Skip to main content
Chapter 13 of 15
NCERT Solutions

मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi - Course A

NCERT Solutions for मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी), CBSE Class 10 Hindi - Course A: 10 textbook questions solved step by step.

44 questions34 flashcards5 concepts

Interactive on Super Tutor

Studying मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)? Get the full interactive chapter.

Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for NCERT solutions and more.

Free trial, no card needed.

मन्नू भंडारी के जन्म, शिक्षा, प्रमुख रचनाओं, अध्यापन कार्य, पुरस्कारों और देहांत को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
Super Tutor

One of 10 illustrations for मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

10 Questions Solved · 3 Sections

The first 5 solutions are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account.

बोध-प्रश्न (प्रश्न 1–5)

1लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?Show solution

दिया गया: यह प्रश्न मन्नू भंडारी की आत्मकथ्य 'एक कहानी यह भी' पर आधारित है।

उत्तर:

लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व पर निम्नलिखित व्यक्तियों का गहरा प्रभाव पड़ा—

  1. पिता जी का प्रभाव: पिता जी एक महत्त्वाकांक्षी, स्वाभिमानी और राष्ट्रवादी विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने लेखिका में देशप्रेम, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना के बीज बोए। वे चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर आगे बढ़े। उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता और महत्त्वाकांक्षा का प्रभाव लेखिका पर स्पष्ट दिखता है। साथ ही पिता के अहंकारी और दकियानूसी रवैये ने लेखिका को विद्रोही और स्वतंत्र सोच वाली बनाया।
  1. शीला अग्रवाल (अध्यापिका) का प्रभाव: शीला अग्रवाल लेखिका की हिंदी प्राध्यापिका थीं। उन्होंने लेखिका को साहित्य से परिचित कराया, अच्छी पुस्तकें पढ़ने की प्रेरणा दी और राष्ट्रीय आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके प्रभाव से ही लेखिका में सामाजिक-राजनीतिक चेतना जागी और वे स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय हुईं।

निष्कर्ष: इस प्रकार पिता जी ने जहाँ लेखिका को स्वाभिमान और देशप्रेम की भावना दी, वहीं शीला अग्रवाल ने उन्हें साहित्यिक एवं सामाजिक चेतना से जोड़ा। दोनों के प्रभाव ने मिलकर लेखिका के व्यक्तित्व को गढ़ा।

2इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?Show solution

दिया गया: यह प्रश्न पिता जी की मानसिकता और उनके दृष्टिकोण से संबंधित है।

उत्तर:

लेखिका के पिता एक महत्त्वाकांक्षी, प्रगतिशील और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटियाँ केवल घर-गृहस्थी और रसोई तक सीमित रहें। उनके विचार में रसोई एक ऐसी जगह थी जो स्त्रियों की प्रतिभा, बुद्धि और समय को नष्ट कर देती है।

'भटियारखाना' शब्द उस स्थान के लिए प्रयुक्त होता है जहाँ भट्टी जलती रहती है अर्थात् जहाँ केवल खाना पकाने का काम होता है। पिता जी का मानना था कि रसोई में उलझकर स्त्रियाँ अपनी शिक्षा, प्रतिभा और जीवन के बड़े लक्ष्यों से दूर हो जाती हैं। यह स्थान उनकी बौद्धिक क्षमता को कुंद कर देता है।

इस प्रकार 'भटियारखाना' कहकर पिता जी ने रसोई को एक ऐसी जगह के रूप में चित्रित किया जो स्त्री को केवल घरेलू कार्यों में उलझाए रखती है और उसे आगे बढ़ने से रोकती है। यह उनकी प्रगतिशील सोच का परिचायक है।

3वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?Show solution

दिया गया: यह प्रश्न आत्मकथ्य की एक महत्त्वपूर्ण घटना से संबंधित है।

उत्तर:

वह घटना थी — लेखिका की बड़ी बहन सुशीला का विवाह।

लेखिका के पिता अपनी बड़ी बेटी सुशीला से बहुत प्यार करते थे और उसे बहुत मानते थे। परंतु एक दिन अचानक यह खबर आई कि पिता जी ने सुशीला दीदी की शादी एक ऐसे व्यक्ति से तय कर दी जो न तो सुंदर था, न ही विशेष रूप से योग्य। इतना ही नहीं, वह व्यक्ति पहले से विवाहित था और उसके बच्चे भी थे।

यह सुनकर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हुआ और न अपने कानों पर, क्योंकि जो पिता जी बेटियों की शिक्षा और प्रगति के इतने हिमायती थे, जो रसोई को 'भटियारखाना' कहते थे, वही पिता जी अपनी बेटी के साथ ऐसा कर सकते हैं — यह बात अविश्वसनीय थी। यह घटना पिता जी के व्यक्तित्व के दोहरेपन को उजागर करती है।

