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Chapter 2 of 32
NCERT Solutions

माता का अँचल

Jharkhand Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for माता का अँचल — Jharkhand Board Class 10 Hindi.

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यह चित्र भोलानाथ की बचपन की दिनचर्या को दर्शाता है, जिसमें वह अपने पिता के साथ पूजा करना, रामायण पाठ के दौरान आईने में देखना, राम-नाम लिखना, और मछलियों को चारा खिलाना शामिल है।
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12 Questions Solved · 1 Section

माता का अँचल — अभ्यास प्रश्न (कृतिका-2, कक्षा 10)

1प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?Show solution
दिया गया है: पाठ 'माता का अँचल' में भोलानाथ का अपने बाबूजी से गहरा लगाव दिखाया गया है — वह उनके साथ पूजा करता है, उनके साथ खेलता है, उनकी नकल उतारता है। फिर भी साँप देखकर भागने पर वह माँ की गोद में जाकर छिपता है।

कारण:

1. माँ का आँचल सुरक्षा का प्रतीक है। बच्चे के मन में माँ की गोद सबसे सुरक्षित स्थान होती है। विपदा, भय या दर्द के समय बच्चा स्वाभाविक रूप से माँ के पास दौड़ता है क्योंकि माँ का स्पर्श, उसकी ममता और उसका आँचल तुरंत सांत्वना देते हैं।

2. पिता का प्रेम खेल-साथी जैसा है। बाबूजी का प्रेम मित्रवत् और उत्साहवर्धक है, जबकि माँ का प्रेम करुणामय और सुरक्षात्मक है। संकट के समय बच्चे को करुणा और ममता की आवश्यकता होती है, न कि साहस की।

3. माँ की प्रतिक्रिया तत्काल और भावनात्मक होती है। माँ बच्चे को देखते ही रो पड़ती है, उसे गले लगाती है, घावों पर हल्दी लगाती है — यह भावनात्मक सुरक्षा बच्चे को चाहिए होती है।

निष्कर्ष: पिता का प्रेम जहाँ बच्चे को साहसी और क्रियाशील बनाता है, वहीं माँ का प्रेम उसे भावनात्मक आश्रय देता है। इसीलिए विपदा में बच्चा माँ की शरण लेता है।
2आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?Show solution
दिया गया है: पाठ में भोलानाथ जब भी रोता है या सिसकता है, तो अपने साथियों को देखकर उसका रोना बंद हो जाता है।

कारण:

1. बचपन में साथियों का विशेष महत्त्व होता है। बच्चों की दुनिया उनके खेल-साथियों के इर्द-गिर्द घूमती है। साथियों को देखते ही मन में खेल, मस्ती और उत्साह की भावना जाग उठती है जो दुख को पीछे धकेल देती है।

2. बच्चों का मन चंचल और वर्तमान में जीने वाला होता है। बच्चे अपने दुख को अधिक देर तक नहीं ढोते। साथियों की उपस्थिति उनका ध्यान तुरंत बदल देती है।

3. साथियों के सामने रोना 'कमज़ोरी' लगती है। बच्चों में यह स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वे अपने साथियों के सामने रोकर कमज़ोर नहीं दिखना चाहते।

4. सामूहिक खेल का आकर्षण। साथियों को देखकर खेल में शामिल होने की इच्छा इतनी प्रबल हो जाती है कि सिसकना स्वतः भूल जाता है।

निष्कर्ष: बचपन में मित्रों की संगति सबसे बड़ी औषधि होती है। साथियों को देखते ही भोलानाथ का मन खेल की ओर मुड़ जाता है और दुख-दर्द पीछे छूट जाता है।
3आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।Show solution
संकेत: यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। नीचे कुछ प्रचलित तुकबंदियाँ उदाहरण के रूप में दी जा रही हैं:

आँख-मिचौली के लिए:
> अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो,
> अस्सी नब्बे पूरे सौ।
> सौ में लगा धागा,
> चोर निकल के भागा।

लँगड़ी-टाँग (पिट्टू) खेल के लिए:
> पिट्टू गरम, पिट्टू गरम,
> जो न खेले वो बेशरम।

गिल्ली-डंडा खेल के लिए:
> गिल्ली उड़ी, डंडा मारा,
> जो हारा वो बेचारा।

खो-खो के लिए:
> खो-खो खेलें हम सब मिलकर,
> हारे-जीते रहें हँसकर।

नोट: विद्यार्थी अपने क्षेत्र और अनुभव के अनुसार अपनी तुकबंदियाँ लिख सकते हैं।
4भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?Show solution
दिया गया है: पाठ में भोलानाथ और उसके साथियों के खेलों का वर्णन है।

