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Chapter 18 of 20
Flashcards

हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी)

CBSE · Class 11 · Hindi

Flashcards for हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी) — CBSE Class 11 Hindi. Quick Q&A cards covering key concepts, definitions, and formulas.

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26 Flashcards
Card 1कवयित्री परिचय

अक्कमहादेवी कौन थीं?

Answer

अक्कमहादेवी बारहवीं सदी की कन्नड़ कवयित्री थीं। वे वीर शैव आंदोलन से जुड़ी थीं, कर्नाटक के उडुतरी गाँव में जन्मीं, और चन्नमल्लिकार्जुन देव की अनन्य भक्त थीं। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ त्याग और आत्म

Card 2आराध्य

चन्नमल्लिकार्जुन देव कौन हैं?

Answer

चन्नमल्लिकार्जुन देव शिव का नाम या रूप हैं। अक्कमहादेवी उन्हें अपना आराध्य मानती थीं। उनकी भक्ति सांसारिक संबंधों से ऊपर उठकर परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण का रूप लेती है।

Card 3समकालीन संत कवि

बसवन्ना और अल्लामा प्रभु का अक्कमहादेवी से क्या संबंध है?

Answer

बसवन्ना और अल्लामा प्रभु अक्कमहादेवी के समकालीन कन्नड़ संत कवि थे। वे उसी भक्ति-परंपरा का हिस्सा थे, जिसमें सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना दोनों का महत्व था।

Card 4जीवन-प्रसंग

अक्कमहादेवी ने विवाह के लिए राजा के सामने कौन-सी बात रखी थी?

Answer

अक्कमहादेवी ने विवाह के लिए राजा के सामने तीन शर्तें रखीं। विवाह के बाद जब राजा ने उन शर्तों का पालन नहीं किया, तब उन्होंने वस्त्राभूषण और राज-परिवार छोड़ दिया। यह उनका दृढ़ और स्वतंत्र स्वभाव दिखाता

Card 5त्याग और भक्ति

अक्कमहादेवी के त्याग को मीरा की पंक्ति से क्यों जोड़ा गया है?

Answer

अक्कमहादेवी का त्याग इतना गहरा था कि शरीर और बाहरी वैभव का मोह उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं रहा। इसी कारण मीरा की पंक्ति 'तन की आस कबहू नहीं कीनी ज्यों रणमाँही सूरौ' उनकी स्थिति के साम्य के रूप में उद्धृत

Card 6पहला वचन

पहला वचन किस भाव को व्यक्त करता है?

Answer

पहला वचन इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश देता है। इसमें भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या को शांत करने की मनुहार है। इसका स्वर उपदेशात्मक नहीं, बल्कि प्रेम-भरा और आत्मसंयम से भरा है।

Card 7इंद्रिय-नियंत्रण

पहले वचन में किन-किन प्रवृत्तियों पर नियंत्रण की बात है?

Answer

पहले वचन में भूख, प्यास, नींद, क्रोध, मोह, लोभ, मद और ईर्ष्या पर नियंत्रण की बात है। ये सभी मनुष्य को लक्ष्य से भटका सकती हैं, इसलिए कवयित्री इन्हें शांत करने का आग्रह करती हैं।

Card 8पंक्ति अर्थ

'हे चराचर! मत चूक अवसर' का क्या अर्थ है?

Answer

इस पंक्ति का अर्थ है कि जड़ और चेतन सभी को अवसर नहीं चूकना चाहिए। यहाँ जीवन की आध्यात्मिक पुकार है कि मनुष्य सही समय पर ईश्वर-स्मरण और आत्मसंयम के मार्ग को अपनाए।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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