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Chapter 17 of 38
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भरत-राम का प्रेम / पद (तुलसीदास)

Bihar Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for भरत-राम का प्रेम / पद (तुलसीदास) — Bihar Board Class 12 Hindi.

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एक समयरेखा जो तुलसीदास के जन्म, बचपन के कष्ट, गुरु नरहरिदास से भेंट, रत्नावली से विवाह (विवादित), गृहत्याग, तीर्थयात्रा, रामचरितमानस की रचना का प्रारंभ, काशी में निवास और निधन जैसी प्रमुख घटनाओं को दर
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भरत-राम का प्रेम

1'हारहु खेल जितावहिं मोही' भरत के इस कथन का क्या आशय है?Show solution
भरत का आशय है कि वे राम के साथ खेल में भी जीतना नहीं चाहते। वे राम को बार-बार अपने ऊपर जीतने देते हैं, क्योंकि वे राम के प्रति अत्यंत प्रेम, आदर और समर्पण रखते हैं। यह कथन उनके विनम्र और भक्तिभावपूर्ण स्वभाव को प्रकट करता है।

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2'मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ।' में राम के स्वभाव की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है?Show solution
इस पंक्ति से राम के स्वभाव की ये विशेषताएँ संकेतित हैं—वे अत्यंत प्रेमी, सहृदय, क्रोधरहित, क्षमाशील और स्नेहशील हैं। वे किसी अपराधी पर भी क्रोध नहीं करते, बल्कि सब पर कृपा रखते हैं और भरत के प्रति विशेष स्नेह दिखाते हैं।

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3राम के प्रति अपने श्रद्धाभाव को भरत किस प्रकार प्रकट करते हैं, स्पष्ट कीजिए।Show solution
भरत राम के प्रति अपना श्रद्धाभाव विनम्रता, प्रेम और आत्मसमर्पण के रूप में प्रकट करते हैं। वे कहते हैं कि राम बचपन से ही उन्हें खेल में जिताते रहे, उनका मन कभी नहीं तोड़ा और हमेशा कृपा करते रहे। भरत उनके स्वभाव को जानकर उनके चरणों में अपना सब कुछ अर्पित मानते हैं। वे राम के वियोग में अत्यंत व्याकुल होकर उनकी वस्तुओं और स्मृतियों के माध्यम से अपना प्रेम व्यक्त करते हैं।

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4'महीं सकल अनरथ कर मूला' पंक्ति द्वारा भरत के विचारों-भावों का स्पष्टीकरण कीजिए।Show solution
‘महीं सकल अनरथ कर मूला’ का अर्थ है कि धरणी ही सब अनर्थों की जड़ है। इस पंक्ति में भरत यह भाव व्यक्त करते हैं कि राम के वनगमन और अयोध्या में फैले दुःख-द्वेष, कलह और विपत्ति का मूल कारण पृथ्वी पर घटित वह अनर्थपूर्ण घटना है, जब राम को वन जाना पड़ा। वे इस प्रसंग को दुख, विघटन और संकट का कारण मानते हैं।

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5'फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकता प्रसव कि सबुक काली'। पंक्ति में छिपे भाव और शिल्प सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।Show solution
इस पंक्ति में भरत अपने शुद्ध भाव से कहते हैं कि क्या कोदव से सुसाली धान फल सकता है या घोंघे से मोती उत्पन्न हो सकता है? भाव यह है कि जैसे असंभव वस्तुओं से असंभव फल नहीं निकलता, वैसे ही उनके भीतर कोई पाप या दुष्टता नहीं हो सकती।

शिल्प-सौंदर्य:
- इसमें उपमा और उत्प्रेक्षा का सुंदर प्रयोग है।
- कोदव और सुसाली, संबुक और मुकता के विरोध से भाव और भी प्रभावी बनता है।
- भाषा में प्रतीकात्मकता, विरोधाभास और गहन भावाभिव्यक्ति है।
- भरत अपने चरित्र की निर्मलता और शुद्धता को अत्यंत मार्मिक ढंग से व्यक्त करते हैं।

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पद

1राम के वन-गमन के बाद उनकी वस्तुओं को देखकर माँ कौशल्या कैसा अनुभव करती हैं? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।Show solution
राम के वनगमन के बाद माँ कौशल्या उनकी वस्तुओं—जैसे जूते, धनुष-बाण आदि—को देखकर गहरे विरह, करुणा और स्मृति-वेदना से भर जाती हैं। वे बार-बार उन वस्तुओं को निहारती हैं, उन्हें अपने हृदय से लगाती हैं और राम के न रहने की पीड़ा से अत्यंत दुखी हो जाती हैं। उनके लिए राम से जुड़ी हर वस्तु राम की अनुपस्थिति की टीस को और बढ़ा देती है।

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2'रहि चकि चित्रलिखी सी' पंक्ति का मर्म अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।Show solution
‘रहि चकि चित्रलिखी सी’ का मर्म यह है कि कौशल्या राम के वनगमन की बात सुनकर स्तब्ध और निःशब्द हो जाती हैं। वे इतनी दुखी और चकित हैं कि मानो चित्र की तरह जड़ खड़ी रह गई हों। यह उनकी गहन पीड़ा, विस्मय और मानसिक अवस्था का चित्रण करता है।

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3गीतावली से संकलित पद 'राघो एक बार फिरि आवौ' में निहित करुणा और संदेश को अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
4(क) उपमा अलंकार के दो उदाहरण छाँटिए।
(ख) उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग कहाँ और क्यों किया गया है? उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
5पठित पदों के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास का भाषा पर पूरा अधिकार था?

योग्यता-विस्तार

1'महानता लाभलोभ से मुक्ति तथा समर्पण त्याग से हासिल होता है' को केंद्र में रखकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
2भरत के त्याग और समर्पण के अन्य प्रसंगों को भी जानिए।
3आज के संदर्भ में राम और भरत जैसा भ्रातृप्रेम क्या संभव है? अपनी राय लिखिए।

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