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Chapter 12 of 15
NCERT Solutions

यशपाल (लखनवी अंदाज़) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi - Course A

NCERT Solutions for यशपाल (लखनवी अंदाज़), CBSE Class 10 Hindi - Course A: 9 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास (यशपाल).

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9 Questions Solved · 1 Section

The first 5 solutions are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account.

प्रश्न-अभ्यास (यशपाल)

1लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?Show solution

दिया गया है: यशपाल की कहानी 'लखनवी अंदाज़' में लेखक और नवाब साहब एक ही रेल के डिब्बे में यात्रा कर रहे हैं।

उत्तर:
लेखक को नवाब साहब के निम्नलिखित हाव-भावों से यह महसूस हुआ कि वे बातचीत के लिए उत्सुक नहीं हैं—

  1. नज़रें फेर लेना: जब लेखक डिब्बे में दाखिल हुए तो नवाब साहब ने उनकी ओर देखकर तुरंत नज़रें खिड़की की तरफ फेर लीं, जैसे उनका आना अच्छा न लगा हो।
  2. असंतोष का भाव: नवाब साहब के चेहरे पर यह भाव स्पष्ट था कि किसी अपरिचित का एकांत में आ जाना उन्हें पसंद नहीं आया।
  3. संगति के लिए उत्साह न दिखाना: नवाब साहब ने लेखक की उपस्थिति को स्वीकार तो किया, परंतु बातचीत शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की।
  4. खीरे में व्यस्त हो जाना: वे लेखक को अनदेखा करते हुए अपने खीरे की तैयारी में लग गए, जिससे स्पष्ट था कि वे अकेले रहना चाहते थे।

निष्कर्ष: इन सभी हाव-भावों से लेखक को स्पष्ट हो गया कि नवाब साहब उनसे बातचीत करने के इच्छुक नहीं हैं।

2नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंततः सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?Show solution

दिया गया है: नवाब साहब ने खीरे को बड़े यत्न से काटा, नमक-मिर्च लगाई, सूँघा और फिर बिना खाए खिड़की से बाहर फेंक दिया।

नवाब साहब ने ऐसा क्यों किया होगा — संभावित कारण:

  1. दिखावे की प्रवृत्ति: नवाब साहब एक अपरिचित व्यक्ति (लेखक) के सामने खीरा खाना अपनी शान के खिलाफ समझते थे। वे यह दिखाना चाहते थे कि वे खाने-पीने के मामले में बहुत नफ़ासत (सफाई/शालीनता) रखते हैं।
  2. झूठी शान बनाए रखना: खीरा एक साधारण खाद्य पदार्थ है। नवाब साहब नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें खीरा खाते देखे, इसलिए उन्होंने केवल सूँघकर ही संतुष्टि का नाटक किया।
  3. लखनवी तहज़ीब का प्रदर्शन: वे यह जताना चाहते थे कि उनके लिए खाने की सुगंध और कल्पना ही पर्याप्त है — यही उनकी 'खानदानी रईसी' है।

स्वभाव का संकेत:
नवाब साहब का यह व्यवहार उनके दिखावटी, आडंबरपूर्ण और पतनशील सामंती स्वभाव को इंगित करता है। वे वास्तविकता से दूर, केवल बाहरी शान-शौकत और नकली नवाबी तहज़ीब में जीते हैं। उनकी यह 'नफ़ासत' असल में खोखली है — पेट भूखा है, पर दिखावे के लिए खाना फेंक दिया। यह उनके पाखंड और झूठे अभिमान का प्रतीक है।

3बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?Show solution

दिया गया है: यशपाल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि खीरे की सुगंध की कल्पना मात्र से पेट भर सकता है तो बिना विचार, घटना और पात्रों के भी 'नयी कहानी' लिखी जा सकती है।

विचार:
यशपाल का यह कथन 'नयी कहानी' आंदोलन पर एक तीखा व्यंग्य है। वे उन लेखकों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो बिना ठोस कथ्य, पात्र और घटनाओं के केवल 'नयापन' के नाम पर खोखली रचनाएँ लिखते हैं।

मेरी सहमति/असहमति:

मैं यशपाल के इस विचार से आंशिक रूप से सहमत हूँ —

  • असहमति के कारण: एक सार्थक कहानी के लिए विचार, घटना और पात्र आवश्यक तत्त्व हैं। इनके बिना कहानी निर्जीव और अर्थहीन होती है। पाठक को कहानी से कुछ न कुछ संदेश, भाव या अनुभव मिलना चाहिए।
  • सहमति के कारण: यशपाल का व्यंग्य उचित है। कुछ आधुनिक लेखक केवल प्रयोगवाद के नाम पर ऐसी रचनाएँ लिखते हैं जो पाठक को कुछ नहीं देतीं। ऐसी कहानियाँ नवाब साहब के खीरे की तरह हैं — दिखावा बहुत, सार कुछ नहीं।

निष्कर्ष: एक अच्छी कहानी के लिए विचार, घटना और पात्र अनिवार्य हैं। केवल कल्पना और दिखावे से साहित्य नहीं बनता।

4आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?Show solution

दिया गया है: यशपाल की यह रचना 'लखनवी अंदाज़' शीर्षक से है।

वैकल्पिक शीर्षक:

इस निबंध को निम्नलिखित नामों में से कोई भी दिया जा सकता है —

  1. 'नवाबी नफ़ासत' — क्योंकि पूरी कहानी नवाब साहब की झूठी नफ़ासत और शान के इर्द-गिर्द घूमती है।
  2. 'खोखली शान' — क्योंकि नवाब साहब की तहज़ीब केवल दिखावटी है, उसमें कोई वास्तविकता नहीं।
  3. 'दिखावे का खीरा' — क्योंकि खीरा इस पूरी कहानी का केंद्रीय प्रतीक है और नवाब साहब का व्यवहार दिखावे का प्रतीक है।
  4. 'पतनशील नवाबी' — क्योंकि यह रचना सामंती वर्ग के पतन और उनकी खोखली जीवन-शैली को उजागर करती है।

मेरी पसंद: मैं इसे 'खोखली नवाबी' नाम देना चाहूँगा, क्योंकि यह शीर्षक कहानी के मूल व्यंग्य को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

5(क)नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।Show solution

दिया गया है: पाठ में नवाब साहब द्वारा खीरा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का वर्णन है।

नवाब साहब द्वारा खीरा तैयार करने की प्रक्रिया (अपने शब्दों में):

नवाब साहब ने पहले सीट के नीचे से एक अखबार निकाला और उसे सीट पर बिछा दिया। फिर उन्होंने दो खीरे निकाले और उन्हें लोटे के पानी से धोया। इसके बाद जेब से चाकू निकालकर बड़े करीने से दोनों खीरों के सिरे काटे। फिर खीरों को गोदकर उनका झाग निकाला ताकि कड़वाहट दूर हो जाए। इसके बाद उन्होंने खीरों को लंबाई में फाँकों में काटा। फिर उन फाँकों पर बड़े सलीके से नमक और लाल मिर्च बुरकी (छिड़की)। अब वे फाँकें तैयार थीं — चमकती हुई, रसीली और सुगंधित। परंतु नवाब साहब ने उन्हें खाया नहीं। वे एक-एक फाँक को नाक के पास ले जाते, उसकी सुगंध लेते और फिर खिड़की से बाहर फेंक देते। इस प्रकार सारी फाँकें बाहर फेंककर उन्होंने तौलिए से हाथ और होंठ पोंछे और गर्व से लेखक की ओर देखा।

5(ख)किन-किन चीजों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?

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6खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा। किसी एक के बारे में लिखिए।

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7क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।

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8निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए—
(क) एक सफ्रेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
(ग) टाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
(घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
(ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा।
(छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
(ज) जेब से चाकू निकाला।

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4 more solved questions in यशपाल (लखनवी अंदाज़)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in यशपाल (लखनवी अंदाज़) for CBSE Class 10 Hindi - Course A?
Key topics in यशपाल (लखनवी अंदाज़) include लेखक परिचय, रचना का स्वरूप और मुख्य उद्देश्य, कथावाचक और यात्रा का प्रसंग, नवाब साहब का चरित्र-चित्रण. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for यशपाल (लखनवी अंदाज़) free?
The first 5 of the 9 solutions on this page are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise यशपाल (लखनवी अंदाज़) for the CBSE Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 44 practice questions on यशपाल (लखनवी अंदाज़). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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