छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख
Haryana Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख — Haryana Board Class 12 Hindi.
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1छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?Show solution
अर्थ एवं व्याख्या:
कवि ने कागज के पन्ने और खेत के बीच एक सार्थक रूपक स्थापित किया है। दोनों की आकृति चौकोनी होती है और दोनों में कुछ-न-कुछ उगाया जाता है —
- जिस प्रकार खेत में बीज बोए जाते हैं और फसल उगती है, उसी प्रकार कागज के पन्ने पर विचार-बीज बोए जाते हैं और रचना रूपी फसल तैयार होती है।
- खेत सीमित आकार का होता है, परंतु उसमें असीमित अन्न उत्पन्न होने की क्षमता होती है। उसी प्रकार कागज का पन्ना भले ही छोटा हो, किंतु उस पर लिखी रचना असीमित भावों और अर्थों को समेट सकती है।
- यह रूपक सृजन-प्रक्रिया को कृषि-कर्म से जोड़ता है — दोनों में श्रम, धैर्य और प्रतीक्षा की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष: इस प्रयोग में कवि यह बताना चाहता है कि जैसे खेत में बीज से फसल उगती है, वैसे ही कागज पर विचार-बीज से साहित्यिक रचना जन्म लेती है। दोनों का उद्देश्य मानव-जीवन को पोषित करना है।
2रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?Show solution
अंधड़ (आँधी) का अर्थ:
रचना के संदर्भ में अंधड़ उस भावनात्मक आवेग या प्रेरणा का प्रतीक है जो कवि के मन में अचानक उठती है। जिस प्रकार आँधी अप्रत्याशित रूप से आती है और सब कुछ हिला देती है, उसी प्रकार कवि के मन में कोई तीव्र अनुभव, संवेदना या विचार का झोंका आता है जो उसे रचना के लिए प्रेरित करता है।
बीज का अर्थ:
रचना के संदर्भ में बीज उस मूल भाव, विचार या कल्पना का प्रतीक है जो उस आवेग (अंधड़) के कारण कवि के मन में अंकुरित होता है। यही बीज-भाव आगे चलकर शब्दों का रूप लेता है और एक पूर्ण रचना बनता है।
निष्कर्ष: अंधड़ = रचना की प्रेरणा/भावनात्मक आवेग; बीज = वह मूल विचार या भाव जो उस प्रेरणा से जन्म लेता है और जिससे कविता/रचना का विकास होता है।
3रस का अक्षयपात्र से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?Show solution
अक्षयपात्र का अर्थ: अक्षयपात्र वह पात्र है जो कभी रिक्त नहीं होता — जितना लिया जाए, उतना ही भरा रहता है।
रचनाकर्म की विशेषताएँ जिनकी ओर संकेत है:
1. अनंत आनंद का स्रोत: एक श्रेष्ठ रचना पाठकों को बार-बार पढ़ने पर भी नया आनंद देती है। उसका रस कभी समाप्त नहीं होता।
2. कालजयिता: रचना एक बार लिखी जाती है, परंतु युगों-युगों तक पाठकों को रस प्रदान करती रहती है। समय के साथ उसका महत्त्व घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है।
3. असीमित प्रभाव: जितने अधिक पाठक उसे पढ़ते हैं, रचना का रस उतना ही अधिक फैलता है — वह कभी कम नहीं होता।
4. रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की: रचना का सृजन एक क्षण में होता है, परंतु उससे मिलने वाला आनंद अनंत काल तक चलता रहता है।
निष्कर्ष: 'रस का अक्षयपात्र' के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि सच्ची साहित्यिक रचना अमर होती है — वह जितनी बार पढ़ी जाए, उतना ही नया रस देती है और कभी रिक्त नहीं होती।
