हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी) — NCERT Solutions
CBSE · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी), CBSE Class 11 Hindi: 6 textbook questions solved step by step.
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कविता के साथ
1लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं— इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।Show solution
दिया गया संदर्भ: अक्कमहादेवी की कविता 'हे भूख! मत मचल' में कवयित्री ने इंद्रियों की चंचलता को ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग में बाधक बताया है।
तर्क एवं स्पष्टीकरण:
मनुष्य की पाँच ज्ञानेंद्रियाँ — आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा — सदैव बाहरी विषयों की ओर आकर्षित रहती हैं। जब तक ये इंद्रियाँ अपने-अपने विषयों (रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श) में उलझी रहती हैं, तब तक मन एकाग्र नहीं हो सकता।
- भूख (जिह्वा की लालसा): जब पेट भोजन की माँग करता है और जीभ स्वाद में लिप्त रहती है, तो साधक का ध्यान ईश्वर से हट जाता है। इसीलिए कवयित्री कहती हैं — 'हे भूख! मत मचल।'
- प्यास (तृष्णा): शारीरिक और मानसिक तृष्णा मनुष्य को संसार के मोह में बाँधे रखती है।
- मद (अहंकार व नशा): इंद्रियों का मद मनुष्य को अंधा कर देता है और वह सत्य से दूर हो जाता है।
निष्कर्ष: इंद्रियों पर नियंत्रण किए बिना आत्मा का परमात्मा से मिलन संभव नहीं। जब साधक इंद्रियों के पाश से मुक्त होता है, तभी वह अपने लक्ष्य — ईश्वर-प्राप्ति — की ओर अग्रसर हो सकता है। अतः इंद्रियाँ लक्ष्य-प्राप्ति में निश्चित रूप से बाधक हैं।
2ओ चराचर! मत चूक अवसर — इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
प्रयुक्त शब्दों का अर्थ:
- चराचर = जड़ और चेतन, अर्थात् संपूर्ण सृष्टि
- अवसर = ईश्वर-प्राप्ति का सुअवसर
आशय:
कवयित्री अक्कमहादेवी इस पंक्ति में संपूर्ण सृष्टि को — चाहे वह जड़ हो या चेतन — संबोधित करते हुए कहती हैं कि ईश्वर का साक्षात्कार करने का यह दुर्लभ अवसर बार-बार नहीं आता। यह मानव-जीवन ही वह क्षण है जब आत्मा परमात्मा से मिल सकती है।
कवयित्री का भाव है कि —
- ईश्वर की कृपा और उनका सान्निध्य एक अनमोल अवसर है।
- यदि इस जीवन में इंद्रियों और सांसारिक मोह को त्यागकर ईश्वर की ओर नहीं मुड़े, तो यह सुअवसर हाथ से निकल जाएगा।
- सृष्टि के प्रत्येक कण को चाहिए कि वह इस दिव्य मिलन के क्षण को पहचाने और उसका लाभ उठाए।
निष्कर्ष: यह पंक्ति एक आध्यात्मिक जागरण का आह्वान है। कवयित्री समस्त जगत को सचेत करती हैं कि ईश्वर-भक्ति और आत्म-साक्षात्कार का यह सुनहरा अवसर व्यर्थ न जाने दें।
3ईश्वर के लिए किस दृष्टांत का प्रयोग किया गया है। ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए।Show solution
दृष्टांत:
कवयित्री अक्कमहादेवी ने दूसरी कविता 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' में ईश्वर (चन्नमल्लिकार्जुन/शिव) की तुलना जूही के फूल से की है।
साम्य का आधार (समानता के बिंदु):
| जूही का फूल | ईश्वर |
|---|---|
| अत्यंत कोमल और सुंदर होता है | ईश्वर भी परम सुंदर और कोमल हृदय हैं |
| सुगंध से सारे वातावरण को महका देता है | ईश्वर की कृपा से जीवन आनंदमय हो जाता है |
| छोटा और सरल दिखता है, पर प्रभाव गहरा होता है | ईश्वर निराकार और सूक्ष्म हैं, पर सर्वव्यापी हैं |
| फूल निःस्वार्थ भाव से सुगंध बाँटता है | ईश्वर भी निःस्वार्थ प्रेम और कृपा बरसाते हैं |
निष्कर्ष: जूही का फूल जिस प्रकार अपनी सुकोमलता, सुगंध और सौंदर्य से मन को मोह लेता है, उसी प्रकार ईश्वर भी अपनी दिव्य सुंदरता और प्रेम से भक्त के हृदय को आकर्षित करते हैं। यह दृष्टांत ईश्वर के प्रति कवयित्री के कोमल, प्रेमपूर्ण और भावनात्मक संबंध को व्यक्त करता है।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर (अक्कमहादेवी) for CBSE Class 11 Hindi?
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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