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Chapter 11 of 15
NCERT Solutions

रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) — NCERT Solutions

CBSE · Class 10 · Hindi - Course A

NCERT Solutions for रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत), CBSE Class 10 Hindi - Course A: 16 textbook questions solved step by step.

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One of 6 illustrations for रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

16 Questions Solved · 2 Sections

The first 8 solutions are open to read. The other 8 are free with a Super Tutor account.

पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्न (क्षितिज-2, कक्षा 10)

1खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?Show solution

दिया गया है: बालगोबिन भगत एक गृहस्थ किसान थे, फिर भी उन्हें साधु माना जाता था।

उत्तर:
बालगोबिन भगत निम्नलिखित चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे —

  1. झूठ न बोलना: वे कभी झूठ नहीं बोलते थे और खरा व्यवहार करते थे।
  2. किसी से खरा-खरा व्यवहार: किसी को धोखा नहीं देते थे।
  3. किसी की चीज़ न छूना: बिना अनुमति के किसी की वस्तु को हाथ नहीं लगाते थे।
  4. कबीर के आदर्शों पर चलना: वे कबीर को अपना 'साहब' मानते थे और उनके पदों को गाते थे।
  5. फसल पहले 'साहब' को अर्पण: खेत में जो भी उपजता, उसे पहले कबीरपंथी मठ में 'साहब' को भेंट करते और वहाँ से जो 'प्रसाद' मिलता, उसी से गुज़ारा करते।
  6. सामाजिक रूढ़ियों का विरोध: वे प्रचलित सामाजिक मान्यताओं और आडंबरों से दूर रहते थे।

इस प्रकार गृहस्थ होते हुए भी उनका आचरण, विचार और जीवन-शैली पूर्णतः साधु जैसी थी।

2भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?Show solution

दिया गया है: भगत के बेटे की मृत्यु के बाद उनकी पुत्रवधू ही उनकी देखभाल करती थी।

उत्तर:
भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले इसलिए नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि —

  1. भगत का बेटा (उसका पति) मर चुका था और अब घर में भगत की देखभाल करने वाला कोई नहीं था।
  2. भगत वृद्ध हो चुके थे। उनकी सेवा-सुश्रूषा के लिए किसी की आवश्यकता थी।
  3. पुत्रवधू को उनके अकेलेपन और असहायता की चिंता थी।
  4. वह उनके प्रति अपना कर्तव्य और स्नेह निभाना चाहती थी।

भगत ने उसे उसके भाई के साथ मायके भेज दिया और दूसरा विवाह करने को कहा, परंतु पुत्रवधू इस बात के लिए तैयार नहीं थी। वह ससुर को अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहती थी।

3भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त की?Show solution

दिया गया है: भगत का बेटा मंदबुद्धि था, जिसकी मृत्यु हो गई।

उत्तर:
बालगोबिन भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अत्यंत असाधारण ढंग से अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं —

  1. रोने के बजाय गाना: वे बेटे की लाश के पास बैठकर रो नहीं रहे थे, बल्कि कबीर के उन पदों को गा रहे थे जो आत्मा के परमात्मा से मिलन की खुशी व्यक्त करते हैं।
  2. पुत्रवधू को रोने से मना करना: उन्होंने पुत्रवधू को रोने से मना किया और कहा कि यह विरह नहीं, बल्कि उत्सव का अवसर है — आत्मा परमात्मा से मिल रही है।
  3. उत्सव का भाव: उनके अनुसार मृत्यु दुख का नहीं, आनंद का विषय है क्योंकि आत्मा अपने 'साहब' के पास चली गई है।
  4. पुत्र का अंतिम संस्कार पुत्रवधू से करवाना: उन्होंने पुत्रवधू से ही बेटे की चिता को मुखाग्नि दिलवाई, जो उस समय की सामाजिक मान्यताओं के विरुद्ध था।

इस प्रकार भगत ने मृत्यु को ईश्वर-मिलन का अवसर मानकर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।

4भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।Show solution

दिया गया है: पाठ में लेखक रामबृक्ष बेनीपुरी ने भगत के व्यक्तित्व और वेशभूषा का वर्णन किया है।

