जयशंकर प्रसाद (आत्मकथ्य) — NCERT Solutions
CBSE · Class 10 · Hindi - Course A
NCERT Solutions for जयशंकर प्रसाद (आत्मकथ्य), CBSE Class 10 Hindi - Course A: 12 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-उत्तर (क्षितिज-2, कक्षा 10)
1कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?Show solution
दिया गया है: जयशंकर प्रसाद की कविता 'आत्मकथ्य' में कवि से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया जाता है।
उत्तर:
कवि आत्मकथा लिखने से निम्नलिखित कारणों से बचना चाहता है—
- जीवन की असफलताएँ और दुःख: कवि का जीवन सुख-रहित रहा है। उसे जो सुख का स्वप्न था, वह कभी पूरा नहीं हुआ। ऐसे दुःखमय जीवन की कथा सुनाना उसे उचित नहीं लगता।
- निजी पीड़ा को उजागर न करना: कवि अपनी प्रेम-विफलता, छल-प्रपंच और व्यक्तिगत कमज़ोरियों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता। वह नहीं चाहता कि उसकी निजी पीड़ा दूसरों के लिए हँसी का विषय बने।
- जीवन की सामान्यता: कवि मानता है कि उसका जीवन विशेष उपलब्धियों से रहित है — उसकी 'गागर रीती' (मन खाली) है। ऐसे जीवन की आत्मकथा दूसरों के लिए प्रेरणादायक नहीं होगी।
- आत्म-प्रशंसा से परहेज: कवि स्वयं की 'उज्ज्वल गाथा' गाना नहीं चाहता क्योंकि यह आत्म-प्रशंसा जैसा लगेगा।
निष्कर्ष: कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और जीवन की पीड़ाओं को सार्वजनिक न करने की इच्छा ही उसे आत्मकथा लिखने से रोकती है।
2आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है?Show solution
दिया गया है: कवि से आत्मकथा सुनाने का आग्रह किया जाता है, परंतु वह कहता है — 'अभी समय भी नहीं'।
उत्तर:
कवि के 'अभी समय भी नहीं' कहने के पीछे निम्नलिखित भाव हैं—
- जीवन-संघर्ष जारी है: कवि का जीवन अभी भी संघर्षों से भरा हुआ है। जब जीवन की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई, तो उसकी कथा कैसे सुनाई जाए?
- मन की व्यस्तता: कवि का मन अभी भी अपनी स्मृतियों, पीड़ाओं और अनुभवों को पचाने में लगा है। इस अवस्था में आत्मकथा लिखना संभव नहीं।
- विनम्र टालने का भाव: यह कथन एक विनम्र बहाना भी है। कवि वास्तव में आत्मकथा लिखना नहीं चाहता, इसलिए 'समय नहीं' कहकर इस आग्रह को टाल देता है।
- जीवन की अपूर्णता: कवि को लगता है कि उसका जीवन अभी अधूरा है — उसके सपने अधूरे हैं, उसकी कहानी अभी समाप्त नहीं हुई।
निष्कर्ष: 'अभी समय भी नहीं' — यह कथन कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और जीवन की अपूर्णता का प्रतीक है।
3स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?Show solution
दिया गया है: कवि अपनी प्रिया की स्मृति को 'पाथेय' बनाने की बात करता है।
शब्दार्थ: 'पाथेय' का अर्थ है — यात्रा में साथ ले जाने वाला भोजन या संबल, अर्थात् वह सहारा जो लंबी यात्रा में शक्ति देता है।
आशय:
कवि का आशय यह है कि उसकी प्रिया की मधुर स्मृतियाँ ही उसके जीवन-पथ की एकमात्र संबल हैं। जिस प्रकार एक यात्री लंबी यात्रा पर निकलते समय अपने साथ भोजन (पाथेय) लेकर चलता है, जो उसे थकान में शक्ति देता है — उसी प्रकार कवि अपनी प्रिया की प्रेम-भरी स्मृतियों को अपने जीवन-यात्रा का सहारा बनाता है।
कवि का जीवन कठिनाइयों और निराशाओं से भरा है। प्रिया का साथ नहीं रहा, परंतु उसकी मधुर यादें कवि को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा और शक्ति देती हैं।
निष्कर्ष: स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का आशय है — प्रिया की प्रेम-स्मृतियों को जीवन-यात्रा का आधार और शक्ति-स्रोत बनाना।
4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
(ख) जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।Show solution
(क) भाव:
दिया गया है: कवि ने सुख का स्वप्न देखा था, परंतु वह सुख कभी प्राप्त नहीं हुआ।