4(i)व्याख्या करें — शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुण्यों से नमित हुआ विशेष।Show solution
शब्दार्थ:
- अंकुर फूटे = विचार/भाव का प्रस्फुटन होना
- पल्लव = पत्तियाँ (यहाँ रचना के विकसित भाव/शब्द)
- पुण्यों से नमित = पुण्य (श्रेष्ठ कर्म) के भार से झुका हुआ
- विशेष = कविता/रचना
व्याख्या:
जब कवि के मन में भावनात्मक आवेग (अंधड़) आता है और उससे विचार-बीज का जन्म होता है, तो धीरे-धीरे उस बीज से शब्दों के अंकुर फूटते हैं — अर्थात् कवि के मन में शब्द और भाव उगने लगते हैं। जैसे-जैसे रचना विकसित होती है, उसमें पल्लव (नए-नए भाव, विचार, शब्द-सौंदर्य) आते हैं। ये पल्लव इतने पुण्यमय (श्रेष्ठ, सुंदर और अर्थपूर्ण) होते हैं कि उनके भार से रचना (विशेष) नमित हो जाती है — अर्थात् रचना अपने ही सौंदर्य और गुणों के बोझ से झुक जाती है, जैसे फलों से लदी डाली झुक जाती है।
काव्य-सौंदर्य: यहाँ रचना-प्रक्रिया की तुलना पौधे के विकास से की गई है। रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग है।
भाव: श्रेष्ठ रचना अपने ही गुणों के कारण विनम्र और गरिमामयी होती है।
4(ii)व्याख्या करें — रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।Show solution
शब्दार्थ:
- रोपाई क्षण की = बीज बोने (रचना लिखने) का कार्य एक क्षण में होता है
- कटाई अनंतता की = फसल काटना (रस ग्रहण करना) अनंत काल तक चलता है
- लुटते रहने से = बार-बार बाँटते/देते रहने से
- जरा भी नहीं कम होती = तनिक भी कम नहीं होती
व्याख्या:
कवि कहता है कि एक रचना का सृजन (रोपाई) तो एक विशेष क्षण में होता है — जब कवि प्रेरणा के आवेग में आकर रचना लिखता है। परंतु उस रचना से मिलने वाला रस और आनंद (कटाई) अनंत काल तक चलता रहता है। पाठक पीढ़ी-दर-पीढ़ी उस रचना से रस ग्रहण करते रहते हैं, फिर भी रचना का रस समाप्त नहीं होता। जितना अधिक लोग उसे पढ़ते और उससे आनंद लेते हैं, वह रस उतना ही अधिक फैलता है — लुटाते रहने पर भी जरा भी कम नहीं होता।
काव्य-सौंदर्य: यहाँ 'अक्षयपात्र' की अवधारणा को कृषि के रूपक द्वारा स्पष्ट किया गया है। विरोधाभास अलंकार की झलक भी है।
भाव: सच्ची साहित्यिक रचना कालजयी होती है — उसका आनंद-रस अनंत और अक्षय होता है।
कविता के आसपास
1शब्दों के माध्यम से जब कवि दृश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गंध को हमारे ऐन्द्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निर्माण होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिंब की खोज करें।Show solution
'छोटा मेरा खेत' कविता में बिंब:
1. दृश्य बिंब (Visual Imagery):
- *'छोटा मेरा खेत चौकोना'* — एक छोटे चौकोने खेत का चित्र मन में उभरता है।
- *'शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुण्यों से नमित हुआ विशेष'* — अंकुर फूटने और पत्तियों से लदी झुकी हुई डाली का दृश्य बिंब।
- *'रस का अक्षयपात्र'* — एक भरे हुए पात्र का दृश्य।
2. गति/क्रिया बिंब:
- *'एक अंधड़ आया'* — आँधी के आने का गतिशील चित्र।
- *'रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की'* — खेत में रोपाई और कटाई की क्रिया का बिंब।
'बगुलों के पंख' कविता में बिंब:
1. दृश्य बिंब:
- *'नभ में पाँती बँधे बगुलों के पंख'* — आकाश में कतार बनाकर उड़ते सफेद बगुलों का सुंदर दृश्य।
- *'काली घटा'* — काले बादलों का दृश्य बिंब।
2. रंग बिंब:
- काली घटा पर सफेद बगुलों की पंक्ति — श्वेत-श्याम का सुंदर विपरीत रंग-बिंब।
निष्कर्ष: दोनों कविताओं में मुख्यतः दृश्य बिंब का प्रयोग हुआ है जो पाठक की कल्पना को जीवंत कर देता है।
2जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो, रूपक कहलाता है। इस कविता में से रूपक का चुनाव करें।Show solution
'छोटा मेरा खेत' कविता में रूपक:
| रूपक प्रयोग | उपमेय | उपमान |
|---|---|---|
| *'छोटा मेरा खेत चौकोना'* (कागज का पन्ना = खेत) | कागज का पन्ना | खेत |
| *'रस का अक्षयपात्र'* | रचना का आनंद | अक्षयपात्र |
| *'शब्द के अंकुर'* | शब्द/विचार | अंकुर |
| *'पल्लव-पुण्यों से नमित'* | रचना के भाव | पल्लव (पत्तियाँ) |
विस्तृत विवेचन:
1. 'कागज का पन्ना = खेत' — यहाँ कागज के पन्ने (उपमेय) पर खेत (उपमान) का आरोप है। दोनों में अभेद स्थापित किया गया है।
2. 'शब्द के अंकुर' — शब्द (उपमेय) को अंकुर (उपमान) कहा गया है। शब्द और अंकुर में अभेद।
3. 'रस का अक्षयपात्र' — रचना के रस (उपमेय) को अक्षयपात्र (उपमान) कहा गया है।
निष्कर्ष: इस कविता में कृषि-कर्म और रचना-कर्म के बीच निरंतर रूपक चलता है जो कविता को अत्यंत प्रभावशाली बनाता है।
कला की बात — बगुलों के पंख
1बगुलों के पंख कविता को पढ़ने पर आपके मन में कैसे चित्र उभरते हैं? उनकी किसी भी अन्य कला माध्यम में अभिव्यक्ति करें।Show solution
उमाशंकर जोशी की 'बगुलों के पंख' कविता पढ़ने पर मन में अत्यंत सुंदर और जीवंत चित्र उभरते हैं —
मन में उभरने वाले चित्र:
1. प्राकृतिक दृश्य: वर्षा ऋतु का आकाश — चारों ओर काली-घनी घटाएँ छाई हुई हैं। उस गहरे काले पृष्ठभूमि पर श्वेत बगुलों की एक लंबी कतार पंख फैलाए उड़ती जा रही है। यह श्वेत-श्याम का विपरीत संयोजन अत्यंत मनोरम लगता है।
2. गतिशील चित्र: बगुलों की पंक्ति एक लय में, एक ताल में उड़ती है — मानो आकाश में कोई सफेद माला पिरोई जा रही हो।
3. भावनात्मक चित्र: यह दृश्य देखकर मन में एक अद्भुत सौंदर्यानुभूति होती है — मन चंचल हो उठता है, उड़ने की इच्छा जागती है।
अन्य कला माध्यमों में अभिव्यक्ति:
- चित्रकला: काले-नीले रंग से आकाश और बादल बनाकर उस पर सफेद रंग से बगुलों की कतार चित्रित की जा सकती है। यह जल-रंग (watercolor) में विशेष रूप से सुंदर लगेगा।
- संगीत: इस दृश्य को किसी मल्हार राग में स्वरबद्ध किया जा सकता है — वर्षा की रिमझिम के साथ बगुलों की उड़ान का संगीतात्मक चित्रण।
- नृत्य: कथक या भरतनाट्यम में बगुलों की उड़ान की भाव-भंगिमा को हस्त-मुद्राओं और गति के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है।
- फोटोग्राफी/फिल्म: वर्षा ऋतु में वास्तविक बगुलों की उड़ान को कैमरे में कैद करके इस कविता के भाव को साकार किया जा सकता है।
निष्कर्ष: यह कविता प्रकृति के एक क्षणिक किंतु अत्यंत सुंदर दृश्य को शब्दों में बाँधती है। इसे किसी भी कला माध्यम में अभिव्यक्त करने पर प्रकृति का यह सौंदर्य और भी जीवंत हो उठता है।
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