4लेखिका को अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution

दिया गया: यह प्रश्न लेखिका और उनके पिता के बीच वैचारिक मतभेद से संबंधित है।

उत्तर:

लेखिका मन्नू भंडारी और उनके पिता के बीच वैचारिक टकराहट कई स्तरों पर थी—

1. स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी को लेकर: जब लेखिका अपनी अध्यापिका शीला अग्रवाल के प्रभाव में आकर स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय हुईं और जुलूसों, सभाओं में भाग लेने लगीं, तो पिता जी को यह पसंद नहीं आया। वे चाहते थे कि बेटी पढ़े, आगे बढ़े, परंतु इस तरह सड़कों पर उतरना उन्हें स्वीकार नहीं था।

2. पिता के अहंकार और दोहरे व्यवहार को लेकर: पिता जी एक ओर प्रगतिशील विचार रखते थे, दूसरी ओर घर में उनका व्यवहार अहंकारी और तानाशाही था। वे घर में अपनी बात को ही सर्वोपरि मानते थे। लेखिका इस दोहरेपन से आहत थीं।

3. बड़ी बहन के विवाह को लेकर: जब पिता जी ने बड़ी बहन सुशीला की शादी एक अयोग्य और पहले से विवाहित व्यक्ति से कर दी, तो लेखिका का पिता जी से मोहभंग हो गया। यह उनके बीच सबसे बड़ी वैचारिक टकराहट थी।

निष्कर्ष: इस प्रकार लेखिका धीरे-धीरे पिता जी की छत्रछाया से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की ओर अग्रसर हुईं। यह टकराहट उनके व्यक्तित्व के निर्माण में सहायक सिद्ध हुई।

5इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।Show solution

दिया गया: यह प्रश्न स्वाधीनता आंदोलन और उसमें लेखिका की भूमिका से संबंधित है।

उत्तर:

स्वाधीनता आंदोलन का परिदृश्य:

सन् 1946-47 का समय भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का चरमोत्कर्ष था। देश भर में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जन-जागरण हो रहा था। विद्यार्थी, युवा, महिलाएँ — सभी वर्ग इस आंदोलन में कूद पड़े थे। हड़तालें, जुलूस, सभाएँ, नारेबाजी — यह सब आम दृश्य थे। कॉलेजों में भी राष्ट्रीय चेतना की लहर थी। छात्र-छात्राएँ अपनी पढ़ाई छोड़कर आंदोलन में भाग ले रहे थे।

मन्नू जी की भूमिका:

मन्नू भंडारी उस समय अजमेर के एक कॉलेज में पढ़ती थीं। उनकी अध्यापिका शीला अग्रवाल ने उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। मन्नू जी ने—

  • कॉलेज में छात्राओं को जागरूक किया और उन्हें आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
  • जुलूसों और सभाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रवेश निषिद्ध किए जाने पर भी हार नहीं मानी और बाहर रहकर भी आंदोलन जारी रखा।
  • उनके और उनके साथियों के दबाव के कारण कॉलेज को अगस्त में थर्ड इयर की कक्षाएँ पुनः खोलनी पड़ीं।
  • 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता की खुशी में उन्होंने पूरे उत्साह से भाग लिया।

निष्कर्ष: मन्नू जी की भूमिका एक साहसी, जागरूक और देशभक्त छात्रा की थी जिन्होंने व्यक्तिगत कठिनाइयों की परवाह किए बिना स्वाधीनता आंदोलन में अपना योगदान दिया।

रचना और अभिव्यक्ति (प्रश्न 6–9)

6लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।

Free with a Super Tutor account

7मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।

Free with a Super Tutor account

8लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।

Free with a Super Tutor account

9आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।

Free with a Super Tutor account

भाषा-अध्ययन (प्रश्न 10)

10इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ—
(क) लू उतारना
(ख) आग लगाकर चले जाना
(ग) धू-धू करके जाना
(घ) आग-बबूला होना

Free with a Super Tutor account

5 more solved questions in मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)

They are free with a Super Tutor account, along with practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start, no card needed.

Frequently Asked Questions

What are the important topics in मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) for CBSE Class 10 Hindi - Course A?
Key topics in मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) include लेखिका और आत्मकथ्य का स्वरूप, पारिवारिक पृष्ठभूमि और पिता का व्यक्तित्व, माँ का व्यक्तित्व और पारिवारिक जीवन, सुशीला, बचपन और लैंगिक सीमाएँ. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) free?
The first 5 of the 10 solutions on this page are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) for the CBSE Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 44 practice questions on मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

For serious students

Get the full मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) chapter — start free.

Quizzes, flashcards, an AI doubt solver and a study plan for CBSE Class 10 Hindi - Course A. Free to start, no card needed.