इन पंक्तियों में कवि अपने जीवन की सबसे बड़ी विडंबना व्यक्त करता है। कवि ने प्रेम और सुख का एक सुंदर स्वप्न देखा था — उसे लगा था कि उसे अपनी प्रिया का प्रेम और जीवन में सुख मिलेगा। परंतु यह सुख केवल स्वप्न ही रहा; जब वह वास्तविकता में बदलने वाला था, तभी वह मुस्कुराकर भाग गया — अर्थात् प्रिया या सुख ने उसे छल दिया।
'आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया' — यह पंक्ति प्रेम की क्षणभंगुरता और जीवन की विडंबना को दर्शाती है। सुख इतना निकट था, फिर भी हाथ न आया। यह कवि की प्रेम-विफलता और जीवन की निराशा का मार्मिक चित्रण है।
(ख) भाव:
दिया गया है: कवि अपनी प्रिया की सुंदरता का वर्णन करता है।
इन पंक्तियों में कवि अपनी प्रिया की अलौकिक सुंदरता का वर्णन करता है। प्रिया के लाल-लाल गालों (अरुण कपोल) की आभा इतनी मनमोहक थी कि प्रेम से भरी भोर (अनुरागिनी उषा) भी उसी की छाया में अपना सुहाग (सौंदर्य और मधुरता) ग्रहण करती थी।
अर्थात् — प्रातःकाल की लालिमा भी प्रिया के गालों की लालिमा से प्रेरित लगती थी। यह अतिशयोक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग है जिसमें प्रिया की सुंदरता को उषा से भी श्रेष्ठ बताया गया है। कवि की प्रिया के प्रति गहरी आसक्ति और उसकी अपूर्व सुंदरता का यह मनोरम चित्रण है।
5'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की'—कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?Show solution
दिया गया है: कवि से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया जाता है।
भाव एवं आशय:
इस कथन के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि उसके जीवन में जो सुखद और मधुर क्षण थे — वे प्रेम की चाँदनी रातों जैसे थे — वे अब केवल स्मृति बनकर रह गए हैं। उन मधुर पलों की 'उज्ज्वल गाथा' गाना उसके लिए संभव नहीं, क्योंकि—
- वे क्षण अब नहीं रहे: जो सुखद प्रेम-प्रसंग थे, वे बीत चुके हैं। उनकी स्मृति मात्र शेष है।
- आत्म-प्रशंसा से परहेज: अपने सुखद अनुभवों को सार्वजनिक करना आत्म-प्रशंसा जैसा लगेगा, जो कवि को स्वीकार नहीं।
- पीड़ा का बोध: उन मधुर रातों की याद करना कवि के लिए और भी पीड़ादायक है, क्योंकि वे सुख अब उसके जीवन में नहीं हैं।
- निजता की रक्षा: कवि अपने प्रेम-जीवन की मधुर स्मृतियों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता।
निष्कर्ष: यह कथन कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और अपनी निजी खुशियों को सार्वजनिक न करने की इच्छा का प्रतीक है।
6'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।Show solution
दिया गया है: जयशंकर प्रसाद की कविता 'आत्मकथ्य'।
काव्यभाषा की विशेषताएँ:
1. खड़ी बोली का प्रयोग:
कविता में परिष्कृत और साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।
उदाहरण: 'मधुप गुनगुनाकर कह जाता कौन कहानी यह अपनी।'
2. संस्कृतनिष्ठ शब्दावली:
कविता में तत्सम शब्दों का प्रचुर प्रयोग है जो भाषा को गरिमामय बनाता है।
उदाहरण: 'अनुरागिनी उषा', 'अनंत नीलिमा', 'प्रवंचना'।
3. अलंकारों का सुंदर प्रयोग:
- रूपक अलंकार: 'मधुप गुनगुनाकर' — मन को मधुप (भौंरा) कहा गया है।
- अतिशयोक्ति: 'अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में' — उषा की तुलना प्रिया से।
- मानवीकरण: उषा को अनुरागिनी बताना।
4. प्रतीकात्मकता:
- 'गागर रीती' — खाली जीवन का प्रतीक
- 'पाथेय' — जीवन-संबल का प्रतीक
- 'चाँदनी रातें' — सुखद प्रेम-क्षणों का प्रतीक
5. संगीतात्मकता और लय:
कविता में तुकबंदी और लय का सुंदर निर्वाह है जो इसे गेय बनाता है।
उदाहरण: 'जाग गया — भाग गया', 'रातों की — बातों की'।
6. भावानुकूल भाषा:
कवि की पीड़ा, विनम्रता और आत्म-संकोच को व्यक्त करने में भाषा पूर्णतः सफल है।
निष्कर्ष: 'आत्मकथ्य' की काव्यभाषा परिष्कृत, प्रतीकात्मक, संगीतमय और भावपूर्ण है जो छायावादी काव्य की विशेषताओं से युक्त है।
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Frequently Asked Questions
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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