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल एवं सामग्री:

| पक्ष | भोलानाथ के खेल | आज के बच्चों के खेल |
|---|---|---|
| खेल का स्थान | खुले मैदान, नदी-तालाब, खेत-खलिहान | घर के अंदर, मोबाइल/कंप्यूटर स्क्रीन पर |
| खेल के प्रकार | गिल्ली-डंडा, कबड्डी, मिट्टी के घर बनाना, बारात निकालना, खेत में काम का अभिनय | वीडियो गेम, क्रिकेट (मैदान में), बैडमिंटन |
| खेल सामग्री | मिट्टी, पत्थर, पत्तियाँ, लकड़ी, प्राकृतिक वस्तुएँ | प्लास्टिक के खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, महँगे खेल उपकरण |
| साथी | मोहल्ले के सभी बच्चे मिलकर | सीमित मित्र या अकेले |
| प्रकृति से जुड़ाव | प्रकृति के बीच खेलते थे | प्रकृति से कटे हुए |

निष्कर्ष: भोलानाथ के खेल सरल, प्राकृतिक और सामूहिक थे जिनमें शारीरिक श्रम और सामाजिकता थी। आज के खेल तकनीक-आधारित, व्यक्तिगत और महँगे हो गए हैं।
5पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?Show solution
पाठ 'माता का अँचल' के हृदयस्पर्शी प्रसंग:

1. बाबूजी और भोलानाथ की पूजा का प्रसंग:
बाबूजी जब पूजा करते हैं तो भोलानाथ भी उनकी नकल उतारता है — माथे पर तिलक लगाता है, रामायण की चौपाइयाँ गुनगुनाता है। यह पिता-पुत्र का निश्छल प्रेम मन को छू जाता है।

2. बाबूजी का बच्चों के साथ खेलना:
बाबूजी बच्चों के साथ बैल बनकर खेलते हैं, उन्हें अपनी पीठ पर बिठाते हैं। एक पिता का इस तरह बच्चों के साथ घुल-मिल जाना अत्यंत भावुक करता है।

3. साँप देखकर भागने का प्रसंग:
जब बच्चे खेत में साँप देखकर भागते हैं और भोलानाथ डर से काँपता हुआ माँ के आँचल में छिप जाता है — यह दृश्य बचपन की असहायता और माँ की ममता को एक साथ चित्रित करता है।

4. माँ का आँचल:
सबसे हृदयस्पर्शी प्रसंग वह है जब बाबूजी भोलानाथ को माँ की गोद से लेने आते हैं, परंतु भोलानाथ माँ के आँचल को नहीं छोड़ता। यह प्रसंग माँ के प्रेम की अपरिहार्यता को दर्शाता है।

निष्कर्ष: ये सभी प्रसंग बचपन की मासूमियत, माता-पिता के वात्सल्य और ग्रामीण जीवन की सरलता को इतनी सजीवता से चित्रित करते हैं कि पाठक का मन भावविभोर हो जाता है।
6इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।Show solution
दिया गया है: पाठ में 1930 के दशक की ग्रामीण संस्कृति का चित्रण है।

तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति की विशेषताएँ:
- संयुक्त परिवार प्रणाली
- प्राकृतिक जीवनशैली
- धार्मिक आस्था और पूजा-पाठ का महत्त्व
- बच्चों का प्रकृति के बीच खेलना
- घरेलू उद्योग (चावल अमनिया करना आदि)
- पड़ोसियों से घनिष्ठ संबंध
- सादा भोजन और देशी उपचार (हल्दी लगाना)

आज की ग्रामीण संस्कृति में परिवर्तन:

1. परिवार: संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, एकल परिवार बढ़ रहे हैं।
2. तकनीक: मोबाइल, इंटरनेट और टेलीविज़न ने ग्रामीण जीवन को भी प्रभावित किया है।
3. शिक्षा: आज गाँवों में भी स्कूल और शिक्षा का प्रसार हुआ है।
4. स्वास्थ्य: देशी उपचार की जगह अस्पताल और दवाइयाँ आ गई हैं।
5. खेती: परंपरागत खेती की जगह आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग होने लगा है।
6. सामाजिक संबंध: पड़ोसियों से घनिष्ठता कम हुई है।
7. बच्चों का बचपन: बच्चे अब मोबाइल और टीवी में व्यस्त हैं, प्राकृतिक खेल कम हो गए हैं।

निष्कर्ष: आज की ग्रामीण संस्कृति आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। कुछ परिवर्तन सकारात्मक हैं (शिक्षा, स्वास्थ्य) तो कुछ ने ग्रामीण जीवन की सरलता और आत्मीयता को कम किया है।
7पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।Show solution
नोट: यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। नीचे एक नमूना डायरी प्रविष्टि दी जा रही है:

---

दिनांक: _________

प्रिय डायरी,

आज 'माता का अँचल' पाठ पढ़ते-पढ़ते मन भावुक हो गया। भोलानाथ और उसके बाबूजी का प्रेम देखकर मुझे अपने पिताजी की याद आ गई। जब मैं छोटा था, वे मुझे अपने कंधों पर बिठाकर घुमाते थे। उनकी उँगली थामकर चलना मुझे आज भी याद है।

माँ की याद तो और भी गहरी है। जब भी मुझे बुखार आता था, वे रात भर जागकर मेरे माथे पर ठंडी पट्टी रखती थीं। उनके हाथ का खाना खाकर ही मुझे नींद आती थी। उनकी गोद में सिर रखकर सोना — वह सुख अब भी याद है।

आज समझ आया कि माता-पिता का प्यार दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। मैं उनका सदा आभारी रहूँगा।

तुम्हारा अपना,
[अपना नाम लिखें]

---

नोट: विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभवों के आधार पर डायरी लिखें।
8यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
दिया गया है: पाठ 'माता का अँचल' में माता और पिता दोनों का भोलानाथ के प्रति वात्सल्य चित्रित किया गया है।

पिता (बाबूजी) का वात्सल्य:
- बाबूजी प्रतिदिन भोलानाथ को अपने साथ पूजा में बिठाते हैं, उसके माथे पर तिलक लगाते हैं।
- वे भोलानाथ को अपनी पीठ पर बिठाकर बैल बनकर खेलते हैं।
- बच्चों के साथ मिलकर खेत में काम का अभिनय करते हैं।
- जब भोलानाथ संकट में होता है तो दौड़कर आते हैं और उसे गोद में लेना चाहते हैं।
- उनका वात्सल्य मित्रवत्, उत्साहवर्धक और क्रियाशील है।

माता (मइयाँ) का वात्सल्य:
- भोलानाथ को डरा हुआ देखकर माँ जोर से रो पड़ती है।
- वह उसे अंग भरकर दबाती है, आँचल से पोंछती है और चूम लेती है।
- घावों पर हल्दी पीसकर लगाती है।
- उसके काँपते ओंठों को बार-बार निहारकर रोती है।
- बड़े लाड़ से उसे गले लगाती है।
- उनका वात्सल्य करुणामय, सुरक्षात्मक और भावनात्मक है।

निष्कर्ष: पिता का वात्सल्य जहाँ बच्चे को संसार से परिचित कराता है, वहीं माँ का वात्सल्य उसे भावनात्मक सुरक्षा और ऊष्मा प्रदान करता है। दोनों मिलकर बच्चे के व्यक्तित्व को पूर्ण बनाते हैं।
9माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।Show solution
'माता का अँचल' शीर्षक की उपयुक्तता:

1. केंद्रीय भाव: पूरे पाठ में यद्यपि भोलानाथ का अपने पिता से गहरा लगाव दिखाया गया है, परंतु अंत में संकट के समय वह माँ के आँचल में ही शरण लेता है। यह आँचल प्रेम, ममता, सुरक्षा और शांति का प्रतीक है।

2. प्रतीकात्मकता: 'आँचल' केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं है — यह माँ की समस्त ममता, करुणा और सुरक्षा का प्रतीक है। पाठ का अंतिम वाक्य — *'प्रेम और शांति के चाँदोवे की छाया'* — इस शीर्षक को पूर्णतः सार्थक बनाता है।

3. विषयवस्तु से संगति: पाठ का समापन माँ के आँचल में होता है, इसलिए यह शीर्षक पाठ के मूल भाव को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

अन्य संभावित शीर्षक:

- 'बचपन की दुनिया' — क्योंकि पाठ में बचपन के खेल, मस्ती और निश्छल जीवन का सुंदर चित्रण है।
- 'माँ की ममता' — क्योंकि माँ का वात्सल्य पाठ का केंद्रीय भाव है।
- 'भोलानाथ' — क्योंकि यह मूल उपन्यास का नाम है और पूरी कथा भोलानाथ के इर्द-गिर्द घूमती है।

सर्वाधिक उपयुक्त: 'माता का अँचल' शीर्षक सर्वाधिक उपयुक्त है क्योंकि यह पाठ के केंद्रीय भाव — माँ की ममता और सुरक्षा — को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है।
10बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?Show solution
दिया गया है: पाठ में भोलानाथ के माध्यम से बच्चों के माता-पिता के प्रति प्रेम का चित्रण है।

बच्चे अपने प्रेम को निम्नलिखित प्रकार से अभिव्यक्त करते हैं:

1. अनुकरण द्वारा: भोलानाथ अपने बाबूजी की नकल उतारता है — उनकी तरह तिलक लगाता है, रामायण गाता है। यह अनुकरण प्रेम और आदर का प्रतीक है।

2. साथ रहने की इच्छा: बच्चे माता-पिता के साथ हर काम में शामिल होना चाहते हैं — पूजा में, खेत में, रसोई में।

3. संकट में माता-पिता की शरण लेना: विपदा के समय बच्चा सबसे पहले माँ या पिता के पास दौड़ता है — यह उनके प्रति असीम विश्वास और प्रेम का प्रमाण है।

4. लाड़-प्यार की माँग: बच्चे माता-पिता से गले लगना, चूमना, गोद में बैठना चाहते हैं — यह उनके प्रेम की सहज अभिव्यक्ति है।

5. माता-पिता की बात मानना: बच्चे माता-पिता की आज्ञा का पालन करके भी अपना प्रेम व्यक्त करते हैं।

6. माँ के आँचल को न छोड़ना: पाठ के अंत में भोलानाथ बाबूजी के आने पर भी माँ का आँचल नहीं छोड़ता — यह माँ के प्रति उसके गहरे प्रेम की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।

निष्कर्ष: बच्चों का प्रेम निश्छल, सहज और स्वाभाविक होता है। वे अपने प्रेम को शब्दों से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, क्रियाओं और भावनाओं से व्यक्त करते हैं।
11इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?Show solution
दिया गया है: पाठ में 1930 के दशक के ग्रामीण बच्चों की दुनिया का चित्रण है।

पाठ में चित्रित बच्चों की दुनिया:
- खुले मैदानों, नदी-तालाबों और खेत-खलिहानों में खेलना
- मिट्टी, पत्थर, पत्तियों से खेल बनाना
- गिल्ली-डंडा, कबड्डी जैसे देशी खेल
- बड़ों की नकल उतारना (बारात निकालना, खेती करना)
- प्रकृति के बीच निर्भय विचरण
- सामूहिक खेल और मित्रता
- माता-पिता के साथ घनिष्ठ सहवास
- सरल, निश्चिंत और आनंदमय जीवन

आज के बचपन की दुनिया:
- घर के अंदर, मोबाइल और टेलीविज़न तक सीमित
- महँगे खिलौने और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट
- स्कूल, ट्यूशन और प्रतियोगिता का दबाव
- प्रकृति से दूरी
- सीमित मित्र-मंडली
- माता-पिता के पास समय की कमी

भिन्नता का सार:

| पक्ष | पाठ का बचपन | आज का बचपन |
|---|---|---|
| खेल | प्राकृतिक, सामूहिक | डिजिटल, एकाकी |
| स्वतंत्रता | अधिक | कम |
| तनाव | नगण्य | अधिक |
| प्रकृति से जुड़ाव | गहरा | नगण्य |

निष्कर्ष: पाठ का बचपन अधिक सरल, स्वतंत्र और प्राकृतिक था। आज का बचपन सुविधाओं से भरपूर है, परंतु उस निश्छल आनंद और स्वतंत्रता से वंचित है।
12फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़िए।Show solution
यह प्रश्न एक पठन-गतिविधि (Reading Activity) है।

फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख आंचलिक रचनाएँ:
- मैला आँचल (उपन्यास) — बिहार के पूर्णिया जिले की ग्रामीण संस्कृति, राजनीति और सामाजिक जीवन का यथार्थ चित्रण।
- परती परिकथा (उपन्यास)
- ठुमरी, अगिनखोर (कहानी संग्रह)
- तीसरी कसम (कहानी) — जो बाद में फिल्म भी बनी।

नागार्जुन की प्रमुख आंचलिक रचनाएँ:
- बलचनमा (उपन्यास) — बिहार के ग्रामीण जीवन और शोषण का चित्रण।
- रतिनाथ की चाची (उपन्यास)
- नई पौध, युगधारा (काव्य संग्रह)

आंचलिक साहित्य की विशेषता:
आंचलिक साहित्य किसी विशेष अंचल (क्षेत्र) की भाषा, संस्कृति, लोकजीवन और समस्याओं को केंद्र में रखकर लिखा जाता है। इसमें उस क्षेत्र की बोली, रीति-रिवाज, लोकगीत और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण होता है।

निर्देश: विद्यार्थी इन रचनाओं को पुस्तकालय से लेकर पढ़ें और अपने अनुभव कक्षा में साझा करें।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in माता का अँचल for Jharkhand Board Class 10 Hindi?
माता का अँचल covers several key topics that are frequently asked in Jharkhand Board Class 10 board exams. Focus on the core concepts listed on this page and practise related questions to build confidence.
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Sources & Official References

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