उत्तर:

वेशभूषा:
बालगोबिन भगत का पहनावा अत्यंत सादा था —

  • वे कपड़े बहुत कम पहनते थे।
  • कमर में एक लंगोटी और सिर पर कनटोप (टोपी) पहनते थे।
  • माथे पर रामानंदी चंदन का टीका लगाते थे।
  • गले में तुलसी की जड़ों की माला पहनते थे।

व्यक्तित्व:

  • वे साठ वर्ष से अधिक आयु के थे, परंतु शरीर अभी भी स्वस्थ और चुस्त था।
  • बाल सफेद हो गए थे, परंतु चेहरे पर एक अलौकिक तेज था।
  • वे सत्यवादी, निर्लोभी और सरल स्वभाव के थे।
  • कबीर के अनुयायी होने के कारण उनके जीवन में आडंबर का कोई स्थान नहीं था।
  • उनकी आवाज़ में अद्भुत मिठास थी और उनका गायन सबको मंत्रमुग्ध कर देता था।
  • वे खेती करते थे, परंतु उनका मन सदा ईश्वर-भक्ति में लगा रहता था।

संक्षेप में, बालगोबिन भगत एक सच्चे संत-स्वभाव के गृहस्थ थे जिनका बाहरी और आंतरिक व्यक्तित्व दोनों ही प्रेरणादायक थे।

5बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?Show solution

दिया गया है: भगत की दिनचर्या असाधारण थी।

उत्तर:
बालगोबिन भगत की दिनचर्या निम्नलिखित कारणों से लोगों के अचरज का विषय थी —

  1. प्रतिदिन नदी-स्नान: वे प्रतिदिन सुबह दो मील दूर नदी पर स्नान करने जाते थे, चाहे कड़ाके की सर्दी हो या भीषण गर्मी।
  2. प्रभाती गायन: कार्तिक मास से लेकर फागुन तक वे प्रतिदिन प्रातःकाल 'प्रभाती' गाते थे।
  3. रात्रि में भजन: आधी रात के बाद उठकर भजन-कीर्तन करते थे।
  4. वृद्धावस्था में भी नियम न तोड़ना: अत्यधिक वृद्धावस्था में भी उनकी दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं आया।
  5. खेती के साथ भक्ति: दिन में खेत में काम करते और साथ-साथ गाते भी रहते।

इस प्रकार उनकी अटूट नियमितता, कठोर साधना और अदम्य उत्साह लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था।

6पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।Show solution

दिया गया है: पाठ में भगत के गायन का विस्तृत वर्णन है।

उत्तर:
बालगोबिन भगत के मधुर गायन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं —

  1. मधुर और प्रभावशाली स्वर: उनकी आवाज़ इतनी मीठी और सुरीली थी कि सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
  2. वातावरण पर प्रभाव: उनके गायन से समूचा वातावरण चमत्कृत हो जाता था — खेतों में काम करने वाले किसान, रोपाई करती महिलाएँ, सभी उनके स्वर में स्वर मिलाने लगते थे।
  3. प्रकृति पर प्रभाव: उनके गायन से बादल झूमने लगते, नदियाँ थिरकने लगतीं और हवाएँ गुनगुनाने लगती थीं।
  4. कबीर के पदों का गायन: वे मुख्यतः कबीर के पदों को गाते थे जो भक्ति और वैराग्य से भरे होते थे।
  5. खंजड़ी के साथ गायन: वे खंजड़ी बजाते हुए गाते थे जिससे संगीत में और मिठास आ जाती थी।
  6. भावपूर्ण गायन: उनके गायन में इतनी भावना होती थी कि सुनने वाले भाव-विभोर हो जाते थे।
  7. प्रभाती गायन: कार्तिक से फागुन तक प्रातःकाल प्रभाती गाते थे जो पूरे गाँव को जगा देती थी।
7कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।Show solution

दिया गया है: भगत के जीवन में कई ऐसे प्रसंग हैं जो सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध हैं।

उत्तर:
बालगोबिन भगत के जीवन के निम्नलिखित मार्मिक प्रसंग यह सिद्ध करते हैं कि वे प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे —

प्रसंग 1 — पुत्र की मृत्यु पर शोक न मनाना:
जब उनके बेटे की मृत्यु हुई, तो उन्होंने रोने-धोने के बजाय कबीर के आनंदमय पदों का गायन किया। उस समय की सामाजिक मान्यता के अनुसार मृत्यु पर शोक मनाया जाता है, परंतु भगत ने इसे उत्सव की तरह मनाया।

प्रसंग 2 — पुत्रवधू से मुखाग्नि दिलवाना:
उन्होंने अपने बेटे की चिता को मुखाग्नि अपनी पुत्रवधू से दिलवाई। उस समय की सामाजिक मान्यता के अनुसार यह कार्य पुरुष (पुत्र या निकट संबंधी) करते थे, स्त्री नहीं। भगत ने इस रूढ़ि को तोड़ा।

प्रसंग 3 — पुत्रवधू को पुनर्विवाह के लिए प्रेरित करना:
बेटे की मृत्यु के बाद भगत ने पुत्रवधू को उसके भाई के साथ मायके भेज दिया और दूसरा विवाह करने को कहा। उस समय विधवा का पुनर्विवाह सामाजिक रूप से वर्जित था, परंतु भगत ने इस रूढ़ि को नकारा।

इन प्रसंगों से स्पष्ट है कि भगत एक प्रगतिशील और मानवीय सोच वाले व्यक्ति थे।

8धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।Show solution

दिया गया है: आषाढ़ मास में धान की रोपाई के समय का वर्णन पाठ में है।

उत्तर:
आषाढ़ का महीना — आसमान में काले-काले बादल छाए हुए हैं। रिमझिम वर्षा हो रही है। खेतों में कीचड़ और पानी भरा है। किसान धान की रोपाई में लगे हैं। महिलाएँ कतारों में खड़ी होकर धान की पौध रोप रही हैं। वातावरण में उमस और गर्मी है।

ऐसे में अचानक भगत के कंठ से कबीर के पदों की स्वर-लहरियाँ उठती हैं। उनकी मधुर आवाज़ वर्षा की बूँदों के साथ मिलकर एक अद्भुत संगीत रचती है। खेतों में काम करने वाले किसानों के पैर थिरकने लगते हैं। रोपाई करती महिलाएँ उनके स्वर में स्वर मिलाने लगती हैं। बच्चे खुशी से उछलने लगते हैं।

बादल जैसे झूमने लगते हैं, हवाएँ गुनगुनाने लगती हैं। समूचा वातावरण भगत की स्वर-लहरियों से चमत्कृत हो जाता है। थकान मिट जाती है, मन प्रफुल्लित हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति और मनुष्य दोनों एक साथ ईश्वर की भक्ति में डूब गए हों।

इस प्रकार भगत का गायन धान की रोपाई के कठिन परिश्रम को भी आनंदमय बना देता था।

9पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?

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10आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?

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11गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?

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12"ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।" क्या 'साधु' की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति 'साधु' है?

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13मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध करेंगे?

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14इस पाठ में आए कोई दस क्रियाविशेषण छाँटकर लिखिए और उनके भेद भी बताइए।

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पाठेतर सक्रियता

1पाठ में आषाढ़, भादो, माघ आदि में विक्रम संवत कलेंडर के मासों के नाम आए हैं। यह कलेंडर किस माह से आरंभ होता है? महीनों की सूची तैयार कीजिए।

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2इस पाठ में जो ग्राम्य संस्कृति की झलक मिलती है वह आपके आसपास के वातावरण से कैसे भिन्न है?

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8 more solved questions in रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) for CBSE Class 10 Hindi - Course A?
Key topics in रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) include लेखक परिचय और रचना-परिचय, बालगोबिन भगत का व्यक्तित्व, साहब कबीर और भगत की भक्ति, संगीत-साधना और लोक-जीवन. Study these first, then practise questions on each for the CBSE Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) free?
The first 8 of the 16 solutions on this page are open to read. The other 8 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) for the CBSE Class 10 board exam?
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Sources & Official References

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