुरंत बदल देती है।
  1. साथियों के सामने रोना 'कमज़ोरी' लगती है। बच्चों में यह स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे अपने साथियों के सामने रोकर कमज़ोर नहीं दिखना चाहते।
  1. सामूहिक खेल का आकर्षण। साथियों को देखकर खेल में शामिल होने की इच्छा इतनी प्रबल हो जाती है कि सिसकना स्वतः भूल जाता है।

निष्कर्ष: बचपन में मित्रों की संगति सबसे बड़ी औषधि होती है। साथियों को देखते ही भोलानाथ का मन खेल की ओर मुड़ जाता है और दुख-दर्द पीछे छूट जाता है।

3आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।Show solution

संकेत: यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। नीचे कुछ प्रचलित तुकबंदियाँ उदाहरण के रूप में दी जा रही हैं:

आँख-मिचौली के लिए:
> अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो,
> अस्सी नब्बे पूरे सौ।
> सौ में लगा धागा,
> चोर निकल के भागा।

लँगड़ी-टाँग (पिट्टू) खेल के लिए:
> पिट्टू गरम, पिट्टू गरम,
> जो न खेले वो बेशरम।

गिल्ली-डंडा खेल के लिए:
> गिल्ली उड़ी, डंडा मारा,
> जो हारा वो बेचारा।

खो-खो के लिए:
> खो-खो खेलें हम सब मिलकर,
> हारे-जीते रहें हँसकर।

नोट: विद्यार्थी अपने क्षेत्र और अनुभव के अनुसार अपनी तुकबंदियाँ लिख सकते हैं।

4भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?Show solution

दिया गया है: पाठ में भोलानाथ और उसके साथियों के खेलों का वर्णन है।

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल एवं सामग्री:

पक्षभोलानाथ के खेलआज के बच्चों के खेल
खेल का स्थानखुले मैदान, नदी-तालाब, खेत-खलिहानघर के अंदर, मोबाइल/कंप्यूटर स्क्रीन पर
खेल के प्रकारगिल्ली-डंडा, कबड्डी, मिट्टी के घर बनाना, बारात निकालना, खेत में काम का अभिनयवीडियो गेम, क्रिकेट (मैदान में), बैडमिंटन
खेल सामग्रीमिट्टी, पत्थर, पत्तियाँ, लकड़ी, प्राकृतिक वस्तुएँप्लास्टिक के खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, महँगे खेल उपकरण
साथीमोहल्ले के सभी बच्चे मिलकरसीमित मित्र या अकेले
प्रकृति से जुड़ावप्रकृति के बीच खेलते थेप्रकृति से कटे हुए

निष्कर्ष: भोलानाथ के खेल सरल, प्राकृतिक और सामूहिक थे जिनमें शारीरिक श्रम और सामाजिकता थी। आज के खेल तकनीक-आधारित, व्यक्तिगत और महँगे हो गए हैं।

5पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?Show solution

पाठ 'माता का अँचल' के हृदयस्पर्शी प्रसंग:

1. बाबूजी और भोलानाथ की पूजा का प्रसंग:
बाबूजी जब पूजा करते हैं तो भोलानाथ भी उनकी नकल उतारता है — माथे पर तिलक लगाता है, रामायण की चौपाइयाँ गुनगुनाता है। यह पिता-पुत्र का निश्छल प्रेम मन को छू जाता है।

2. बाबूजी का बच्चों के साथ खेलना:
बाबूजी बच्चों के साथ बैल बनकर खेलते हैं, उन्हें अपनी पीठ पर बिठाते हैं। एक पिता का इस तरह बच्चों के साथ घुल-मिल जाना अत्यंत भावुक करता है।

3. साँप देखकर भागने का प्रसंग:
जब बच्चे खेत में साँप देखकर भागते हैं और भोलानाथ डर से काँपता हुआ माँ के आँचल में छिप जाता है — यह दृश्य बचपन की असहायता और माँ की ममता को एक साथ चित्रित करता है।

4. माँ का आँचल:
सबसे हृदयस्पर्शी प्रसंग वह है जब बाबूजी भोलानाथ को माँ की गोद से लेने आते हैं, परंतु भोलानाथ माँ के आँचल को नहीं छोड़ता। यह प्रसंग माँ के प्रेम की अपरिहार्यता को दर्शाता है।

निष्कर्ष: ये सभी प्रसंग बचपन की मासूमियत, माता-पिता के वात्सल्य और ग्रामीण जीवन की सरलता को इतनी सजीवता से चित्रित करते हैं कि पाठक का मन भावविभोर हो जाता है।

6इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।Show solution

दिया गया है: पाठ में 1930 के दशक की ग्रामीण संस्कृति का चित्रण है।

तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति की विशेषताएँ:

  • संयुक्त परिवार प्रणाली
  • प्राकृतिक जीवनशैली
  • धार्मिक आस्था और पूजा-पाठ का महत्त्व
  • बच्चों का प्रकृति के बीच खेलना
  • घरेलू उद्योग (चावल अमनिया करना आदि)
  • पड़ोसियों से घनिष्ठ संबंध
  • सादा भोजन और देशी उपचार (हल्दी लगाना)

आज की ग्रामीण संस्कृति में परिवर्तन:

  1. परिवार: संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, एकल परिवार बढ़ रहे हैं।
  2. तकनीक: मोबाइल, इंटरनेट और टेलीविज़न ने ग्रामीण जीवन को भी प्रभावित किया है।
  3. शिक्षा: आज गाँवों में भी स्कूल और शिक्षा का प्रसार हुआ है।
  4. स्वास्थ्य: देशी उपचार की जगह अस्पताल और दवाइयाँ आ गई हैं।
  5. खेती: परंपरागत खेती की जगह आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग होने लगा है।
  6. सामाजिक संबंध: पड़ोसियों से घनिष्ठता कम हुई है।
  7. बच्चों का बचपन: बच्चे अब मोबाइल और टीवी में व्यस्त हैं, प्राकृतिक खेल कम हो गए हैं।

निष्कर्ष: आज की ग्रामीण संस्कृति आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। कुछ परिवर्तन सकारात्मक हैं (शिक्षा, स्वास्थ्य) तो कुछ ने ग्रामीण जीवन की सरलता और आत्मीयता को कम किया है।

7पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

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8यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

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9माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।

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10बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

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11इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?

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12फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़िए।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in माता का अँचल-शिवपूजन सहाय for Bihar Board Class 10 Hindi?
Key topics in माता का अँचल-शिवपूजन सहाय include कथा का केंद्रीय भाव, पिता का व्यक्तित्व, माता का स्नेह, बालक और उसका मन. Study these first, then practise questions on each for the Bihar Board Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for माता का अँचल-शिवपूजन सहाय free?
The first 6 of the 12 solutions on this page are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise माता का अँचल-शिवपूजन सहाय for the Bihar Board Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 42 practice questions on माता का अँचल-शिवपूजन सहाय. Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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